By नीरज कुमार दुबे | Sep 03, 2026
कभी कश्मीर में आतंक और अलगाववाद का पर्याय रहा यासीन मलिक अब अदालत और तिहाड़ जेल की सलाखों के पीछे भावनात्मक कार्ड खेलता नजर आ रहा है। 1990 के चर्चित सरला भट्ट हत्याकांड में मुकदमा नहीं लड़ने और मौत की सजा पर विचार करने की बात कहने वाले प्रतिबंधित JKLF के प्रमुख ने अब अपनी पाकिस्तानी पत्नी मुशाल हुसैन मलिक को तलाक देने का ऐलान भी कर दिया है। पत्नी और बेटी के नाम भावुक संदेशों के जरिए मलिक ने अपनी जिंदगी के हालात को ‘अंतरात्मा की आवाज’ बताने की कोशिश की है, लेकिन सवाल यह है कि क्या यह वास्तव में पश्चाताप है या फिर अदालत की गंभीर कानूनी लड़ाई के बीच सहानुभूति बटोरने की एक नई रणनीति?
मलिक ने अदालत के सामने कहा, “मैं अब इस मुकदमे का विरोध नहीं करूंगा और मेरे लिए मौत की सजा पर विचार किया जा सकता है।” हालांकि उसने यह भी स्पष्ट करने की कोशिश की कि मुकदमा न लड़ने के उसके फैसले को अपराध स्वीकार करने के रूप में न देखा जाए। उसका दावा है कि राजनीतिक परिस्थितियों के कारण उसे झूठे तरीके से फंसाया गया है। मलिक के मुताबिक, उसने यह फैसला लंबे विचार-विमर्श और ‘इस्तिखारा’ करने के बाद लिया है। इस्तिखारा इस्लामी परंपरा में किसी महत्वपूर्ण निर्णय से पहले की जाने वाली प्रार्थना है। लेकिन इस फैसले का राजनीतिक और कानूनी महत्व इसलिए भी बड़ा है क्योंकि यह पहली बार नहीं है जब यासीन मलिक ने अदालत में अपने बचाव से पीछे हटने का रास्ता चुना है।
हम आपको याद दिला दें कि मई 2022 में दिल्ली की विशेष NIA अदालत ने उसे आतंकवाद के वित्तपोषण से जुड़े मामले में दोषी ठहराया था। उस समय भी मलिक ने आरोपों का प्रभावी ढंग से मुकाबला नहीं किया और बाद में उसे उम्रकैद की सजा सुनाई गई। अब NIA उसकी उम्रकैद को मौत की सजा में बदलने की मांग कर रही है। ऐसे में सरला भट्ट हत्याकांड में उसका यह नया रुख और भी गंभीर हो जाता है।
हम आपको याद दिला दें कि सरला भट्ट श्रीनगर स्थित शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SKIMS) में स्टाफ नर्स थीं। अप्रैल 1990 में, जब कश्मीर घाटी आतंकवाद और हिंसा के सबसे भयावह दौर से गुजर रही थी, उनका अपहरण कर लिया गया था। कुछ दिनों बाद उनका शव बरामद हुआ। एक कश्मीरी पंडित महिला की इस हत्या ने उस दौर में पंडित समुदाय के बीच भय और असुरक्षा को और गहरा कर दिया था। लेकिन यह मामला तीन दशक से अधिक समय तक लगभग ठंडे बस्ते में पड़ा रहा।
वर्ष 2025 में राज्य जांच एजेंसी (SIA) ने मामले को दोबारा खोला और यासीन मलिक तथा उसके सहयोगियों से जुड़े कई ठिकानों पर छापेमारी की। जांच के बाद दाखिल चार्जशीट में यासीन मलिक के अलावा खुर्शीद अहमद चाल्कू, अब्दुल हमीद शेख, मोहम्मद यूसुफ सोफी और गुलाम मोहम्मद टपलू के नाम शामिल किए गए। इनमें चाल्कू अभी भी फरार बताया जाता है, जबकि सोफी, शेख और टपलू की मौत हो चुकी है। इस तरह यासीन मलिक इस मामले में सबसे प्रमुख जीवित आरोपियों में से एक है। वह जम्मू के एक अन्य हत्या मामले में भी मुकदमे का सामना कर रहा है।
अपने इसी हलफनामे में यासीन मलिक ने निजी जीवन को लेकर भी बेहद भावुक और असाधारण घोषणा की है। उसने अपनी पाकिस्तानी पत्नी मुशाल हुसैन मलिक से तलाक लेने का फैसला किया है। दोनों ने 2009 में शादी की थी और उनकी 13 वर्षीय बेटी रज़िया सुल्ताना है। मलिक ने दावा किया कि पिछले आठ वर्षों से वह अपनी पत्नी की आवाज तक नहीं सुन सका है। उसके अनुसार, जेल में उसे न तो पत्नी से फोन पर बात करने की अनुमति मिली और न ही वीडियो कॉल के जरिए संपर्क करने दिया गया। उसने यह भी कहा कि वह अपने परिवार से भी सामान्य तरीके से संपर्क नहीं कर पाया।
मुशाल के नाम भावुक संदेश में मलिक ने कहा कि वह नहीं चाहता कि उसकी पत्नी पूरी जिंदगी उसकी परिस्थितियों का बोझ उठाती रहे या “एक विधवा की तरह जिंदगी जिए।” उसने मुशाल से कहा कि वह उससे करीब 20 साल छोटी है और उसे सम्मान और उम्मीद के साथ जिंदगी का नया अध्याय शुरू करना चाहिए। हलफनामे में मलिक ने लिखा कि उसका यह फैसला किसी सहानुभूति या दया को हासिल करने की कोशिश नहीं है, बल्कि वह इसे अपनी “अंतरात्मा का आखिरी शब्द” मानता है। उसने कहा कि जहां भी उसका भाग्य उसे ले जाए, उसकी प्रार्थनाएं, प्यार और आशीर्वाद हमेशा मुशाल के साथ रहेंगे।
सबसे भावुक संदेश उसने अपनी बेटी रज़िया के लिए छोड़ा। मलिक ने बेटी से अपनी दादी यानी उसकी मां का ख्याल रखने और रोज कम से कम पांच मिनट उनसे बात करने की अपील की, ताकि बुजुर्ग मां को परिवार का साथ महसूस होता रहे। उसने परिवार के साथ समय न बिता पाने और उनसे दूर रहने पर अफसोस भी जताया।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि यासीन मलिक का यह फैसला आखिर किस दिशा में जाएगा। एक तरफ वह दावा कर रहा है कि वह निर्दोष है और उसे राजनीतिक परिस्थितियों में फंसाया गया है, दूसरी तरफ वह मुकदमे में अपना बचाव छोड़कर मौत की सजा पर विचार करने की बात कर रहा है। बहरहाल, सरला भट्ट हत्याकांड, आतंकवाद फंडिंग मामले में उम्रकैद और NIA की मौत की सजा की मांग के बीच तिहाड़ से आया यह बयान यासीन मलिक के जीवन का शायद अब तक का सबसे नाटकीय और निर्णायक मोड़ बन गया है।