Bhadohi में बोले Yogi Adityanath, 2017 से पहले उप्र माफिया राज और अराजकता से था ग्रस्त

By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Oct 04, 2026

भदोही (उप्र), चार अक्टूबर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को कहा कि वर्ष 2017 में उनके सत्ता में आने से पहले राज्य अराजकता और माफिया राज के लिए बदनाम था तथा नीतिगत जड़ता के कारण यहां के कारीगरों के हाथ बंधे हुए थे। भदोही में ‘कारपेट एक्सपो मार्ट’ में आयोजित अंतरराष्ट्रीय कालीन मेले के स्वर्ण जयंती संस्करण को संबोधित करते हुए आदित्यनाथ ने कहा कि तब तक राज्य ‘बीमारू’ अर्थव्यवस्था में बदल चुका था, क्योंकि ‘बीमारू मानसिकता’ वाली सरकारों के कारण यहां सुरक्षा, बुनियादी ढांचे, प्रौद्योगिकी और बाजार की सुविधाओं का अभाव था। मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘ वर्ष 2017 से पहले अराजकता, माफिया राज, गुंडागर्दी, कर्फ्यू और दंगे होते थे।

आदित्यनाथ ने कहा, ‘‘मुझे प्रसन्नता है कि इस वर्ष अपनी-अपनी प्रदर्शनी के साथ 227 से अधिक लोगों के अलावा 65 देशों के 450 से अधिक विदेशी खरीदार, इस अन्‍तरराष्‍ट्रीय प्रदर्शनी का हिस्सा बने हैं। इनमें से 106 खरीदार ‘ब्रिक्‍स’ देशों से संबंधित हैं।’’ उन्‍होंने राज्‍य के गौरवशाली अतीत की चर्चा करते हुए कहा, ‘‘हमारे उप्र के पास क्या नहीं था, उप्र असीमित उत्पादन का प्रदेश था, लेकिन बीच के कालखंड में प्रदेश की ‘बीमारू’ मानसिकता वाली सरकारों ने इस उप्र को ‘बीमारू’ बना दिया।’’ प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के नेतृत्व और ‘डबल इंजन’ सरकार के कार्यों का ब्यौरा देते हुए आदित्यनाथ ने कहा कि जो उप्र कभी ‘बीमारू’ था, आज वह अर्थव्यवस्था के विकास का इंजन बन गया है और भारत के अंदर राजस्व आधिक्य वाले राज्य के रूप में अपने कार्यक्रम को आगे बढ़ा रहा है। उन्‍होंने कहा कि जब कोई व्यक्ति, कोई परिवार, कोई समाज और कोई क्षेत्र हताश और निराश होकर अपनी ‘बीमारू’ मानसिकता के साथ कार्य करता है तो परिणाम भी उसी प्रकार देखने को मिलते हैं।

एक लंबे समय तक हमें उस पहचान का मोहताज बनना पड़ा।’’ योगी ने उप्र को ‘बीमारू’ राज्य की श्रेणी से मुक्त करने का दावा करते हुए कहा कि पहले हमारा जो कारीगर था, वह श्रमिक के रूप में अपनी पहचान छिपाने के लिए मजबूर था, हमारा जो अन्नदाता था, वह आत्महत्या करने के लिए मजबूर हो गया था, लेकिन आज यह देश की नंबर एक अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ता प्रदेश है।” उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों के दौरान उप्र के नौजवान पलायन के लिए मजबूर थे। आदित्यनाथ ने कहा कि वर्ष 2017 के पहले यह ‘बीमारू’ मानसिकता उप्र को ग्रसित कर चुकी थी। आदित्यनाथ ने कहा कि 2017 के पहले उप्र का खजाना खाली था, लेकिन उनकी सरकार ने ‘एक जिला-एक उत्पाद’ (ओडीओपी) की योजना प्रारंभ की और भदोही के लिए कालीन को उसका हिस्‍सा बनाया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि एक-एक धागे के साथ कारीगर की कल्पना, उसका परिश्रम और माटी का गौरव जुड़ा होता है। उन्‍होंने कहा कि जिन हाथों ने सदियों से कालीन बुना है, उन्हीं हाथों में आज नई तकनीक और नई डिजाइन होनी चाहिए और उसके पास नया बाजार भी होना चाहिए। उन्होंने कहा कि नए बाजार से जोड़ने के लिए सरकार सुविधा उपलब्ध करा रही है।

आदित्यनाथ ने कहा कि आज उत्तर प्रदेश में न तो दंगे होते हैं और न ही कर्फ्यू लगता है। उन्होंने कहा, अब कोई माफिया पिस्तौल लहराकर लोगों को खुलेआम धमकी नहीं दे सकता... आज आपके पास तकनीक, डिज़ाइन, बाज़ार, कनेक्टिविटी और सुरक्षा है।’’ मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य को 50 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले हैं, जिनमें से 15 लाख करोड़ रुपये की परियोजनाओं का शिलान्यास हो चुका है, जबकि 7.5 लाख करोड़ रुपये की अन्य परियोजनाओं के जल्द शुरू होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि देश के एक्सप्रेसवे नेटवर्क में अब उप्र की हिस्सेदारी 60 प्रतिशत है और यहां सबसे ज़्यादा हवाई अड्डे हैं।

उन्होंने कहा कि संत रविदास नगर-मिर्ज़ापुर-वाराणसी सिल्क और कालीन क्लस्टर ने लगभग 6,100 करोड़ रुपये का कारोबार किया है और 2017 के बाद से राज्य की अर्थव्यवस्था तीन गुना से ज़्यादा बढ़ी है। उन्होंने कहा कि उप्र में देश का सबसे बड़ा ‘सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम’ (एमएसएमई) है, जिसमें लगभग 96 लाख इकाई हैं, और सरकार हर इकाई को पांच लाख रुपये का बीमा कवर देती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 से पहले प्रदेश में करीब 14 हजार कारखाने थे, जिनकी संख्या अब 35 हजार से अधिक हो गई है।

उन्होंने कहा कि देश के 55 प्रतिशत मोबाइल फोन और 60 प्रतिशत इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट का निर्माण उत्तर प्रदेश में हो रहा है, जबकि देश के एक्सप्रेसवे नेटवर्क में 60 प्रतिशत हिस्सेदारी उत्तर प्रदेश की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि रक्षा उद्योग गलियारे के छह नोड पर काम चल रहा है और प्रदेश में 12 निजी औद्योगिक पार्क विकसित किए जा रहे हैं। निवेश मित्र, निवेश सारथी और उद्यमी मित्र जैसी व्यवस्थाओं के जरिये निवेशकों को हरसंभव सुविधाएं दी जा रही हैं।

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