योगी बोले- घुसपैठियों को बाहर करेंगे तो नीतीश ने कहा, किसी में दम नहीं

By अंकित सिंह | Nov 05, 2020

विधानसभा चुनाव की लड़ाई के सीमांचल में प्रवेश करते ही बिहार की सियासत में उबाल आ गया है। वो कहते है ना, जिसने कोसी-सीमांचल जीता, उसने बिहार जीता। बिहार चुनाव के आखिरी चरण में इन्हीं क्षेत्रों में मतदान होने है। चुनाव में यह क्षेत्र निर्णायक भूमिका अदा करता है। इस बार भी यह हार-जीत की अंतिम पटकथा लिखने को तैयार है। सीमांचल को साधने के लिए एनडीए और महागठबंधन, दोनों ही तरफ से जोर आजमाइश की जा रही है। अंतिम चरण में जिन 78 सीटों पर मतदान होना है उनमें से आधे से अधिक सीटों पर अल्पसंख्यक मतदाताओं की हिस्सेदारी 40 से 70 फ़ीसदी के बीच है। माना जा रहा है कि यह चरण एनडीए और खास करके भाजपा के लिए थोड़ा चुनौती भरा रह सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए भाजपा ने भी ध्रुवीकरण की कोशिश तेज करते है। मुस्लिम बहुल वाले इस क्षेत्र में भाजपा सीएए और एनआरसी जैसे मुद्दे उठा रही है ताकि ध्रुवीकरण किया जा सके। भाजपा अब सीएए और एनआरसी जैसे मुद्दे को लेकर सीमांचल में आक्रमक हो गई है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) को लेकर विपक्ष को कठघरे में खड़ा किया। कटिहार में योगी ने दहाड़ लगाते हुए कहा कि एनडीए की सरकार फिर बनते ही चुन-चुनकर घुसपैठियों को बाहर खदेड़ेंगे। हालांकि यहां से कुछ ही दूर किशनगंज में जदयू अध्यक्ष और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार चुनावी सभा कर रहे थे। नीतीश अपने सहयोगी भाजपा के फायर ब्रांड नेता के बातों से सहमत नहीं दिखे। उन्होंने तुरंत कहा कि किसी में दम नहीं कि हमारे लोगों को देश से बाहर कर दे। नीतीश ने आगे कहा कि ये कौन दुष्प्रचार करता रहता है, फालतू बातें कहता रहता है। उन्होंने कहा कि सभी लोग हिन्दुस्तान के हैं, कौन बाहर करेगा?  विपक्ष पर परोक्ष रूप से निशाना साधते हुए नीतीश ने कहा कि कुछ लोग चाहते हैं कि समाज में झगड़ा चलता रहे और काम करने की जरूरत नहीं हो। 

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यह वही इलाका है जहां बिहार में सियासी जमीन तलाश रहे हैदराबाद से सांसद और एआईएमआईएम के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी भी मुसलमानों को साधने के लिए पूरी कोशिश कर रहे हैं। अपनी हर रैली में सीएएऔर एनआरसी जैसे मुद्दे उठाते है और केंद्र की मोदी सरकार और राज्य की नीतीश सरकार पर हमला करते है। वह यह भी आरोप लगा रहे है कि बीजेपी और आरएसएस सीमांचल में बसे लोगों को घुसपैठिया कह रही है और आरजेडी तथा कांग्रेस अपना मुंह नहीं खोल रही।

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आज बिहार चुनाव के तीसरे चरण के लिए प्रचार थम गया। तीसरे चरण में मुकाबला और भी ज्यादा दिलचस्प होने की उम्मीद है। लोजपा की नई रणनीति और सीमांचल में एआईएमआईएम की बढ़ती ताकत ने महागठबंधन और एनडीए के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी है। 2015 की बात करें तो तीसरे चरण की 78 सीटों पर कांग्रेस-राजद-जदयू गठबंधन में एनडीए को करारी शिकस्त दी थी। तब इस गठबंधन को 54 सीटें मिली थी जिनमें जदयू को 23, राजद को 20 और कांग्रेस को 11 । एनडीए की बात करें तो पिछले चुनाव में यहां से उसे 21 सीटें मिली थी जिसमें से भाजपा 20 सीटों पर चुनाव जीती थी जबकि आरएलएसपी के खाते में 1 सीट गई थी। 

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