राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में दिखी योगी के बढ़ते कद की झलक, राजनीतिक प्रस्ताव पेश किए जाने के क्या हैं मायने?

By अभिनय आकाश | Nov 08, 2021

पांच राज्यों में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर बीजेपी की दिल्ली में कार्यकारिणी की बैठक हुई। इस बैठक में पीएम मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा समेत तमाम बड़े नेता शामिल हुए। राष्ट्रीय कार्यकारिणी को पीएम मोदी ने संबोधित भी किया। इस बैठक की खास बात ये रही कि इसमें सभी चुनावी राज्यों के सीएम को बोलने का मौका दिया गया। यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने केंद्र सरकार की नीतियों की तारीफ की। बैठक में कोरोना काल में मोदी सरकार के काम-काज की तारीफ हुई। 

गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत, उत्तराखंड के पुष्कर सिंह धामी, पंजाब के पदाधिकारी के अलावा जितने भी राज्यों में चुनाव होने थे उसके नेता अपने-अपने राज्यों के मुख्यालय से इस बैठक में जुड़े थे। अगर चुनाव वाले राज्यों से इतर अगर बीजेपी शासित राज्यों की बात करें तो कोई भी वहां बैठक में फिशिकली उपस्थित नहीं था। एक मात्र मुख्यमंत्री जो वर्चुअली नहीं बल्कि फिशिकली इस बैठक में नजर आए वो थे योगी आदित्यानाथ। उन्होने राजनीतिक प्रस्ताव भी रखा। इस राजनीतिक प्रस्ताव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की योजनाओं की तारीफ के साथ-साथ पांच राज्यों में आगामी चुनाव को लेकर के पार्टी की रणनीति पर चर्चा हुई।

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 राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक का महत्व

पिछले साल राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक कोविड की वजह से नहीं हो पाई थी। अमूमन राष्ट्रीय कार्यकारिणी बीजेपी की सबसे बड़ी ईकाई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित 124 सदस्य वहां उपस्थित थे, जबकि शेष लोग वर्चुअली तौर पर बैठक में शामिल हुए। इसमें प्रदेशों के अध्यक्ष, कुछ केंद्रीय मंत्री व राजनीतिक रूप से खासा महत्व रखने वाले नेताओं को इसमें शामिल किया जाता है। ये बैठक काफी अहम मानी जाती है क्योंकि इससे ये पता चलता है कि पार्टी के भीतर किसका क्या वजूद है। किसी भी राज्य में चुनाव को लेकर रणनीति बनाना, वहां टिकटों को फाइनल करना ये सारे काम कार्यकारिणी के सदस्यों के बीच से ही होता है। मीटिंग में भाग लेने के लिए किसको बुलाया गया है और किसको नहीं ये बेहद अहम होता है और इसके मायने भी खास होते हैं। वैसे तो राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में सभी मौजूद होते हैं, चाहे वो विशेष आमंत्रित सदस्य ही क्यों न हो। लेकिन इस बार की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में कोरोना काल की वजह से तय किया गया कि 100-150 की संख्या में लोग इसमें मौजूद रहेंगे। बाकी लोग अपने राज्यों से वर्चअल माध्यम से इससे जुड़ेंगे। 

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क्यों हुआ योगी का चयन

2017 और 2018 में वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री और पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठकों में राजनीतिक प्रस्तावों को पेश किया था। आदित्यनाथ को मैदान में उतारने के पार्टी के फैसले के बारे में पूछे जाने पर, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि यूपी के मुख्यमंत्री अपने प्रदर्शन पर इसके हकदार हैं। हमें उन्हें क्यों नहीं चुनना चाहिए? वो सबसे अधिक आबादी वाले राज्य में सरकार चला रहे हैं। कोविड महामारी के दौरान उनके काम को हर कोई जानता है – चाहे वह प्रवासी मजदूरों के लिए हो या गांवों में रोजगार पैदा करने के लिए। वे संसद में वरिष्ठ सांसद रह चुके हैं। हमें उन्हें राजनीतिक प्रस्ताव रखने के लिए क्यों नहीं बुलाना चाहिए? हम जरूर ऐसा करेंगे।

2024 की राह यूपी करेगा आसान 

ये तो पुरानी कहावत है कि दिल्ली का रास्ता यूपी से होकर ही जाता है। ऐसे में 2022 का उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में सफलता प्राप्त कर बीजेपी 2024 की राह को आसान बनाना चाहती है। इसी वजह से पार्टी योगी के पीछे अपनी पूरी ताकत झोंकने में लगा है। राष्ट्रीय कार्यकारिणी में पेश राजनीतिक प्रस्ताव को काफी महत्वपूर्ण दस्तावेज माना जाता है क्योंकि इसमें पार्टी के वीजन की झलक तो मिलती ही है, साथ ही उन योजनाओं का भी जिक्र होता है जिनपर बीजेपी सरकारें काम कर रही होती हैं। 

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