By अंकित सिंह | Dec 18, 2021
केंद्र सरकार द्वारा लड़कियों के विवाह के लिए न्यूनतम आयु को 18 साल से बढ़ाकर 21 साल करने के प्रस्ताव को मोदी सरकार ने मंजूरी दे दी है। अगले सप्ताह में इससे संबंधित एक विधेयक संसद में पेश किया जाएगा। सरकार के इस फैसले को लेकर इस के अलग-अलग हिस्सों में खुशी व्यक्त की जा रही है। इन सबके बीच कुछ नेता ऐसे भी हैं जो एक खास तबके से आते हैं, उन्हें सरकार का यह फैसला बिल्कुल भी पसंद नहीं आ रहा है। समाजवादी पार्टी के तो दो सांसदों ने सरासर सरकार के इस फैसले के खिलाफ सवाल उठा दिए हैं। समाजवादी पार्टी के सांसद सैयद तुफैल हसन ने कहा कि लड़कियों की शादी कब करनी चाहिए जब वे प्रजनन की उम्र तक पहुंच जाए। महिलाओं की प्रजनन की उम्र 16 से 17 वर्ष से लेकर 30 वर्ष तक होती है। विवाह के लिए प्रस्ताव 16 वर्ष की उम्र में आने शुरू हो जाते हैं। ऐसे में अगर देर से शादी होती है तो इसके दो नुकसान हो सकते हैं। एक बांझपन की आशंका और दूसरा किसी की उम्र बढ़ने तक बच्चे सेटल नहीं हो पाते हैं।
शफीकुर्रहमान बर्क का बयान
सपा के एक और सांदस शफीकुर्रहमान बर्क ने भी सरकार के इस फैसले पर सवाल उठाए है। उन्होंने कहा कि लड़कियों की शादी की उम्र बढ़ाने से हालात बिगड़ेंगे। पहले जो 18 साल की उम्र थी वह भी काफी थी। लंबे समय से यही उम्र थी, वरना इससे ज्यादा आवारगी का मौका मिलेगा। उन्होंने कहा कि भारत एक गरीब देश है और हर कोई कम उम्र में अपनी बेटी की शादी करना चाहता है ... मैं संसद में इस विधेयक का समर्थन नहीं करूंगा।
ओवैसी का बयान
वहीं अब एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने भी इस पर गुस्सा जाहिर किया है। ओवैसी ने सवाल किया कि 18 साल की उम्र में एक भारतीय नागरिक अनुबंध पर हस्ताक्षर कर सकता है, व्यवसाय शुरू कर सकता है, प्रधानमंत्री चुन सकता है और सांसदों और विधायकों का चुनाव कर सकता है तो फिर शादी क्यों नहीं कर सकता? ओवैसी ने यह भी कह दिया कि मेरा विचार है कि लड़कों के लिए एक किस आयु सीमा घटाकर 18 कर दी जानी चाहिए। ओवैसी ने सरकार से सवाल किया कि आखिर आपने महिलाओं के लिए क्या किया है? ओवैसी ने ट्वीट में कहा कि मोदी सरकार मोहल्ले के अंकल की तरह बर्ताव कर रही है? ओवैसी ने यह भी कहा कि 18 की उम्र में वह आपसी सहमति से यौन संबंध बना सकते हैं, लिव-इन रिलेशनशिप में रह सकते हैं, लेकिन शादी नहीं कर सकते। यह हास्यास्पद है।