By अंकित सिंह | Jul 21, 2025
एनडीए के घटक दल और पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को जनता दल (यूनाइटेड) की कमान छोड़ने की सलाह देते हुए कहा कि अब उनके लिए सरकार और पार्टी दोनों को एक साथ संभालना संभव नहीं रहा। इसके साथ ही, कुशवाहा यह सुझाव देने वाले भाजपा और जदयू के पहले सहयोगी बन गए। नीतीश के पुराने मित्र कुशवाहा ने उनके बेटे निशांत को जन्मदिन की बधाई देते हुए यह बात कही और उन्हें ‘जद(यू) की नई उम्मीद’ भी बताया।
उन्होंने कहा कि सरकार चलाने का उनका लंबा अनुभव है जिसका लाभ राज्य को आगे भी मिलता रहे, यह फिलहाल राज्य हित में अतिआवश्यक है। परन्तु पार्टी की जवाबदेही के हस्तांतरण (जो वक्त मेरी ही नहीं स्वयं उनकी पार्टी के हजारों कार्यकर्ताओं/नेताओं की राय में अब आ चुका है) के विषय पर समय रहते ठोस फैसला ले लें। यही उनके दल के हित में है। और इसमें विलंब दल के लिए अपूर्णीय नुकसान का कारण बन सकता है। शायद ऐसा नुकसान जिसकी भरपाई कभी हो भी नहीं पाये।
हालांकि, अपने पोस्ट के नोट में कुशवाहा ने यह भी लिखा कि मैं जो कुछ कह रहा हूं, जदयू के नेता शायद मुख्यमंत्री जी से कह नहीं पाएंगे और कुछ लोग कह भी सकते हों, तो वैसे लोग वहां तक पहुंच ही नहीं पाते होंगे। जेडी(यू) के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने इस पर कहा कि उपेंद्र कुशवाहा एक वरिष्ठ नेता रहे हैं। नीतीश कुमार ने उन्हें विधानसभा में विपक्ष का नेता बनाया था और राज्यसभा के लिए मनोनीत करके उन्हें बहुत महत्व दिया था। एनडीए के सहयोगी और नीतीश कुमार के शुभचिंतक होने के नाते कुशवाहा ने अपनी चिंताएँ व्यक्त की हैं। लेकिन इस पर फैसला पूरी तरह से निशांत कुमार और मुख्यमंत्री पर निर्भर है। निशांत अपने पिता की इच्छा के अनुसार काम करेंगे।