By मिताली जैन | Aug 27, 2026
किसी भी कपल के लिए पैरेंट बनना उनके जीवन का एक नया अध्याय शुरू होने जैसा है। लेकिन बहुत से कपल्स चाहकर भी पैरेंट नहीं बन पाते हैं। जब बात फर्टिलिटी यानी प्रजनन क्षमता की आती है, तो आमतौर पर फोलिक एसिड, आयरन, विटामिन डी और ओमेगा-3 जैसे पोषक तत्वों की चर्चा ज्यादा होती है। लेकिन एक छोटा सा मिनरल ऐसा भी है, जिसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए जिंक।
अधिकतर लोगों को यह पता ही नहीं होता है कि जिंक फर्टिलिटी के लिए इतना जरूरी क्यों है? दरअसल, हमारे शरीर में प्रजनन से जुड़ी कई प्रक्रियाओं में जिंक की भूमिका होती है। महिलाओं में यह अंडाणु के विकास और परिपक्वता से जुड़ी प्रक्रियाओं में शामिल होता है। इतना ही नहीं, शोध में यह भी पाया गया है कि अंडाणु के सामान्य विकास और निषेचन की प्रक्रिया के लिए पर्याप्त जिंक जरूरी है।
वहीं, पुरुषों के मामले में जिंक शुक्राणुओं के बनने और उनकी गुणवत्ता से जुड़ी प्रक्रियाओं में भूमिका निभाता है। जिंक की कमी को खराब शुक्राणु गुणवत्ता और शुक्राणु निर्माण में गड़बड़ी से जोड़ा गया है।
महिलाओं में अंडाणु के विकास और परिपक्व होने की प्रक्रिया में जिंक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। शोध से पता चलता है कि पर्याप्त जिंक उपलब्ध न होने पर अंडाणु की परिपक्वता प्रभावित हो सकती है। निषेचन के बाद शुरुआती भ्रूण के विकास में भी जिंक की भूमिका होती है। इसलिए अगर कोई महिला गर्भधारण की योजना बना रही है, तो केवल कैलोरी या वजन पर ध्यान देने के बजाय पूरा पोषण लेना भी जरूरी है।
पुरुषों में जिंक का संबंध शुक्राणुओं से है। शुक्राणु बनने की प्रक्रिया को शुक्राणुजनन कहा जाता है और इसमें जिंक की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। कुछ अध्ययनों में कम जिंक स्तर को शुक्राणुओं की संख्या, उनकी गति और आकार जैसे मानकों में गड़बड़ी से जोड़ा गया है। जिंक शरीर की ऑक्सीडेटिव तनाव से निपटने वाली प्रक्रियाओं में भी भूमिका निभाता है। ज्यादा ऑक्सीडेटिव तनाव शुक्राणुओं को नुकसान पहुंचा सकता है, इसलिए पर्याप्त पोषण पुरुष प्रजनन स्वास्थ्य का एक हिस्सा है।
अगर आप शाकाहारी हैं तो भी जिंक की जरूरत पूरी करने के लिए सिर्फ गोलियों पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं है। आप अपने खाने में कुछ चीजों जैसे कद्दू के बीज, तिल, मूंगफली, काजू, चना, राजमा, मसूर दाल, मूंग दाल व सोयाबीन आदि को शामिल कर सकते हैं। हालंाकि, यह ध्यान रखें कि दालों और साबुत अनाज में मौजूद फाइटेट जिंक के अवशोषण को कम कर सकते हैं। इसलिए दालों और अनाज को भिगोना, अंकुरित करना और अच्छी तरह पकाना बहुत जरूरी है।
वयस्क पुरुषों के लिए जिंक की सामान्य अनुशंसित मात्रा लगभग 11 मिलीग्राम प्रतिदिन और वयस्क महिलाओं के लिए 8 मिलीग्राम प्रतिदिन है। गर्भावस्था और स्तनपान के दौरान जरूरत बढ़ जाती है। हालांकि, जिंक सप्लीमेंट लेने से पहले एक बार डॉक्टर की सलाह अवश्य लें।
- मिताली जैन