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    <title><![CDATA[Hindi News - News in Hindi - Latest News in Hindi | Prabhasakshi]]></title>
    <description><![CDATA[Latest News in Hindi, Breaking Hindi News, Hindi News Headlines, ताज़ा ख़बरें, Prabhasakshi.com पर]]></description>
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      <title><![CDATA[Parenting Mistakes: बच्चों के जिद्दी स्वभाव के पीछे हैं पेरेंट्स की ये 4 गलतियां, Future पर पड़ता है गहरा असर]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/these-mistakes-by-parents-behind-children-stubborn-nature-they-profound-impact-on-their-future]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>हर माता-पिता की यह चाहत होती है कि वह अपने बच्चे को अच्छी से अच्छी परवरिश दें। लेकिन कई बार वह बच्चे को लाड़-प्यार में इतना सिर पर चढ़ा लेते हैं कि वह माता-पिता की बात को हल्के में लेते हैं। वहीं इसके अलावा की गई छोटी-छोटी बातें गलतियां बच्चे के व्यवहार को गुस्सैल और जिद्दी बना देते हैं। बच्चों की हर बेतुकी मांग को पूरा करना, दूसरों से तुलना करना, बात-बात पर चिल्लाना जैसी चीजें शामिल हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको 4 ऐसी गलतियों के बारे में बताने जा रहे हैं, जो बच्चे के स्वभाव को बिगाड़ सकती हैं।</div><div><br></div><h2>अनुशासन की कमी</h2><div>जब पेरेंट्स बच्चों को न तो सही नियम सिखाते हैं और न ही रोक-टोक करते हैं। वहीं हद से ज्यादा लाड-प्यार देते हैं, तो बच्चे समझ नहीं पाते हैं कि क्या सही है और क्या गलत। वहीं दूसरी ओर बच्चे की हर बात में कमी निकाली जाए या फिर उन पर दबाव बनाया जाए, तो उनको ऐसा लगता है कि कोई उनकी बात को सुन नहीं रहा है। ऐसे में माहौल में अपनी बात को मनवाने के लिए और खुद को बचाने के लिए बच्चे गुस्सैल और जिद्दी बनते हैं।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/health/nocturia-sign-of-heart-and-kidney-disease-not-diabetes-not-ignore-frequent-urination-at-night" target="_blank">Health Tips: Diabetes ही नहीं Heart और Kidney डिजीज का संकेत है Nocturia, रात में बार-बार पेशाब आने को न करें इग्नोर</a></h3><div><br></div><h2>लड़ाई-झगड़े का माहौल</h2><div>घर का तनावपूर्ण माहौल बच्चे के भावनात्मक और मानसिक विकास को रोकता है। जब बच्चों को सही दिशा और प्यार की जगह सिर्फ डांट और गुस्सा मिलता है। तो उनका सेल्फ-कॉन्फिडेंस डगमगा जाता है। वह अपनी फीलिंग्स को सही तरीके से व्यक्त नहीं कर पाते हैं। फिर यह आदत धीरे-धीरे उनके स्वभाव का हिस्सा बन जाती है। वह छोटी-छोटी बातों पर चिढ़ने लगते हैं।</div><div><br></div><h2>बचपन के बर्ताव का बड़े होने पर भी दिखता है असर</h2><div>बचपन की आदतें उम्र के साथ खत्म नहीं होती हैं बल्कि बड़े होने पर वह व्यक्ति के स्वभाव का हिस्सा बन जाती है। ऐसे माहौल में पले-बढ़े बच्चे बड़े होकर अपनी छोटी-छोटी परेशानियों या फिर तनान को झेल नहीं पाते हैं। वह हर बात पर अपना बचाव करने लगते हैं और दूसरों के साथ दिल से जुड़ने में उनको समस्या आती है। बचपन का गुस्सा बड़े होने पर अविश्वास करने या फिर दूरी बनाने की आदत में बदल जाता है।</div><div><br></div><h2>भविष्य के लिए बेहतर है अनुशासन</h2><div>पेरेंट्स जिस तरह से बच्चे को संस्कार और अनुशासन सिखाते&nbsp; हैं, वह उनके भविष्य को आकार देता है। बच्चों से गुस्से की जगह बातचीत के जरिए अपनी समस्याओं को हल करना सिखाना जरूरी होता है। इसके लिए माता-पिता को खुद भी शांत रहना होगा। आपका अच्छा व्यवहार बच्चों के सामने सही मिशाल पेश करेगा। जब घर में समझदारी, प्यार और सही नियम होंगे, तो बच्चे भी आगे चलकर समझदार और मानसिक रूप से मजबूत बन जाएंगे।</div>]]></description>
      <pubDate>Sat, 08 Aug 2026 11:34:52 +0530</pubDate>
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      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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      <title><![CDATA[Health Tips: Diabetes ही नहीं Heart और Kidney डिजीज का संकेत है Nocturia, रात में बार-बार पेशाब आने को न करें इग्नोर]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/nocturia-sign-of-heart-and-kidney-disease-not-diabetes-not-ignore-frequent-urination-at-night]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>रात में एक बार पेशाब के लिए उठना, पानी पीने की आदत, उम्र या कुछ दवाओं की वजह से सामान्य माना जा सकता है। लेकिन अगर रात में दो या इससे ज्यादा बार पेशाब के लिए उठते हैं और इससे आपकी नींद प्रभावित होती है, तो इसको नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। मेडिकल साइंस में इस स्थिति को नोक्टूरिया कहा जाता है। हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक नोक्टूरिया बीमारी नहीं है, लेकिन यह कई सेहत संबंधी समस्याओं की शुरूआत का संकेत हो सकती है। लगातार नींद टूटने से होने वाली थकान, गिरने का खतरा, ध्यान में कमी और जीवन की गुणवत्ता पर भी इसका असर पड़ सकती है।</div><div><br></div><h2>क्यों बढ़ती है रात में पेशाब की इच्छा</h2><div>रात को शरीर एंटीड्यूरेटिक हार्मोन ज्यादा मात्रा में बनाता है। जिससे किडनी कम मात्रा में यूरिन बनाती है और नींद के दौरान बार-बार आपको पेशाब जाने की जरूरत पड़ती है। लेकिन हार्मोनल बदलाव, उम्र बढ़ने, कुछ बीमारियों या दवाओं की वजह से यह प्रोसेस प्रभावित हो सकता है। वहीं रात में कैफीन, ज्यादा तरल पदार्थ लेने या शराब आदि के सेवन भी बार-बार पेशाब आने की वजह बन सकता है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/health/sawan-2026-ultimate-monsoon-diet-and-health-plan" target="_blank">Monsoon Health Tips: सावन में कमजोर Digestion को दुरुस्त रखेंगे ये Food Habits और Diet</a></h3><div><br></div><h2>डायबिटीज हो सकती है वजह</h2><div>अगर बार-बार पेशाब जाने के अलावा बार-बार भूख लगना, ज्यादा प्यास लगना और वेट लॉस जैसे लक्षण हों, तो यह डायबिटीज का संकेत हो सकता है। जब ब्लड शुगर बढ़ जाता है, तो शरीर एक्स्ट्रा ग्लूकोज को यूरिन के जरिए बाहर निकालने की कोशिश करता है। जिससे बार-बार पेशाब आता है।</div><div><br></div><h2>नींद से जुड़ी बीमारी</h2><div>कई लोगों को ऐसा लगता है कि स्लीप एपनिया सिर्फ खर्राटों की बीमारी है। यह नोक्टूरिया से भी जुड़ी हो सकती है। स्लीप एपनिया के दौरान बार-बार सांस रुकती है। इस कारण शरीर ऐसे हार्मोन छोड़ता है, जो यूरिन बनने की मात्रा बढ़ा सकते हैं। अगर रात में पेशाब के साथ सांस रुकना, तेज खर्राटे या दिन भर नींद आना भी हो तो भी स्लीप एपनिया की जांच कराना चाहिए।</div><div><br></div><h2>ओवरएक्टिव ब्लैड</h2><div>ओवरएक्टिव ब्लैडर में मूत्राशय सामान्य से ज्यादा संवेदनशील हो जाता है। ऐसे में अधिकतर मोटे लोगों में थोड़ी मात्रा में यूरिन जमा होने पर भी पेशाब की तीव्र इच्छा महसूस हो सकती है। इसमें व्यक्ति को बार-बार पेशाब आना, अचानक तेज पेशाब लगना, रात में कई बार उठना और कई बार पेशाब पर कंट्रोल न रहना जैसे लक्षण महसूस होते हैं।</div><div><br></div><h2>हार्ट या किडनी की बीमारी</h2><div>दिन भर पैरों में जमा एक्स्ट्रा तरल पदार्थ रात के समय लेटने पर दोबारा ब्लड फ्लो में लौटता है। जिसके बाद किडनी ज्यादा यूरिन बनाने लगती है। इससे रात में बार-बार पेशाब की समस्या हो सकती है। यह समस्या विशेष रूप से क्रॉनिक किडनी डिजीज, हार्ट फेल्योर या पैरों में सूजन वाले लोगों में देखी जा सकती है।</div><div><br></div><h2>पुरुषों में प्रोस्टेट बढ़ना</h2><div>50 साल से ज्यादा उम्र के पुरुषों में बढ़ा हुआ प्रोस्टेट रात में बार-बार पेशाब जाने की समस्या सामान्य हो सकती है। लेकिन महिलाओं में यह वजह नहीं होती है, लेकिन पुरुषों के लिए यह सबसे आम वजहों में से एक है।</div><div><br></div><div>हालांकि बार-बार रात में पेशाब आना हमेशा सामान्य नहीं होता है। यह किडनी या हार्ट की बीमारी, डायबिटीज, ओवरएक्टिव ब्लैडर, स्लीप एपनिया या अन्य सेहत संबंधी समस्याओं का शुरूआती संकेत हो सकता है। अगर यह समस्या लगातार बनी रहती है, या अन्य चेतावनी वाले लक्षण दिखते हैं, तो समय रहते डॉक्टर से जांच जरूर कराएं। सही वजह पता लगकर इलाज शुरू करने से न सिर्फ नींद बेहतर होती है, बल्कि कई गंभीर बीमारियों की समय रहते पहचान भी हो सकती है।</div>]]></description>
      <pubDate>Fri, 07 Aug 2026 11:49:39 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/nocturia-sign-of-heart-and-kidney-disease-not-diabetes-not-ignore-frequent-urination-at-night</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Monsoon Health Tips: सावन में कमजोर Digestion को दुरुस्त रखेंगे ये Food Habits और Diet]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/sawan-2026-ultimate-monsoon-diet-and-health-plan]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>सावन का महीना धार्मिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जाता है, साथ ही हेल्थ के लिए भी यह महीना काफी महत्वपूर्ण होता है। मानसून के समय नमी बढ़ जाती है और इंफेक्शन का खतरा भी अधिक हो जाता है। लेकिन पाचन तंत्र भी कुछ हद तक धीमा हो जाता है।&nbsp;</div><div><span style="font-size: 1rem;">इसलिए डाइट में कुछ खास बदलाव करना बेहद जरुरी होता है। सावन के महीने में संतुलित और सात्विक आहार, सेहत को बेहतर बनाने में मदद करता है। सावन के महीने में आसानी से पचने वाले, शरीर में पानी की कमी पूरी करने वाले और पोषक तत्वों से भरपूर फूड्स पर ध्यान देना जरुरी है। इस दौरान तामसिक और प्रोसेस्ड फूड्स से दूर रहना बेहद जरुरी है। आइए आपको बताते हैं इस मौसम में क्या खाना चाहिए और क्या नहीं?&nbsp;</span></div><div><br></div><div><b>सावन के महीने में क्या खाएं?</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">डाइटिशियन के मुताबिक सावन के समय में व्रत रखें या सामान्य भोजन करें, दोनों ही परिस्थिति में आपको हल्का और बैलेंस डाइट लेनी की काफी जरुरत है। इस मौसम में आपको फूड्स को डाइट में शामिल करें, जिन्हें आप आसानी से पचा सकते हैं।</span></div><div><span style="font-size: 1rem;">- इस मौसम में सीजनल फ्रूट्स जैसे केला, सेब, पपीता और अनार जरुर खाएं।</span></div><div><br></div><div>- यह आपके शरीर को एनर्जी और हाइड्रेशन देंगे।</div><div><br></div><div>- कुट्टू, सिंघाड़े और अमरंथ (राजगिरा) का आटा खाएं।</div><div><br></div><div>- इसके अलावा आप दूध, दही, छाछ और पनीर को डाइट का हिस्सा बनाएं। इनसे शरीर को प्रोटीन और कैल्शियम मिलेगा।</div><div><br></div><div>- इस मौसम में आप आलू, कद्दू, लौकी और कच्चे केले जैसी सब्जियों को भोजन में जरुर शामिल करें।&nbsp;</div><div><br></div><div>- आप सूखे मेवे, मखाना और सेंधा नमक जरुर खाएं। इससे शरीर को ताकत मिलती है और इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस रहता है।</div><div><br></div><div>- मानसून के समय आप गुनगुना पानी, नारियल पानी और सौंफ-अजवाइन का पानी पीने से शरीर में पानी की कमी नहीं होगी और डाइजेशन भी दुरुस्त रहने वाला है।</div><div><br></div><div><b>सावन के महीने में क्या न खाएं?</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">ध्यान रखें कि सावन के महीने में भारी भोजन नहीं खाना चाहिए? इसे पचाना काफी मुश्किल होता है। खासकर रात के समय हल्का भोजन करना चाहिए। आप चाहे तो डिनर में सूप ले सकते हैं।</span></div><div><br></div><div>- गेंहू, दाल और बेसन को डाइट में बिल्कुल शामिल न करें।</div><div><br></div><div>- लहसुन, प्याज और मसालेदार खाने से बचें।</div><div><br></div><div>- नॉनवेज फूड्स, अंडे और एल्कोहल से दूरी बनाना सबसे बढ़िया है।</div><div><br></div><div>- फ्राइड, पैकेज्ड और तले-भुने खाने से दूर रहे, क्योंकि इससे पाचन तंत्र खराब हो सकता है।&nbsp;</div><div><br></div><div>- इस मौसम में हरी पत्तेदार सब्जियां और बैगन न खाएं। इससे मानसून में बैक्टीरियल इंफेक्शन का खतरा बना रहता है।&nbsp;</div>]]></description>
      <pubDate>Fri, 07 Aug 2026 11:18:29 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/sawan-2026-ultimate-monsoon-diet-and-health-plan</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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      <title><![CDATA[Health Tips: डायबिटीज मरीजों के लिए Jowar और Barley रोटी क्यों है जरूरी? जानें इसके फायदे]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/why-jowar-and-barley-rotis-essential-for-diabetic-patients-know-their-benefits]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>डायबिटीज के मरीजों को अपनी डाइट का खास ख्याल रखना जरूरी होता है। दवाओं के साथ जब तक आप सही डाइट नहीं लेंगे, हेल्दी लाइफस्टाइल को नहीं फॉलो करते हैं। तब तक ब्लड शुगर को कंट्रोल करना पॉसिबल नहीं है। डायबिटीज मरीजों के लिए डाइट में लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले फूड्स को शामिल करना जरूरी है। लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले फूड्स का मतलब उन फूड्स से है, जो ब्लड में ग्लूकोज लेवल जल्दी नहीं बढ़ाते हैं। वहीं मौसम के हिसाब से भी अपनी डाइट में बदलाव करना जरूरी होता है।</div><div><br></div><div>क्योंकि मानसून में पाचन कमजोर हो जाता है। ऐसे में जरूरी है कि ऐसी चीजों को डाइट में शामिल करें, जिनको पचाना आसान हो और शुगर लेवल को कंट्रोल करने में मदद कर सके। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको 3 ऐसे आटे के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनसे बनने वाली रोटी को मानसून में डायबिटीज के मरीजों को अपनी डाइट में जरूर शामिल करना चाहिए।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/health/not-cold-improper-footwear-and-hormonal-changes-also-to-blame-how-to-protect-feet" target="_blank">Foot Care: केवल ठंड ही नहीं, गलत Footwear और Hormonal Changes भी हैं जिम्मेदार, ऐसे करें पैरों का बचाव</a></h3><div><br></div><h2>ज्वार की रोटी</h2><div>मानसून में डायबिटीज के मरीजों को ज्वार से आटे से बनने वाली रोटी को अपनी डाइट में शामिल करना चाहिए। क्योंकि इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है। इसमें फाइबर भरपूर मात्रा में पाया जाता है। ज्वार की रोटी खाने से ब्लड शुगर लेवल अचानक नहीं बढ़ता है। इससे इंसुलिन सेंसिटिविटी में सुधार होता है और यह ग्लूटन फ्री है। इसको खाने से पेट लंबे समय तक भरा महसूस होता है और वेट कम करने में भी मदद मिलती है।</div><div><br></div><h2>जौ की रोटी</h2><div>डायबिटीज मरीजों के लिए जौ की रोटी फायदेमंद होती है। इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स भी कम होता है और गट हेल्थ के लिए भी इसको अच्छा माना जाता है। जौ में मौजूद बीटा-ग्लूकॉन नामक घुलनशील फाइबर ग्लूकोज के अब्जॉर्बशन को स्लो कर देता है। अगर आप भी जौ के आटे की रोटी नहीं खाना चाहती हैं, तो आप इसमें गेहूं का भी आटा मिला सकती हैं।</div><div><br></div><h2>चने के आटे की रोटी</h2><div>डायबिटीज के मरीजों को चने के आटे यानी कि बेसन वाली रोटी को अपनी डाइट में शामिल करना चाहिए। गेहूं की रोटी की तुलना में बेसन में कार्बोहाइड्रेट कम होता है। इससे ब्लड शुगर लेवल बैलेंस होता है। इससे मेटाबॉलिज्म भी दुरुस्त रहता है और वेट लॉस में भी मदद मिलती है। वहीं बेसन की रोटी खाने से इंसुलिन रेजिस्टेंस और कोलेस्ट्रॉल लेवल भी कम होता है।</div>]]></description>
      <pubDate>Thu, 06 Aug 2026 10:51:49 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/why-jowar-and-barley-rotis-essential-for-diabetic-patients-know-their-benefits</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
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      <title><![CDATA[Foot Care: केवल ठंड ही नहीं, गलत Footwear और Hormonal Changes भी हैं जिम्मेदार, ऐसे करें पैरों का बचाव]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/not-cold-improper-footwear-and-hormonal-changes-also-to-blame-how-to-protect-feet]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>ठंड के मौसम में अक्सर लोगों को एड़ियों के फटने और रूखेपन की समस्या होती है। लेकिन कुछ लोग ऐसे भी हैं, जिनको हर मौसम में फटी एड़ियों की शिकायत बनी रहती है। इसकी वजह न सिर्फ मौसम बल्कि कुछ सामान्य लापरवाहियां भी एड़ियों को तंग करती है। हवा में खुश्की होने की वजह स्किन से नमी कम होना लाजमी है। अधिकतर एसी में रहने या ठंड के मौसम में ऐसा होना एक सामान्य प्रोसेस है। लेकिन अगर मॉइश्चराइज न किया जाए, तो एड़ियां खुरदरी और फटने लगती हैं।</div><div><br></div><div>मौसम की मार के अलावा जो लोग लंबे समय तक खड़े रहते हैं या फिर एड़ियों की देखरेख में लापरवाही बरतते हैं। तब भी एड़ियों के फटने की समस्या होती है, जोकि किसी भी मौसम में हो सकती है। शुरूआत में एड़ियां रूखी बनी रहती है। वहीं समय रहते इस समस्या पर ध्यान न दिया जाए, तो एड़ियों में गहरी दरारें आना शुरू हो जाती हैं और इनमें दर्द भी होता है। कई बार गंभीर स्थितियों में एड़ियों से खून आने लगता है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/health/understanding-texting-anxiety-and-digital-stress" target="_blank">Digital Era में बढ़ती हुई Texting Anxiety: क्या रिप्लाई न मिलना आपकी Mental Health बिगाड़ रहा है?</a></h3><div><br></div><h2>क्यों होती है क्रैक्ड हील की समस्या</h2><div>ज्यादा नहाने, खुश्क मौसम या हार्श सॉप की वजह से एड़ियों की नमी खोने लगती है।</div><div><br></div><div>सख्त फर्श पर लंबे समय तक खड़े रहने से।</div><div><br></div><div>नंगे पैर ज्यादा देर तक चलने से।</div><div><br></div><div>सही फिटिंग का फुटवियर न होने पर या पीछे से फुटवियर खुला होने पर।</div><div><br></div><div>मोटापा, इससे भी एड़ियों पर अधिक भार पड़ता है।</div><div><br></div><div>बढ़ती उम्र में भी नेचुरल रूप से स्किन की इलास्टिसिटी कम होने लगती है।</div><div><br></div><div>साइरोसिस, फंगल इंफेक्शन या एग्जिमा होना पर।</div><div><br></div><div>हाइपोथायरॉएडिज्म या डायबिटीज जैसी बीमारियां होने पर।</div><div><br></div><h2>ये आदतें हो सकती हैं जिम्मेदार</h2><div>एड़ियों को मेटल के स्क्रबर से घिसना।</div><div>एड़ियों पर ज्यादा स्क्रबर करना।</div><div>रोजाना ज्यादा गर्म पानी से नहाना।</div><div>ऐसे फुटवियर पहनना जो सख्त हों और तलवों के लिए कुशन नहीं होता है।</div><div>शुरूआत में एड़ियों के रूखेपन को नजरअंदाज करना।</div><div>लंबे समय तक नंगे पैर चलना या पैर घिसकर चलना।</div><div>नहाने के बाद मॉइश्चराइजर या फुट केयर न करना।</div><div><br></div><h2>किसे होती है क्रैक हील की सबसे ज्यादा समस्या</h2><div>अक्सर ज्यादा वेट वाले या मोटे लोगों में क्रैक हील की समस्या होती है। क्योंकि शरीर का भार एड़ियों पर आता है और इससे उन पर दबाव पड़ता है। जिन लोगों को लंबे समय तक खड़े रहना पड़ता है और उनको भी फटी एड़ियों की समस्या होती है। इनमें फैक्ट्री कर्मचारी, सेल्स मैन, टीचर और महिलाएं शामिल हैं। इसके अलावा डायबिटीज जैसी समस्याएं या एग्जिमा जैसी स्किन की बीमारियों से जूझ रहे लोगों को क्रैक हील की समस्या हो सकती है।</div><div><br></div><h2>लाइफस्टाइल संबंधी समस्याएं</h2><div>ज्यादातर महिलाएं पीछे से खुली चप्पलें पहनती हैं, जिनमें एड़ियां ढकी नहीं रहती हैं।</div><div><br></div><div>लगातार पानी में रहकर काम करने से।</div><div><br></div><div>जेनेटिक्स की वजह</div><div><br></div><div>रोजाना मॉश्चराइजर लगाए बगैर बार-बार पेडिक्योर कराना।</div><div><br></div><div>हार्मोन या मेनोपॉज में बदलाव की वजह से।</div><div><br></div><h2>ऐसे रखें एड़ियों का ख्याल</h2><div>आप हर मौसम में फटी एड़ियों से बचने के लिए कुछ तरीके अपना सकते हैं और बदलाव करेंगे। इससे रूखी और फटी एड़ियां ठीक होंगी और हील्स भी क्रैक होने से बचेंगी।</div><div><br></div><div>दिन में दो बार एड़ियों पर मॉश्चराइजर लगाएं। मॉश्चराइजर में ग्लिसरीन, यूरिया, सेरामाइड और लैक्टिक एसिड जैसी चीजें होती हैं।</div><div><br></div><div>पैर धोने या फिर नहाने के बाद पैरों को पोंछने के बाद मॉश्चराइजर लगाना चाहिए।</div><div><br></div><div>सप्ताह में एक या दो बार प्यूमिक स्टोन से एड़ियों को स्क्रब करें, इससे डेड स्किन हट जाएगी।</div><div><br></div><div>वहीं नंगे पैर रहने से बचना चाहिए।</div><div><br></div><div>पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए।</div><div><br></div><div>रात को सोने से पहले फुट क्रीम लगाना न भूलें।</div><div><br></div><div>बहुत ज्यादा गर्म पानी से नहाने से बचना चाहिए।</div><div><br></div><div>अगर नियमित देखरेख की जाए, तो एड़ियों को फटने से बचाया जा सकता है। नियमित देखरेख और रूखेपन की शुरूआत में ही अगर आप एहतियात बरतती हैं, तो क्रैक हील की शिकायत नहीं होगी। लेकिन अगर एड़ियों में ज्यादा समस्या है और दरारें गहरी हो गई हैं और उनमें खून आता है या तेज दर्द होता है। तब आपको डर्मेटोलॉजिस्ट की जरूरत पड़ती है।</div>]]></description>
      <pubDate>Wed, 05 Aug 2026 14:10:47 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/not-cold-improper-footwear-and-hormonal-changes-also-to-blame-how-to-protect-feet</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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      <title><![CDATA[Digital Era में बढ़ती हुई Texting Anxiety: क्या रिप्लाई न मिलना आपकी Mental Health बिगाड़ रहा है?]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/understanding-texting-anxiety-and-digital-stress]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>आज के डिजिटल दौर में इंटरनेट के जरिए टेक्सट मैसेजिंग से बातचीत करना बेहद आसान हो चुका है। अब हर कोई कहीं न कहीं चैट पर बिजी रहता है। इस दौरान कई लोग महसूस करते हैं कि किसी को मैसेज भेजने के बाद जब देर तक रिप्लाई नहीं आता, तो दिल की धड़कनें तेजी से बढ़ जाती हैं। जिससे व्यक्ति बार-बार फोन चेक करता है, एक अलग सी एंग्जायटी देखनो को मिलती है। सामने वाले व्यक्ति के Typing... स्टेटस का लगातार चेक करते रहना , हमेशा इंतजार में बनें रहते हैं या आप भी सोचते हैं कि कहीं आपने कुछ गलत तो नहीं लिख दिया है।</div><div><span style="font-size: 1rem;">दरअसल, ये सभी लक्षण टेक्स्टिंग एंग्जायटी के लक्षण होते हैं। वैसे यह कोई मेडिकल बीमारी नहीं है, बल्कि स्मार्टफोन का अधिक इस्तेमाल और लगातार ऑनलाइन रहने से दिमाग में स्ट्रेस और घबराहट का कारण बन जाता है। आइए आपको बताते हैं टेक्स्टिंग एंग्जायटी क्या है और इससे कैसा बचा जाए?</span></div><div><br></div><div><span style="font-size: 1rem;"><b>क्या होती है टेक्स्टिंग एंग्जायटी</b></span></div><div><span style="font-size: 1rem;">अगर आप मैसेज के जरिए बातचीत करते समय घबराहट होने के पीछे कई मनोवैज्ञानिक और व्यवहारिक कारण हो सकता है, आइए आपको इसके बारे में बताते हैं-</span></div><div><br></div><div><b>- हाव-भाव और टोन की कमी: </b>असल में जब हम आमने-सामने बातचीत में चेहरे एक्सप्रेशन और टोन से बात का सही मतलब समझा जाता है। टेक्स्ट में यह सब गायब हो जाता है, जिससे कई बार गलतफहमी का डर बन जाता है।</div><div><br></div><div><b>- लगातार ऑनलाइन रहने का दबाव: </b>अक्सर मैसेज आते रहते हैं और हर समय रिप्लाई करने की मजबूरी इंसान को दिमागी रुप से थका रही है।</div><div><br></div><div><b>- फोन का ज्यादा यूज करना: </b>स्मार्टफोन का लगातार यूज करने से दिमाग में 'डोपामाइन' के स्तर को प्रभावित करता है, जिससे नोटिफिकेशन चेक करने की आदत एक लत बन जाती है।</div><div><br></div><div>&nbsp;<b>- सोशल एंग्जायटी और साइबर बुलिंग:</b> जिन लोगों को पहले से ही घबराहट होती हैं या ऑनलाइन ट्रोलिंग का शिकार रह चुके हैं, उन्हें मैसेज का जवाब देने का इंतजार करने में डर लगने लगता है।</div><div><br></div><div><b>टेक्स्टिंग एंग्जायटी के लक्षण</b></div><div><br></div><div><b>&nbsp;शारीरिक और मानसिक लक्षण</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">- मैसेज भेजने के बाद अचानक से दिल की धड़कन तेज होना या बैचेनी होना।</span></div><div><br></div><div>- लगातार चिड़चिड़ापन, घबराहट या हाथ-पैरों में कंपकंपी महसूस होना।</div><div><br></div><div>- सांस लेने में भारीपन या छाती में खिंचाव महसूस होना।</div><div><br></div><div><b>व्यावहारिक लक्षण</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">- नोटिफिकेशन न आने पर भी बार-बार फोन की स्क्रीन चेक करना।</span></div><div><br></div><div>- अनसोल्वड मैसेज देखकर डरना या मैसेज का जवाब देने से पूरी तरह बचना।</div><div><br></div><div>- किसी का देर से रिप्लाई करने पर खुद को दोषी मानना या लगातार ओवरथिंकिंग करते रहना।</div><div><br></div><div><b>मैसेज के स्ट्रेस को दूर कैसे करें?</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">- अधिक फोन का इस्तेमाल करने से बचें। दिन में कुछ घंटे ऐसे तय करें जब आप फोन से पूरी तरह दूर रहें।</span></div><div><br></div><div>- किसी भी गंभीर मुद्दे पर टेक्स्ट करने के बजाय फोन पर बात करें या मिलाकर बात करें। इससे गलतफहमी नहीं होती है।&nbsp;</div><div><br></div><div>- दोस्तों और सहकार्मियों को साफ रुप से बताएं कि हर समय आप तुरंत रिप्लाई देने के लिए उपबल्ध नहीं रह सकते हैं।</div><div><br></div><div>- अगर किसी का रिप्लाई रूखा या देर से आए, तो यह न समझें कि वह आपसे नाराज है। क्या पता सामने वाला व्यक्ति काम में बिजी हो।</div><div><br></div><div><b>डॉक्टर या विशेषज्ञ से संपर्क कब करें?</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">जब घबराहट रोजाना काफी बढ़ जाए, ऑफिस के वर्क या पर्सनल रिश्तों को बुरी तरह प्रभावित होने लगे, तो आप किसी थेरेपिस्ट या काउंसलर की मदद लेना समझदारी है। दरअसल, कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (CBT) जैसी तकनीकों से इस डिजिटल स्ट्रेस को दूर करने में मदद मिल सकती है।&nbsp;&nbsp;</span></div>]]></description>
      <pubDate>Wed, 05 Aug 2026 12:39:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/understanding-texting-anxiety-and-digital-stress</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Natural Detox Drink: ब्लोटिंग और एसिडिटी खत्म करेगा धनिये का पानी, एक्सपर्ट्स ने बताए इसके चौंकाने वाले फायदे]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/coriander-water-benefits-for-body-detox-and-liver]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>आजकल भागदौड़ भरी जिंदगी फिट रहने के लिए किसी के पास समय नहीं है। वैसे भी खराब जीवनशैली और गलत खानपान के कारण भी हेल्थ समस्याएं दिनों-दिन बढ़ने लगी हैं। ऐसे में अपनी सेहत का ध्यान रखने के लिए रसोई में मौजूद इस चीज का जरुर इस्तेमाल करें।&nbsp;</div><div><span style="font-size: 1rem;">रसोई में मौजूद कई बीज, मसाले, हर्ब्स और पत्ते औषधीय गुणों से भरपूर हैं और इन्हें सही तरीके से डाइट में इस्तेमाल करने से आपकी कई सारी समस्याएं दूर हो जाएंगी। इन्हीं में से एक धनिये के बीज हैं। आइए आपको बताते हैं इसे डाइट में कैसे शामिल करें।</span></div><div><br></div><div><b>धनिए के बीजों में पाए जाते हैं कई सारे न्यूट्रिएंट्स</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">धनिया के बीजों में विटामिन-सी, विटामिन-बी और विटामिन-के पाया जाता है। इसमें आयरन, कैल्शियम, पोटैशियम और मैग्नीशियम की भरपूर मात्रा होती है।&nbsp;</span></div><div><br></div><div><b>किन चीजों में फायदेमंद है धनिये के बीज?</b></div><div><br></div><div><b>डाइजेशन को सुधारना&nbsp;</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">धनिए के बीज पाचन क्रिया को सुधारने में मदद करते हैं। ये गैस , ब्लोटिंग और अपच को दूर करते हैं और हाजमे को दुरुस्त करता है। वैसे ये डाइजेस्टिव एंजाइम्स के सीक्रेशन को भी तेज करते हैं। इसकी तासीर ठंडी होती है। ये एसिडिटी दूर करने में मदद करती हैं।</span></div><div><br></div><div><b>लिवर के फायदेमंद</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">धनिया के बीज लिवर फंक्शन को सुधारते हैं। इनमें एंटीऑक्सीडेंट, एंटीइंफ्लेमेटरी और डिटॉक्सिफाइंग गुण होते हैं। वैसे ये लिवर हेल्थ को बेहतर बनाने और शरीर को डिटॉक्स करता है।</span></div><div><br></div><div><b>यूटीआई में राहत मिलती है</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">धनिया का बीज यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन में भी राहत पहुंचाते हैं। ये वॉटर रिटेंशन को कम करके यूरिन प्रोडक्शन का बढ़ाता है, जिससे पेशाब में जलन कम हो जाती है और शरीर को गर्मी को शांत करते हैं।</span></div><div><br></div><div><b>धनिया के बीज डाइट में कैसे इस्तेमाल करें?</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">- 1-2 टीस्पून धनिए के बीजों को रातभर भिगो दें।</span></div><div><br></div><div>- इसको सुबह हल्का गुनगुना कर लें और छानकर पिएं।</div><div><br></div><div>- इसे हल्का कूटकर दाल, सूप और सब्जी में डालें।&nbsp;</div>]]></description>
      <pubDate>Tue, 04 Aug 2026 17:19:54 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/coriander-water-benefits-for-body-detox-and-liver</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Smart Tips to Maintain Fitness: बिना थके लगातार फिटनेस बनाए रखने के 5 स्मार्ट टिप्स]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/5-smart-tips-to-maintain-fitness-consistently-without-getting-tired]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>फिटनेस की शुरुआत करना आसान है लेकिन उसे लम्बे समय तक जारी रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। कई लोग कुछ हफ़्तों तक पूरे जोश के साथ वर्कआउट (workout) करते हैं, फिर थकान, व्यस्त दिनचर्या या मोटिवेशन (motivation) की कमी के कारण अपना लक्ष्य पूरा नहीं कर पाते।&nbsp;</div><div><br></div><div>अपने स्वास्थ्य और तंदुरुस्ती के लिए के लिए आपको हर दिन खुद को पूरी तरह थकाने की ज़रूरत नहीं है। कुछ छोटे और स्मार्ट बदलाव आपकी यात्रा को आसान और टिकाऊ बना सकते हैं। ऐसे पांच टिप्स हमने यहाँ सूचीबद्ध किए हैं:&nbsp;</div><div><br></div><h2>1. हर दिन 100% देने की बजाय नियमित रहें</h2><div><br></div><div>क्या आप सोचते हैं कि हर वर्कआउट का लक्ष्य (workout goal) खुद को पूरी तरह थका देना होता है? तो, यह बिलकुल गलत है। कुछ दिन आपकी एनर्जी (energy) कम होगी और यह बिलकुल सामान्य है। ऐसे दिनों में हल्की एक्सरसाइज, स्ट्रेचिंग या छोटी वॉक भी काफी होती है। सबसे ज़रूरी बात यह है कि आपकी आदत बनी रहे। यदि आपको लंबे समय तक अच्छे नतीजे चाहिए तो नियमित रहना आवश्यक है न कि सिर्फ कुछ दिनों तक बहुत ज़यादा मेहनत करना।&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/health/understanding-viral-fever-when-to-consult-a-doctor" target="_blank">Monsoon के मौसम में तेजी से बढ़ रहा Viral Fever; जानिए Symptoms और बचाव के असरदार तरीके</a></h3><h2>2. रिकवरी को भी प्राथमिकता दें&nbsp;</h2><div><br></div><div>अगर आपके शरीर को आराम नहीं मिलेगा, तो प्रदर्शन भी धीरे-धीरे गिरने लगेगा। अच्छी नींद, पर्याप्त पानी और संतुलित आहार आपकी रिकवरी को बेहतर बनाते हैं। अगर आप नियमित रूप से स्ट्रेंथ ट्रेनिंग (strength training) करते हैं, तो अपने आहार में पर्याप्त प्रोटीन शामिल करने की कोशिश करें। ज़रूरत के अनुसार आप <a href="https://www.healthkart.com/whey-protein?navKey=SCT-snt-pt-wp" target="_blank">whey protein powder</a> का इस्तेमाल कर सकते हैं ताकि रोज़ाना की प्रोटीन (protein) ज़रूरत पूरी करने में आसानी हो सके। हालांकि, यह संतुलित भोजन का विकल्प नहीं बल्कि एक सुविधाजनक पूरक है।</div><div><br></div><h2>3. छोटे-छोटे लक्ष्य बनाएं</h2><div><br></div><div>अगर आपका लक्ष्य सिर्फ 10 किलो वज़न कम करना या सिक्स पैक बनाना है, तो इसमें समय लग सकता है। इसकी बजाय छोटे लक्ष्य तय करें, जैसे इस हफ्ते चार दिन वर्कआउट करना, रोज़ 8,000 कदम चलना या पहले से थोड़ा ज़्यादा वज़न उठाना। छोटे-छोटे लक्ष्य पूरे होने पर आत्मविश्वास बढ़ता है और फिटनेस का सफर ज़्यादा मज़ेदार लगता है।</div><div><br></div><h2>4. फिटनेस को आदत बनाएं</h2><div><br></div><div>अपनी फिटनेस के लिए ऐसी गतिविधियां चुनें जिनमें आपको मज़ा आता हो, चाहे वह जिम (gym) हो, योग (yoga), साइक्लिंग (cycling), डांस (dance) या तेज़ चलना। जब फिटनेस आपकी लाइफस्टाइल का हिस्सा बन जाती है, तो उसे जारी रखना आपके लिए आसान हो जाता है।</div><div><br></div><h2>5. अपने शरीर की सुनें</h2><div><br></div><div>हर दिन एक जैसा नहीं होता। अगर लगातार थकान महसूस हो रही है या मांसपेशियों (muscles) में दर्द बना हुआ है, तो आपका शरीर शायद आराम मांग रहा है। ज़रूरत से ज़्यादा ट्रेनिंग करने की बजाय आप रिकवरी (recovery) पर ध्यान दें। कुछ लोग अपने फिटनेस प्लान के अनुसार <a href="https://www.healthkart.com/workout-essentials/l-carnitine?navKey=SCT-sn-wrk-crnt" target="_blank">liquid carnitine</a> जैसे सप्लीमेंट्स को शामिल करते हैं, लेकिन याद रखें कि किसी भी सप्लीमेंट लेने के साथ नियमित ट्रेनिंग, सही खानपान और पर्याप्त आराम का पूरा ध्यान रखें।&nbsp;</div><div><br></div><h2>निष्कर्ष</h2><div><br></div><div>फिटनेस कोई 30 दिन का चैलेंज नहीं, बल्कि लंबे समय की आदत है। खुद को हर दिन थकाने की बजाय समझदारी से ट्रेनिंग करें, शरीर को पर्याप्त आराम दें और छोटे-छोटे कदमों पर ध्यान रखें। धीरे-धीरे यही छोटी आदतें बड़े बदलाव लेकर आती हैं। याद रखें, सबसे सफल फिटनेस जर्नी वही होती है जो लंबे समय तक बिना रुके चलती है।</div>]]></description>
      <pubDate>Tue, 04 Aug 2026 15:20:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/5-smart-tips-to-maintain-fitness-consistently-without-getting-tired</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Health Tips: अपनी खुशियों का Password खुद ढूंढें, Locus of Control और Self-Esteem से बदलें सोचने का नजरिया]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/find-password-to-own-happiness-shift-perspective-through-locus-of-control-and-self-esteem]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>किसी भी समस्या के प्रति किसी व्यक्ति का व्यवहार कैसा है, इसको मनोविज्ञान की भाषा में 'लोकस ऑफ कंट्रोल' बोलते हैं। अगर हर मुश्किल के लिए कोई व्यक्ति खुद को जिम्मेदार मानते हुए उसका समाधान ढूंढने की कोशिश करता है। तो इसको इंटरनल लोकस ऑफ कंट्रोल कहा जाता है। वहीं दूसरी तरफ जब कोई अपनी हर एक समस्या के लिए बाहरी वजहों को दोषी मानता है, तो इसको एक्सटर्नल लोकस ऑफ कंट्रोल कहा जाता है।</div><div><br></div><h2>इमोशनल मैनेजमेंट</h2><div>बता दें कि इंटरनल एलओसी वाले लोगों को खुद पर इस बात का यकीन रहता है कि वह अपने व्यवहार और इच्छाओं को कंट्रोल कर सकते हैं। इसके ठीक उलट एक्सटर्नल एलओसी वाले लोग यह मानते हैं कि उनकी जिंदगी को बाहरी लोग कंट्रोल करते हैं।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/health/understanding-viral-fever-when-to-consult-a-doctor" target="_blank">Monsoon के मौसम में तेजी से बढ़ रहा Viral Fever; जानिए Symptoms और बचाव के असरदार तरीके</a></h3><div><br></div><div>लोकस ऑफ कंट्रोल उस मनोदशा की जांच करता है, जिसके तहत लोग यह यकीन करते हैं कि उनकी सेहत और अन्य किसी हालात पर आंतरिक या बाहरी वजहों का किस सीमा तक कंट्रोल है। लेकिन यह उनके दिमाग के काम करने के तरीके का अध्ययन है।</div><div><br></div><h2>एक्सटर्नल एलओसी</h2><div>इन लोगों के मन में ऐसी धारणा बनी रहती है कि उनके जीवन की स्थितियां किसी के भाग्य या फिर किस्मत के कंट्रोल में हैं।</div><div><br></div><h2>इंटरनल एलओसी</h2><div>इन लोगों का मानना होता है कि उनका जीवन जैसा भी है, वह उनके अपने कामों का प्रत्यक्ष परिणाम है।</div><div><br></div><div>ये लोग मानते हैं कि उनका जीवन जैसा भी है, वह उनके अपने कार्यों का ही प्रत्यक्ष परिणाम है।</div><div><br></div><div>उदाहरण के तौर पर जो लोग वेट कम करने के लिए दवाओं की मदद लेना चाहते हैं। वह वेट लॉस में उतना सफल नहीं होते हैं। जबकि संतुलित खानपान और रोजाना की एक्सरसाइज अपनाने वाले लोग आसानी से अपना वेट कंट्रोल कर लेते हैं।</div><div><br></div><div>इस लिहाज से अपनी मनोदशा को समझते हुए खुद को इमोशनल मैनेजमेंट करना ज्यादा पॉजिटिव और सही कोशिश है। इसके उलट एक्सटर्नल एलओसी वाले लोगों में पेशेंस की खासी कमी होती है। फिर भी कई बार समस्या के हिसाब से संतुलित ढंग से उसके समाधान के लिए दोनों तरीकों को अपनाते हुए इमोशनल मैनेजमेंट की जरूरत होती है।</div><div><br></div><h2>छोटी शुरुआत जरूरी</h2><div>बदलते वक्त की जरूरतों के हिसाब से लाइफस्टाइल में बदलाव लाने की कोशिश करनी चाहिए। जैसे रोजमर्रा के छोटे-छोटे फैसले दूसरों से पूछे बिना खुद लें। लोकस ऑफ कंट्रोल आपके बारे में काफी कुछ कहता है। अगर आप इसको मैनेज करना सीख गए तो हर समस्या का हल खोजना आसान हो जाएगा।</div><div><br></div><h2>आपकी खुशियों का पासवर्ड</h2><div><br></div><h2>आत्मसम्मान</h2><div>दूसरों के सामने ऐसा कोई भी काम न करें, जो दूसरों के सामने तो आपकी छवि को बेहतर बनाए, लेकिन आपको वह काम नापसंद हो।</div><div><br></div><h2>संतुलन है जरूरी</h2><div>सभी के जीवन में उतार-चढ़ाव आता है। दोनों की स्थितियों में संयमित रहना जरूरी होता है। सफलता के बाद अति-उत्साहित और नाकामी से मिलने वाली निराशा की वजह से अक्सर लोग गलतियां करते हैं। इसलिए दोनों ही स्थितियों में शांत रहना जरूरी है।</div><div><br></div><h2>बातचीत करना जरूरी</h2><div>अगर आपका मन कभी तनावग्रस्त हो और आप किसी समस्या का समाधान नहीं खोज पा रहे हैं। तो परिवार के सदस्यों या किसी अपने करीबी दोस्त से बात करें।</div>]]></description>
      <pubDate>Tue, 04 Aug 2026 11:57:40 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/find-password-to-own-happiness-shift-perspective-through-locus-of-control-and-self-esteem</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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      <title><![CDATA[Monsoon के मौसम में तेजी से बढ़ रहा Viral Fever; जानिए Symptoms और बचाव के असरदार तरीके]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/understanding-viral-fever-when-to-consult-a-doctor]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>बदलता हुआ मौसम अपने साथ ढेर सारी बीमारियां लेकर आता है। मानसून के समय कई बीमारियों का खतरा अधिक हो जाता है। इस दौरान वायरल फीवर के मामले में भी काफी तेजी से बढ़ते हैं। बरसात के समय मौसम में बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक कोई भी इसकी चपेट में आ जाते हैं।</div><div><span style="font-size: 1rem;">असल में वायरल फीवर एक वायरस से नहीं, बल्कि कई तरह के वायरल संक्रमणों के कारण होता है। इसकी शुरुआत अक्सर तेज बुखार, शरीर में दर्द, सिरदर्द, गले में खराश, खांसी, जुकाम और कमजोरी जैसे लक्षणों से होती है।</span></div><div><span style="font-size: 1rem;">इस दौरान पर्याप्त रुप से आराम करना भी काफी जरुरी है। अगर लंबे समय तक बुखार बना रहें और सांस लेने में समस्या हो, कमजोरी महसूस हो या कोई अन्य लक्षण नजर आए, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। आइए आपको वायरल फीवर के लक्षण क्या है और इससे बचने के आसान तरीके बताते हैं।</span></div><div><br></div><div><b>&nbsp;वायरल फीवर कितने दिन रहता है?</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">- आमतौर पर वायरल फीवर 3 से 7 दिन तक रहता है।</span></div><div><br></div><div>- अक्सर लोगों में बुखार उतरने के बाद भी 1 से 2 सप्ताह तक कमजोरी और थकान महसूस होने लगती है।</div><div><br></div><div>- यदि आपको बुखार 5 से 7 दिन से ज्यादा बना हुआ है या बार-बार आ रहा है, तो एक बार डॉक्टर जरुर दिखा लें।</div><div><br></div><div><b>वायरल फीवर के सामान्य लक्षण</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">- तेज बुखार आना</span></div><div><br></div><div>- पूरे शरीर और मांसपेशियों में दर्द बना रहना</div><div><br></div><div>- लगातार सिरदर्द होना</div><div><br></div><div>- गले में खराश&nbsp;</div><div><br></div><div>- खांसी और जुकाम से परेशान रहना</div><div><br></div><div>- कमजोरी और थकान</div><div><br></div><div>- भूख कम लगना</div><div><br></div><div>- ठंड लगना या कंपकंपी&nbsp;</div><div><br></div><div><b>वायरल फीवर होने पर क्या करें?</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">- आराम करना बेहद जरुरी है।</span></div><div><br></div><div>- दिनभर खूब पानी पिएं, नारियल पानी का सेवन, सूप और अन्य तरल पदार्थ जरुर लें।</div><div><br></div><div>- इस दौरान हल्का और न्यूट्रिशन से भरपूर जैसे खिचड़ी, दाल, सूप और फल खाएं।</div><div><br></div><div>- डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही दवाई लें।</div><div><br></div><div>- शरीर का तापमान नियमित रुप से चेक करते रहे हैं।</div><div><br></div><div><b>वायरल फीवर से बचाव के तरीके</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">- हाथों को साबुन से अच्छे तरीके से बार-बार धोएं।</span></div><div><br></div><div>- भीड़भाड़ वाली जगहों पर मास्क जरुर पहनें।</div><div><br></div><div>- संक्रमित व्यक्ति से संपर्क में आने से बचें।</div><div><br></div><div>- संतुलित आहार लें और पर्याप्त नींद जरुर लें।</div><div><br></div><div>- रोजाना पर्याप्त मात्रा में पानी जरुर पिएं।</div><div><br></div><div>- घर और आसपास साफ-सफाई जरुर रखें।</div><div><br></div><div>- नियमित तौर पर व्यायाम कर इम्यूनिटी को मजबूत बनाएं।</div><div><br></div><div><b>कब डॉक्टर को दिखाएं?</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">- बुखार में 5 से 7 दिन से ज्यादा रहे।</span></div><div><br></div><div>- अगर आपको सांस लेने में परेशानी हो रही है, तो डॉक्टर को दिखाएं।</div><div><br></div><div>- लगातार उल्टी या तेज कमजोरी महसूस होना।</div><div><br></div><div>- बेहोश होना, भ्रम या दौरे जैसे लक्षण दिखाईं दे।</div><div><br></div><div>-&nbsp; बच्चों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों या गंभीर बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को तेज बुखार हो।&nbsp;</div>]]></description>
      <pubDate>Tue, 04 Aug 2026 11:27:28 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/understanding-viral-fever-when-to-consult-a-doctor</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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      <title><![CDATA[30 की उम्र में Breast Cancer का खतरा, खराब Lifestyle और Obesity बढ़ा रहे हैं महिलाओं की मुश्किलें]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/diet-and-breast-cancer-risk-analytical-study]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>दुनियाभर में ब्रेस्ट कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। 30 की उम्र वाली महिलाओं को भी इसका खतरा देखा जा रहा है। डॉक्टर के अनुसार, जिस तरह से हमारी दैनिक रुटीन और खानपान में गड़बड़ी हुई, तब से चिंता और बढ़ गई है।&nbsp;</div><div><span style="font-size: 1rem;">महिलाओं में बढ़ता हुआ मोटापा, शारीरिक निष्क्रियता, मां बनने में समस्या आना। वहीं, हार्मोनल बदलाव और कई जेनटिक कारण से भी ब्रेस्ट कैंसर के मामले बढ़े हैं। अगर आप अपनी जीवनशैली में बदलाव करती हैं, तो इसका जोखिम कम हो जाता है। आइए आपको बताते हैं कैसर से बचाव करने के उपाय।</span></div><div><br></div><div><b>ब्रेस्ट कैंसर के लिए सुपरफूड</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">- अगर आप लंबे समय से संतुलित आहार, पर्याप्त मात्रा में फाइबर, फल-सब्जियां, साबुत अनाज का सेवन करें, तो इससे कैंसर उत्पन्न होने वाली स्थिति कम हो जाती है।</span></div><div><br></div><div>- कैंसर से बचने के लिए जीवनशैली में काफी सुधार करना जरुरी है। जैसे कि नियमित व्यायाम, वेट कम करना और स्तन की समय-समय पर जांच जरुर चेक कराएं है।&nbsp;</div><div><br></div><div><b>ब्रेस्ट कैंसर का खतरा कैसे कम करें?</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">-रिसर्च में पता चला है कि पौधों पर आधारित संतुलित आहार, पर्याप्त फाइबर, एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन से भरपूर भोजन शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और सूजन को कम करने में मदद करता है।</span></div><div><br></div><div>- हेल्दी आहार का सेवन करने से वजन भी कंट्रोल में रहता है। मोटापा के कारण ब्रेस्ट कैंसर का खतरा अधिक देखने को मिलता है।</div><div><br></div><div><b>किन चीजों का करें सेवन</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">- आप फल और सब्जियों का सेवन करें, साबुत अनाज, दालें-बीन्स और ओमेगा-3 युक्त खाद्य पदार्थ का सेवन करें। फाइबर, विटामिन-सी, विटामिन-ई, कैरोटेनॉयड्स, पॉलीफेनॉल और अन्य एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं।</span></div><div><br></div><div>- ये पोषक तत्व कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाने वाले फ्री-रेडिकल्स के प्रभाव को कम करने में सहायक है।&nbsp;</div><div><br></div><div>&nbsp;- आप ब्रोकली, फूलगोभी जैसी सब्जियों में कई ऐसे यौगिक होते हैं, जो शरीर से कैंसर की वृद्धि को कम करने में मददगार साबित होते हैं।</div><div><br></div><div><span style="font-size: 1rem;"><b>क्या चीजें ब्रेस्ट कैंसर का खतरा बढ़ा देती है</b></span></div><div><span style="font-size: 1rem;">प्रोसेस्ड फूड, चीनी वाली चीजें, ट्रांस फैट और तली हुई चीजों खाने से मोटापा और मेटाबॉलिक समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। वहीं, शराब पीने की आदत से भी ब्रेस्ट कैंसर के जोखिम बढ़ जाते हैं।&nbsp;</span></div>]]></description>
      <pubDate>Sun, 02 Aug 2026 17:36:56 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/diet-and-breast-cancer-risk-analytical-study</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Monsoon में बच्चों की immunity बढ़ाने के लिए ये 4 सुपरफूड्स हैं फायदेमंद]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/monsoon-superfoods-to-boost-kids-immunity]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>बारिश का मौसम भले ही सुहावना लगे, लेकिन यह अपने साथ कई तरह की बीमारियां लेकर आता है। बच्चों के लिए यह मौसम पानी में खेलने और मस्ती करने का खास समय होता है, लेकिन हवा में नमी और बैक्टीरिया के बढ़ने से वे सर्दी, जुकाम या पेट के संक्रमण जैसी बीमारियों का आसानी से शिकार हो जाते हैं। ऐसे में, यदि आप अपने बच्चों की इम्यूनिटी को मजबूत रखना चाहते हैं, तो उन्हें कुछ स्वादिष्ट और स्वास्थ्यवर्धक चीजें खिला सकते हैं।</p><h2>बारिश में बच्चों के लिए सेहतमंद आहार</h2><h3>1. गरमा-गरम होममेड सूप</h3><p>सूप हर मौसम में सेहत के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है। बारिश के मौसम में यह आसानी से पच जाता है और शरीर को गर्माहट देता है। आप टमाटर, मकई, मिक्स वेजिटेबल या चिकन सूप बनाकर बच्चों को दे सकते हैं। यह शरीर को आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करता है और उसे हाइड्रेटेड रखने में मदद करता है।</p><h3>2. भुट्टा या स्वीट कॉर्न</h3><p>मानसून के दौरान भुट्टा खाना बच्चों और बड़ों सभी को पसंद आता है। भुने हुए या उबले हुए भुट्टे पर हल्का नींबू और चुटकी भर काला नमक लगाकर देना बच्चों के लिए पौष्टिक होता है। मकई में भरपूर मात्रा में फाइबर, विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट होते हैं, जो पाचन क्रिया को बेहतर बनाने में सहायक होते हैं।</p><h3>3. ताजे मौसमी फल</h3><p>बारिश के मौसम में मिलने वाले फल बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करते हैं। इनमें सेब, नाशपाती, अनार, आलूबुखारा और चेरी जैसे फल शामिल हैं। बच्चों को फल देने से पहले उन्हें गुनगुने पानी से अच्छी तरह धो लेना चाहिए। सड़क किनारे बिकने वाले कटे हुए फलों से बच्चों को दूर रखना चाहिए।</p><h3>4. हल्दी वाला दूध</h3><p>हल्दी वाला दूध सेहत के लिए अत्यंत लाभकारी माना जाता है। रात को सोने से पहले बच्चों को हल्का गर्म हल्दी वाला दूध देना एक बेहतरीन विकल्प है। हल्दी में एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो बच्चों को खांसी, सर्दी और संक्रमण से बचाने में मदद करते हैं।</p>]]></description>
      <pubDate>Sat, 01 Aug 2026 14:26:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/monsoon-superfoods-to-boost-kids-immunity</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    <item>
      <title><![CDATA[Health Tips: पुरुषों में गुस्सा तो महिलाओं में उदासी, क्यों अलग दिखते हैं डिप्रेशन के लक्षण]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/anger-in-men-and-sadness-in-women-why-do-symptoms-of-depression-look-different]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>अक्सर लोगों को लगता है कि डिप्रेशन की समस्या होने पर उनको रोना, मन उदास होना, अकेलापन आदि होगा। लेकिन डिप्रेशन इससे भी कहीं ज्यादा गंभीर है। WHO के मुताबिक डिप्रेशन एक ऐसी कंडीशन है, जिसमें लंबे समय तक व्यक्ति का उदास रहता है। या फिर व्यक्ति को जिन कार्यों में रुचि थी, उनमें रुचि खत्म हो जाती है। WHO के अनुसार, दुनियाभर में करीब 4.6% पुरुष और 6.9% महिलाएं डिप्रेशन से प्रभावित हैं।</div><div><br></div><div>लेकिन क्या महिलाएं और पुरुषों में डिप्रेशन के लक्षण एक तरह के होते हैं। हेल्थ एक्सपर्ट की मानें, तो महिलाओं में डिप्रेशन के मामले ज्यादा होते है। हालांकि डिप्रेशन को एक ही तरह से परिभाषित किया जाता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए बताने जा रहे हैं कि पुरुषों और महिलाओं में डिप्रेशन के लक्षणों में क्या फर्क होता है।&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/health/supta-baddha-konasana-for-fertility-and-period-health" target="_blank">कंसीव करने में आ रही है दिक्कत? Reproductive Health सुधारने के लिए रामबाण है यह 1 आसन</a></h3><div><br></div><h2>महिलाओं में डिप्रेशन के लक्षण</h2><div>महिलाओं में पुरुषों की तुलना में डिप्रेशन की संभावना 1.5 गुना ज्यादा होती है। आमतौर पर महिलाओं में डिप्रेशन की वजह हार्मोनल बदलाव हो सकता है। पीरियड्स से पहले होने वाले बदलाव, मेनोपॉज, प्रेग्नेंसी और पोस्टपार्टम डिप्रेशन शामिल हैं। वहीं महिलाएं अपने इमोशन्स खुलकर बताती हैं। ऐसे में उनके लक्षण जल्दी पहचान में आ जाते हैं। वहीं महिलाओं को खासतौर पर इन लक्षणों पर ध्यान देना चाहिए।</div><div><br></div><div>बिना कारण रोने का मन होना।</div><div>हर समय घबराहट या चिंता महसूस होना।</div><div>हमेशा खालीपन या उदासी महसूस होना</div><div>खुद को हर समय दोष देना या फिर अपराधबोध महसूस करना</div><div>हर समय थकान लगना।</div><div>लोगों से मिलने का मन न होना।</div><div>पहले जो काम अच्छे लगने थे, उनमें अब इंट्रेस्ट खत्म होना।</div><div><br></div><h2>पुरुषों में डिप्रेशन के लक्षण</h2><div>हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक पुरुषों में डिप्रेशन कई बार अलग तरीके से दिखता है। कई पुरुषों को उदासी की जगह व्यवहार में बदलाव दिखता है। इसलिए पुरुषों को अपने बर्ताव पर ध्यान देने की जरूरत है।</div><div><br></div><div>हर समय चिड़चिड़ापन होना।</div><div>हिंसक होना।</div><div>छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा होना।</div><div>खुद को जरूरत से ज्यादा काम में व्यस्त रखना।</div><div>ज्यादा शराब, स्मोकिंग या अन्य नशे का सहारा लेना।</div><div>दोस्तों और परिवार से दूरी बनाना।</div><div>अपनी फीलिंग्स को दूसरों के साथ शेयर नहीं करना।</div><div><br></div><h2>महिलाओं और पुरुषों में डिप्रेशन में फर्क</h2><div>हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक कई पुरुष अपनी उदासी को गुस्से के जरिए दिखाते हैं। डिप्रेशन में पुरुषों के व्यवहार में बदलाव आने लगते हैं। यही वजह है कि परिवार के लोग भी नहीं समझ पाते हैं कि वह डिप्रेशन से जूझ रहे हैं। पुरुषों को बचपन से इमोशंस अपने तक रखने और मजबूत रहने की सलाह दी जाती है। इसलिए पुरुषों का डिप्रेशन का जल्दी पता नहीं चल पाता है। जिसका नतीजा कई बार आत्महत्या तक भी पहुंच जाता है।</div><div><br></div><div>वहीं महिलाएं अपने इमोशन्स को खुलकर जाहिर करती हैं। इसलिए उनमें डिप्रेशन के लक्षण जल्दी पहचान में आ जाते हैं। साथ ही महिलाएं मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेने में नहीं हिचकती हैं।</div>]]></description>
      <pubDate>Sat, 01 Aug 2026 14:09:59 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/anger-in-men-and-sadness-in-women-why-do-symptoms-of-depression-look-different</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[कंसीव करने में आ रही है दिक्कत? Reproductive Health सुधारने के लिए रामबाण है यह 1 आसन ]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/supta-baddha-konasana-for-fertility-and-period-health]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>खराब जीवनशैली और गलत खानपान के कारण कई सारी बॉडी प्रॉब्लम बन जाती है। आजकल पीरियड्स के दौरान फर्टिलिटी से संबंधित काफी दिक्कतें देखने को मिलती है। खान-पान सही न होने के कारण और तनाव का अधिक बढ़ने से पीरियड और ओव्युलेशन अनियमित हो जाती है। कई बार कंसीव करने में काफी समस्या देखने को मिलती है।&nbsp;</div><div><span style="font-size: 1rem;">लेकिन डाइट, और लाइफस्टाइल को सही से रखने से आप इन समस्याओं से बच सकती हैं। पीरियड्स को नियमित बनाने और फर्टिलिटी को सुधारने में कई योगासन मदद कर सकते हैं। आइए आपको बताते हैं आप कौन-सा योग करना चाहिए।</span></div><div><br></div><div><b>सुप्त बद्ध कोणासन कैसे करें?</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">इस आसन को करना बेहद आसान है ज्यादा मुश्किल नहीं है। अगर आप रुटीन में योगा नहीं करती हैं, तो आपको शुरुआत में थोड़ी मुश्किल हो सकती है। वैसे आप इसे शुरुआत में किसी योगा ट्रेनर की निगरानी में कर सकती हैं।</span></div><div><br></div><div>- इसे करने के लिए सबसे पहले योगा मैट पर सीधा बैठ जाएं।</div><div><br></div><div>- इसको आप सोने से पहले बिस्तर पर भी कर सकते हैं।</div><div><br></div><div>- अब आपको सांस छोड़ते हुए घुटनों के मोड़ना है और एड़ी को पेल्विक फ्लोर की तरफ ले जा सकता है।</div><div><br></div><div>- दोनों पैरों के तलवों को आपस में मिलाकर घुटनों को तितली की तरह दोनों ओर खोलें।</div><div><br></div><div>&nbsp;- इस बात का ध्यान रखें कि पैरों के तलवे हमेशा एकदम जुड़े हुए होने चाहिए।</div><div><br></div><div>&nbsp;- एड़ियों को पेल्विक फ्लोर के जितना हो सके, उतना पास लाएं।</div><div><br></div><div>- रीढ़ की हड्डी को बिल्कुल सीधा रखें और हाथों को शरीर से थोड़ा दूर, हथेलियां की ओर रखें।</div><div><br></div><div>- सांस लेते हुए घुटनों को ऊपर की तरफ ले जाएं।</div><div><br></div><div>&nbsp;- आपको पेल्विक फ्लोर पर खिचाव महसूस होना चाहिए।</div><div><br></div><div>&nbsp;- इसके बाद पैरों को वापस पहली पोजीशन में ले आएं।</div><div><br></div><div><b>सुप्त बद्ध कोणासन के पीरियड्स और फर्टिलिटी के लिए फायदे</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">- इस आसन के करने से पीरियड्स में होने वाली परेशानियां दूर होने लगती है।</span></div><div><br></div><div>- सुप्त बद्ध कोणासन महिलाओं की रिप्रोडक्टिव हेल्थ को सुधारने में मदद मिलती है।</div><div><br></div><div>&nbsp;- यह पेल्विक फ्लोर में ब्लड सर्कुलेशन में सुधरता है और इससे रिप्रोडक्टिव ऑर्गन्स तक सही मात्रा में ऑक्सीजन पहुंच जाती है।</div><div><br></div><div>- इससे पेल्विक फ्लोर का तनाव कम होता है।</div><div><br></div><div>- अगर आप इसे सोने से पहले करती हैं, तो स्ट्रेस कम हो जाता है।</div><div><br></div><div>&nbsp;- यह हार्मोनल इंबैलेंस को दूर करता है और ओव्युलेशन को हेल्दी बना सकता है।</div><div><br></div><div>- इससे शरीर रिलैक्स होता है और मेंटल हेल्थ बेहतर होती है।</div><div><br></div><div>- यदि आप कंसीव करने की प्लानिंग कर रही हैं, तो इसे रुटीन का हिस्सा जरुर बनाएं।&nbsp;</div><div><br></div>]]></description>
      <pubDate>Sat, 01 Aug 2026 11:12:57 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/supta-baddha-konasana-for-fertility-and-period-health</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Health tTps: भूलने की आदत को हल्के में न लें, वजह हो सकती है B12 की कमी]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/how-vitamin-b12-deficiency-can-affect-memory-in-hindi]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>भूलने की समस्या आज के समय में बेहद आम हो चुकी है। अमूमन लोग इसके लिए अत्यधिक तनाव व मल्टीटास्किंग को ही दोष देते हैं। लेकिन वास्तव में यह पूरी तरह से सच नहीं है। कई बार इसकी असली वजह शरीर में विटामिन बी12 की कमी भी हो सकती है? जी हां, यह&nbsp;&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">विटामिन केवल खून बनाने के लिए ही नहीं, बल्कि दिमाग और नसों को स्वस्थ रखने के लिए भी बेहद जरूरी है।</span></div><div><br></div><div>अक्सर लोगों को विटामिन बी12 की कमी का अहसास नहीं होता, लेकिन अगर समय रहते इसकी कमी को पहचाना और पूरा नहीं किया जाए, तो यह याददाश्त, एकाग्रता और सोचने-समझने की क्षमता पर असर डाल सकती है। तो चलिए जानते हैं कि विटामिन बी12 की कमी का दिमाग से क्या संबंध है और इससे कैसे बचा जा सकता है।</div><div><br></div><h2>विटामिन बी12 क्यों जरूरी है?</h2><div>विटामिन बी12 एक पानी में घुलनशील विटामिन है, जो शरीर में कई महत्वपूर्ण काम करता है। यह ना केवल लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण में मदद करता है और डीएनए बनने की प्रक्रिया में भाग लेता है। बल्कि मस्तिष्क की कोशिकाओं के सही कामकाज में भी मदद करता है। यही वजह है कि जब शरीर में इसकी कमी होती है, तो सबसे पहले इसका असर नसों और मस्तिष्क के कार्यों पर दिखाई दे सकता है।</div><div><br></div><h2>विटामिन बी12 की कमी और याददाश्त का आपस में क्या कनेक्शन है?</h2><div>विटामिन बी12 की कमी और याददाश्त आपस में गहराई से जुड़े हैं। यह दिमाग को कई तरह से प्रभावित कर सकता है। विटामिन बी12 की कमी से लाल रक्त कोशिकाएं सामान्य रूप से नहीं बन पातीं, जिससे एनीमिया होने का खतरा बढ़ सकता है। इससे शरीर और मस्तिष्क तक ऑक्सीजन की आपूर्ति कम हो सकती है। जिसकी वजह से मानसिक थकान, ध्यान लगाने में परेशानी व याद रखने की क्षमता में कमी जैसी समस्याएं हो सकती हैं।</div><div><br></div><h2>किन लोगों में विटामिन बी12 की कमी का खतरा अधिक होता है?</h2><div>यूं तो विटामिन बी12 की कमी किसी को भी हो सकती है, लेकिन कुछ लोगों में इसकी कमी की संभावना ज्यादा होती है, मसलन-&nbsp;</div><div><br></div><h2>50 वर्ष से अधिक उम्र के लोग</h2><div>लंबे समय से पूरी तरह शाकाहारी या वीगन डाइट लेने वाले लोग</div><div>पेट या आंतों से जुड़ी बीमारियों वाले मरीज</div><div>लंबे समय तक एसिडिटी की दवाएं लेने वाले लोग</div><div>डायबिटीज की कुछ दवाएं लंबे समय तक लेने वाले लोग</div><div>क्या हर भूलने की बीमारी का कारण बी12 की कमी होती है?</div><div><br></div><div>यह सच है कि विटामिन बी12 की कमी से व्यक्ति की याददाश्त पर असर पड़ता है। लेकिन भूलने की समस्या सिर्फ विटामिन बी12 की कमी से नहीं जुड़ी होती, बल्कि इसके अन्य भी कई कारण हो सकते हैं, जैसे-</div><div>पर्याप्त नींद न लेना</div><div>लगातार तनाव</div><div>अवसाद</div><div>थायरॉयड की समस्या</div><div>कुछ दवाओं का असर</div><div>बढ़ती उम्र से जुड़े बदलाव</div><div>अन्य न्यूरोलॉजिकल रोग</div><div><br></div><div>इसलिए कभी भी सिर्फ लक्षण देखकर खुद से सप्लीमेंट लेना शुरू ना करें।&nbsp;&nbsp;</div><div><br></div><div>- मिताली जैन</div>]]></description>
      <pubDate>Fri, 31 Jul 2026 19:27:47 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/how-vitamin-b12-deficiency-can-affect-memory-in-hindi</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Vitamin Deficiency से हो सकती है Insomnia की समस्या, जानिए नींद और विटामिन्स का कनेक्शन]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/vitamin-deficiency-causes-sleep-problems-and-insomnia-solutions]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>शरीर में पोषक तत्वों की अनदेखी नींद के चक्र को बुरी तरह प्रभावित कर सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों और हालिया अध्ययनों के अनुसार, विटामिन डी, बी12, बी6 और फोलेट (विटामिन बी9) की कमी के चलते लोगों को अनिद्रा और बेचैन नींद की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। मस्तिष्क में नींद को नियंत्रित करने वाले प्रमुख हार्मोन मेलाटोनिन और सेरोटोनिन का निर्माण इन विटामिन्स पर निर्भर करता है।</p><p>शोध पत्रिकाओं में प्रकाशित अध्ययनों से स्पष्ट हुआ है कि विटामिन डी का सीधा संबंध मस्तिष्क के उन हिस्सों से है जो सोने और जागने की प्रक्रिया को संचालित करते हैं। इसकी कमी होने से व्यक्ति की नींद बार-बार टूटती है और नींद की गुणवत्ता खराब होती है। इसके अलावा, न्यूरोलॉजिकल स्वास्थ्य के लिए बेहद अहम विटामिन बी12 का कम स्तर शरीर की बायोलॉजिकल क्लॉक को बिगाड़ देता है, जिससे रात में सोने में देरी और दिन के समय अत्यधिक आलस महसूस होता है।</p><p>विशेषज्ञों के मुताबिक, विटामिन बी6 शरीर में मेलाटोनिन हार्मोन के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसकी कमी से व्यक्ति को बिस्तर पर लेटने के बाद भी काफी देर तक नींद नहीं आती। बुजुर्गों पर किए गए अध्ययनों में भी देखा गया है कि कम बी6 वाले लोगों में नींद से जुड़ी शिकायतें अधिक पाई गईं। इसी तरह, फोलेट यानी विटामिन बी9 मस्तिष्क की कोशिकाओं के बेहतर संचालन और न्यूरोट्रांसमीटर के संतुलन को बनाए रखता है, जिसकी कमी से रातभर करवटें बदलने की नौबत आ जाती है।</p><p>इस प्रकार की पोषण संबंधी कमियों से बचाव के लिए आहार विशेषज्ञ संतुलित भोजन को प्राथमिक उपाय बताते हैं। भोजन में हरी पत्तेदार सब्जियां, फल, साबुत अनाज, डेयरी उत्पाद, अंडे और मेवे शामिल करने की सलाह दी जाती है। इसके साथ ही, विटामिन डी के प्राकृतिक स्रोत के रूप में रोजाना सुबह 15 से 30 मिनट धूप में बिताना फायदेमंद माना गया है। यदि जीवनशैली और आहार में बदलाव के बावजूद नींद न आने की समस्या बनी रहती है, तो डॉक्टरों द्वारा ब्लड टेस्ट कराकर चिकित्सकीय परामर्श के आधार पर ही सप्लीमेंट्स लेने की हिदायत दी जाती है।</p>]]></description>
      <pubDate>Fri, 31 Jul 2026 18:48:34 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/vitamin-deficiency-causes-sleep-problems-and-insomnia-solutions</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Cancer research: आनुवंशिकी और डीएनए क्षति से तय होता है फेफड़ों के कैंसर का जोखिम]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/nature-study-shows-how-genetics-influences-lung-cancer-risk]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>एक नए अध्ययन में पहली बार ऐसे सीधे सबूत मिले हैं जो बताते हैं कि किसी व्यक्ति की आनुवंशिक बनावट कैसे सिगरेट के धुएं या धूप जैसे कारकों से होने वाले डीएनए नुकसान को प्रभावित कर सकती है और उत्परिवर्तन (mutations) की संख्या को बदल सकती है। जर्नल 'नेचर' में प्रकाशित यह निष्कर्ष उन पहलुओं को समझाने में मदद कर सकते हैं कि क्यों ज्यादातर धूम्रपान करने वालों को फेफड़ों का कैंसर नहीं होता, जबकि कुछ धूम्रपान न करने वालों को भी यह बीमारी हो जाती है।</p>
<p>कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं सहित विशेषज्ञों का कहना है कि इसका कारण लगभग निश्चित रूप से हमारी विरासत में मिली आनुवंशिक बनावट से जुड़ा है, लेकिन रोगी समूहों के अध्ययन में इसके सीधे सबूत खोजना चुनौतीपूर्ण रहा है।</p>
<p>हालांकि कई अध्ययनों ने सुझाव दिया है कि आनुवंशिक अंतर कैंसर के जोखिम को प्रभावित करते हैं, लेकिन इसे साबित करना मुश्किल रहा है क्योंकि मानव आबादी के भीतर और उनके बीच जीवनशैली, पर्यावरण और जोखिम इतिहास में भिन्नता होती है।</p>
<h2>आनुवंशिकी और कैंसर का संबंध</h2>
<p>शोध के वरिष्ठ लेखक डंकन ओडोम ने कहा, "कैंसर पूरी तरह से संयोग से नहीं होता है। हालांकि ट्यूमर अक्सर एक ही जैविक अंतिम बिंदु पर पहुंचते हैं, लेकिन उस बिंदु तक पहुंचने का रास्ता व्यक्ति की आनुवंशिक पृष्ठभूमि से निर्धारित होता है।"</p>
<p>ओडोम ने आगे बताया, "हम पहली बार यह दिखाने में सक्षम हुए हैं कि आनुवंशिक पृष्ठभूमि उत्परिवर्तन प्रक्रियाओं और ट्यूमर के विकास की ओर ले जाने वाले मार्गों दोनों को किस हद तक प्रभावित करती है।"</p>
<h2>निष्कर्षों का महत्व</h2>
<p>शोधकर्ताओं का कहना है कि इन निष्कर्षों के कैंसर स्क्रीनिंग और सटीक चिकित्सा (precision medicine) के लिए महत्वपूर्ण प्रभाव हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि रोकथाम और स्क्रीनिंग की रणनीतियों को विरासत में मिली आनुवंशिकी और जनसंख्या की विविधता को अधिक सावधानी से ध्यान में रखना पड़ सकता है।</p>
<h2>चूहों पर अध्ययन</h2>
<p>शोधकर्ताओं ने चार प्रकार के चूहों पर अध्ययन किया, जिनकी यकृत कैंसर के प्रति संवेदनशीलता भिन्न थी। यह आनुवंशिक विविधता मानव आबादी में देखी जाने वाली विविधता के बराबर थी।</p>
<p>इसके बाद, चूहों को यकृत कार्सिनोजेन डायथाइलनिट्रोसामाइन (DEN) की एक खुराक दी गई। शोधकर्ताओं ने बताया कि DEN तंबाकू के धुएं और कुछ प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों में पाया जाता है और यह यकृत कोशिकाओं में डीएनए क्षति का कारण बनता है, जिससे उत्परिवर्तन होते हैं जो ट्यूमर के विकास को शुरू कर सकते हैं।</p>
<p>चूंकि हर चूहे को नियंत्रित परिस्थितियों में एक ही उम्र में समान खुराक मिली, इसलिए टीम ने मनुष्यों में अध्ययन को भ्रमित करने वाली पर्यावरणीय भिन्नता को समाप्त कर दिया।</p>
<h2>जीनोम विश्लेषण</h2>
<p>उन्होंने लगभग 600 ट्यूमर के जीनोम का अनुक्रमण (sequencing) किया और विकसित हुई जीन गतिविधि का विश्लेषण किया। साथ ही, बिना उपचार वाले चूहों की जांच करके विभिन्न प्रकारों में स्वतः होने वाले ट्यूमर के गठन की तुलना की। इस डेटा का उपयोग करके, शोधकर्ताओं ने पुनर्निर्मित किया कि प्रत्येक ट्यूमर अपने मूल कैंसर-कारक उत्परिवर्तन से कैसे विकसित हुआ।</p>
<p>सभी चूहे प्रकारों में, कैंसर ने लगभग हमेशा एक कैंसर-कारक उत्परिवर्तन प्राप्त किया जिसने MAPK नामक एक ही कैंसर-प्रचारक सिग्नलिंग प्रणाली को सक्रिय किया। यह आणविक संकेतों का एक बहु-चरणीय झरना है जो कोशिका वृद्धि सहित महत्वपूर्ण जीवन प्रक्रियाओं को नियंत्रित करता है, और कई प्रकार के कैंसर में एक प्रमुख भूमिका निभाता है।</p>
<p>हालांकि, चूहे की आनुवंशिकी के आधार पर, प्राप्त उत्परिवर्तन ने कैंसर से जुड़े अन्य सिग्नलिंग मार्गों की गतिविधि को बदल दिया। इसने पूरे जीनोम के दोहराव (whole-genome duplication) की एक आश्चर्यजनक प्रवृत्ति भी पैदा की, जहां एक जीव को अपने सभी गुणसूत्रों का एक अतिरिक्त सेट मिलता है और अतिरिक्त जीन प्रतियां उत्परिवर्तित होने और नए कार्य लेने के लिए स्वतंत्र हो जाती हैं।</p>]]></description>
      <pubDate>Fri, 31 Jul 2026 15:40:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/nature-study-shows-how-genetics-influences-lung-cancer-risk</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    <item>
      <title><![CDATA[Health Tips: सुबह उठते ही क्यों भारी रहता है सिर? ये 6 बड़े Reasons बिगाड़ सकते हैं आपकी Health]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/why-head-feel-heavy-when-you-wake-up-in-morning-these-6-major-reasons-harm-health]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>कई लोगों की सुबह की शुरूआत सिरदर्द के साथ होती है। कई लोगों को सुबह उठते ही सिर भारी लगना, कनपटी में दर्द या फिर पूरे सिर में दबाव महसूस होता है। जोकि पूरे दिन का मूड खराब कर देता है। अक्सर लोग इसको नॉर्मल थकान समझकर इग्नोर कर देते हैं। लेकिन अगर आपको अक्सर ही यह समस्या हो रही है, तो इसके पीछ कई वजह हो सकती हैं।</div><div><br></div><div>स्ट्रेस, डिहाइड्रेशन, खराब नींद और कुछ हेल्थ समस्या इसकी वजह हो सकते हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि सुबह उठते ही सिरदर्द क्यों होता है और इस समस्या से कैसे बचा जा सकता है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/health/methi-and-cinnamon-tea-for-pcod-management" target="_blank">PCOD Control: Methi और Dalchini Tea कैसे करती है Hormone Balance, जानें Dietitian की खास Health Advice</a></h3><div><br></div><h2>सुबह होने वाले सिरदर्द की वजह</h2><div>सुबह के समय सिरदर्द होने की सबसे आम वजह खराब या अधूरी नींद होती है। भरपूर नींद न लेना, देर रात तक मोबाइल देखना या फिर बार-बार रात में नींद टूटना आदि दिमाग को पूरा आराम नहीं दे पाता है। इसलिए अक्सर सुबह सिरदर्द होता है।</div><div><br></div><div>सुबह सिरदर्द की एक बड़ी वजह स्लीप एपनिया हो सकती है। इस समस्या में सोने के दौरान बार-बार सांस रुकती है। जिस कारण शरीर और दिमाग को सफिशिएंट ऑक्सीजन नहीं मिल पाता है। ऐसे लोगों को भी सुबह सिरदर्द और थकान की समस्या हो सकती है।</div><div><br></div><div>शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन भी सिरदर्द की वजह बन सकती है। रात भर पानी न पीने या गर्म मौसम से शरीर से अधिक पानी निकलता है, जिस कारण सुबह के समय सिर भारी लग सकता है।</div><div><br></div><div>कुछ लोगों को नींद में जबड़े कसकर रखने या दांत पीसने की आदत होती है। इससे सिर और जबड़े की मसल्स पर दबाव पड़ता है। जोकि मॉर्निंग हेडक की वजह बन सकता है।</div><div><br></div><div>बीपी के अलावा सुबह के समय बीपी बढ़ना, चिंता, ज्यादा स्ट्रेस और पेन रिलीवर दवाओं के बार-बार इस्तेमाल से भी मॉर्निंग हेडेक की समस्या हो सकती है।</div><div><br></div><h2>मॉर्निंग हेडेक से कैसे बचें</h2><div>अगर आप भी मॉर्निंग हेडेक की समस्या से बचना चाहते हैं, तो नींद की आदतों पर सबसे पहले ध्यान दें।</div><div><br></div><div>रोजाना एक ही समय पर सोने और उठने की आदत डालें। वहीं रात में 7 से 8 घंटे की नींद जरूर लें।</div><div><br></div><div>सोने से पहले मोबाइल और लैपटॉप का कम इस्तेमाल करें।</div><div><br></div><div>दिन भर में पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं, जिससे शरीर में पानी की कमी न होने पाए।</div><div><br></div><div>रात में शराब और जरूरत से ज्यादा कैफीन लेने से बचना चाहिए।</div><div><br></div><div>अगर आपको खर्राटे आते हैं या फिर नींद में सांस रुकने की समस्या है या फिर दांत पीसने की आदत है। तो आपको डॉक्टर से संपर्क करें।</div>]]></description>
      <pubDate>Fri, 31 Jul 2026 13:33:20 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/why-head-feel-heavy-when-you-wake-up-in-morning-these-6-major-reasons-harm-health</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[PCOD Control: Methi और Dalchini Tea कैसे करती है Hormone Balance, जानें Dietitian की खास Health Advice]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/methi-and-cinnamon-tea-for-pcod-management]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>PCOD महिलाओं में होने वाली एक हार्मोनल समस्या है, जिसमें अंडाशय (ओवरी) में छोटे-छोटे सिस्ट बनने लगते हैं और पुरुष हार्मोन (एंड्रोजन) का स्तर बढ़ जाता है। इस दौरान महिलाओं का वजन बढ़ने लगता, अनियमित पीरियड्स होना और चेहरे पर कई बार अनचाहे बाल आने लगते हैं। पीसीओडी का असर महिलाओं के पूरे सिस्टम यानी फिजिकल और मेंटल हेल्थ पर होता है।</div><div><span style="font-size: 1rem;">PCOD में इंसुलनि, एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन तीनों हार्मोन्स इंबैलेंस हो जाते हैं। इसलिए पीसीओडी में इन तीनों हार्मोन्स कै बैलेंस होना बेहद जरुरी है। असल में इंसुलिन हार्मोन को बैलेंस करने और PCOD में होने वाली दिक्कतों को कम करने के लिए मेथी दाने और दालचीनी की चाय पी सकते हैं। आइए आपको इसके पीने का तरीका और इसके फायदे बताते हैं।</span></div><div><br></div><div><b>PCOD में क्यों फायदेमंद है मेथी और दालचीनी की चाय?</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">फेमस डाइटिशियन मनप्रीत कालरा के अनुसार, इस चाय के सेवन से इंसुलिन बैलेंस टी का नाम देती हैं। उनका कहना है कि इस चाय को पीने से न सिर्फ इंसुलिन लेवल बैलेंस होगा, बल्कि पीरियड्स भी रेगुलर हो जाएंगे।</span></div><div><span style="font-size: 1rem;">- मेथी दाना इंसुलिन रेजिस्टेंस को कम करना है। इसके सेवन से हार्मोन्स बैलेंस हो सकते हैं, शुगर स्पाइक नहीं होता है और पीरियड साइकिल भी रेगुलर होती है।</span></div><div><br></div><div>&nbsp;- वैसे यह ब्लड में ग्लूकोज और इंसुलिन के लेवल को सुधारता है, जिससे पीसीओडी के लक्षणों को नियंत्रित करने में मदद मिलती है।&nbsp;</div><div><br></div><div>&nbsp;- यह डाइजेशन संबंधित दिक्कतें को दूर करता है।</div><div><br></div><div>&nbsp;- दालचीनी इंसुलिन सेंसिटिविटी को बढ़ाती है यानी शरीर इंसुलिन का इस्तेमाल ज्यादा अच्छे से कर पाता है।</div><div><br></div><div>&nbsp;- वहीं, इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट गुण इंफ्लेमेशन को कम करते हैं।</div><div><br></div><div>&nbsp;- तेजपत्ता भी इंफ्लेमेशन को कम करता है और ग्लूकोज लेवल को कंट्रोल करने का काम करता है।</div><div><br></div><div>&nbsp;- इसमें एंटीऑक्सीडेंट्स पाया जाता है, जो कि ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करते हैं।</div><div><br></div><div><b>PCOD में मेथी दाने और दालचीनी की चाय कैसे बनाएं?</b></div><div><br></div><div><span style="font-size: 1rem;">- सबसे पहले आप एक पैन में पानी डालकर उबालें और इसमें 1 चम्मच मेथी दाना डालें।</span></div><div><br></div><div>- अब इसमें 1 तेजपत्ता, 1 चुटकी दालचीनी पाउडर और 2 लौंग डाल दें।</div><div><br></div><div>- इस पानी को आप 5-7 मिनट तक उबालें।</div><div><br></div><div>&nbsp;- इसके बाद आधा नींबू निचोड़ दें। इसको आपको सुबह के समय खाली पेट गुनगुना पिएं।</div><div><br></div><div>- फिर आप नट्स और सीड्स के सेवन करने के बाद दिन की शुरुआत करें।&nbsp;</div><div><br></div><div><span style="font-size: 1rem;">एक्सपर्ट ने बताया है कि PCOD में मेथी और दालचीनी की चाय बेहद फायदेमंद है। लेकिन आपको इसका सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिए। यदि आपको कोई हेल्थ कंडीशन है या कोई दवाई चल रही है, तो एक बार डॉक्टर की सलाह जरुर लें।&nbsp;</span></div>]]></description>
      <pubDate>Fri, 31 Jul 2026 12:47:14 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/methi-and-cinnamon-tea-for-pcod-management</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    <item>
      <title><![CDATA[High-Protein Lunch से दिनभर रहें ऊर्जावान, डाइट में शामिल करें 5 हेल्दी विकल्प]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/high-protein-lunch-ideas-to-stay-energetic-all-day]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>अगर आप पूरे दिन एक्टिव रहना चाहते हैं और आपको जल्दी भूख भी न लगे, साथ ही सेहत भी अच्छी रहे, तो हाई-प्रोटीन लंच एक बेहतरीन विकल्प है। प्रोटीन मांसपेशियों को मजबूत बनाने, पेट को लंबे समय तक भरा रखने और शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करता है। यदि आप एक ऐसे लंच की तलाश में हैं जो जल्दी बन जाए और सेहतमंद भी हो, तो यहां कुछ झटपट बनने वाले लंच आइडियाज दिए गए हैं।</p><p>लंच के लिए कुछ बेहतरीन फ़ूड आइडियाज&nbsp;</p><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/business/microsoft-alphabet-meta-report-high-capital-expenditure" target="_blank" rel="noopener">Microsoft, Alphabet और Meta के नतीजों के बाद भारी निवेश पर बढ़ा निवेशकों का दबाव</a></h3><h2>1. दाल और ब्राउन राइस</h2><p>अरहर, मूंग या मसूर की दाल प्रोटीन का एक बेहतरीन स्रोत है। जब इसे ब्राउन राइस और हरी सब्जियों के साथ खाया जाता है, तो यह पूरे दिन शरीर में एनर्जी बनाए रखता है।</p><h2>2. चना सलाद</h2><p>ब्रेकफास्ट या लंच में कुछ हेल्दी खाने से हम पूरे दिन एनर्जेटिक महसूस करते हैं। उबले हुए काले चने में प्याज, टमाटर, खीरा, नींबू का रस और थोड़ा सा काला नमक मिलाकर बनाया गया सलाद हल्का और प्रोटीन से भरपूर होता है।</p><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/health/how-to-manage-period-pain-with-pre-cycle-nutrition" target="_blank" rel="noopener">Menstrual Health Tips: पीरियड्स की तारीख से 1 हफ्ता पहले बदलें अपनी Routine, दर्द में मिलेगी बड़ी राहत</a></h3><h2>3. मूंग दाल का चीला</h2><p>सुबह के नाश्ते या दोपहर के लंच के लिए मूंग दाल का चीला एक बढ़िया विकल्प है। यह स्वादिष्ट होने के साथ-साथ हेल्दी भी होता है। इसमें पनीर या सब्जियों की स्टफिंग करके प्रोटीन की मात्रा और बढ़ाई जा सकती है।</p><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/health/10-best-fruit-combinations-for-maximum-nutrition" target="_blank" rel="noopener">Diet Plan में शामिल करें ये 10 Fruit Combinations, आयुर्वेद के नियमों से दोगुना बढ़ेगा पोषण</a></h3><h2>4. अंडा करी और रोटी</h2><p>अगर आप अंडा खाते हैं, तो अंडा करी लंच के लिए एक सेहतमंद विकल्प है। उबले अंडे की करी को गेहूं या मल्टीग्रेन रोटी के साथ खाया जा सकता है। यह प्रोटीन से भरपूर होता है और पेट को लंबे समय तक भरा रखता है।</p><h2>5. सोया चंक्स की सब्जी</h2><p>सोया चंक्स सेहत के लिए बहुत फायदेमंद माने जाते हैं। लंच में इनका सेवन शरीर को भरपूर एनर्जी देता है। सोया चंक्स में उच्च मात्रा में प्रोटीन होता है। इसे टमाटर और मसालों के साथ बनाकर रोटी या ब्राउन राइस के साथ खाया जा सकता है।</p>]]></description>
      <pubDate>Fri, 31 Jul 2026 12:18:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/high-protein-lunch-ideas-to-stay-energetic-all-day</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    <item>
      <title><![CDATA[Karnataka में 7000 से ज्यादा छात्र HIV Positive, ऐसे में क्यों जरूरी है Sex Education और सही Awareness?]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/7000-karnataka-students-hiv-positive-why-sex-education-is-now-crucial]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>कर्नाटक में 18 से 25 साल की उम्र के 7,000 से ज्यादा छात्र HIV पॉजिटिव पाए गए हैं। इन आंकड़ों ने सभी को चौंका दिया है। इसके बाद राज्य सरकार ने कर्नाटक राज्य एड्स रोकथाम सोसाइटी (KSAPS) के निर्देश पर सभी सरकारी, सहायता प्राप्त और निजी कॉलेजों में HIV टेस्टिंग और काउंसलिंग कैंप लगाना अनिवार्य कर दिया है। इस घटना ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि युवाओं के बीच सेक्स एजुकेशन और HIV को लेकर सही जानकारी देना कितना जरूरी है।</div><div><br></div><h2><b>HIV और AIDS एक नहीं हैं</b></h2><div>अक्सर लोग HIV और AIDS को एक ही मान लेते हैं, जबकि दोनों अलग हैं। HIV (ह्यूमन इम्यूनोडेफिशिएंसी वायरस) एक वायरस है, जो शरीर की इम्यूनिटी को कमजोर करता है। वहीं AIDS HIV संक्रमण की गंभीर और आखिरी स्टेज है। अच्छी बात यह है कि समय पर इलाज शुरू कर दिया जाए, तो HIV से संक्रमित व्यक्ति लंबे समय तक सामान्य और स्वस्थ जीवन जी सकता है।</div><div>&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/health/warning-signs-for-men-aged-15-to-40-not-ignore-these-8-body-changes" target="_blank">Testicular Cancer: 15 से 40 की उम्र के पुरुषों के लिए Warning Signs, शरीर के ये 8 बदलाव न करें इग्नोर</a></h3><div><br></div><h2><b>HIV कैसे फैलता है?</b></h2><div>HIV मुख्य रूप से असुरक्षित सेक्स करने, संक्रमित सुई या सिरिंज, संक्रमित खून चढ़ाने और HIV संक्रमित मां से बच्चे में फैल सकता है। वहीं हाथ मिलाने, गले मिलने, साथ खाना खाने, मच्छर के काटने या एक ही टॉयलेट इस्तेमाल करने से HIV नहीं फैलता है। इसलिए इससे जुड़े मिथकों पर नहीं, सही जानकारी पर भरोसा करना जरूरी है।</div><div><br></div><h2><b>सेक्स एजुकेशन क्यों है जरूरी?</b></h2><div>आज भी भारत में सेक्स एजुकेशन को लेकर खुलकर बात नहीं होती। इसकी वजह से कई युवा इंटरनेट, दोस्तों या गलत स्रोतों से अधूरी जानकारी हासिल करते हैं। सही सेक्स एजुकेशन सिर्फ यौन संबंधों के बारे में नहीं, बल्कि सुरक्षित व्यवहार, सहमति, यौन स्वास्थ्य और HIV जैसी बीमारियों से बचाव की जानकारी भी देती है।</div><div><br></div><h2><b>अगर HIV हो जाए तो क्या करें?</b></h2><div>HIV पॉजिटिव आने का मतलब जिंदगी खत्म होना नहीं है। सबसे पहले डॉक्टर से संपर्क करें और एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी शुरू करें। नियमित दवाओं और सही देखभाल से वायरस को नियंत्रित रखा जा सकता है। समय पर इलाज न सिर्फ व्यक्ति को स्वस्थ रखने में मदद करता है, बल्कि दूसरों तक संक्रमण फैलने का खतरा भी काफी कम कर देता है।</div><div>&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/health/high-blood-pressure-becoming-silent-killer-these-lifestyle-changes-have-an-effect" target="_blank">Silent Killer है High BP, साइलेंट किलर बन रहा है उच्च रक्तचाप, ये Lifestyle Changes करेंगे असर</a></h3><div><br></div><h2><b>जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव</b></h2><div>कर्नाटक की यह घटना एक याद दिलाती है कि HIV से लड़ने का सबसे असरदार तरीका डर नहीं, बल्कि सही जानकारी है। युवाओं तक वैज्ञानिक और भरोसेमंद जानकारी पहुंचाना, समय-समय पर जांच कराना और सुरक्षित व्यवहार अपनाना ही इस संक्रमण को रोकने की दिशा में सबसे मजबूत कदम है।</div>]]></description>
      <pubDate>Thu, 30 Jul 2026 15:31:23 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/7000-karnataka-students-hiv-positive-why-sex-education-is-now-crucial</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Testicular Cancer: 15 से 40 की उम्र के पुरुषों के लिए Warning Signs, शरीर के ये 8 बदलाव न करें इग्नोर]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/warning-signs-for-men-aged-15-to-40-not-ignore-these-8-body-changes]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>कैंसर का नाम सुनते ही हम परेशान हो उठते हैं। लेकिन अगर शरीर में होने वाले हर अच्छे बुरे बदलाव पर ध्यान दिया जाए, तो किसी भी गंभीर बीमारी का आसानी से पता लगाया जा सकता है। ऐसी ही एक बीमारी टेस्टिकुलर कैंसर है। यह कैंसर 15 से 40 साल के आयु वाले पुरुषों में सबसे ज्यादा आम कैंसरों में से एक है। लेकिन अच्छी बात यह है कि अगर शुरूआती स्टेज में ही इस बीमारी का पता चल जाए, तो इससे छुटकारा भी मिल सकता है।</div><div><br></div><div>टेस्टिकुलर कैंसर के शुरूआती लक्षण बेहद सामान्य होते हैं। जैसे टेस्टिकुलर में सूजन या लम्प, स्क्रोटम में भारीपन महसूस होना या लोअर बैक में दर्द महसूस होना आदि है। युवा पुरुषों को टेस्टिकुलर कैंसर के लक्षणों को समझना जरूरी है। आसान भाषा में समझा जाए, तो टेस्टिकल्स में बनने वाले ट्यूमर या गांठ को टेस्टिकुलर कैंसर कहा जाता है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/health/high-blood-pressure-becoming-silent-killer-these-lifestyle-changes-have-an-effect" target="_blank">Silent Killer है High BP, साइलेंट किलर बन रहा है उच्च रक्तचाप, ये Lifestyle Changes करेंगे असर</a></h3><div><br></div><h2>जानें टेस्टिकुलर कैंसर के वार्निंग साइन</h2><div>टेस्टिकुलर कैंसर अन्य कैंसर की तुलना में धीरे-धीरे बढ़ता है। इसलिए कई बार लोग इसके लक्षणों को इग्नोर कर देते हैं। तो आइए जानते हैं टेस्टिकुलर कैंसर के लक्षण क्या हैं, जिनको समझकर आप इस गंभीर बीमारी से छुटकारा पा सकते हैं।</div><div><br></div><h2>टेस्टिकल्स में सूजन</h2><div>टेस्टिकल्स में सूजन या फिर लम्प की समस्या शुरू हो सकती है। यह सबसे बड़ा संकेत होता है कि एक अंडकोष में बिना दर्द की गांठ या फिर सूजन होना है। क्योंकि हर गांठ कैंसर नहीं होती है। लेकिन फिर भी असामान्य बदलाव की जांच करवानी चाहिए। वहीं कुछ पुरुषों को महसूस हो सकता है कि अंडकोष सामान्य से भारी, बड़ा या ज्यादा सख्त है।</div><div><br></div><h2>टेस्टिकल्स में बदलाव</h2><div>अगर आपको टेस्टिकल्स के साइज या शेप में अचानक कुछ बदलाव महसूस हो, तो आपको डॉक्टर से साथ इस बदलाव को शेयर करना चाहिए।</div><div><br></div><h2>स्क्रोटम में भारीपन</h2><div>स्क्रोटम में बिना लम्प या गांठ के भी भारीपन महसूस हो सकता है। इसलिए अगर आपको भी भारीपन महसूस हो रहा है। तो इसको इग्नोर करने की गलती नहीं करनी चाहिए।</div><div><br></div><h2>कमर या पेट के निचले हिस्से में दर्द</h2><div>टेस्टिकुलर कैंसर के लक्षणों में पेट के निचले हिस्से में दर्द, अंडकोश में हल्का दर्द, जांघों के जोड़ या बेचैनी आदि महसूस हो सकती है। अंडोकोष में लगातार दर्द या भारीपन महसूस होना आदि लक्षणों को इग्नोर नहीं करना चाहिए। कुछ मामलों में अंडकोष को आसपास तरल पदार्थ जमा हो जाता है, जिस कारण भी सूजन हो सकती है।</div><div><br></div><h2>स्क्रोटम में दर्द</h2><div>अधिकतर मामलों में कैंसर की गांठ में दर्द नहीं होता है। हालांकि कुछ मामलों में स्क्रोटम में जलन या फिर दर्द जैसी समस्या हो सकती है। ऐसे में अगर आपको दो सप्ताह से अधिक दर्द रहता है, तो आपको डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।</div><div><br></div><h2>स्क्रोटम में तरल पदार्थ</h2><div>टेस्टिकुलर कैंसर के लक्षणों में स्क्रोटम में तरल पदार्थ का जमा होना भी है। स्क्रोटम में तरल पदार्थ की वजह से सूजन की समस्या हो सकती है।</div><div><br></div><h2>लोअर बैक में दर्द</h2><div>अगर लोअर बैक में दर्द महसूस हो रहा है। तो बता दें कि कई बार टेस्टिकुलर कैंसर के लक्षणों में बिना कारण थकान, पीठ दर्द, वेट कम होना या फिर सांस लेने में तकलीफ होना जैसी समस्या हो सकती है।</div><div><br></div><h2>ब्रेस्ट में सूजन होना</h2><div>टेस्टिकुलर ट्यूमर ऐसा हॉर्मोन सीक्रेट कर सकता है, जिसकी वजह से मेल ब्रेस्ट में पेन, सूजन या ब्रेस्ट सॉफ्ट महसूस हो सकते हैं। कैंसर एक्सपर्ट की मानें तो युवा पुरुषों को इसके बारे में जागरुक किया जाना चाहिए कि सामान्य रूप से उनके अंडकोष कैसे दिखते हैं। इससे हर महीने खुद से जांच करने से बदलावों को पता जल्दी चल सकता है। सूजन, गांठ या आकार में बदलाव होने पर फौरन डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।</div><div><br></div><h2>किन लोगों को अधिक खतरा</h2><div>15 से 40 साल के पुरुषों में इस बीमारी का अधिक खतरा होता है।</div><div>अगर परिवार में पहले किसी को कैंसर हुआ हो।</div><div>पिता या भाई को पहले टेस्टिकुलर कैंसर हुआ हो।</div><div>व्यक्ति को पहले कभी टेस्टिकुलर कैंसर हुआ हो।</div><div>इनफर्टिलिटी या फिर टेस्टिकुलर एब्नॉर्मल्टिज की समस्या।</div><div>एन्वॉयरमेंट या लाइफस्टाइल की वजह से भी टेस्टिकुलर कैंसर का जोखिम रहता है।</div><div><br></div><div>बता दें कि युवा पुरुष सबसे ज्यादा टेस्टिकुलर कैंसर से प्रभावित होते हैं। इसलिए यह याद रखना जरूरी होता है कि शुरूआती स्टेज में हमेशा टेस्टिकुलर कैंसर दर्दनाक नहीं होता है। किसी भी तरह का असामान्य लक्षण दिखने पर डॉक्टर की सलाह लें। इससे बीमारी का जल्दी पता चलता है और इलाज में आसानी हो सकती है। टेस्टिकुलर कैंसर से लड़ने के लिए जागरुकता के साथ-साथ समय पर कदम उठाना जरूरी है।</div>]]></description>
      <pubDate>Thu, 30 Jul 2026 13:24:22 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/warning-signs-for-men-aged-15-to-40-not-ignore-these-8-body-changes</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Silent Killer है High BP, साइलेंट किलर बन रहा है उच्च रक्तचाप, ये Lifestyle Changes करेंगे असर]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/high-blood-pressure-becoming-silent-killer-these-lifestyle-changes-have-an-effect]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>आजकल युवा लोगों में भी बीपी और शुगर की दिक्कतें देखने को मिलती हैं। तनाव से भरी लाइफस्टाइल में हाइपरटेंशन यानी हाई ब्लड प्रेशऱ काफी आम हो गया है। इसके पीछे तनाव, तला-भुना खाना, ज्यादा नमक का सेवन, फिजिकल एक्टिविटी की कमी या मोटापा जैसी समस्याएं हो सकती हैं। आजकल हाई बीपी आम हो गया है। इसके शुरूआती लक्षण भी नजर नहीं आते हैं। लंबे समय तक बीपी का हाई या लो रहने का असर शरीर के कई अंगों पर देखने को मिलता है।</div><div><br></div><div>ऐसे में ब्लड प्रेशर को नॉर्मल रेंज में रखना जरूरी है। अगर आपका बीपी भी हाई रहता है, तो आपको दवाओं के साथ-साथ डाइट और लाइफस्टाइल में भी कुछ बदलाव करना चाहिए। इससे आपका ब्लड प्रेशर कंट्रोल हो सकता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि ब्लड प्रेशऱ कंट्रोल में करने के लिए लाइफस्टाइल में क्या-क्या बदलाव करने चाहिए।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/health/ayurvedic-analysis-why-satvic-food-is-essential-in-sawan" target="_blank">Sawan 2026 में क्यों जरूरी है Satvic Diet? आयुर्वेद ने बताया कमजोर Digestive System का पूरा विज्ञान</a></h3><div><br></div><h2>लाइफस्टाइल में करें ये बदलाव</h2><div>हेल्थ एक्सपर्ट की मानें, तो ब्लड प्रेशर को मैनेज करने के लिए जितना जरूरी दवाएं लेना है। उतना ही जरूरी लाइफस्टाइल और डाइट में बदलाव भी है। आप डॉक्टर की सलाह पर नियमित दवाई लें, लेकिन साथ ही कुछ अन्य बातों का भी ध्यान रखें।</div><div><br></div><div>आपको बैलेंस डाइट लेनी है। दिन में 5 से 6 ग्राम से ज्यादा नमक का सेवन न करें। सब्जियां, फल, लीन मीट्स, साबुत अनाज और डैश डाइट का पैटर्न फॉलो करना चाहिए। वहीं प्रोसेस्ड फूड्स या ज्यादा तले-भुने खाने से दूर रहें।</div><div><br></div><div>ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने के लिए डाइट के साथ-साथ एक्सरसाइज भी अहम भूमिका निभाता है। आप ब्रिस्क वॉकिंग, साइकिलिंग और कार्डियोवैस्कुलर एक्टिविटीज जरूर करें। वहीं सप्ताह में 2 बार एक्सरसाइज जरूर करें।</div><div><br></div><div>अगर आपका वेट बढ़ा हुआ है, तो इसको कम करने पर फोकस करें। क्योंकि मोटापा कम करने से ब्लड प्रेशर कम करने में मदद मिलेगी।</div><div><br></div><div>अगर आप एल्कोहल या फिर कैफीन का सेवन करते हैं। तो इसको फौरन बंद कर दें। क्योंकि इसका बीपी और हार्ट हेल्थ समेत पूरे शरीर पर बुरा असर होता है।</div><div><br></div><div>ब्लड प्रेशर बढ़ने के पीछ तनाव भी मुख्य कारण होता है। लंबे समय तक होने वाले तनाव को हल्के में नहीं लें। यह आपकी मेंटल और फिजिकल हेल्थ पर बुरा असर डाल सकता है। तनाव कम करने के लिए आप डीप ब्रीदिंग एक्सरसाइज, माइंडफुलनेस और पूरी नींद लेना चाहिए।</div><div><br></div><div>इसके अलावा बीपी को रेगुलर मॉनिटर करें। जिन लोगों को हाई ब्लड प्रेशर या लो बीपी की समस्या है, तो उनको सप्ताह में कम से कम एक बार बीपी जरूर चेक करना चाहिए।&nbsp;</div>]]></description>
      <pubDate>Wed, 29 Jul 2026 14:05:31 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/high-blood-pressure-becoming-silent-killer-these-lifestyle-changes-have-an-effect</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Sawan 2026 में क्यों जरूरी है Satvic Diet? आयुर्वेद ने बताया कमजोर Digestive System का पूरा विज्ञान]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/ayurvedic-analysis-why-satvic-food-is-essential-in-sawan]]></guid>
      <description><![CDATA[<div><span style="font-size: 1rem;">हर साल जुलाई और अगस्त के महीनों में पड़ने वाला सावन का महीना न सिर्फ आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष है, बल्कि यह आयुर्वेद के लिहाज से भी जुड़ा हुआ है। कल यानी 30 जुलाई को सावन का महीना शुरु होने जा रहा है। इस दौरान हल्का और सात्विक भोजन करने की परंपरा न केवल एक धार्मिक नियम नहीं, बल्कि मानसून के मौसम में शरीर को हेल्दी रखने का एक तरीका है। इसलिए सावन के महीने में खाने-पीने का विशेष ध्यान रखा जाता है। आइए आपको बताते हैं हल्का खान-पान क्यों जरुरी माना जाता है?</span></div><div><br></div><div><b>सावन में पाचन अग्नि कमजोर हो जाती है</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">आयुर्वेद के अनुसार, सावन का महीना वर्षा ऋतु के दौरान आता है। इस समय वातावरण में काफी नमी होती है, जिससे तापमान में काफी बदलाव आता है, जिसका असर सीधे हमारी पाचन क्रिया पर पड़ता है।</span></div><div><br></div><div><b>अग्नि का मंद होना</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">मानसून के समय शरीर का डाइजेस्टिव फायर स्वाभाविक रुप से धीमी हो जाती है, जिससे भारी भोजन पचने में काफी समय लेता है।</span></div><div><br></div><div><b>त्रिदोष का असंतुलन</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">इस दौरान वायु और पित्त दोष में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है। इस कारण से गैस, एसिडिटी, पेट फूलना और अपच जैसी समस्याएं बढ़ जाती है।</span></div><div><br></div><div><b>सात्विक आहार में क्या खाएं और क्या नहीं?</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">आयुर्वेद में बताया है कि सावन के दौरान सात्विक आहार लें। जिससे शरीर को ऊर्जा देने के साथ ही पाचन तंत्र भी मजबूत बना रहे है।</span></div><div><br></div><div><b>क्या खाएं?&nbsp;</b></div><div>- सावन के महीने में आप ताजे फल, लौकी/तोरई, मूंग दाल, गाय का घी, नारियल पानी इन सभी चीजों का सेवन करें।</div><div><br></div><div>&nbsp;- आप हर्बल टी, उबली सब्जियां, सादे अनाज (कुट्टू/सामक चावल) का सेवन कर सकते हैं।</div><div><br></div><div><b>किन चीजों से बचें?</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">- इस दौरान तला-भुना, बासी खाना, प्रिजर्वेटिव्स खाने से दूरी बनाएं।</span></div><div><br></div><div>&nbsp;- सावन में मांसाहार, शराब, लहसुन, प्याज और तेज मिर्च-मसाले का सेवन न करें।</div><div><br></div><div><b>&nbsp;सात्विक खान-पान के फायदे</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">इस महीने में हल्का और सात्विक भोजन करने से पेट को ही दुरुस्त नहीं रखता, बल्कि मन और दिमाग भी शांत रहता है।&nbsp;</span></div><div><br></div><div><b>- आलस और सुस्ती दूर:</b> हल्का खाना खाने से आलस और सुस्ती दूर होती है और व्यक्ति पूरे दिन ऊर्जावन बना रहता है।</div><div><br></div><div>&nbsp;<b>- इम्यूनिटी में सुधार: </b>असल में बरसात के समय संक्रमण का खतरा अधिक रहता है। ऐसे भोजन के सेवन से इम्यूनिटी मजबूत रहती है।</div><div><br></div><div><b>- आध्यात्मिक जुड़ाव:</b> शांत और संतुलित मन ध्यान, पूजा-पाठ और भक्ति में अधिक एकाग्र होता है।&nbsp;</div><div><span style="font-size: 1rem;">&nbsp;</span></div><div><span style="font-size: 1rem;">गौरतलब है कि सावन में हल्का और सात्विक भोजन अपनाना प्राकृतिक डिटॉक्स प्रक्रिया का हिस्सा है। इस सावन भारी और मसालेदार भोजन से परहेज करें और सात्विक खाना अपनाकर खुद को हेल्दी रखें।&nbsp;</span></div>]]></description>
      <pubDate>Wed, 29 Jul 2026 10:44:38 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/ayurvedic-analysis-why-satvic-food-is-essential-in-sawan</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Sawan Health Guide: एक्सपर्ट ने बताया Ayurveda के अनुसार सावन में क्यों जरूरी है Fasting?]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/health-guide-why-fasting-is-important-during-sawan-according-to-ayurveda]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>सावन का महीना आते ही लोग भगवान शिव की पूजा, व्रत और जलाभिषेक में जुट जाते हैं। लेकिन आयुर्वेद कहता है कि सावन सिर्फ धार्मिक आस्था का महीना नहीं है। यह अपने शरीर और मन का ख्याल रखने का भी सही समय होता है। इस मौसम में अगर खान-पान और दिनचर्या पर ध्यान दिया जाए, तो कई स्वास्थ्य समस्याओं से बचा जा सकता है।</div><div><br></div><div>आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. दीक्षा भावसार सावलिया, जो थायरॉइड, हार्मोन और फर्टिलिटी की विशेषज्ञ हैं, ने बताया कि सावन हमें अपनी भागदौड़ भरी जिंदगी को थोड़ा धीमा करने, शरीर को आराम देने और मन को शांत रखने का संदेश देता है। उनके मुताबिक, यह महीना सिर्फ पूजा-पाठ करने का नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ तालमेल बनाकर स्वस्थ जीवन जीने का भी समय है।</div><div><br></div><h2><b>सावन में शरीर में क्या बदलाव होते हैं?</b></h2><div>आयुर्वेद के अनुसार सावन का महीना वर्षा ऋतु में आता है। इस मौसम में हमारी पाचन शक्ति पहले की तुलना में कमजोर हो जाती है। शरीर में सुस्ती और भारीपन महसूस हो सकता है। साथ ही वात दोष बढ़ने लगता है और मन भी पहले से ज्यादा संवेदनशील हो जाता है। डॉ. दीक्षा ने कहा कि हमारे पूर्वजों ने हमेशा मौसम के अनुसार अपनी दिनचर्या और खान-पान बदला। सावन भी ऐसा ही समय है, जब हमें प्रकृति के साथ तालमेल बिठाकर चलना चाहिए।</div><div>&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/health/effective-home-remedies-for-monsoon-sore-throat-relief" target="_blank">गला बैठने और Sore Throat की समस्या से हैं परेशान? अपनाएं ये 5 Home Remedies, मिलेगी जादुई राहत</a></h3><div><br></div><h2><b>सावन में व्रत रखने का असली मतलब क्या है?</b></h2><div>ज्यादातर लोग व्रत का मतलब सिर्फ खाना छोड़ देना समझते हैं। लेकिन आयुर्वेद के अनुसार व्रत का उद्देश्य शरीर को भूखा रखना नहीं, बल्कि उसे आराम देना है। डॉ. दीक्षा ने बताया कि व्रत रखने से पाचन तंत्र को आराम मिलता है। इससे शरीर को भोजन पचाने के लिए कम मेहनत करनी पड़ती है। साथ ही मन शांत रहता है, आत्मसंयम बढ़ता है और खाने की गलत आदतों पर भी नियंत्रण आता है। जब शरीर हल्का महसूस करता है, तो मन भी ज्यादा शांत और एकाग्र रहता है।</div><div><br></div><h2><b>सावन में भगवान शिव की पूजा क्यों की जाती है?</b></h2><div>डॉ. दीक्षा के अनुसार, भगवान शिव सिर्फ एक देवता नहीं, बल्कि जीवन जीने का एक संदेश भी हैं। शिव हमें शांत रहना, धैर्य रखना, कम बोलना, खुद को समझना और जीवन में बदलाव स्वीकार करना सिखाते हैं। सावन का महीना हमें इन गुणों को अपने जीवन में अपनाने की प्रेरणा देता है। इसलिए इस महीने का महत्व सिर्फ पूजा तक सीमित नहीं है।</div><div><br></div><h2><b>सावन की परंपराओं के पीछे छिपे हैं सेहत के राज</b></h2><div>डॉ. दीक्षा ने बताया कि सावन में निभाई जाने वाली कई परंपराओं का सीधा संबंध हमारी सेहत से भी है। दीपक जलाने से मन शांत होता है और ध्यान एक जगह लगता है। मंत्रों का जाप करने से सांसों की गति संतुलित होती है, जिससे तनाव कम करने में मदद मिल सकती है। सात्विक और हल्का भोजन करने से पाचन तंत्र बेहतर रहता है और मन भी साफ और शांत महसूस करता है। वहीं सादगी भरी जीवनशैली अपनाने से मानसिक तनाव और अनावश्यक भागदौड़ कम होती है।</div><div><br></div><h2><b>सावन सिर्फ शरीर नहीं, मन को भी साफ करने का समय है</b></h2><div>आयुर्वेद के अनुसार डिटॉक्स का मतलब केवल शरीर की सफाई नहीं होता। यह मन और व्यवहार को भी बेहतर बनाने का समय है। डॉ. दीक्षा सलाह देती हैं कि सावन के दौरान नकारात्मक सोच से दूर रहने की कोशिश करें। गुस्से पर काबू रखें, ईर्ष्या और द्वेष जैसी भावनाओं को कम करें और दूसरों से प्यार और सम्मान के साथ बात करें। उनका मानना है कि स्वस्थ शरीर के साथ शांत मन भी उतना ही जरूरी है।</div><div>&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/health/monsoon-eye-flu-surge-causes-and-prevention-tips" target="_blank">Eye Flu Cases rising: देशभर में संक्रामक आई फ्लू का तांडव, डॉक्टर्स से जानें Symptoms और जरूरी सावधानी</a></h3><div><br></div><h2><b>सावन में अपनाएं ये आसान आदतें</b></h2><div>डॉ. दीक्षा के अनुसार, सावन में कुछ छोटी-छोटी अच्छी आदतें अपनाकर लंबे समय तक स्वस्थ रहा जा सकता है। खाना हमेशा आभार के साथ खाएं। सुबह थोड़ा जल्दी उठें। रोज कुछ मिनट शांति से बैठें। अच्छी और प्रेरणादायक किताबें पढ़ें। दूसरों के प्रति दया और करुणा का भाव रखें। पूजा केवल एक रस्म की तरह नहीं, बल्कि पूरे मन और श्रद्धा के साथ करें।</div><div><br></div><h2><b>सिर्फ पूजा नहीं, जीवनशैली भी बदलें</b></h2><div>डॉ. दीक्षा भावसार सावलिया ने कहा कि अगर सावन में सिर्फ पूजा करने के बजाय खान-पान, दिनचर्या और मानसिक संतुलन पर भी ध्यान दिया जाए, तो यह महीना शरीर और मन दोनों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। उनका मानना है कि जब अध्यात्म और आयुर्वेद साथ चलते हैं, तब हर अच्छी आदत धीरे-धीरे हमारे शरीर और मन को स्वस्थ बनाने का काम करती है। इसलिए इस सावन सिर्फ पूजा-पाठ ही नहीं, बल्कि अपनी जीवनशैली में भी छोटे-छोटे सकारात्मक बदलाव जरूर करें।</div>]]></description>
      <pubDate>Tue, 28 Jul 2026 17:26:47 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/health-guide-why-fasting-is-important-during-sawan-according-to-ayurveda</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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      <title><![CDATA[गला बैठने और Sore Throat की समस्या से हैं परेशान? अपनाएं ये 5 Home Remedies, मिलेगी जादुई राहत]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/effective-home-remedies-for-monsoon-sore-throat-relief]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>बरसात के मौसम में गर्मी से राहत मिलती है, लेकिन यह अपने साथ ठंडी हवाएं, नमी और वायरल संक्रमण लेकर आता है। इस मौसम में कई लोगों के गले में खराश, दर्द और आवाज बैठने पर जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। बरसात के समय ठंडा पानी पीना, बारिश में भीगना, अधिक बोलना और वायरल संक्रमण के कारण गला बैठ जाता है। इस समस्या से बचने के लिए कई बार लोगों दवाई का सहारा लेते है। लेकिन आप कुछ घरेलू उपाय के जरिए गले के दर्द में राहत पा सकते हैं। चलिए आपको बताते हैं कुछ ऐसे घरेलू नुस्खों के बारे में, जो आपको काफी रिलीफ देगा।</div><div><b style="font-size: 1rem;">&nbsp;</b></div><div><b style="font-size: 1rem;">अपनाएं ये 5 घरेलू नुस्खे</b></div><div><b style="font-size: 1rem;">गुनगुने नमक के पानी से गरारे करें</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">अगर आप गले की खराश और सूजन से परेशान हैं, तो आप गुनगुने पानी में आधा चम्मच नमक मिलाकर दिन में 2-3 बार गरारे कर सकते हैं। ऐसा करने से गले में मौजूद बैक्टीरिया कम हो सकते हैं और दर्द में राहत मिल सकती है।</span></div><div><br></div><div><b>शहद और अदरक का सेवन करें</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">अदरक में नेचुरल रुप से सूजनरोधी गुण होते हैं, जो कि शहद गले को आराम पहुंचाने में मदद करता है। एक चम्मच शहद में थोड़ा अदरक का रस मिलाकर दिन में 2-3 बार जरुर लें। भूलकर भी शिशुओं को न दें।</span></div><div><br></div><div><b>&nbsp;तुलसी और अदरक की हर्बल चाय पिएं</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">गले के दर्द को ठीक करने के लिए तुलसी, अदरक और काली मिर्च से बनीं हर्बल चाय पीना चाहिए, इससे गले को काफी आराम मिलता है। इसमें थोड़ा शहद मिलाकर पीने से आपको काफी राहत मिलेगी।</span></div><div><br></div><div><b>भाप लें</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">गर्म पानी की भाप लेने से गले और श्वसन मार्ग में नमी बनी रहती है। इससे गले का सूखापन और जलन कम हो सकती है। जब आप भाप लें, तो उस समय थोड़ी सावधानी बरतें, जिससे गर्म पानी से जलने का खतरा न हो।</span></div><div><br></div><div><b>पर्याप्त पानी पिएं और आवाज को आराम दें</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">खासतौर पर गला बैठा हो, तो शरीर को हाइड्रेट रखना भी बेहद जरुरी है। गुनगुना पानी, सूप और हर्बल ड्रिंक पिएं। इसके साथ ही कुछ समय तक कम बोलें, क्योंकि लगातार बोलने से वोकल कॉर्ड्स पर काफी दबाव बढ़ सकता है।</span></div><div><br></div><div><b>गला बैठने पर किन चीजों से बचें?</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">- बहुत ठंडे पेय और आइसक्रीम।</span></div><div><br></div><div>&nbsp;- भूलकर भी धूम्रपान और तंबाकू का सेवन न करें।</div><div><br></div><div>&nbsp;- तेज मसालेदार और तला-भुना भोजन न करें।</div><div><br></div><div>&nbsp;- बहुत ज्यादा चाय, कॉफी या कैफीन वाले पेय न पिएं।</div><div><br></div><div>&nbsp;- तेज आवाज में न बोलें।</div><div>&nbsp;</div><div><b>कब डॉक्टर से मिलें?</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">- जब आपके गले की परेशानी 5-7 दिन से अधिक बनी रहे।</span></div><div><br></div><div>&nbsp;- तेज बुखार हो।</div><div><br></div><div>&nbsp;- अगर आपको सांस लेने में तकलीफ हो रही है।</div><div><br></div><div>&nbsp;- निगलने में अत्यधिक दर्द हो।</div><div><br></div><div>&nbsp;- गले में सफेद धब्बे दिखाई दें।</div><div><br></div><div>&nbsp;- आवाज में 2 सप्ताह से अधिक समय बैठी रहे।&nbsp;</div>]]></description>
      <pubDate>Tue, 28 Jul 2026 17:21:08 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/effective-home-remedies-for-monsoon-sore-throat-relief</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Eye Flu Cases rising: देशभर में संक्रामक आई फ्लू का तांडव, डॉक्टर्स से जानें Symptoms और जरूरी सावधानी]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/monsoon-eye-flu-surge-causes-and-prevention-tips]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>इस समय मानसून का सीजन चल रहा है। बरसात गर्मी से राहत प्रदान करती है, लेकिन इन दिनों कई तरह की बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। मानसून के समय मच्छरों का आंतक चर्म पर होता है, जिससे होने वाली बीमरी जैसे डेंगू-मलेरिया का जोखिम बढ़ जाता है।&nbsp;</div><div><span style="font-size: 1rem;">इतना ही नहीं, कई तरह के अन्य संक्रामक रोगों का खतरा भी देखने को मिलता है। दरअसल, कंजंक्टिवाइटिस यानी के आई फ्लू की समस्या भी बरसात में काफी देखने को मिलती है। नमी से भरा वातावरण, वायरस, और बैक्टीरिया सबसे ज्यादा एक्टिव रहते हैं।</span></div><div>&nbsp;</div><div>&nbsp;खासतौर पर कंजंक्टिवाइटिस आंख की बाहरी पारदर्शी झिल्ली में होने वाली सूजन की समस्या है। जिसके कारण आंखें लाल हो जाती हैं और उनमें जलन, खुजली, पानी आने और चिपचिपा पदार्थ निकलने जैसी समस्याएं देखने को मिलती हैं। वैसे यह कंजंक्टिवाइटिस एक संक्रामक बीमारी है, जो सिर्फ एक से दूसरे व्यक्ति में होने का खतरा भी अधिक बढ़ाती है। आइए आपको बताते हैं कैसे इसका बचाव किया जाता है।&nbsp;</div><div><br></div><div><b>कंजंक्टिवाइटिस के मामले</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक, लोग अक्सर आंख लाल होने पर डॉक्टर के पास नहीं जाते, बल्कि मेडिकल स्टोर से स्टेरॉयड आई ड्रॉप्स लेकर आते हैं, जिससे बार-बार नकुसान होने लगता है। इसलिए आई फ्लू का खतरा अधिक बढ़ जाता है। वायरल और बैक्टीरियल कंजंक्टिवाइटिस संक्रमित आंखों से निकलने वाला पदार्थ, तौलिया, रूमाल या दूषित हाथों के संपर्क से फैल सकता है। ऐसे में आंखों का ध्यान रखना जरुरी है।</span></div><div><br></div><div>- ऑफिस, स्कूल और पब्लिक परिवहन जैसी जगहों पर संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से संक्रमण तेजी से फैलती है।</div><div><br></div><div>&nbsp;- अगर आप गंदे हाथों से आंखें छूते हैं, दूषित तौलिया का इस्तेमाल करना और साफ-सफाई का ध्यान न रखना भी संक्रमण का खतरा बढ़ा देता है।</div><div><br></div><div><b>कैसे करें इस समस्या की पहचान?&nbsp;</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">- कंजंक्टिवाइटिस होने से आंखें लाल हो जाती हैं और लगातार पानी आता है। संक्रमण के कारण जलन और खुजली भी महसूस होती है।</span></div><div><br></div><div>&nbsp;- ऐसे में कुछ लोगों को आंखों की सफेद, पीला स्राव भी निकलता है, जो कि सुबह उठने पर पलकें पर चिपक जाता है।</div><div><br></div><div>&nbsp;- आंखों की समस्या के कारण तेज रोशनी में परेशानी होती है और आंखों में हल्की सूजन बनीं रहती है।</div><div><br></div><div><b>डॉक्टर क्या कहते हैं?</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">- हेल्थ एक्सपर्ट के अनुसार, आई फ्लू के दौरान आंखों को रगड़ें न, ऐसा करने से संक्रमण बढ़ जाता है।</span></div><div><br></div><div>&nbsp;- किसी और का तौलिया, तकिया, रूमाल या मेकअप का सामान इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।</div><div><br></div><div>&nbsp;- कॉन्टैक्ट लेंस पहनने वालों को संक्रमण ठीक होने तक लेंस का प्रयोग करना बंद कर दें।</div><div><br></div><div>&nbsp;- डॉक्टर के सलाह के बिना किसी भी तरह की आई ड्रॉप्स का इस्तेमाल न करें। क्योंकि इससे कुछ संक्रमण गंभीर हो सकते हैं।</div><div><br></div><div>- घर पर पुराने रखें हुए आई ड्रॉप्स का यूज न करें।</div><div><br></div><div><span style="font-size: 1rem;"><b>आंखों के संक्रमण से कैसे करें बचाव?</b></span></div><div><br></div><div>- आंखों बार-बार बिना जरुरत के हाथ न लगाएं। अपनी तौलिया, रुमाल, तकिया और कॉस्मेटिक उत्पाद किसी के साथ शेयर न करें।</div><div><br></div><div>&nbsp;- कॉन्टैक्ट लेंस की साफ-सफाई करते रहे हैं।</div><div><br></div><div>&nbsp;- अगर आपके आसपास किसी को आई फ्लू है, तो निकट संपर्क से बचें।</div><div><br></div><div>&nbsp;- अगर आंखों में तेज दर्द, रोशनी से ज्यादा परेशानी हो रही है, तो आंखों से बहुत अधिक गाढ़ा पदार्थ निकाल रहा है, तो तुरंत ही नेत्र रोग डॉक्टर को दिखाएं।</div>]]></description>
      <pubDate>Tue, 28 Jul 2026 14:30:07 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/monsoon-eye-flu-surge-causes-and-prevention-tips</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
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      <title><![CDATA[Health Tips: हिप्स और थाइज के Stubborn Fat से चाहिए छुटकारा? एक्सपर्ट के ये 2 आसान तरीके करेंगे कमाल]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/want-to-get-rid-of-stubborn-fat-in-hips-and-thighs-these-easy-methods-from-experts-do-trick]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>अगर आपके हिप्स और थाइज पर जिद्दी फैट जमा हो गया है। वहीं यह फैट हटाने के लिए आप कई तरीके अपनाकर थक चुकी हैं। तो आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है। क्योंकि सही डाइट और एक्सरसाइज से धीरे-धीरे इस जिद्दी फैट को कम किया जा सकता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको 2 ऐसे आसान तरीकों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनको फॉलो करने से आप हिप्स और थाइज का जिद्दी फैट आसानी से कम कर सकती हैं।</div><div><br></div><h2>डाइट में शामिल करें फैट कम करने वाली चीजें</h2><div>अगर आप नीचे बताई गई चीजों को अपनी डाइट में शामिल करती हैं, तो इससे मेटाबॉलिज्म अच्छा होता है, फैट बर्निंग प्रोसेस को सपोर्ट मिलता है और भूख कंट्रोल रहती है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/health/drinking-less-water-increase-cortisol-levels-and-disrupt-entire-math-of-period" target="_blank">Women Health: कम पानी पीने से बढ़ सकता है Cortisol Level, बिगड़ जाएगा पीरियड्स का पूरा गणित</a></h3><div><br></div><div>ब्रोकली में फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। फाइबर पेट को लंबे समय तक भरा महसूस करता है। जिससे आप ओवरईटिंग से बच जाते हैं। वहीं ब्रोकली में मौजूद सल्फोराफेन शरीर में फैट स्टोरेज को कंट्रोल करता है।</div><div><br></div><div>फूलगोभी में फाइबर ज्यादा और कैलोरी की मात्रा कम होती है। इसलिए वेट लॉस में यह भी मददगार होता है। यह पेट को जल्दी भरता है, जिस कारण आपको बार-बार भूख नहीं लगती है।</div><div><br></div><div>अलसी के बीज में ओमेगा 3 फैटी एसिड और घुलनशील फाइबर पाया जाता है। यह पाचन को स्लो करके पेट को लंबे समय तक भरा महसूस कराता है। इससे क्रेविंग्स कम होती है।</div><div><br></div><div>मूंग दाल में प्रोटीन और फाइबर भरपूर मात्रा में होता है। यह इसको खाने से मसल्स को सपोर्ट मिलता है और मेटाबॉलिज्म एक्टिव रहता है। इसके सेवन से लंबे समय तक एनर्जी बनी रहती है।</div><div><br></div><div>ओट्स में बीटा-ग्लूकन नामक फाइबर पाया जाता है। जोकि ब्लड शुगर को धीरे बढ़ने देता है। इससे अचानक भूख लगने और जंक फूड की क्रेविंग कम हो सकती है।</div><div><br></div><div>ग्रीन टी में कैफीन और कैटेचिंस पाया जाता है। जो बॉडी की कैलोरी बर्न की क्षमता को बढ़ाता है। इसके अलावा यह फैट ऑक्सिडेशन को भी सपोर्ट करता है।</div><div><br></div><div>स्ट्रॉबेरी, ब्लूबेरी जैसी बेरीज में फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट भरपूर होता है। यह मीठा खाने की क्रेविंग्स को हेल्दी तरीके से कंट्रोल करती है।</div><div><br></div><div>लहसुन में एलिसिन नामक कंपाउंड होता है। यह मेटाबॉलिज्म को सपोर्ट करता है और सूजन को कम करता है। इसके साथ ही लहसुन पाचन को भी बेहतर करता है।</div><div><br></div><h2>करें ये एक्सरसाइज</h2><div>हिप्स और जांघों की एक्स्ट्रा चर्बी को कम करने और लोअर बॉडी को टोन करने के लिए आप नीचे बताई गई एक्सरसाइज कर सकती हैं। रोजाना अभ्यास करने से मसल्स मजबूत होती हैं, स्टैमिना बढ़ता है और बॉडी शेप बेहतर दिखता है।</div><div><br></div><h2>सूमो स्क्वाट्स</h2><div>सूमो स्क्वाट्स करने के लिए पैरों को कंधों से थोड़ा ज्यादा चौड़ा रखें।</div><div>अब पंजों को हल्का सा बाहर की ओर मोड़ें।</div><div>फिर दोनों हाथों को बाहर की तरफ रखें।</div><div>अब धीरे-धीरे घुटनों को मोड़कर नीचे बैठें, जैसे चेयर पर बैठा जाता है।</div><div>ध्यान रहे कि इस दौरान आपकी पीठ सीधी हो।</div><div>फिर धीरे-धीरे ऊपर उठें।</div><div>इसको 3 सेट × 15 रेप्स में करें।</div><div>सूमो स्क्वाट्स हिप्स, इनर थाइज और ग्लूट्स को टोन करती है।</div><div><br></div><h2>लेग एक्सटेंशन</h2><div>इसको करने के लिए एक चेयर पर सीधा बैठ जाएं।</div><div>अब पैरों को आगे की तरफ धीरे-धीरे सीधा करें।</div><div>इसको कुछ सेकेंड के लिए रोकें और फिर नीचे लाएं।</div><div>ध्यान रहे कि एक्सरसाइज करते समय झटके न दें।</div><div>इसको 3 सेट × 15 रेप्स में करें।</div><div>यह एक्सरसाइज जाघों की मसल्स को मजबूत करने के साथ पैरों के शेप सुधारने में मदद करती है।</div><div><br></div><h2>स्टेप अप</h2><div>इस एक्सरसाइज के लिए किसी मजबूत बेंच, सीढ़ी या स्टेप के सामने खड़े हों।</div><div>अब दाएं पैर को स्टेप पर रखकर शरीर को ऊपर उठाएं।</div><div>फिर धीरे-धीरे नीचे आएं।</div><div>अब सेम यही प्रोसेस दूसरे पैर से दोहराएं।</div><div>दोनों पैर से 3 सेट × 15 रेप्स में करें।</div><div><br></div><h2>डोंकी किक्स</h2><div>इस एक्सरसाइज को करने के लिए योगा मैट पर हाथों और घुटनों के बल जाएं।</div><div>इस दौरान पीठ सीधी रखें और एक पैर पीछे की ओर ऊपर उठाएं।</div><div>पैर को ऊपर ले जाकर ग्लूट्स पर प्रेशर फील करें।</div><div>अब पैर को धीरे-धीरे नीचे लाएं और दूसरे पैर से यह प्रोसेस दोहराएं।</div><div>दोनों पैरों से 3 सेट × 15 रेप्स में करें।</div><div>इस एक्सरसाइज को करने से हिप्स शेप में, लोअर बॉडी टोन और लोअर बॉडी को टोन होती है।</div><div><br></div><h2>बरतें ये सावधानियां</h2><div>एक्सरसाइज शुरू करने से पहले 5 मिनट वार्मअप जरूरी होता है।</div><div>सही पोश्चर बनाएं, जिससे आप चोट आदि से बचे रहें।</div><div>अच्छे रिजल्ट पाने के लिए हेल्दी डाइट और पर्याप्त पानी पीना जरूरी है।</div>]]></description>
      <pubDate>Tue, 28 Jul 2026 09:58:19 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/want-to-get-rid-of-stubborn-fat-in-hips-and-thighs-these-easy-methods-from-experts-do-trick</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
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      <title><![CDATA[Women Health: कम पानी पीने से बढ़ सकता है Cortisol Level, बिगड़ जाएगा पीरियड्स का पूरा गणित]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/drinking-less-water-increase-cortisol-levels-and-disrupt-entire-math-of-period]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>क्या आपको इस बात की जानकारी है कि डिहाइड्रेशन यानी की शरीर में पानी की कमी का असर सिर्फ थकान या प्यास तक ही सीमित नहीं होता है। डिहाइड्रेशन महिलाओं के हार्मोनल संतुलन और पीरियड्स पर भी असर डाल सकता है। जब शरीर में पानी की कमी होती है, तो कई जरूरी शारीरिक प्रक्रियाएं प्रभावित होती हैं। जिनमें हार्मोनल संतुलन भी शामिल है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि कम पानी पीने से हार्मोनल हेल्थ और पीरियड्स पर भी क्या असर होता है।</div><div><br></div><h2>डिहाइड्रेशन से पीरियड्स और हार्मोनल हेल्‍थ पर असर</h2><div>शरीर में पानी की कमी से स्ट्रेस हार्मोन जैसे कोर्टिसोल का लेवल बढ़ सकता है। इससे एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोंस का बैलेंस बिगड़ सकता है। यह हार्मोन्स पीरियड्स को कंट्रोल करने में मदद करते हैं। इससे पीरियड्स अनियमित हो सकते हैं, कभी-कभी पीरियड्स के दौरान ज्यादा दर्द हो सकता है या फिर पीरियड्स देरी से आ सकते हैं।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/health/how-to-manage-period-pain-with-pre-cycle-nutrition" target="_blank">Menstrual Health Tips: पीरियड्स की तारीख से 1 हफ्ता पहले बदलें अपनी Routine, दर्द में मिलेगी बड़ी राहत</a></h3><div><br></div><div>वहीं डिहाइड्रेशन का असर ब्लड सर्कुलेशन पर भी देखने को मिलता है। जब शरीर में पानी कम मात्रा में होता है, तो ब्लड फ्लो धीमा हो जाता है। जिस कारण पीरियड्स के दौरान क्रैम्प्स ज्यादा महसूस हो सकती है। वहीं शरीर में पानी की कमी से चक्कर, थकान और मूड स्विंग्स जैसे लक्षण भी बढ़ सकते हैं। यह पीरियड्स के दौरान आपको ज्यादा परेशान कर सकते हैं।</div><div><br></div><div>लेकिन यह कहना पूरी तरह से सही नहीं होगा कि सिर्फ डिहाइड्रेशन ही पीरियड्स को पूरी तरह से बिगाड़ता है। हालांकि यह एक अहम फैक्टर जरूर हो सकता है। लेकिन अगर लंबे समय तक शरीर में पानी की कमी रहती है, तो यह ओवरऑल हार्मोनल हेल्थ पर असर डालती है।</div><div><br></div><div>इसलिए महिलाओं को रोजाना पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए। खासकर पीरियड्स और गर्मियों में। सही हाइड्रेशन न सिर्फ आपके शरीर को एनर्जेटिक बनाए रखता है। बल्कि यह पीरियड्स को बेहतर और हार्मोनल संतुलन को भी बेहतर तरीके से मैनेज करता है।</div>]]></description>
      <pubDate>Mon, 27 Jul 2026 13:59:45 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/drinking-less-water-increase-cortisol-levels-and-disrupt-entire-math-of-period</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
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      <title><![CDATA[Menstrual Health Tips: पीरियड्स की तारीख से 1 हफ्ता पहले बदलें अपनी Routine, दर्द में मिलेगी बड़ी राहत]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/how-to-manage-period-pain-with-pre-cycle-nutrition]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>हर महीने महिलाओं को पीरियड्स आना एक बायोलॉजिकल प्रोसेस है। पीरियड्स के दौरान काफी लड़कियों को बहुत तेज दर्द से गुजरना पड़ता है। इतना ही नहीं, उन्हें इस समय रोजमर्रा के कामों करने में काफी दिक्कत होती है और उनकी पूरी रुटीन प्रभावित रहती है।&nbsp;</div><div><span style="font-size: 1rem;">गौरतलब है कि इस समय सिर्फ पेनकिलर्स ही उनका बड़ा सेहरा बनता है और दर्द में राहत मिलती है। खासकर पीरियड्स के दिनों में होने वाले दर्द से बचने के लिए खान-पान और लाइफस्टाइल में बदलाव बहुत जरुरी है। असल में हमारी डाइट और जीवनशैली का सीधा असर हार्मोन्स पर पड़ता है और जब हार्मोन्स इंबैलेंस होते हैं, तो पीरियड साइकिल अनियमित हो जाती है और इन दिनों में तेज दर्द भी होता है।&nbsp;</span></div><div><span style="font-size: 1rem;">यदि आपको पीरियड्स के दिनों में तेज दर्द होता है, तो आप पीरियड की डेट से एक हफ्ते पहले से एक्सपर्ट के बताए कुछ कामों को अपने दिनचर्या में फॉलो करें।</span></div><div><br></div><div><b>भीगी हुई अंजीर और खजूर खाएं</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">- पीरियड आने से पहले एक हफ्ते पहले ही आप रोजाना 1 खाली पेट एक भीगी हुई अंजीर और 1 खजूर खाएं।</span></div><div><br></div><div>&nbsp;- इसके बाद आप कुछ नट्स और सीड्स का सेवन भी कर सकती हैं।</div><div><br></div><div>&nbsp;- ऐसा करने से शरीर को आयरन, मैग्नीशियम और जरुरी मिनरल्स मिलते हैं।</div><div><br></div><div>&nbsp;- बता दें कि, ये दोनों चीजें हमारे शरीर को पोषण प्रदान करती है और हेल्दी पीरियड्स के लिए तैयार करती हैं।</div><div><br></div><div><b>रोज 1 फल खाएं</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">- आप रोजना एक फल का सेवन जरुर करें, इससे आपके शरीर को ताकत मिलेगी।</span></div><div><br></div><div>&nbsp;- इसलिए रोजाना आप अनार, सेब, नाशपाती, एवाकाडो और शकरकंद खा सकती हैं।</div><div><br></div><div>- इससे शरीर को कई सारे विटामिन्स, एंटीऑक्सीडेंट्स, फाइबर और पोटेशियम मिलते हैं।</div><div><br></div><div>&nbsp;- ये हार्मोन्स को बैलेंस करने और पीएमएस के लक्षणों को कम करने में सहायक होता है।</div><div><br></div><div><b>सत्तू वाली छाछ पिएं</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">- पीरियड्स की डेट से 1 हफ्ते पहले से सत्तू वाली छाछ पिएं।</span></div><div><br></div><div>&nbsp;- इसके लिए 1 हिस्सा दही, 6 हिस्से पानी और 2 चम्मच सत्तू को मिलाएं।</div><div><br></div><div>&nbsp;- इसमें जीरा, धनिया और पुदीना पाउडर मिलाएं।</div><div><br></div><div>&nbsp;- यह छाछ शरीर को एनर्जी प्रदान करती है और पाचन भी दुरुस्त रहता है।</div><div><br></div><div>&nbsp;- यह दर्द को भी कम करने में मदद करता है।</div><div><br></div><div><b>चिया और सब्जा सीड्स का पानी पिएं</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">- इसके लिए आप आधा चम्मच चिया और आधा टीस्पून सब्जा सीड्स लें।</span></div><div><br></div><div>&nbsp;- फिर करीब आधे गिलास पानी में भिगो दें।</div><div><br></div><div>&nbsp;- इसको आप शाम के समय पिएं।</div><div><br></div><div>&nbsp;- यह आपके बाउल मूवमेंट में काफी सुधार करता है और शरीर को ठंडक पहुंचता है।&nbsp;</div><div><br></div><div>&nbsp;- वैसे यह शरीर को हाइड्रेट भी करता है।&nbsp;</div><div><br></div><div>&nbsp;- बता दें कि, इसमें ओमेगा-3 फैटी एसिड्स और फाइबर होता है, जो पीरियड हेल्थ में काफी सुधार लाता है।&nbsp;</div>]]></description>
      <pubDate>Mon, 27 Jul 2026 11:30:08 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/how-to-manage-period-pain-with-pre-cycle-nutrition</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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