<?xml version="1.0" encoding="UTF-8" standalone="no"?><rss xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" version="2.0">
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    <title><![CDATA[Hindi News - News in Hindi - Latest News in Hindi | Prabhasakshi]]></title>
    <description><![CDATA[Latest News in Hindi, Breaking Hindi News, Hindi News Headlines, ताज़ा ख़बरें, Prabhasakshi.com पर]]></description>
    <link>https://www.prabhasakshi.com/</link>
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      <title><![CDATA[Health Alert: महिलाओं में Bloating हो सकता है Ovarian Cancer का संकेत, ये लक्षण न करें नजरअंदाज]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/when-bloating-signals-ovarian-cancer-risk]]></guid>
      <description><![CDATA[<div><span style="font-size: 1rem;">अक्सर महिलाओं में ब्लोटिंग यानी पेट फूलने की समस्या काफी देखने को मिलती है। कई बार इसे गैस, बाहर का खाना, तनाव, हार्मोनल बदलाव या पीरियड्स से जोड़कर देखा जाता है। आमतौर पर कभी-कभार पेट फूलना चिंता की बात नहीं होती, लेकिन अगर पेट लगातार फूलता रहे और लंबे समय से ठीक न हो, तो इसे गलती से भी इग्नोर न करें। यह शरीर के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत हो सकता है।</span></div><div><br></div><div><b>पेट फूलना क्या ओवरी कैंसर का संकेत है ?</b></div><div><br></div><div>खासतौर पर महिलाओं को यह समझना जरुरी है कि पेट फूलना कई बार अंडाशय यानी ओवरी के कैंसर का शुरुआती लक्षण हो सकता है। बार-बार पेट फूलना कैंसर का संकेत नहीं हो सकता है, बल्कि यह समस्या कई दिनों या हफ्तों तक बनी रहे, तो डॉक्टर से जांच कराना बेहद जरुरी है। शुरुआती स्टेज पर कैंसर का पता लगाना काफी मुश्किल होता है, क्योंकि इसके लक्षण बेहद ही सामान्य होते हैं।&nbsp;</div><div><br></div><div><b>ब्लोटिंग में शरीर क्या संकेत देता है</b></div><div><br></div><div><span style="font-size: 1rem;">-पेट या पेल्विक एरिया में दर्द</span></div><div>-पेट भारी लगना</div><div>-भूख कम लगना</div><div>-थोड़ा खाने पर पेट भर जाना</div><div>-बेवजह वजन बढ़ना या घटना</div><div>-बार-बार पेशाब आना</div><div>-कब्ज</div><div>-थकान</div><div><br></div><div><b>हमेशा पेट फूलना कैंसर नहीं हो सकता है</b></div><div><br></div><div>यह बिल्कुल सच है कि हर बार पेट फूलना कैंसर नहीं होता। कुछ मामलों में पेट फूलने का कारण गैस, कब्ज, तनाव, हार्मोनल बदलाव, तला-भुना मसालेदार भोजन या पीरियड्स हो सकते हैं। लेकिन समस्या तब होती है, जब महिलाएं बिना ध्यान रखें इसे सामान्य मान लेती है, लक्षण कब से महसूस हो रहे हैं, कितनी बार होते हैं, इन सब पर ध्यान देना काफी जरुरी है।</div><div><br></div><div><b>किन महिलाओं को ओवरी कैंसर का खतरा ?</b></div><div><br></div><div>जिन महिलाओं के परिवार में ओवरी, ब्रेस्ट या कोलोरेक्टल कैंसर का इतिहास रहा है, उनमें जोखिम बढ़ सकता है। इसके साथ ही बढ़ती उम्र, मोटापा, सिगरेट की लत, एंडोमेट्रियोसिस और कुछ आनुवंशिक बदलाव भी खतरा बढ़ जाता है। वहीं, जिन महिलाओं के परिवार में कैंसर का इतिहास नहीं रहा है, उन लोगों को यह बीमारी हो सकती हैं, इसलिए हमेशा जागरुक रहना जरुरी है।</div><div><br></div><div><span style="font-size: 1rem;"><b>शरीर के बदलावों पर ध्यान दें</b></span></div><div><br></div><div>महिलाएं अपने शरीर में होने वाले बदलावों पर ध्यान दें। अचानक से कपड़े कमर पर तंग लगने लगें, पेट लगातार फूला रहे या खानपान बदलने के बाद भी समस्या बनीं रहती है, तो महिला की जांच जरुरी है। महिला को पेल्विक टेस्ट, अल्ट्रासाउंड या कुछ ब्लड टेस्ट करने होते हैं। इनसे बीमारी का जल्दी पता लगाया जा सकता है।</div><div><br></div><div><b>हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाएं</b></div><div><br></div><div>महिलाओं का अपनी सेहत पर ध्यान देना जरुरी है। बैलेंस डाइट, रेगुलर एक्सरसाइज, पर्याप्त पानी पीना, सिगरेट से परेहज करना और वजन को कंट्रोल में रखना शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करता है। इसके साथ ही रेगुलर हेल्थ चेकअप कर सकते हैं।</div><div><br></div><div>30 साल की उम्र के बाद महिलाओं को समय-समय पर अपनी जांच, सोनोग्राफी और जरूरी टेस्ट कराने चाहिए। यदि बीमारी का पता लग जाए तो इलाज आसान हो सकता है और गंभीर उपचार की जरुरत कम पड़ सकती है।&nbsp;</div>]]></description>
      <pubDate>Sun, 24 May 2026 15:13:23 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/when-bloating-signals-ovarian-cancer-risk</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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      <title><![CDATA[Nautapa Alert: 9 दिन पड़ेगी झुलसाने वाली गर्मी, जान बचाने के लिए अपनाएं ये Summer Diet]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/nautapa-diet-foods-to-beat-the-intense-heatwave]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>इस साल नौतपा की शुरुआत 25 मई से शुरू होगा और 2 जून तक चलेगा। इस समय चलने वाली तेज लू और झुलसा देने वाली धूप सीधे हमारे शरीर को प्रभावित करती है। उत्तर भारत में जेठ के महीने में गर्मी प्रचंड रुप में होती है, इसी दौरान नौतपा की शुरुआत होती है। नौतपा के समय सूर्य की तपिश चरम पर होती है।&nbsp;</div><div><br></div><div>इस दौरान आने वाला पसीना शरीर से पानी और जरुरी मिनरल्स को तेजी से बाहर कर देता है, जिससे डिहाइड्रेशन, कमजोरी, सिरदर्द और पेट संबंधित समस्याएं देखने को मिलती है। नौतपा के दौरान खुद को अंदर से ठंडा रखने और डाइट का सही होना काफी जरुरी है। आइए आपको बताते हैं नौतपा के दौरान किन चीजों का डाइट में शमिल करना चाहिए और किन चीजों से परेहज करना है।</div><div><br></div><div><b>नौतपा के दौरान क्या खाना चाहिए?</b></div><div><br></div><div>नौतपा के समय खाने का सबसे पहला नियम बना लें कि, हल्का खाना खाएं और पानी की मात्रा अधिक लें-</div><div><br></div><div><span style="font-size: 1rem;"><b>पानी से भरपूर मौसमी फल और सब्जियां</b></span></div><div><br></div><div>प्रकृति हर मौसम के अनुसार ऐसे फल और सब्जियां प्रदान करती है, जो शरीर को उसी मौसम में स्वस्थ रखने में मदद करती हैं। गर्मियों के दौरान भोजन में तरबूज, खरबूजा, खीरा, ककड़ी और संतरे जैसे रसदार फलों को जरूर शामिल करना चाहिए। इनमें पानी की मात्रा भरपूर होती है, जिससे शरीर हाइड्रेट रहता है और ऊर्जा बनी रहती है। वहीं खाने में लौकी, तोरी, कद्दू और टिंडा जैसी हल्की व सुपाच्य हरी सब्जियां शामिल करें, जो पाचन को बेहतर रखने के साथ शरीर को ठंडक भी पहुंचाती हैं।</div><div><br></div><div><b>देसी ड्रिंक</b></div><div><br></div><div>नौतपा के समय सबसे ज्यादा घर की बनीं पारंपरिक ड्रिंक्स का सेवन करें, जैसे कि छाछ, दही। दोपहर के समय खाने में एक गिलास पुदीने और भुने जीरे वाली छाछ या एक कटोरी दही किसी अमृत से कम नहीं है। इसके अलावा, कच्चे आम का पन्ना लू से बचाने में मदद करेगा।</div><div><br></div><div>सत्तू का शरबत का सेवन करें, यह शरीर को ठंडक पहुंचाएगा और साथ ही एनर्जी प्रदान करेगा। वहीं, नारियल का पानी और नींबू पानी का सेवन अधिक से अधिक करें। इससे इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी पूरी होगी।</div><div><br></div><div><b>हल्का और आसानी से पचने वाला खाना</b></div><div><br></div><div>गर्मी के मौसम में दोपहर और रात के भोजन को हल्का और सुपाच्य रखना बेहतर माना जाता है। तले-भुने और ज्यादा मसालेदार भोजन से बचकर सादा खाने को प्राथमिकता दें। इस दौरान मूंग दाल की खिचड़ी, दाल-भात, दलिया या नरम रोटी के साथ हल्की हरी सब्जियां खाना शरीर के लिए फायदेमंद रहता है। ऐसा भोजन पेट पर कम भार डालता है और पाचन को भी स्वस्थ बनाए रखता है।</div><div><br></div><div><b>नौतपा में किन चीजों से करें परहेज?</b></div><div><br></div><div><span style="font-size: 1rem;">ज्यादा मसालेदार और तला-भुना खाना- इन नौ दिनो के अंदर मिर्च-मसाले, समोसे, कचोरी और प्रोसेस्ड फूड का सेवन बिल्कुल ही न करें। ये पेट में एसिडिटी और गर्मी बढ़ाते हैं, जिससे आप दिन भर सुस्त और थका हुआ महसूस करोगे।</span></div><div><br></div><div><b>चाय और कॉफी-</b> चाय और कॉफी में सबसे ज्यादा कैफीन होती है, जो डाईयूरेटिक को कम करती है। जिससे बार-बार पेशाब आता है और शरीर में पानी की कमी देखने को मिलती है।</div><div><br></div><div><b>मीठी चीजे और शराब -</b> इस दौरान ज्यादा मीठा सेवन न करें और भूलकर भी शराब का सेवन न करें, इससे डिहाइड्रेशन को बढ़ावा मिलता है।</div><div><br></div><div><b>बासी और खुला हुआ खाना- </b>इस दौरान भूलकर भी बासी और बाहर का खुला हुआ खाना न खाएं, क्योंकि तेज तापमान के कारण बैक्टीरिया जल्दी पनपते हैं, जिससे खाना जल्दी खराब हो जाता है। इसलिए फूड पॉइजनिंग से बचने के लिए हमेशा ताजा बना भोजन ही खाएं।</div><div><br></div><div><b>नौतपा के लिए जरूरी टिप</b></div><div><br></div><div><span style="font-size: 1rem;">इन दिनों में प्यास लगने का इंतजार बिल्कुल न करें। हर आधे एक घंटे में थोड़ा-थोड़ा पानी पिएं। इन दिनों दोपहर की तेज धूप में बिना वजह घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए।&nbsp; यदि बहुत जरुरी काम हो, तो चेहरे को पूरा कवर करके बाहर निकलें। सही खानपान अपनाकर आप नौतपा की इस भीषण गर्मी को सेहतमंद रह सकती हैं।&nbsp;</span></div>

<blockquote class="instagram-media" data-instgrm-captioned="" data-instgrm-permalink="https://www.instagram.com/p/DYteeXFHViw/?utm_source=ig_embed&amp;utm_campaign=loading" data-instgrm-version="14" style=" background:#FFF; border:0; border-radius:3px; box-shadow:0 0 1px 0 rgba(0,0,0,0.5),0 1px 10px 0 rgba(0,0,0,0.15); margin: 1px; max-width:540px; min-width:326px; padding:0; width:99.375%; width:-webkit-calc(100% - 2px); width:calc(100% - 2px);"><div style="padding:16px;"> <a href="https://www.instagram.com/p/DYteeXFHViw/?utm_source=ig_embed&amp;utm_campaign=loading" style=" background:#FFFFFF; line-height:0; padding:0 0; text-align:center; text-decoration:none; width:100%;" target="_blank"> <div style=" display: flex; flex-direction: row; align-items: center;"> <div style="background-color: #F4F4F4; border-radius: 50%; flex-grow: 0; height: 40px; margin-right: 14px; width: 40px;"></div> <div style="display: flex; flex-direction: column; flex-grow: 1; justify-content: center;"> <div style=" background-color: #F4F4F4; border-radius: 4px; flex-grow: 0; height: 14px; margin-bottom: 6px; width: 100px;"></div> <div style=" background-color: #F4F4F4; border-radius: 4px; flex-grow: 0; height: 14px; width: 60px;"></div></div></div><div style="padding: 19% 0;"></div> <div style="display:block; height:50px; margin:0 auto 12px; width:50px;"><svg width="50px" height="50px" viewBox="0 0 60 60" version="1.1" xmlns="https://www.w3.org/2000/svg" xmlns:xlink="https://www.w3.org/1999/xlink"><g stroke="none" stroke-width="1" fill="none" fill-rule="evenodd"><g transform="translate(-511.000000, -20.000000)" fill="#000000"><g><path d="M556.869,30.41 C554.814,30.41 553.148,32.076 553.148,34.131 C553.148,36.186 554.814,37.852 556.869,37.852 C558.924,37.852 560.59,36.186 560.59,34.131 C560.59,32.076 558.924,30.41 556.869,30.41 M541,60.657 C535.114,60.657 530.342,55.887 530.342,50 C530.342,44.114 535.114,39.342 541,39.342 C546.887,39.342 551.658,44.114 551.658,50 C551.658,55.887 546.887,60.657 541,60.657 M541,33.886 C532.1,33.886 524.886,41.1 524.886,50 C524.886,58.899 532.1,66.113 541,66.113 C549.9,66.113 557.115,58.899 557.115,50 C557.115,41.1 549.9,33.886 541,33.886 M565.378,62.101 C565.244,65.022 564.756,66.606 564.346,67.663 C563.803,69.06 563.154,70.057 562.106,71.106 C561.058,72.155 560.06,72.803 558.662,73.347 C557.607,73.757 556.021,74.244 553.102,74.378 C549.944,74.521 548.997,74.552 541,74.552 C533.003,74.552 532.056,74.521 528.898,74.378 C525.979,74.244 524.393,73.757 523.338,73.347 C521.94,72.803 520.942,72.155 519.894,71.106 C518.846,70.057 518.197,69.06 517.654,67.663 C517.244,66.606 516.755,65.022 516.623,62.101 C516.479,58.943 516.448,57.996 516.448,50 C516.448,42.003 516.479,41.056 516.623,37.899 C516.755,34.978 517.244,33.391 517.654,32.338 C518.197,30.938 518.846,29.942 519.894,28.894 C520.942,27.846 521.94,27.196 523.338,26.654 C524.393,26.244 525.979,25.756 528.898,25.623 C532.057,25.479 533.004,25.448 541,25.448 C548.997,25.448 549.943,25.479 553.102,25.623 C556.021,25.756 557.607,26.244 558.662,26.654 C560.06,27.196 561.058,27.846 562.106,28.894 C563.154,29.942 563.803,30.938 564.346,32.338 C564.756,33.391 565.244,34.978 565.378,37.899 C565.522,41.056 565.552,42.003 565.552,50 C565.552,57.996 565.522,58.943 565.378,62.101 M570.82,37.631 C570.674,34.438 570.167,32.258 569.425,30.349 C568.659,28.377 567.633,26.702 565.965,25.035 C564.297,23.368 562.623,22.342 560.652,21.575 C558.743,20.834 556.562,20.326 553.369,20.18 C550.169,20.033 549.148,20 541,20 C532.853,20 531.831,20.033 528.631,20.18 C525.438,20.326 523.257,20.834 521.349,21.575 C519.376,22.342 517.703,23.368 516.035,25.035 C514.368,26.702 513.342,28.377 512.574,30.349 C511.834,32.258 511.326,34.438 511.181,37.631 C511.035,40.831 511,41.851 511,50 C511,58.147 511.035,59.17 511.181,62.369 C511.326,65.562 511.834,67.743 512.574,69.651 C513.342,71.625 514.368,73.296 516.035,74.965 C517.703,76.634 519.376,77.658 521.349,78.425 C523.257,79.167 525.438,79.673 528.631,79.82 C531.831,79.965 532.853,80.001 541,80.001 C549.148,80.001 550.169,79.965 553.369,79.82 C556.562,79.673 558.743,79.167 560.652,78.425 C562.623,77.658 564.297,76.634 565.965,74.965 C567.633,73.296 568.659,71.625 569.425,69.651 C570.167,67.743 570.674,65.562 570.82,62.369 C570.966,59.17 571,58.147 571,50 C571,41.851 570.966,40.831 570.82,37.631"></path></g></g></g></svg></div><div style="padding-top: 8px;"> <div style=" color:#3897f0; font-family:Arial,sans-serif; font-size:14px; font-style:normal; font-weight:550; line-height:18px;">View this post on Instagram</div></div><div style="padding: 12.5% 0;"></div> <div style="display: flex; flex-direction: row; margin-bottom: 14px; align-items: center;"><div> <div style="background-color: #F4F4F4; border-radius: 50%; height: 12.5px; width: 12.5px; transform: translateX(0px) translateY(7px);"></div> <div style="background-color: #F4F4F4; height: 12.5px; transform: rotate(-45deg) translateX(3px) translateY(1px); width: 12.5px; flex-grow: 0; margin-right: 14px; margin-left: 2px;"></div> <div style="background-color: #F4F4F4; border-radius: 50%; height: 12.5px; width: 12.5px; transform: translateX(9px) translateY(-18px);"></div></div><div style="margin-left: 8px;"> <div style=" background-color: #F4F4F4; border-radius: 50%; flex-grow: 0; height: 20px; width: 20px;"></div> <div style=" width: 0; height: 0; border-top: 2px solid transparent; border-left: 6px solid #f4f4f4; border-bottom: 2px solid transparent; 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overflow:hidden; padding:8px 0 7px; text-align:center; text-overflow:ellipsis; white-space:nowrap;"><a href="https://www.instagram.com/p/DYteeXFHViw/?utm_source=ig_embed&amp;utm_campaign=loading" style=" color:#c9c8cd; font-family:Arial,sans-serif; font-size:14px; font-style:normal; font-weight:normal; line-height:17px; text-decoration:none;" target="_blank">A post shared by Prabhasakshi (@prabhasakshi)</a></p></div></blockquote>
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      <pubDate>Sat, 23 May 2026 18:00:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/nautapa-diet-foods-to-beat-the-intense-heatwave</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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      <title><![CDATA[Summer में चक्कर, सिरदर्द? ये हैं Heat Stroke के शुरुआती लक्षण, इन Health Tips से करें बचाव]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/beat-the-heat-a-guide-to-avoiding-heatstroke]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>गर्मियों में सेहत का ध्यान न रखा तो मुसीबत बढ़ जाती हैं। तापमान बढ़ता है हीटवेव की समस्या झेलने पड़ती है। भीषण गर्मी में शरीर का काफी नुकसान पहुंचता है। गर्मी के कारण शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन हो सकता है। शुरुआत में इसके लक्षण हल्के लगते हैं, लेकिन गलती से लक्षण को नजरअंदाज कर दिया तो स्थिति गंभीर हो सकती है। हीट एग्जॉस्टशन और हीटस्ट्रोक जैसी खतरनाक समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं।</div><div><br></div><div>मौसम गर्म और उमस भरा होता है, तो शरीर खुद को ठंडा रखने के लिए ज्यादा पसीना निकालता है। पसीने के साथ ही शरीर से पानी और जरुरी मिनरल्स बाहर निकल आते हैं। यदि आप पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं पीतें, तो शरीर में पानी की कमी से डिहाइड्रेशन होने लगता है।</div><div><br></div><div><b>डिहाइड्रेशन के लक्षण</b></div><div><br></div><div>अक्सर डिहाइड्रेशन होने पर कई बार पेशाब कम आने लगती है और मांसपेशियों में ऐंठन भी हो सकती है। ये सभी संकेत बताते हैं कि शरीर को तुरंत पानी और आराम की जरुरत है। आइए आपको डिहाइड्रेशन के अन्य लक्षण के बारे बताते हैं-</div><div><br></div><div>-बहुत ज्यादा प्यास लगना</div><div>-मुंह सूखना</div><div>-होंठ फटना</div><div>-सिरदर्द</div><div>-चक्कर आना</div><div>-कमजोरी</div><div>-थकान</div><div>-ड्राई स्किन</div><div>-गहरे रंग का पेशाब</div><div><br></div><div><b>डिहाइड्रेशन बढ़ने से क्या होता है?</b></div><div><br></div><div>अगर आप पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं पिएंगे, तो डिहाइड्रेशन गंभीर रूप ले सकता है। पानी की कमी के कारण ब्लड प्रेशर कम हो सकता है, शरीर में इलेक्ट्रोलाइट का संतुलन बिगड़ सकता है और इसका असर कई अंगों पर देखने को मिलता है। जिसके बाद से हीट एग्जॉस्टशन और हीटस्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है।</div><div><br></div><div><span style="font-size: 1rem;"><b>हीट एग्जॉस्टशन क्या है?</b></span></div><div><br></div><div><span style="font-size: 1rem;">हीट एग्जॉस्टशन यानी गर्मी से अत्याधिक थकावट होने से व्यक्ति को बहुत ही ज्यादा कमजोरी, चक्कर आना, पसीना, सिरदर्द और बेचैनी की समस्या देखने को मिलती है। यदि आप इस स्थिति में खुद को आराम नहीं दिया और पानी नहीं पीया, तो हीटस्ट्रोक की समस्या हो सकती है।</span></div><div><br></div><div><b>हीटस्ट्रोक क्या है ?</b></div><div><br></div><div><span style="font-size: 1rem;">लू लगना गर्मी के मौसम में होने वाली सबसे गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है। इस दौरान शरीर का तापमान अचानक अत्यधिक बढ़ जाता है और शरीर की प्राकृतिक ठंडक बनाए रखने की क्षमता कमजोर पड़ जाती है। इसके प्रमुख संकेतों में तेज बुखार, धड़कन का बढ़ना, मतली या उल्टी, घबराहट, चक्कर आना, बेहोशी और सांस लेने में परेशानी शामिल हो सकते हैं। यदि स्थिति ज्यादा गंभीर हो जाए तो इसका असर मस्तिष्क, हृदय और किडनी जैसे महत्वपूर्ण अंगों पर भी पड़ सकता है। ऐसे लक्षण नजर आते ही बिना देरी किए चिकित्सक की सलाह लेना बेहद जरूरी होता है।</span></div><div><br></div><div><b>गर्मी का स्किन पर क्या असर देखने को मिलता है?</b></div><div><br></div><div>गर्मी के कारण सिर्फ शरीर के अंदर ही नहीं, बल्कि स्किन पर भी दिखाई देता है। अधिक गर्मी के चलते और पानी की कमी के कारण त्वचा सूखी और बेजान नजर आने लगती है। सनबर्न, जलन और होंठ फटना भी आम समस्याएं हैं। अक्सर त्वचा की समस्या शरीर में पानी की कमी का संकेत होती है।</div><div><br></div><div><b>गर्मी का डाइजेशन पर असर</b></div><div><br></div><div>गर्मियों के दौरान पाचन संबंधी परेशानियां काफी देखने को मिलती हैं। गर्मियों के मौसम में भोजन और पानी जल्दी खराब हो जाती है, जिससे बैक्टीरिया बढ़ने लगते हैं। गर्मियों में ताजा और साफ भोजन खाना काफी जरुरी है। बासी खाना और बाहर का दूषित खाना खाने से बचें। वरना आप इन समस्याओं से परेशान हो सकते हैं-</div><div><br></div><div>-अपच</div><div>-गैस</div><div>-एसिडिटी</div><div>-उल्टी</div><div>-दस्त</div><div>-फूड पॉइजनिंग</div><div><br></div><div><b>लाइफस्टाइल के कारण बढ़ता है डिहाइड्रेशन</b></div><div><br></div><div><span style="font-size: 1rem;">लाइफस्टाइल के चलते भी डिहाइड्रेशन का प्रमुख लक्षण देखने को मिलता है। कई लोग लंबे समय तक घर के बाहर रहते हैं, ट्रैफिक में सफर करते हैं और वर्क में इतने व्यस्त रहते हैं कि समय पर पानी पीना भूल ही जाते हैं। कई लोग पानी की जगह ज्यादा चाय, कॉफी और कोल्ड ड्रिंक पीते हैं। इससे शरीर को सही हाइड्रेशन नहीं मिल पाता। जिस कारण से पानी की कमी बढ़ जाती है। इससे बचने के लिए रेगुलर रुप से पानी जरुर पिएं।</span></div><div><br></div><div><span style="font-size: 1rem;"><b>शरीर को कैस हाइड्रेट रखें?</b></span></div><div><br></div><div>खूब पानी पिएं, पानी पीने केलिए प्यास का इंतजार न करें। गर्मियों में नियमित रुप से पानी पीना जरुरी है। सुबह से ही पर्याप्त मात्रा में पानी पीना शुरु कर देना चाहिए। इसके अतिरिक्त नारियल पानी, नींबू पानी और ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन (ओआरएस) भी सकते हैं, ये शरीर में पानी की कमी को पूरा करता है।&nbsp;</div><div><br></div><div>इतना ही नहीं, गर्मियों में पानी से भरपूर फल खाने चाहिए जैसे कि तरबूज, खीरा, खरबूजा और संतरा शरीर को ठंडक देते हैं और पानी की कमी पूरी करते हैं। हालांकि, तला-भुना मसालेदार और बाहर का खाना खाने से बचें। सिगरेट, शराब और चाय-कॉफी शरीर में पानी की कमी बढ़ा सकते हैं इसलिए इनका सेवन करने से बचें।</div><div><br></div><div><b>गर्मी से खुद को जरुर बचाएं</b></div><div><br></div><div>गर्मी के मौसम में हमेशा हल्का, स्वच्छ और ताजा भोजन खाना बेहतर माना जाता है। शरीर में पानी की कमी न हो, इसके लिए पूरे दिन नियमित अंतराल पर पानी और तरल पदार्थ लेते रहें। तेज धूप और लू के समय खासकर दोपहर में बाहर निकलने से बचना चाहिए। यदि किसी जरूरी काम से बाहर जाना पड़े, तो आरामदायक सूती और हल्के रंग के कपड़े पहनें, सिर को टोपी या गमछे से ढकें तथा त्वचा को धूप से बचाने के लिए सनस्क्रीन जरूर लगाएं।</div><div><br></div><div>बच्चों और बुजुर्गों का ख्याल सबसे ज्यादा रखें क्योंकि पानी की कमी जल्दी हो सकती है। यदि किसी को लगातार चक्कर आए, बहुत कमजोरी महसूस हो, सांस लेने में परेशान हो या बेहोशी जैसा लगे, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।</div>]]></description>
      <pubDate>Sat, 23 May 2026 16:25:26 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/beat-the-heat-a-guide-to-avoiding-heatstroke</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Health Tips: आपका Lipid Profile क्या कहता है? जानें LDL, HDL और Triglycerides का दिल से कनेक्शन]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/what-lipid-profile-say-learn-about-connection-between-ldl-hdl-and-triglycerides-and-heart]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>ट्राईग्लिसराइड्स, LDL और HDL यह तीनों ही दिल की बीमारियों से जुड़े है। आम भाषा में LDL को खराब कोलेस्ट्रॉल, HDL को अच्छा कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स को नसों में जमा फैट कहा जाता है। इन तीनों के ऊपर-नीचे होने से दिल की सेहत पर असर होता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको इन तीनों के आपस के संबंध और दिल की बीमारी से इनके कनेक्शन के बारे में बताने जा रहे हैं।</div><div><br></div><h2>जानिए क्या है HDL</h2><div>HDL का मतलब है हाई-डेंसिटी लिपोप्रोटीन और लिपोप्रोटीन लिपिड्स से है। जोकि फैट और प्रोटीन से मिलकर बना होता है। इसको अच्छा कोलेस्ट्रॉल माना जाता है। क्योंकि यह ब्लड फ्लो से कोलेस्ट्रॉल और अन्य खराब पदार्थों को एकत्र करके लिवर तक ले जाता है। फिर लिवर इस कोलेस्ट्रॉल को ब्रेक करता है और शरीर से बाहर निकालता है। कोलेस्ट्रॉल मोम जैसा पदार्थ होता है, जोकि हर टिश्यू में मौजूद होता है। शरीर के लिए सेहतमंद कोलेस्ट्रॉल बहुत फायदेमंद है। यह बॉडी के सेल्स को सही तरह से काम करने में सहायता करता है। वहीं यह विटामिन डी और हार्मोन का भी निर्माण करता है। हार्ट की बीमारियों और स्ट्रोक के खतरे को भी अच्छा कोलेस्ट्रॉल कम करता है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/health/these-3-things-eaten-thinking-they-healthy-dangerous-learn-ayurvedic-rules" target="_blank">Health Tips: सेहतमंद समझकर खाई जाने वाली ये 3 चीजें हो सकती हैं खतरनाक, जानें Ayurvedic नियम</a></h3><div><br></div><h2>जानिए क्या है LDL</h2><div>LDL का मतलब है लो-डेंसिटी लिपोप्रोटीन होता है। जिसको आम भाषा में खराब कोलेस्ट्रॉल कहा जाता है। इसके कणों में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा ज्यादा और प्रोटीन की मात्रा कम होती है। यह शरीर में कोलेस्ट्रॉल को कोशिकाओं तक पहुंचाता है। जब शरीर में LDL की मात्रा ज्यादा हो जाती है, तो हाई LDL आर्टरी से चिपकने लगता है और इस फैट को प्लाक कहा जाता है। लगातार आर्टरी पर जमने की वजह से आर्टरीज सख्त और संकरी हो जाती है। जिससे ब्लड फ्लो में रुकावट आती है और दिमाग और दिल तक ऑक्सीजन युक्त ब्लड नहीं पहुंच पाता है। अगर यह प्लाक फट जाता है, तो इस कारण स्ट्रोक या हार्ट अटैक हो सकता है। हाई LDL हार्ट संबंधी बीमारियों को बढ़ा सकता है।</div><div><br></div><h2>क्या है ट्राइग्लिसराइड्स</h2><div>यह शरीर में पाया जाने वाला फैट होता है, जोकि अच्छी सेहत के लिए बॉडी में कुछ मात्रा में होना जरूरी होता है। ट्राइग्लिसराइड्स ब्लड में मौजूद एक तरह का लिपिड है, जोकि ब्लड सर्कुलेट करता है। जब लोग ऐसी कैलोरी लेते हैं, जिसकी शरीर को जरूरत नहीं होती है तो शरीर इसको ट्राइग्लिसराइड्स में बदल देता है। इस्तेमाल न होने वाली कैलोरी फैट सेल्स में जमा हो जाते हैं। जब शरीर में कैलोरी की जरूरत हो, तो यह ट्राइग्लिसराइड्स ब्लड में रिलीज होते हैं। शरीर में जब ट्राइग्लिसराइड्स बढ़ते हैं, तो लिपिड डिसऑर्डर होता है। अगर बॉडी में HDL कम हो जाए और ट्राइग्लिसराइड्स बढ़ जाए, तो यह शरीर के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। ट्राइग्लिसराइड्स अधिक होने पर हार्ट की बीमारियों और स्ट्रोक का जोखिम बढ़ सकता है।</div><div><br></div><h2>लिपिड प्रोफाइल में LDL, HDL, Triglycerides कैसे चेक करें</h2><div>हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक लिपिड प्रोफाइल टेस्ट के जरिए शरीर में कोलेस्ट्रॉल और फैट की जांच की जा सकती है। लिपिड प्रोफाइल टेस्ट में टोटल कोलेस्ट्रॉल, HDL, LDL और ट्राइग्लिसराइड्स चेक किया जाता है। दिल संबंधी बीमारी या स्ट्रोक के खतरे को चेक करने के लिए इस टेस्ट को करने की सलाह दी जाती है। यह टेस्ट कराने से पहले व्यक्ति को कम से कम 9 से 12 घंटे की फास्टिंग करनी होगी। हालांकि इस दौरान पानी पिया जा सकता है। लिपिड प्रोफाइल कराने से 24 घंटे पहले शराब नहीं पीना चाहिए।</div><div><br></div><h2>डॉक्टर से कम मिलें</h2><div>अगर लगातार बीपी की समस्या बनी रहे, ब्लड शुगर कंट्रोल में न रहे, ज्यादा पसीना आए, सीने में दर्द, आराम की पोजिशन में सांस फूलना और बहुत ज्यादा थकान आदि के लक्षण महसूस हों, तो फौरन डॉक्टर को दिखाना चाहिए।</div>]]></description>
      <pubDate>Sat, 23 May 2026 13:25:29 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/what-lipid-profile-say-learn-about-connection-between-ldl-hdl-and-triglycerides-and-heart</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Health Tips: सेहतमंद समझकर खाई जाने वाली ये 3 चीजें हो सकती हैं खतरनाक, जानें Ayurvedic नियम]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/these-3-things-eaten-thinking-they-healthy-dangerous-learn-ayurvedic-rules]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>आज कम समय में लोग फिट और हेल्दी रहने के लिए रात में खूब सलाद खा रहे हैं। वहीं डाइजेशन को सुधारने के लिए दही भी खाते हैं। लेकिन इसके बाद भी ब्लोटिंग और गैस की समस्या होती है। तो बता दे कि सिर्फ हेल्दी खाना काफी नहीं होता है। क्योंकि आयुर्वेद के मुताबिक अगर आप पौष्टिक खाना गलत समय पर खाते हैं, तो यह फायदे की जगह नुकसान पहुंचाने लगता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको 3 ऐसे सुपर हेल्दी फूड्स के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनको गलत समय पर खाने से आपकी सेहत बिगड़ सकती है।</div><div><br></div><h2>रात में दही खाना</h2><div>बता दें कि दही को प्रोबायोटिक्स का खजाना माना जाता है। लेकिन आयुर्वेद के मुताबिक रात में दही नहीं खाना चाहिए। क्योंकि दही की प्रकृति भारी और चिकना होता है। सूर्यास्त के बाद शरीर में प्राकृतिक रूप से कफ दोष बढ़ता है। ऐसे में रात में दही के सेवन से शरीर में टॉक्सिन और कफ की मात्रा बढ़ जाती है। जिस वजह से साइनस की समस्या, बलगम बनना, नाक बंद होना, जोड़ों में दर्द, शरीर में भारीपन और एक्ने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/health/morning-curry-leaf-ritual-boost-wellness" target="_blank">सुबह खाली पेट 10 Curry Leaves: जानें क्या हैं इसके चमत्कारी Health Benefits!</a></h3><div><br></div><h2>रात में कच्चा सलाद खाना</h2><div>वेट लॉस के लिए और फाइबर के लिए सलाद को सबसे अच्छा माना जाता है। लेकिन रात को खाने में सलाद को शामिल करने से पाचन तंत्र पर भारी असर पड़ सकता है। क्योंकि दिन से समय हमारी जठराग्नी यानी डाइजेस्टिव फायर तेज होती है। लेकिन शाम ढलते ही यह धीमी पड़ जाती है। कच्ची सब्जियां सूखी और ठंडी होती हैं। कमजोर डायजेस्टिव फायर के लिए कच्ची फाइबर वाली सब्जियों को तोड़ना मुश्किल है। इस वजह से पेट में भारीपन, गैस, ब्लोटिंग और नींद में खलल पड़ने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।</div><div><br></div><h2>खाने के फौरन बाद फल खाना</h2><div>बहुत से लोग खाना खाने के बाद डेजर्ट के रूप में फल खाना पसंद करते हैं। जोकि पाचन के लिए बड़ी गलती होता है। क्योंकि फल जल्दी पच जाते हैं, लेकिन दाल रोटी या भारी खाने को पचने में 3-4 घंटे लगते हैं। क्योंकि जब आप खाना खाने के फौरन बाद फल खाते हैं, तो फल खाने के पीछे फंस जाते हैं। इससे पेट में ही फर्मेंट होने लगते हैं। जिसकी वजह से खट्टी डकारें, एसिडिटी, पाचन की धीमी गति होना और पोषक तत्वों का सही अब्जॉर्प्शन न होने जैसी समस्याएं होने लगती हैं।</div>]]></description>
      <pubDate>Fri, 22 May 2026 12:25:22 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/these-3-things-eaten-thinking-they-healthy-dangerous-learn-ayurvedic-rules</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[सुबह खाली पेट 10 Curry Leaves: जानें क्या हैं इसके चमत्कारी Health Benefits!]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/morning-curry-leaf-ritual-boost-wellness]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>पोहा, सांभर और कई अन्य साउथ इंडियन डिशेज का स्वाद बढ़ाने के लिए करी पत्ता इस्तेमाल किया जात है, ये खुशबू ही नहीं बढ़ाता बल्कि हेल्थ के लिए भी काफी अच्छा माना जाता है। करी पत्ते एंटीऑक्सीडेंट, फाइबर और अन्य पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं, जो शरीर को अंदर से हेल्‍दी रखते हैं। अगर आप रोजाना खाली पेट 8-10 करी पत्ते चबाए तो शरीर को कई तरह से फायदा पहुंचा सकते हैं। इसमें आयरन, केल्शियम और फाइबर जैसे जरुरी पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर को अंदर से पोषण देते हैं। आइए आपको बताते हैं खाली पेट करी पत्ता खाने के फायदे।</div><div><br></div><div><b>रोज खाली पेट करी पत्ते खाने से क्‍या होता है?</b></div><div><br></div><div>प्रतिदिन करी पत्ता के सेवन करने के बाद शरीर और स्किन संबंधित समस्याओं में काफी सुधार देखने को मिलता है-</div><div><br></div><div><b>पाचन रहता है दुरुस्‍त</b></div><div><br></div><div>करी पत्ते में भरपूर मात्रा में फाइबर पाया जाता है, जो पाचन तंत्र को स्वस्थ बनाए रखने में सहायक हो सकता है। इसका सेवन पेट की सफाई में मदद करता है और गैस, सूजन व पेट भारी लगने जैसी परेशानियों से राहत दिलाने में भी उपयोगी माना जाता है।</div><div><br></div><div><b>दिन भर रहते हैं एनर्जी से भरपूर</b></div><div><br></div><div>करी पत्ते में मौजूद आवश्यक पोषक तत्व शरीर को ऊर्जा देने में मददगार माने जाते हैं। इसका नियमित सेवन करने से दिनभर स्फूर्ति बनी रह सकती है और शरीर अधिक तरोताजा व हल्का महसूस कर सकता है।</div><div><br></div><div><b>शरीर में जमा टॉक्सिंस को निकालता है</b></div><div><br></div><div><span style="font-size: 1rem;">करी पत्ता प्राकृतिक रुप से नेचुरली डिटॉक्स करने में काफी सहायक होता है, जिससे शरीर अधिक फ्रेश फिल करता है।</span></div><div><br></div><div><b>हेयर फॉल होता है कम</b></div><div><br></div><div>करी पत्ता में पाए जाता है आयरन, एंटीऑक्सीडेंट और जरूरी पोषक तत्व, ये बालों की जड़ों को पोषण प्रदान करता है। इसके साथ ही बाल को हेल्दी बनाए रखता है।</div><div><br></div><div><b>&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">मुंहासे कम होते हैं</span></b></div><div><br></div><div>आयुर्वेद में बताया है कि पाचन सही रहता है तब इसका असर स्किन पर भी नजर आता है। करी पत्ते शरीर को अंदर से साफ रखने और स्किन को हेल्दी दिखाने में सहायक माने जाते हैं।</div><div><br></div><div>गौरतलब है कि करी पत्ता शरीर को डिटोक्स करता है,&nbsp; डाइजेशन को बेहतर बनाने और ब्लड शुगर बैलेंस रखने में मदद करता है। इसमें पाए जाने वाला फाइबर पेट को साफ रखता है, जबकि एंटीऑक्सीडेंट शरीर को फ्री रेडिकल्स से बचाने में काफी सहायक होता है।</div><div><br></div><div><b>करी पत्ते कैसे खाएं?</b></div><div><br></div><div>- सुबह खाली पेट 8-10 ताजे करी पत्ते अच्छे से चबाएं।</div><div><br></div><div>&nbsp;- अब एक गिलास में गुनगुना पानी पी सकते हैं।</div>]]></description>
      <pubDate>Fri, 22 May 2026 10:55:19 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/morning-curry-leaf-ritual-boost-wellness</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Health Tips: Work Life में दिमाग हो रहा Hang? यह Decision Fatigue है, Burnout से पहले पहचानें लक्षण]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/feeling-hangry-in-work-life-this-decision-fatigue-recognize-signs-before-burnout]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>आज के समय में हम सभी अपने घर-परिवार, करियर और अन्य कारणों के बारे में काफी ज्यादा सोचने लगते हैं। सुबह उठने से लेकर रात को सोने के समय तक हमारा दिमाग शांत नहीं रह पाता है। दिन भर के कई छोटे-छोटे फैसले जैसे- कहां जाना है, कैसे जाना है, क्या पहनना है, किसके साथ मीटिंग है, खाने में क्या खाना है और किस काम को पहले करना है आदि लेने की वजह से दिमाग काफी थक जाता है।</div><div><br></div><div>इस मानसिक थकान को मेडिकल भाषा में डिसीजन फटीग कहा जाता है। हालांकि यह कोई बड़ी मानसिक बीमारी नहीं होती है। लेकिन इस समस्या के होने पर व्यक्ति को रोजाना के नॉर्मल डिसीजन लेने भी मुश्किल हो जाते हैं। आमतौर पर यह समस्या तब होती है, जब आपका दिमाग बार-बार अपने कामों को करने के ऑप्शन के बीच में किसी एक ऑप्शन को चुनने को लेकर थक जाता है। फैसले लेने की क्षमता मानसिक ऊर्जा पर निर्भर होती है। जब मेंटल एनर्जी कम होने लगती है, तो हमारे फैसला लेने, धैर्य और सोचने-समझने की क्षमता पर इसका असर पड़ता है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/health/nautapa-heatwave-foods-to-eat-and-avoid-for-health" target="_blank">Summer Health Guide: शुरू हो रहा है Nautapa, जानें 9 दिनों में हेल्दी रहने के लिए क्या खाएं और क्या नहीं</a></h3><div><br></div><h2>जानिए डिसीजन फटीग के लक्षण</h2><div>एक रिसर्च के मुताबिक डिसीजन फटीग हमारी मानसिक एनर्जी को कम कर देता है। जिसकी वजह से व्यक्ति की विलपॉवर और सही फैसला लेने की क्षमता कम होने लगती है। यह थकान गलत फैसले लेने के लिए मजबूर करती है। इस समस्या के होने पर शरीर में कई तरह के लक्षण नजर आ सकते हैं।</div><div><br></div><h2>मानसिक थकान होना</h2><div>लगातार फैसले लेने के बाद दिमाग में भारीपन महसूस होने लगता है। इस स्थिति में व्यक्ति को सोचने में ज्यादा समय लगता है और साधारण काम को करने में भी मुश्किल होता है।</div><div><br></div><h2>फैसले टालना</h2><div>डिसीजन फटीग की वजह से फैसला लेने की ताकत कम हो जाती है। जिस कारण व्यक्ति फैसले टालने लगता है। इस समस्या के होने पर व्यक्ति अभी मन नहीं कर रहा या हर काम को वो बाद में देखेंगे आदि तरह के बहाने बनाने लगता है।</div><div><br></div><h2>गलत फैसला लेना</h2><div>कई बार दिमाग पर जोर पड़ने की वजह से हम जल्दबाजी में फैसले लेने लगते हैं। जैसे बिना सोचे समझे शॉपिंग करना, डाइट पर होने के बाद भी जंक फूड खाना या किसी काम के लिए हां या न करना।</div><div><br></div><h2>फैसले लेने से बचने की कोशिश</h2><div>इस समस्या की वजह से फैसला लेने की क्षमता कमजोर हो जाती है। जिसकी वजह से कई लोग अक्सर निर्णय लेने से पूरी तरह से बचने लगते हैं। ऐसे में वह अपनी जिम्मेदारी को दूसरों पर डालने लगते हैं। या फिर अन्य ऑप्शन से दूरी बना लेते हैं।</div><div><br></div><h2>आत्मविश्वास न होना</h2><div>डिसीजन फटीग की वजह से खुद को दोष देना, बार-बार अपने फैसलों पर शक होगा या हर फैसले के बाद यह सोचना की सही फैसला लिया या नहीं, यह भी इसका बड़ा संकेत है।</div><div><br></div><h2>शारीरिक लक्षण</h2><div>इस समस्या की वजह से व्यक्ति को फोकस करने में मुश्किल, सिर में दर्द, रोजमर्रा के कामों में दिक्कत और नींद में कमी होना जैसे लक्षण नजर आ सकते हैं।</div><div><br></div><h2>डिसीजन फटीग से कैसे करें बचाव</h2><div>कोई भी फैसला सुबह के समय लें, क्योंकि इस दौरान मानसिक एनर्जी ज्यादा होती है। इसलिए जरूरी है कि आप सुबह के समय अपने जरूरी फैसले लें।</div><div><br></div><div>अपने किसी काम को करने के लिए ज्यादा ऑप्शन न रखें। खाना, कपड़ा या रोजमर्रा के कामों को सीमित ऑप्शन रखने चाहिए, जिससे कि ज्यादा कंफ्यूजन न हो।</div><div><br></div><div>आपको अपने लिए एक हेल्दी रूटीन बनाना चाहिए। जिससे कि छोटे फैसले खुद लेने में आराम रहे। आप एक समय पर एक्सरसाइज करें और खुद के लिए तय किया हुआ खाना खाएं।</div><div><br></div><div>लगातार काम करने से बचना चाहिए। क्योंकि लगातार काम करने से आप मानसिक तौर पर थक जाते हैं। इसलिए हर 60 से 90 मिनट बाद छोटा ब्रेक लें।&nbsp;</div><div><br></div><div>वहीं हेल्दी डाइट और अच्छी नींद भी आपके मेंटल हेल्थ को बेहतर रखने और फैसलों को आसान बनाने में सहायता कर सकते हैं।</div><div><br></div><h2>जानिए कब है ये चिंता का कारण</h2><div>अगर आपको थकान, चिड़चिड़ापन और कोई भी फैसला लेने में मुश्किल होती है औऱ अगर यह समस्या लंबे समय तक बनी रहती है। जिसकी वजह से आपके रोजमर्रा के काम प्रभावित हो रहे हैं। तो आपको सिर्फ डिसीजन फटीग नहीं बल्कि तनाव या मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या भी हो सकती है। इस स्थिति को आपको हल्के में नहीं लेना चाहिए, बल्कि डॉक्टर या एक्सपर्ट से भी कंसल्ट करें।</div>]]></description>
      <pubDate>Thu, 21 May 2026 13:16:12 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/feeling-hangry-in-work-life-this-decision-fatigue-recognize-signs-before-burnout</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Summer Health Guide: शुरू हो रहा है Nautapa, जानें 9 दिनों में हेल्दी रहने के लिए क्या खाएं और क्या नहीं]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/nautapa-heatwave-foods-to-eat-and-avoid-for-health]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>उत्तर भारत में 25 मई से नौतपा की शुरुआत हो रही है, जो 2 जून तक चलेगा। ये नौ दिन साल के सबसे गर्म दिन माने जाते हैं, जिसमें पूरे देश में भारी गर्मी पड़ती है। इस दौरान चलने वाली तेज लू और कड़क धूप का सीधा असर हमारी सेहत पर पड़ता है। इसीलिए, इन नौ दिनों में अपनी सेहत का खास ख्याल रखना बेहद जरूरी है।</div><div><br></div><div>तेज गर्मी में ज्यादा पसीना निकलने के कारण शरीर से पानी और जरूरी मिनरल्स कम हो जाते हैं। इससे कमजोरी, सिरदर्द, डिहाइड्रेशन और पेट की बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है। इस झुलसाने वाली गर्मी से बचने और शरीर को अंदर से ठंडा रखने के लिए हमारी डाइट का सही होना बहुत जरूरी है। आइए जानते हैं कि नौतपा के दौरान हमें क्या खाना चाहिए और किन चीजों से दूरी बनानी चाहिए।</div><div>&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/health/brain-tumor-warning-when-headaches-signal-more" target="_blank">आम Headache और Brain Cancer वाले सिरदर्द में क्या है फर्क? ये 5 Symptoms दिखें तो हो जाएं अलर्ट</a></h3><div><br></div><h2><b>नौतपा में क्या खाएं?</b></h2><div>इस दौरान खुद को स्वस्थ रखने का सबसे पहला नियम यह है कि ऐसा खाना खाएं जो पचने में बिल्कुल हल्का हो और जिसमें पानी की मात्रा ज्यादा हो ताकि शरीर पर ज्यादा भार न पड़े।</div><div><br></div><div><b>पानी से भरपूर फल और सब्जियां</b></div><div>इस मौसम में तरबूज, खरबूजा, खीरा, ककड़ी और संतरा जैसी चीजें ज्यादा से ज्यादा खाएं। इनमें 90% से ऊपर पानी होता है, जो शरीर में पानी की कमी नहीं होने देता। सब्जियों में लौकी, तोरई, कद्दू और टिंडा जैसी हल्की हरी सब्जियां खाएं, जो पेट को आराम देती हैं।</div><div><br></div><div><b>घर के बने देसी ड्रिंक्स</b></div><div>बाजार की कोल्ड ड्रिंक्स या पैकेट वाले जूस की जगह घर के बने पारंपरिक ड्रिंक्स पिएं। दोपहर के खाने में पुदीने और भुने जीरे वाली छाछ या दही जरूर लें, यह पेट को ठंडा रखती है। इसके अलावा कच्चे आम का पन्ना लू से बचाता है, और सत्तू का शरबत शरीर को तुरंत ताकत और ठंडक देता है। नींबू पानी और नारियल पानी भी शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी को पूरा करते हैं।</div><div><br></div><div><b>हल्का और सादा भोजन</b></div><div>दोपहर और रात के खाने में भारी भोजन करने से बचें। इसकी जगह मूंग की दाल की खिचड़ी, दाल-चावल, दलिया या पतली रोटी और हरी सब्जी खाएं। यह खाना आसानी से पच जाता है।</div><div>&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/health/prevent-summer-ear-infections-expert-health-tips" target="_blank">Summer Heat में बढ़ जाता है कान में Infection का खतरा, Doctor से जानें बचने के सेफ उपाय</a></h3><div><br></div><h2><b>नौतपा में किन चीजों से परहेज करें?</b></h2><div>कुछ चीजें ऐसी होती हैं जो गर्मियों में हमारे शरीर का तापमान बढ़ा देती हैं और पाचन को खराब करती हैं।</div><div><br></div><div><b>ज्यादा मसालेदार और तला-भुना खाना</b></div><div>तेज मिर्च-मसाले, समोसे, कचोरी और बहार का तला हुआ खाना पचाने में भारी होता है। इससे पेट में गैस और एसिडिटी बढ़ती है, जिससे आप दिनभर सुस्त महसूस कर सकते हैं।</div><div><br></div><div><b>चाय और कॉफी</b></div><div>चाय और कॉफी में कैफीन होता है, जिससे बार-बार पेशाब आता है और शरीर में पानी की कमी हो सकती है।</div><div><br></div><div><b>ज्यादा मीठी चीजें और शराब</b></div><div>ज्यादा चीनी वाली सॉफ्ट ड्रिंक्स और शराब पीने से भी शरीर का पानी तेजी से सूखता है, इसलिए इनसे दूर रहें।</div><div><br></div><div><b>बासी और खुला हुआ खाना</b></div><div>गर्मियों में तेज तापमान की वजह से खाना बहुत जल्दी खराब हो जाता है। फूड पॉइजनिंग से बचने के लिए हमेशा ताजा बना हुआ खाना ही खाएं।</div><div><br></div><h2><b>सेहत के लिए एक जरूरी सलाह</b></h2><div>नौतपा के दिनों में प्यास लगने का इंतजार न करें। हर आधे-एक घंटे में थोड़ा-थोड़ा पानी पीते रहें। दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे के बीच, जब धूप सबसे तेज होती है, बहुत जरूरी न हो तो घर से बाहर न निकलें। सही खान-पान अपनाकर आप इस भारी गर्मी में भी पूरी तरह सेहतमंद रह सकते हैं।</div>]]></description>
      <pubDate>Thu, 21 May 2026 13:05:10 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/nautapa-heatwave-foods-to-eat-and-avoid-for-health</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[आम Headache और Brain Cancer वाले सिरदर्द में क्या है फर्क? ये 5 Symptoms दिखें तो हो जाएं अलर्ट]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/brain-tumor-warning-when-headaches-signal-more]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>भागदौड़ भारी जिदंगी और गलत लाइफस्टाइल के कारण अक्सर सिरदर्द देखने को मिलता है। तनाव, नींद की कमी, स्क्रीन के ज्यादा इस्तेमाल या काम के दबाव को जिम्मेदार माना जाता है। ये सब सिरदर्द के लिए जिम्मेदार माने जाते हैं। हर बार ऐसा हो, जरुरी नहीं है। एक्सपर्ट बताते हैं कि लगातार होने वाले या असामान्य सिरदर्द को हमेशा नजरअंदाज नहीं करें। कुछ मामलों में यह ब्रेन ट्यूमर का संकेत भी हो सकता है। नॉर्मल सिरदर्द और ब्रेन ट्यूमर की वजह से होने सिरदर्द में क्या अंतर होता है, इस लेख में हम आपको बताते हैं।</div><div><br></div><div><b>लगातार सिरदर्द बनें रहने से ब्रेन ट्यूमर का संकेत</b></div><div><br></div><div>- न्यूरोसर्जन ने बताया है कि ब्रेन ट्यूमर के कारण होने वाला सिरदर्द, नॉर्मल सिरदर्द से अलग होता है। ये धीरे-धीरे बढ़ता है और ये बहुत ज्यादा बार होता है। खासतौर पर सुबह के समय यह काफी तेज महसूस होता है।</div><div><br></div><div>&nbsp;- कई लोगों को सिरदर्द के साथ उल्टी, धुंधला नजर आना, वॉक करने में इंबैलेंस होना, दौरे, हाथ-पैरों में कमजोरी या याद रखने में मुश्किल होता है।</div><div><br></div><div>&nbsp;- ब्रेन ट्यूमर किसी भी आयु वर्ग के लोगों को प्रभावित कर सकता है और इसके सही इलाज के लिए इसके लक्षण जल्दी पता लग जाने चाहिए।</div><div><br></div><div>&nbsp;- सबसे बड़ी मुश्किल यहीं है कि इसके संकेत शुरुआत में समझ नहीं आते हैं और अक्सर इन्हें तनाव, माइग्रेन, साइनस की समस्या या थकान समझ लेते हैं, इसको पहचानने में काफी समय लगता है।</div><div><br></div><div>&nbsp;- डॉक्टर ने बताया है कि हफ्तों तक रहने वाला लगातार सिरदर्द, नींद से जगा देने वाला सिरदर्द, बार-बार उल्टी होना, कई बार दृष्टि में अचानक बदलाव देखने को मिलते हैं या नर्वस सिस्टम से संबंधित बदलावों की तुरंत जांच कराएं। एमआरआई स्कैन जैसे इमेजिंग परीक्षण शुरुआती दौर में पकड़ने में मदद करती है।</div><div><br></div><div>- कुछ सालों से ब्रेन ट्यूमर के इलाज के कई ऑप्शन हो गए हैं। ट्यूमर के प्रकार, आकार और स्थान के आधार पर उपचार में आमतौर पर सर्जरी में शामिल है। इसके अतिरिक्त रेडियोसर्जरी (जीकेआरएस/एसआरएस), विकिरण चिकित्सा, कीमोथेरेपी, टारगेट थेरेपी या और भी कोई तकनीकी से इसका इलाज किया जा सकता है। ऐसे में इससे घबराने की जरुरत नहीं है।&nbsp;</div>]]></description>
      <pubDate>Wed, 20 May 2026 14:54:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/brain-tumor-warning-when-headaches-signal-more</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Health Tips: Diabetes और High Cholesterol का 'Reverse Connection' खतरनाक, बढ़ सकता है Heart Attack का Risk]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/reverse-connection-between-diabetes-and-high-cholesterol-dangerous-increase-risk-of-heart-attack]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>भारत में लगातार डायबिटीज के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। वहीं इसके साथ हाई कोलेस्ट्रॉल की समस्या भी कॉमन होती जा रही है। आज के समय में हाई कोलेस्ट्रॉल और डायबिटीज दो सबसे आम लेकिन खतरनाक बीमारियां हैं। अगर एक ही व्यक्ति में एक साथ यह दोनों बीमारियां पाई जाती हैं, तो शरीर पर इसका असर कई गुना बढ़ जाता है। खासकर इस स्थिति में दिल की बीमारियों का जोखिम तेजी से बढ़ जाता है। हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक हाई कोलेस्ट्रॉल और डायबिटीज का रिश्ता सीधा नहीं बल्कि दोतरफा है। जिसको रिवर्स कनेक्शन कहा जाता है। ऐसे में इन दोनों बीमारियों को अलग-अलग नहीं बल्कि एक साथ समझना और मैनेज करना जरूरी होता है।</div><div><br></div><h2>जानिए क्या है रिवर्स कनेक्शन</h2><div>कोलेस्ट्रॉल और डायबिटीज के बीच का कनेक्शन काफी गहरा है। टाइप 2 डायबिटीज में बॉडी इंसुलिन का सही तरह से उपयोग नहीं कर पाता है। जिसको इंसुलिन रेजिस्टेंस कहा जाता है। इस स्थिति में बॉडी का मेटाबॉलिज्म बिगड़ जाता है और खून में फैट का लेवल असंतुलित हो जाता है। ऐसे में इसका रिजल्ट डायबिटिक डिस्लिपिडेमिया के तौर पर सामने आता है। इसमें ट्राइग्लिसराइड्स और LDL बढ़ जाते हैं, वहीं HDL कम हो जाता है। इस स्थिति में धमनियों में फैट जमा होने का प्रोसेस तेज हो जाता है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/health/prevent-summer-ear-infections-expert-health-tips" target="_blank">Summer Heat में बढ़ जाता है कान में Infection का खतरा, Doctor से जानें बचने के सेफ उपाय</a></h3><div><br></div><div>वहीं दूसरी ओर जब बॉडी में पहले से ही कोलेस्ट्रॉल का लेवल ज्यादा होता है। खासकर मोटापे के साथ तो यह इंसुलिन के काम को भी प्रभावित करता है। जिस कारण इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ता है और धीरे-धीरे ब्लड शुगर लेवल बढ़ने लगता है। यही कारण है कि हाई कोलेस्ट्रॉल वाले लोगों में डायबिटीज का जोखिम ज्यादा होता है। इसके दो-तरफा प्रभाव को ही रिवर्स कनेक्शन कहा जाता है।</div><div><br></div><h2>हाई बीपी से बढ़ता है दिल का खतरा</h2><div>हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक जब ब्लड शुगर लंबे समय तक हाई रहता है, तो यह ब्लड वेसेल्स को नुकसान पहुंचाने लगता है। जिससे LDL कणों की संरचना बदल जाती है और वह छोटे और ज्यादा घने हो जाते हैं। ऐसे LDL कण धमनियों की दीवारों में आसानी से घुल जाते हैं और प्लाक बनाने लगते है। धीरे-धीरे यह प्लाक धमनियों को संकरा कर देता है, जिस कारण ब्लड फ्लो कम हो जाता है। आगे चलकर यह स्थिति स्ट्रोक और हार्ट अटैक की वजह बन सकती है।</div><div><br></div><div>एक रिपोर्ट के मुताबिक टाइप 2 डायबिटीज से पीड़ित लोगों में एलडीएल कोलेस्ट्रॉल का बढ़ा हुआ लेवल दिल से जुड़ी बीमारियों के खतरे को काफी हद तक बढ़ा देता है। जिन लोगों में LDL कोलेस्ट्रॉल अधिक पाया जाता है। उनमें हार्ट डिजीज और मृत्यु का जोखिम ज्यादा देखा गया है। यह जोखिम ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर और अन्य सामान्य कारणों से अलग भी बना रहता है। LDL कोलेस्ट्रॉल खुद में एक जोखिम कारक है। इसलिए डायबिटीज के मरीजों को कोलेस्ट्रॉल लेवल को कंट्रोल रखना बेहद जरूरी है।</div><div><br></div><h2>कोलेस्ट्रॉल बढ़ाता है डायबिटीज का खतरा</h2><div>हेल्थ एक्सपर्ट की मानें, तो कोलेस्ट्रॉल का असर सिर्फ दिल तक ही नहीं बल्कि शरीर की मेटाबॉलिक प्रक्रियाओं को भी प्रभावित करता है। जब बॉडी में खराब कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स का लेवल बढ़ जाता है, तो यह कोशिकाओं में फैट जमा करने लगता है।</div><div><br></div><div>इससे इंसुलिन रिसेप्टर्स प्रभावित होते हैं और वह सही तरीके से काम नहीं करते हैं। जिसकी वजह से ग्लूकोज कोशिकाओं में नहीं जा पाता है और ब्लड शुगर बढ़ने लगता है। वहीं यह स्थिति इंसुनिन रेजिस्टेंस को अधिक बढ़ा देती है।</div><div><br></div><div>हाई कोलेस्ट्रॉल और डायबिटीज का कॉम्बिनेशन शरीर के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। जब यह दोनों समस्याएं एक साथ होती हैं, तो अन्य कई गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। सबसे बड़ा दिल की बीमारियों का खतरा होता है। धमनियों में तेजी से प्लाक जमा होता है, जिससे ब्लड फ्लो बाधिक होता है। इससे स्ट्रोक या हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। वहीं किडनी की बीमारी, नसों को नुकसान और आंखों की समस्या भी हो सकती है।</div><div><br></div><h2>कैसे किया जाता है इलाज</h2><div>दवाइयों के साथ-साथ नियमित जांच और लाइफस्टाइल में बदलाव से डायबिटीज और कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल किया जा सकता है। आमतौर पर डॉक्टर LDL को कम करने के लिए स्टैटिन्स देते हैं, जोकि दिल के खतरे को भी कम करने में सहायता करते हैं। वहीं ब्लड शुगर कंट्रोल के लिए इंसुलिन, मेटफॉर्मिन या अन्य दवाएं दी जाती हैं।</div><div><br></div><div>ऐसे में अगर आपकी फैमिली में हाई कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज या दिल की बीमारी का इतिहास है, तो आपको ज्यादा सतर्क रहना चाहिए। वहीं 30 की उम्र के बाद हर व्यक्ति को साल में कम से कम एक बार ब्लड शुगर और लिपिड प्रोफाइल की जांच जरूर कराना चाहिए। वहीं जो लोग हाई कोलेस्ट्रॉल या डायबिटीज से पीड़ित हैं, उनको नियमित फॉलोअप कराना चाहिए।</div>]]></description>
      <pubDate>Wed, 20 May 2026 13:28:13 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/reverse-connection-between-diabetes-and-high-cholesterol-dangerous-increase-risk-of-heart-attack</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    <item>
      <title><![CDATA[Summer Heat में बढ़ जाता है कान में Infection का खतरा, Doctor से जानें बचने के सेफ उपाय]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/prevent-summer-ear-infections-expert-health-tips]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>गर्मियों के मौसम में कान से संबंधित समस्याएं तेजी से देखने को मिलती हैं। खासकर कान में खुजली, दर्द, भारीपन, पानी भरने जैसा एहसास और इंफेक्शन संबंधित समस्याएं काफी होती है। सबसे बड़ा कारण गर्मी,नमी, ज्यादा पसीना और स्विमिंग जैसी एक्टिविटी मानी जाती है।&nbsp;</div><div><br></div><div><span style="font-size: 1rem;">गर्म वातावरण में बैक्टीरिया और फंगस तेजी से पनपते हैं, जिससे कान का बाहरी हिस्सा आसानी से संक्रमित होता है।&nbsp;</span></div><div><br></div><div><b>स्विमिंग से बढ़ता है कान में इंफेक्‍शन का खतरा</b></div><div><br></div><div>स्विमिंग के समय कान में पानी चले जाना भी इंफेक्शन का बड़ा कारण बनता है। असल में पूल का पानी पूरी तरह से साफ नहीं रहता है, इसमें मौजूद बैक्टीरिया कान के अंदर जाकर इंफेक्शन पैदा कर सकते हैं। अगर पानी लंबे समय तक कान में फंसा रहता है, तब कान के अंदर नमी बनी रहती है और इससे&nbsp; 'स्विमर्स ईयर' यानी मेडिकल भाषा में 'ओटाइटिस एक्सटर्ना' कहा जाता है। यह एक तरह से ईयर कैनाल को प्रभावित करता है। इसमें कान में दर्द, सूजन और सुनने में परेशानी होने लगती है।</div><div><br></div><div><b>पसीना भी बढ़ाता है कान में इंफेक्‍शन</b></div><div><br></div><div>गर्मियों के मौसम में सबसे ज्यादा पसीना आता है, जो कि कानों के लिए नुकसानदायक हो सकता है। पसीने और धूल के कारण कान के आसपास गंदगी जमा होने लगती है, जिससे बैक्टीरिया और फंगस को बढ़ाने का मौका मिलता है। यदि व्यक्ति को बार-बार कान खुजाता है या ईयरबड्स और हेडफोन लंबे समय तक इस्तेमाल करता है, तो इंफेक्शन का खतरा और बना रहता है।&nbsp;</div><div><br></div><div>कुछ लोग कान को साफ करने के लिए ईयरबड्स या नुकीले चीजे डालकर कान को साफ करते हैं, जिससे कान में छोटे-छोटे घाव बन जाते हैं और इंफेक्शन आसानी से फैल सकता है। कान में मौजूद वैक्स प्राकृतिक सुरक्षा का काम करता है, इसलिए इसे बार-बार हटाना भी सही नहीं होता है।&nbsp;</div><div><br></div><div><b>गर्मियों में कान कैसे सुरक्षित रखें</b></div><div><br></div><div>- समर में कानों को सुरक्षित रखने के लिए स्विमिंग के बाद कानों को अच्छी तरह सुखाना जरुरी है।</div><div><br></div><div>&nbsp;- गीले कानों को लंबे समय तक बिल्कुल छोड़ें और जरुरत पड़ने पर साफ तौलिए या ड्रायर की हल्की हवा का इस्तेमाल करें।</div><div><br></div><div>&nbsp;- बहुत ज्यादा पसीना आने पर कान और इसके आसपास की सफाई बनाए रखें।</div><div><br></div><div>&nbsp;- इसके साथ ही तेज आवाज में ईयरफोन का इस्तेमाल कम करें।</div><div><br></div><div>- कोई भी कान में नुकीली चीज न डालें।&nbsp;</div>]]></description>
      <pubDate>Tue, 19 May 2026 17:26:19 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/prevent-summer-ear-infections-expert-health-tips</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    <item>
      <title><![CDATA[Basi Roti With Ghee: आपका Breakfast Habit कितना सेफ? बासी रोटी पर घी लगाकर खाने से पहले जान लें ये जरूरी Health Facts]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/how-safe-breakfast-habit-before-eating-stale-bread-smeared-with-ghee-know-important-health-facts]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>सेहतमंद रहने के लिए हेल्दी नाश्ता बेहद जरूरी होता है। क्योंकि नाश्ते से न सिर्फ दिनभर के कामों के लिए हमारे शरीर को ताकत मिलती है। बल्कि हेल्दी और न्यूट्रिएंट्स से भरपूर नाश्ता स्वस्थ रखने में भी मदद करता है। भारतीय घरों में नाश्ते में कई चीजें बनती हैं। जहां कई लोग नाश्ते में इडली, पोहा और पराठे जैसी चीजें खाते हैं, तो वहीं कुछ लोग सुबह के नाश्ते में चाय और बिस्किट खाते हैं। लेकिन चाय और बिस्किट सुबह के नाश्ते के लिए अच्छा ऑप्शन नहीं है।</div><div><br></div><div>भारतीय घरों में बचे हुए खाने को अलग-अलग तरीके से डाइट में शामिल किया जाता है। कई लोग नाश्ते में बासी रोटी पर घी लगाकर खाते हैं। लेकिन क्या यह वाकई में सही है और क्या इससे सेहत को फायदा होता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको इसका जवाब देने जा रहे हैं।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/health/aloe-vera-juice-health-risks-and-who-should-avoid-it" target="_blank">Aloe Vera जूस का रोज सेवन खतरनाक! इन लोगों के लिए बन सकता है 'Slow Poison'</a></h3><p>&nbsp;</p><h2>बासी रोटी पर घी लगाना फायदेमंद या नुकसानदेह</h2><div>बता दें कि बासी रोटी पर घी लगाकर खाने से पाचन बेहतर होता है और शरीर को एनर्जी मिलती है। लेकिन बासी रोटी पर घी अधिक मात्रा में नहीं लगाना चाहिए। बासी रोटी में नेचुरल फर्मेंटेशन होता है, जिसके कारण इसमें एक ऐसा स्टार्च बनता है, जो फाइबर की तरह काम करता है और डाइजेशन व गट हेल्थ को बेहतर करता है।</div><div><br></div><div>बासी रोटी पर घी लगाने से इसमें ब्यूटिरेट की मात्रा बढ़ जाती है। इससे गट लाइनिंग को आराम मिलता है, इंफ्लेमेशन कम होता है और गुड बैक्टीरिया बढ़ते हैं।</div><div><br></div><div>बासी रोटी में घी लगाकर खाने से ब्लड शुगर लेवल बैलेंस रहता है। शरीर को ताकत मिलती है और ग्लाइसेमिक इंडेक्शन कम होता है। डायबिटीज पेशेंट्स के लिए यह फायदेमंद होता है। इससे वेट लॉस में भी मदद मिलती है।</div><div><br></div><div>घी में वसा मौजूद होती है और घुलनशील विटामिन इम्यूनिटी को मजबूत करते हैं। वहीं न्यूट्रिएंट्स अब्जॉर्बेशन को बढ़ाते हैं। इस कॉम्बिनेशन से आपका पेट लंबे समय तक भरा रहता है और आपको इसे खाने से सुस्ती भी नहीं लगती है।</div><div><br></div><div>हालांकि इसको ज्यादा मात्रा में खाना सही नहीं होता है। क्योंकि ज्यागा घी के सेवन से कैलोरी बढ़ती है। वहीं जिन लोगों का कोलेस्ट्रॉल बढ़ा है, वेट बढ़ा है या जिनको हार्ट से जुड़ी समस्या है। उन लोगों को इसको खाने से बचना चाहिए।</div><div><br></div><div>जिन लोगों का पाचन कमजोर होता है, अगर वह लोग इसका सेवन करते हैं तो उनको एसिडिटी और ब्लोटिंग की समस्या हो सकती है।</div><div><br></div><div>दिन में 1 या 2 बासी रोटी से ज्यादा नहीं खाना चाहिए। वहीं इसमें 1-2 चम्मच घी लगाना चाहिए। अगर आप भी बासी रोटी पर घी लगाकर खाते हैं, तो फिर अन्य चीजों में घी का कम इस्तेमाल करना चाहिए।</div>]]></description>
      <pubDate>Tue, 19 May 2026 13:32:31 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/how-safe-breakfast-habit-before-eating-stale-bread-smeared-with-ghee-know-important-health-facts</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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      <title><![CDATA[Aloe Vera जूस का रोज सेवन खतरनाक! इन लोगों के लिए बन सकता है 'Slow Poison']]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/aloe-vera-juice-health-risks-and-who-should-avoid-it]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>सेहत से लेकर सौंदर्य के लिए Aloe Vera बेहद ही फायदेमंद माना जाता है। यदि आप एलोवेरा जूस पीते हैं, तो कई फायदे मिलते हैं, लेकिन यह सभी के लिए सुरक्षित नहीं होते हैं। एलोवेरा में टीऑक्सीडेंट, विटामिन, मिनरल्स और कूलिंग गुण शरीर को अंदर से हेल्दी रख सकते हैं। जिससे स्किन ग्लो होती है, डाइजेशन में सुधार आता है, शरीर को ठंडक देता और वेट लॉस जैसे फायदे के लिए एलोवेरा अच्छा माना जाता है।</div><div><br></div><div><span style="font-size: 1rem;">लेकिन हर एक हेल्दी चीज हर किसी के लिए सेहतमंद नहीं होती है। बिना किसी जानकारी के रोजाना एलोवेरा लेना शरीर को फायदे की जगह नुकसान भी हो सकता है। खासतौर पर कुछ&nbsp; महिलाओं में यह हार्मोनल बदलाव, डाइजेशन संबंधी परेशानियां या ब्लड शुगर लेवल पर बुरा प्रभाव डालता है। अगर आप जरुरत से ज्यादा एलोवेरा का जूस पीते हैं, तो आपको पेट दर्द, स्त, कमजोरी और डिहाइड्रेशन जैसी समस्याएं झेलनी पड़ सकती हैं। आइए आपको बताते हैं किन लोगों को एलोवेरा का जूस भूलकर भी नहीं पीना चाहिए।</span></div><div><br></div><div><b>लो ब्लड शुगर</b></div><div><br></div><div>एलोवेरा ब्लड शुगर लेवल को कम करता है। ऐसे में जिन महिलाओं का शुगर लेवल पहले से ही कम रहता है, उनके लिए एलोवेरा का ज्यादा सेवन नुकसानदायक हो सकता है। अगर खाली पेट एलोवेरा लेने से कमजोरी, चक्कर आना, थकान, पसीना आना या अचानक एनर्जी लो महसूस होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।</div><div><br></div><div>यदि आप डायबिटीज की दवा ले रहे हैं, तो एलोवेरा दवा के असर को और बढ़ा सकता है, जिससे ब्लड शुगर जरुरत से कम हो सकता है। लो बीपी की समस्या से परेशान महिलाओं को बिना एक्सपर्ट सलाह के एलोवेरा जूस नहीं पीना चाहिए।</div><div><br></div><div><b>प्रेग्‍नेंट महिलाएं</b></div><div><br></div><div><span style="font-size: 1rem;">प्रेग्नेंसी&nbsp; के समय एलोवेरा का सेवन करने से पहले डॉक्टर की राय लेना बेहद जरूरी माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ परिस्थितियों में यह गर्भाशय की गतिविधियों को प्रभावित कर सकता है, जिससे प्रेग्नेंसी में जटिलताओं की आशंका बढ़ सकती है। विशेष रूप से एलोवेरा के लेटेक्स हिस्से का प्रभाव शरीर पर अधिक तीव्र माना जाता है, इसलिए इसका उपयोग सावधानी के साथ करना चाहिए।</span></div><div><br></div><div>प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं का शरीर काफी संवेदनशील हो जाता है, इसलिए किसी भी घरेलू नुस्खे को अपनाने से पहले पूरी सतर्कता बरतनी चाहिए। त्वचा और स्वास्थ्य से जुड़े फायदों को ध्यान में रखते हुए कई महिलाएं एलोवेरा जूस का सेवन करने लगती हैं, लेकिन प्रेग्नेंसी के समय इसे लेने से पहले विशेषज्ञ या डॉक्टर से परामर्श करना आवश्यक माना जाता है।</div><div><br></div><div><b>कमजोर डाइजेशन</b></div><div><br></div><div>जिन लोगों को बार-बार पेट संबंधी दिक्कतें जैसे दस्त, गैस, एसिडिटी या पाचन कमजोर रहने की परेशानी होती है, उन्हें एलोवेरा का उपयोग सावधानी से करना चाहिए। इसमें मौजूद कुछ प्राकृतिक तत्व आंतों की गतिविधियों को तेज कर सकते हैं, जिसके कारण पेट में मरोड़, बार-बार शौच जाने की जरूरत या पाचन बिगड़ने जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। उन लोगों के लिए जरुरत से ज्यादा एलोवेरा का जूस नहीं पीना चाहिए। खासकर खाली पेट एलोवेरा जूस पीने से कई बार पेट में जलन या ऐंठन हो सकती है।</div><div><br></div><div><b>सावधानी</b></div><div><br></div><div>- किसी भी घरेलू उपाय का जरुरत से ज्यादा इस्तेमाल न करें।</div><div><br></div><div>&nbsp;- शरीर में कोई बीमारी या हेल्थ प्रॉब्लम हो तो पहले डॉक्टर की सलाह लें।</div><div><br></div><div>&nbsp;- पहली बार सेवन करने से पहले कम मात्रा में ही पिएं।</div><div><br></div><div>&nbsp;- किसी भी सोशल मीडिया ट्रेंड देखकर किसी भी चीज को रोजाना डाइट में शामिल न करें।</div><div><br></div><div>&nbsp;- शुद्ध और अच्छी क्वालिटी वाला एलोवेरा का इस्तेमाल करें।</div>]]></description>
      <pubDate>Tue, 19 May 2026 11:01:18 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/aloe-vera-juice-health-risks-and-who-should-avoid-it</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Diabetes के मरीजों सावधान! पैर का हल्का दर्द भी हो सकता है Nerve Damage का संकेत]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/diabetic-foot-pain-signals-nerve-damage-pad-risk]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>डायबिटीज के मरीज अक्सर पैरों की समस्या से परेशान रहते हैं, इसको नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ब्लड शुगर की समस्या होने पर मरीज के पैरों में होने वाला हल्का सा दर्द भी किसी बड़ी समस्या का संकेत माना जा सकता है।&nbsp;</div><div><span style="font-size: 1rem;">कई बार लोग डायबिटीज में होने वाले हल्के पैरों के दर्द को सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन शुगर के मरीजों में यह लापरवाही एक गंभीर समस्या का कारण बन सकती है।</span></div><div><br></div><div><span style="font-size: 1rem;"><b>डायबिटीज में पैरों का दर्द को इग्नोर न करें</b></span></div><div><br></div><div><span style="font-size: 1rem;">हेल्थ एक्सपर्ट के अनुसार, डायबिटीज सिर्फ ब्लड शुगर बढ़ने की बीमारी नहीं है, बल्कि यह शरीर की नसों, ब्लड वेसल्स और पैरों को भी गंभीर रूप से प्रभावित कर सकते हैं। इसी कारण डायबिटीज के मरीजो को पैरों में होने वाले हल्के दर्द को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।</span></div><div><br></div><div><b>दर्द नसों को नुकसान पहुंचाने का संकेत</b></div><div><br></div><div>लंबे समय से ब्लड शुगर की समस्या से जूझ रहे हैं, तो इसका असर आपके पैरों की नसों पर भी पड़ता है, जिसे डायबिटिक न्यूरोपैथी के रुप में जाना जाता है। इसके कारण पैरों में झुनझुनाहट, जलन, सुन्नपन या हल्का दर्द महसूस हो सकता है। शुरुआत में ये लक्षण नॉर्मल लग सकते हैं, हालांकि यह बाद में पैरों की सेंसिटिविटी कम हो जाती है। कई बार तो मरीज को चोट लगने पर कुछ महसूस नहीं होता है।&nbsp;</div><div><br></div><div><b>खराब ब्लड सर्कुलेशन हो सकता है कारण</b></div><div><br></div><div>डायबिटीज का असर पैरों की नसों और रक्त वाहिकाओं पर भी पड़ता है, जिससे पैरों में ब्लड सर्कुलेशन सही तरीके से नहीं हो पाता। इस समस्या को पेरिफेरल आर्टरी डिजीज (PAD) कहा जाता है। इसकी वजह से व्यक्ति को चलते समय पैरों में दर्द महसूस हो सकता है, पैरों में कमजोरी और सुन्नपन आ सकता है, पैर अक्सर ठंडे रहने लगते हैं और चोट या घाव भरने में काफी समय लग सकता है। यदि इस स्थिति पर समय रहते ध्यान न दिया जाए, तो यह आगे चलकर गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती है।</div><div><br></div><div><b>छोटे घाव भी बन सकते हैं खतरनाक</b></div><div><br></div><div>डायबिटीज के मरीजों में पैरों में मामूली कट, छाले या स्किन फटना भी गंभीर इंफेक्शन का कारण बन सकता है। खराब ब्लड सर्कुलेशन और नसों की कमजोरी के कारण घाव जल्दी से रिकवर नहीं होता है। जिससे यह समस्या अल्सर, टिश्यू डैमेज या गैंग्रीन तक पहुंच सकती है।</div><div><br></div><div><b>पैरों से जुड़े किन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए?</b></div><div><br></div><div>डायबिटीज से पीड़ित मरीजों के पैरों में दर्द, जलन, सूजन, सुन्नपन, रेडनेस या घाव दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर दिखाएं। खासकर रात के समय बढ़ने वाला दर्द नर्व डैमेज का संकेत हो सकता है।</div><div><br></div><div><b>डायबिटीज में पैरों की देखभाल कैसे करें</b></div><div><br></div><div><span style="font-size: 1rem;">डायबिटीज से पीड़ित मरीजों को रोज अपने पैरों की जांच करनी चाहिए। सही फुट वियर पहनना चाहिए। नंगे पैर चलने से बचना चाहिए और ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल रहता है। इसके साथ ही नियमित रुप से एक्सरसाइज और हेल्दी लाइफस्टाइल भी पैरों को सुरक्षित रखने में मदद करता है।&nbsp;</span></div>]]></description>
      <pubDate>Mon, 18 May 2026 17:21:52 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/diabetic-foot-pain-signals-nerve-damage-pad-risk</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Health Tips: Belly Fat से हैं परेशान? सुबह खाली पेट पिएं ये Magic Drink, हफ्तेभर में दिखेगा असर]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/troubled-by-belly-fat-drink-this-magic-drink-on-an-empty-stomach-in-morning]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>बैली फैट न सिर्फ खूबसूरती को खराब करती है, बल्कि कई तरह की बीमारियों भी होती हैं। ऐसे में महिलाएं बैली फैट को कम करने के लिए आसान और नेचुरल उपायों की तलाश में रहती हैं। इसको ध्यान में रखते हुए आज हम आपको एक ऐसी ड्रिंक के बारे में बताने जा रहे हैं, जोकि सब्जा सीड्स से बना है। अगर सही मात्रा और सही तरीके से इसका सेवन किया जाता है, तो वेट लॉस, डाइजेशन को सुधारने और पेट की चर्बी को कम करने में मदद करता है। जो लोग प्राकृतिक तरीकों से अच्छी सेहत पाना चाहते हैं, उनको इस ड्रिंक का सेवन करना चाहिए। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको इस ड्रिंक को बनाने, सही तरीके से सेवन करने और फायदों के बारे में बताने जा रहे हैं।</div><div><br></div><h2>सामग्री</h2><div>सब्‍जा सीड्स- 1 चम्‍मच (लगभग 5 ग्राम)</div><div>नींबू का रस- 1 चम्मच</div><div>पानी- 1 गिलास (200-250 मिली)</div><div>शहद- 1/2 चम्मच (ऑप्शनल)</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/health/fix-light-periods-with-this-herbal-tea-health-remedy" target="_blank">Periods में 2 दिन से भी कम होती है Bleeding? इस Magical Tea से सुधरेगा Flow</a></h3><div><br></div><h2>ऐसे बनाएं ड्रिंक</h2><div>इस ड्रिंक को बनाने के लिए 1 चम्मच सब्जा सीड्स ले लें।</div><div>फिर आधा कप पानी में 10-15 मिनट के लिए भिगो दें।</div><div>जब यह फूलकर जेल जैसी परत बना लेंगे तो इसमें नींबू का रस, शहद और पानी मिलाएं।</div><div>इसको अच्छे से मिक्स करें और फौरन पी लें।</div><div><br></div><h2>जानिए ड्रिंक पीने का सही समय</h2><div>अगर आप भी बैली फैट कम करना चाहती हैं, तो आपको इस ड्रिंक का सेवन सुबह खाली पेट करना चाहिए। अगर आप ओवरइटिंग को कंट्रोल करना चाहती हैं, तो इसको खाने से 30 मिनट पहले ले सकती हैं।</div><div><br></div><h2>बैली फैट कैसे कम करती है ये ड्रिंक</h2><div>सब्जा में हाई फाइबर भरपूर होता है, जब यह पानी सोखकर फूलता है, जिससे पेट भरा-भरा रहता है।</div><div>इससे भूख जल्दी नहीं लगती है और क्रेविंग भी कम होती है।</div><div>इस ड्रिंक का सेवन करने से ब्लड शुगर अचानक से नहीं बढ़ता है और साथ ही फैट स्टोर भी कम होता है।</div><div>यह ड्रिंक बॉडी की सूजन और गर्मी को कम करता है।</div><div>इसमें कैलोरी इनटेक कम होता है और मेटाबॉलिज्म भी बेहतर होता है।</div><div><br></div><h2>क्या हैं ड्रिंक के फायदे</h2><div>इस ड्रिंक के सेवन से पेट की चर्बी कम होती है।</div><div>इससे पाचन बेहतर होने के साथ ब्लोटिंग कम होती है।</div><div>इस ड्रिंक के सेवन से भूख और इमोशनल ईटिंग भी कंट्रोल में रहती है।</div><div>बॉडी डिटॉक्स में भी सपोर्ट करता है।</div><div>यह ड्रिंक शरीर को ठंडा और हाइड्रेटड रहता है।</div><div>यह ड्रिंक स्किन में भी निखार लाता है।</div><div><br></div><h2>जानिए ड्रिंक गलत तरीके से लेने के नुकसान</h2><div>ज्यादा लेने से गैस, भारीपन या दस्त जैसी समस्याएं हो सकती हैं।</div><div>सूखे बीज का सेवन करने से इसके गले में फंसने का खतरा होता है।</div><div>इस ड्रिंक के ओवरयूज से पोषक तत्वों का अवशोषण धीमा हो सकता है।</div><div><br></div><h2>बरते ये सावधानी</h2><div>लो BP या डाइजेशन से जुड़ी गंभीर समस्या से परेशान लोगों को इस ड्रिंक को पीने से बचना चाहिए। वहीं प्रेग्नेंसी में बिना डॉक्टर की सलाह नहीं लेना चाहिए।</div>]]></description>
      <pubDate>Mon, 18 May 2026 12:32:19 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/troubled-by-belly-fat-drink-this-magic-drink-on-an-empty-stomach-in-morning</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Periods में 2 दिन से भी कम होती है Bleeding? इस Magical Tea से सुधरेगा Flow]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/fix-light-periods-with-this-herbal-tea-health-remedy]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>महिलाओं में हर महीने में पीरियड्स का आना एक सामान्य प्रक्रिया है। पीरियड्स के दौरान फ्लो सही से फ्लो आना काफी जरुरी है। यदि आप फ्लो बहुत कम हो या बहुत ज्यादा आए, तो इसको भूलकर भी नजरअंदाज न करें। वैसे तो पीरियड्स में 3-5 दिन फ्लो आना नॉर्मल है। यदि आपको इससे ज्यादा दिनों तक ब्लीडिंग हो रही है या फ्लो बहुत कम या बहुत ज्यादा आ रहा है, तो आपको इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।&nbsp;</div><div><br></div><div><span style="font-size: 1rem;">हार्मोनल इंबैलेंस, स्ट्रेस और भी कई सारी दिक्कतों का इशारा हो सकता है। यदि आपको इन दिनों कम फ्लो आता है, तो इस देसी चाय को डाइट में शामिल कर सकते हैं, आइए आपको बताते हैं इसे कैसे बनाएं।</span></div><div><br></div><div><b>पीरियड फ्लो को सुधारने में मदद करेगी यह चाय</b></div><div><br></div><div>&nbsp;- शरीर में जब एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन का लेवल कम-ज्यादा होने लगे, तो उसकी वजह से पीरियड्स और रिप्रोडक्टिव हेल्थ पर असर पड़ता है।</div><div><br></div><div>&nbsp;- इन हार्मोन्स संतुलन बिगड़ने से पीरियड फ्लो और साइकिल पर काफी असर पड़ता है। ऐसे में कई लड़कियों को पीरियड में ब्लड बहुत ज्यादा या बहुत कम आने लगता है।</div><div><br></div><div>&nbsp;- यह चाय ब्लड सर्कुलेशन को बूस्ट करती है और इससे हार्मोन्स भी मैनेज होते हैं।</div><div><br></div><div>&nbsp;- जीरा डाइजेशन को सुधारता है और इससे ब्लोटिंग कम होती है। इससे साइकलि के दौरान आपको हल्का महसूस होता है और पाचन भी बेहतर होता है। यह क्रैम्प्स को कम कर सकता है।</div><div><br></div><div>&nbsp;- अजवाइन शरीर को गर्म रखती है और इससे पेट की मांसपेशियों को आराम मिलता है। अदरक में एंटी-इंफ्लेमेटेरी प्रॉपर्टीज होती है, जो शरीर को गर्माहट मिलती है और दर्द कम होता है। इससे सर्कुलेशन में सुधार होता है।</div><div><br></div><div>&nbsp;- केसर के धागे मूड को सुधारने का काम करते हैं। इससे हार्मोन्स बैलेंस होते हैं।</div><div><br></div><div><b>कैसे बनाएं यह देसी चाय</b></div><div><br></div><div>&nbsp;- सबसे पहले एक पैन में लगभग 2 कप पानी डालें।</div><div><br></div><div>&nbsp;- अब 1 टीस्पून जीरा और 1 टीस्पून अजवाइन डालें।</div><div><br></div><div>&nbsp;- इसमें अदरक का एक छोटा टुकड़ा घिसकर डालें।</div><div><br></div><div>&nbsp;- इसमें केसर के कुछ धागे डालें।</div><div><br></div><div>&nbsp;- अब इसमें 1 टीस्पून गुड़ मिलाएं।</div><div><br></div><div>&nbsp;- इसे छान लें और इसे आप दिन में 1 बार पी सकती हैं।</div>]]></description>
      <pubDate>Sun, 17 May 2026 17:55:27 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/fix-light-periods-with-this-herbal-tea-health-remedy</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[हर समय कुछ खाने का मन क्यों करता है? जानिए छिपी हुई वजह]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/the-hidden-reason-of-feeling-hungry-all-day-in-hindi]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>दिन की शुरुआत से लेकर अंत तक, हम सभी कुछ ना कुछ खाते हैं। ब्रेकफास्ट में भरपेट खाकर ही घर से निकलते हैं। लेकिन कुछ देर बाद ही कुछ ना कुछ खाने का मन करने लगता है ना? ऐसा हम सभी के साथ कभी ना कभी हुआ ही है। ऐसा नहीं है कि हमें उस समय जोर से भूख लगी होती है, बस कुछ खाने की इच्छा होती है। ऐसे में हम कुछ भी हल्का-फुल्का व टेस्टी खाना चाहते हैं। लेकिन क्या आपने कभी यह सोचा है कि आखिर ऐसा क्यों होता है।</div><div><br></div><div>कई बार इसके पीछे शरीर के ऐसे छिपे कारण होते हैं जिन पर लोग ध्यान ही नहीं देते। कुछ लोग पूरा दिन खाते रहते हैं, फिर भी वह संतुष्टि का अहसास नहीं होता। अगर आपके साथ लगातार ऐसा हो रहा है, तो इसके पीछे कई वजहें हो सकती हैं। तो चलिए जानते हैं इस लेख में-</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/health/high-bp-becoming-silent-killer-learn-about-its-symptoms-and-preventive-measures" target="_blank">Health Tips: 'Silent Killer' बन रहा High BP, जानें ये Symptoms और बचाव के उपाय</a></h3><h2>पेट नहीं, दिमाग से भूख लगना</h2><div>सुनने में यह थोड़ा अजीब लगे, लेकिन हम सभी ने कभी ना कभी इसे एक्सपीरियंस किया ही है। हर बार खाने की इच्छा होने का मतलब यह नहीं होता कि शरीर को सच में भोजन चाहिए। बस कभी-कभी बहुत ज्यादा थकान, तनाव, अकेलापन, चिंता या बोरियत होने पर भी हम अच्छा महसूस करने के लिए कुछ खाना चाहते हैं।&nbsp;</div><div><br></div><h2>प्रोटीन की कमी</h2><div>अगर आपके खाने में प्रोटीन की कमी है तो ऐसे में बार-बार कुछ खाने की इच्छा होना स्वाभाविक है। दरअसल, प्रोटीन पेट को लंबे समय तक भरा हुआ महसूस कराता है। इसलिए हर किसी को अपनी डाइट में प्रोटीन रिच फूड्स जैसे अंडे, पनीर, दाल, दही, स्प्राउट्स आदि को जरूर शामिल करना चाहिए।&nbsp; &nbsp;</div><div><br></div><h2>पोषण की कमी होना</h2><div>पेट भरने का मतलब यह बिल्कुल भी नहीं है कि आप कुछ भी खा लो। अक्सर लोग ऐसी चीजें खाते हैं जो हाई कैलोरी होती हैं, लेकिन उनमें पोषण नहीं होता है। चिप्स, पैकेट स्नैक्स, बेकरी आइटम्स, इंस्टेंट नूडल्स खाने से कुछ देर के लिए पेट तो भर जाता है, लेकिन शरीर को वह पोषण नहीं मिल पाता। जिसकी वजह से कुछ देर बाद ही फिर से कुछ ना कुछ खाने की इच्छा पैदा हो जाती है।</div><div><br></div><h2>पानी की कमी को भूख समझना&nbsp;</h2><div>यह एक ऐसी गलती है, जो अक्सर लोग अनजाने में कर बैठते हैं। अक्सर जब शरीर को पानी की जरूरत होती है, तो हमें ऐसा अहसास होता है, जैसे भूख लगी हो। खासकर, गर्मियों में, व्यायाम के बाद, ज्यादा चाय या कॉफी पीने पर कुछ ना कुछ खाने का मन करने लगता है। ऐसे में अगर आपको भी अचानक भूख लगे तो पहले एक गिलास पानी पीकर कुछ मिनट इंतजार करें।</div><div><br></div><div>- मिताली जैन</div>]]></description>
      <pubDate>Sun, 17 May 2026 11:12:01 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/the-hidden-reason-of-feeling-hungry-all-day-in-hindi</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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      <title><![CDATA[Health Tips: 'Silent Killer' बन रहा High BP, जानें ये Symptoms और बचाव के उपाय]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/high-bp-becoming-silent-killer-learn-about-its-symptoms-and-preventive-measures]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>वैश्विक स्तर पर हाइपरटेंशन तेजी से बढ़ती गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है। भारत सहित दुनिया के तमाम देशों में हर साल लाखों लोगों में हाई बीपी की समस्या का निदान किया जाता है। वही भारत में भी एक्सपर्ट इस बढ़ते हुए खतरे को लेकर लोगों को सावधारी बरतने की सलाह देते हैं। आंकड़ों को देखे तो करीब 33% शहरी और 25% ग्रामीण आबादी हाई ब्लड प्रेशर की समस्या से ग्रस्त हैं। वहीं गंभीर बात यह है कि 60-70 फीसदी लोगों को जब तक समस्या ज्यादा न बढ़ जाए, तब तक इसके बारे में पता नहीं चल पाता है कि वह हाइपरटेंशन के शिकार हैं।</div><div><br></div><div>इस बीमारी के बारे में लोगों को जागरुक करने के लिए हर साल 17 मई को वर्ल्ड हाइपरटेंशन डे मनाया जाता है। हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक यह समस्या बड़ों से लेकर बूढ़ों तक किसी को भी हो सकती है। ऐसे में इसके बारे में जानना और बचाव के उपाय करना बेहद जरूरी होता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको हाइपरटेंशन के लक्षण, कारण और बचाव के बारे में बताने जा रहे हैं।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/health/gastro-expert-how-sitting-causes-your-acid-reflux" target="_blank">पेट में Gas और जलन से हैं परेशान? खाने को नहीं, अपने Sitting पोस्चर को बदलें, जानें Expert राय</a></h3><div><br></div><h2>हाई बीपी की समस्या</h2><div>धमनी की दीवारों के खिलाफ अगर लंबे समय तक ब्लड के बढ़े हुए दबाव की स्थिति को हाई बीपी माना जाता है। आपका हृदय कितना ब्लड पंप करता है और धमनियों में ब्लड सर्कुलेशन के प्रतिरोध की मात्रा कितनी है। इस आधार पर ब्लड प्रेशर के स्तर का निर्धारण किया जाता है। जितनी ज्यादा धमनियों की संकीर्णता होगी, उतना ज्यादा ब्लड आपके हृदय द्वारा पंप किया जाता है, ब्लड प्रेशर उतना ही ज्यादा होता है। ब्लड प्रेशर का 120/80 मिमीएचजी स्तर को सामान्य माना जाता है।</div><div><br></div><h2>बीपी बढ़ने की वजह</h2><div>इस बारे में सभी लोगों का जानना जरूरी है कि आखिर ब्लड प्रेशर क्यों बढ़ जाता है। फैमिली हिस्ट्री, उम्र, लाइफस्टाइल और अनहेल्दी डाइट, सोडियम का ज्यादा सेवन, शराब-धूम्रपान और मोटापा जैसी प्रमुख आदतें ब्लड प्रेशर के प्रमुख कारणों के रूप में जानी जाती हैं।</div><div><br></div><div>वहीं कुछ लोगों में अंतर्निहित स्वास्थ्य स्थितियों की वजह से हाई ब्लड प्रेशर हो सकता है। इसमें एडर्नल ग्लैंड ट्यूमर, किडनी की बीमारियां, रक्त वाहिकाओं में दोष और कुछ दवाओं के ज्यादा सेवन जैसी समस्या को भी इसके लिए जिम्मेदार माना जाता है।</div><div><br></div><h2>ऐसे करें हाई ब्लड प्रेशर की पहचान</h2><div>बहुत ज्यादा पसीना आना।</div><div>बेचैनी महसूस होना और चिंता या तनाव की स्थिति बने रहना</div><div>नींद की समस्या होना।</div><div>चिड़चिड़ापन होना या चक्कर आना।&nbsp;</div><div><br></div><h2>हाई बीपी का इलाज</h2><div>हाई ब्लड प्रेशर उम्र भर बनी रहने वाली समस्या है। इसके इलाज के रूप में बीपी को कंट्रोल करने पर ध्यान देने की जरूरत है। लाइफस्टाइल में बदलाव से हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल किया जा सकता है। लेकिन जिन लोगों का ब्लड प्रेशर ज्यादा बढ़ा रहता है, उनको सामान्य उपायों राहत नहीं मिल पाता है। उनको डॉक्टर्स दवाएं दे सकते हैं, जिससे हृदय रोगों के जोखिम से बचा जा सकता है।</div><div><br></div><div>हालांकि बिना डॉक्टर की सलाह के खुद से इन दवाओं को बंद नहीं करना चाहिए। इससे अचानक बीपी बढ़ने और गंभीर स्थितियों में हार्ट अटैक का खतरा हो सकता है। वहीं दवाओं के साथ बीपी को कंट्रोल करने वाले उपायों पर ध्यान देना जरूरी है।</div><div><br></div><h2>बीपी कंट्रोल करने के तरीके</h2><div>लाइफस्टाइल और डाइट में बदलाव करके ब्लड प्रेशर को कंट्रोल किया जा सकता है। जिन लोगों का बीपी अक्सर बढ़ा रहता है या फिर जिनको इसका खतरा होता है। उन लोगों को अपनी डाइट में सोडियम की मात्रा कम रखना चाहिए। सोडियम का ज्यादा सेवन करने से रक्तचाप बढ़ सकता है।</div><div><br></div><div>इसके अलावा ज्यादा शराब और धूम्रपान करने वाले लोगों में भी इसका ज्यादा खतरा होता है। इन चीजों से दूरी बनानी चाहिए। वहीं नियमित व्यायाम की आदत से भी ब्लड प्रेशर को आसानी से कंट्रोल में किया जा सकता है।</div>]]></description>
      <pubDate>Sat, 16 May 2026 13:27:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/high-bp-becoming-silent-killer-learn-about-its-symptoms-and-preventive-measures</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[पेट में Gas और जलन से हैं परेशान? खाने को नहीं, अपने Sitting पोस्चर को बदलें, जानें Expert राय]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/gastro-expert-how-sitting-causes-your-acid-reflux]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>खराब लाइफस्टाइल और गलत खान के कारण अक्सर लोग पेट संबंधित समस्याओं से परेशान रहते हैं। एसिडिटी की समस्या लगातार परेशान करती है। एसिड रिफ्लक्स के लिए मसालेदान खाना, चाय-कॉफी या खराब खानपान को जिम्मेदार माना जाता है। हालांकि आप नहीं जानते हैं कि आपकी गलत करीके से बैठने की आदत और खराब पोश्चचर भी इसकी बड़ी वजह हो सकती है? काफी लंबे समय तक झुककर बैठना, स्क्रीन के सामने स्लाउचिंग करना और खाना खाने के तुरंत बाद लेट जाना पेट में बनने वाले एसिड को ऊपर की तरफ धकेल सकता है। ऐसे में आपके सीने में जलन, खट्टी डकारें और पेट में भारीपन जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।</div><div><br></div><div><b>क्या कहते हैं हेल्थ एक्सपर्ट?</b></div><div><br></div><div>हेल्थ एक्सपर्ट ने बताया है कि हमारे शरीर में फूड पाइप और पेट के बीच नेचुरल बैरियर होता है, जो पेट के एसिड को ऊपर आने से रोकता है। हालांकि गलत पोश्चर पेट पर अतिरिक्त दबाव डालता है, जिससे यह सिस्टम कमजोर पड़ने लगता है और एसिड रिफ्लक्स की समस्या बढ़ सकती है।</div><div><br></div><div><b>झुककर बैठना कैसे बढ़ाता है एसिडिटी?</b></div><div><br></div><div><span style="font-size: 1rem;">आजकल लोग घंटों तक लैपटॉप या मोबाइल के सामने बैठे रहते हैं। इस अवधि में शरीर आगे की ओर झुका रहता है और पेट की समस्या दबने लगती है। इससे पेट के अंदर दबाव बढ़ जाता है और एसिड ऊपर की ओर आने लगता है। अक्सर ज्यादा मसालेदार खाना खाए बिना भी सिर्फ गलत तरीके से बैठने के कारण एसिडिटी महसूस होने लगती है।</span></div><div><br></div><div><b>डायफ्राम और सांस लेने का कनेक्शन</b></div><div><br></div><div>डॉक्टर के मुताबिक, डायफ्राम केवल सांस लेने में मदद नहीं करता, बल्कि यह एसिड रिफ्लक्स को रोकने वाले सिस्टम का भी अहम हिस्सा है। खराब पोश्चचर डायफ्राम की मूवमेंट को सीमित कर देता है। ऐसे में बेली ब्रीदिंग या डायफ्रामेटिक ब्रीदिंग एक्सरसाइज इस मसल को मजबूत बनाकर राहत दे सकता है।</div><div><br></div><div><b>खाने के तुरंत बाद लेटना क्यों है नुकसानदायक?</b></div><div><br></div><div>यदि आप खाना खाने के तुरंत बाद लेट जाते हैं, तो ग्रेविटी का सपोर्ट खत्म हो जाता है। इससे पेट का एसिड आसानी से ऊपर की तरफ आने लगता है। इसी कारण से रात में एसिडिटी और सीने में जलन की समस्या ज्यादा बढ़ जाती है। एक्सपर्ट भी बताते हैं खाना खाने के बाद कुछ समय तक सीधे बैठें या हल्की वॉक करें। रात को सोते समय सिर को थोड़ा ऊंचा रखकर सोना भी फायदेमंद हो सकता है।</div><div><br></div><div><b>सिर्फ दवा नहीं, लाइफस्टाइल सुधारना भी जरूरी</b></div><div><br></div><div>एसिडिटी सिर्फ एक केमिकल समस्या मानी जाती है, जो कि गलत है, कई मामलों में यह बॉडी मैकेनिक्स और लाइफस्टाइल से&nbsp; भी जुड़ी होती है। सही तरीके से बैठना, स्क्रीन टाइम के दौरान पोश्चचर सुधारना, डीप ब्रीदिंग की आदत डालना और खाना खाने तुरंत बाद न लेटना एसिड रिफ्लक्स को कम करने में मदद करेगा।&nbsp;</div>]]></description>
      <pubDate>Sat, 16 May 2026 11:33:11 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/gastro-expert-how-sitting-causes-your-acid-reflux</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[World Hypertension Day 2026: युवाओं को क्यों घेर रहा High Blood Pressure? ये 5 Lifestyle Mistakes हैं वजह]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/world-hypertension-day-2026-lifestyle-mistakes-raising-your-blood-pressure]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में मोटापा, डायबिटीज और दिल की बीमारियां तो जैसे आम बात हो गई हैं। लेकिन हाई ब्लड प्रेशर भी खामोश दुश्मन की तरह बहुत तेजी से हमारे बीच अपनी जगह बना रहा है। पहले यह समस्या सिर्फ बड़े-बुजुर्गों में देखी जाती थी, लेकिन आज युवा भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि हमारा अनहेल्दी लाइफस्टाइल और हर वक्त का स्ट्रेस इसके सबसे बड़े कारण हैं। इसी खतरे के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल 17 मई को 'वर्ल्ड हाइपरटेंशन डे' मनाया जाता है।</div><div><br></div><h2><b>हाई ब्लड प्रेशर होने के कारण क्या?</b></h2><div><b>सुस्त लाइफस्टाइल</b></div><div>आजकल हम घंटों एक जगह बैठकर काम करते हैं और देर रात तक मोबाइल में खोए रहते हैं। फिजिकल एक्टिविटी कम होने की यह आदत धीरे-धीरे हमारी ब्लड वेसेल्स और दिल पर दबाव डालने लगती है। इसके साथ ही जंक फूड, जरूरत से ज्यादा नमक, प्रोसेस्ड फूड और मीठा खाने का शौक इस समस्या को और ज्यादा गंभीर बना रहा है।</div><div><br></div><div><b>लगातार बढ़ता तनाव</b></div><div>लगातार स्ट्रेस लेना और पूरी नींद न लेना भी हाई बीपी की एक बड़ी वजह है। जब हमारा शरीर हर वक्त तनाव में रहता है, तो स्ट्रेस हार्मोन्स का लेवल बढ़ जाता है, जिसका सीधा बुरा असर हमारी दिल की धड़कनों और ब्लड प्रेशर पर पड़ता है। इसके अलावा स्मोकिंग, शराब और कैफीन का ज्यादा सेवन भी इस खतरे को कई गुना बढ़ा देता है।</div><div><br></div><div><b>बढ़ता वजन</b></div><div>शरीर का बढ़ता वजन, खासकर पेट के आसपास जमा फैट, ब्लड प्रेशर बढ़ने का मुख्य कारण है। इसके अलावा, कम उम्र में ही डायबिटीज, थायरॉयड या हार्मोनल असंतुलन जैसी परेशानियां भी बीपी के लेवल को बिगाड़ देती हैं।</div><div>&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/health/ayurvedic-lemon-shot-for-digestion-and-headaches" target="_blank">पेट की Acidity और Headache का रामबाण इलाज है ये Lemon Shot, आयुर्वेद का चमत्कारी नुस्खा</a></h3><div><br></div><h2><b>हाइपरटेंशन के लक्षण</b></h2><div>अक्सर सिर में भारीपन, चक्कर आना या बेवजह की थकान महसूस होना इसके शुरुआती संकेत हो सकते हैं। थोड़ा सा चलने या काम करने पर ही सांस का फूलना या सीने में हल्का दबाव महसूस होना। कभी-कभी आंखों के सामने धुंधलापन छा जाना, नाक से खून आना या दिल की धड़कन का अचानक तेज हो जाना।</div><div><br></div><h2><b>बिना आहट के कैसे नुकसान पहुंचा रहा हाई ब्लड प्रेशर?</b></h2><div>हाई ब्लड प्रेशर के साथ सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि कई बार इसके कोई लक्षण नजर नहीं आते, इसलिए इसे साइलेंट किलर भी कहा जाता है। हम खुद को फिट समझकर टेस्ट नहीं करवाते, जबकि यह अंदर ही अंदर शरीर को नुकसान पहुंचाता रहता है। हालांकि सिरदर्द, चक्कर आना, थकान या सांस फूलना जैसे संकेत कभी-कभी मिल सकते हैं, लेकिन इन्हें नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है।</div><div>&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/health/pcos-renamed-pmos-a-major-shift-in-womens-health" target="_blank">Medical Science में बड़ा बदलाव, PCOS अब हुआ PMOS! जानिए नाम बदलने की असली वजह</a></h3><div><br></div><h2><b>कैसे रखें खुद को सुरक्षित?</b></h2><div>अपनी सेहत को वापस पटरी पर लाना उतना भी मुश्किल नहीं है। बस कुछ छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखें। रोजाना कम से कम 40 मिनट की वॉक या एक्सरसाइज के लिए समय निकालें। शरीर और दिमाग को आराम देने के लिए पर्याप्त और गहरी नींद लें। अपनी डाइट में फल, हरी सब्जियां और साबुत अनाज जैसी हेल्दी चीजों को शामिल करें।</div>]]></description>
      <pubDate>Fri, 15 May 2026 16:21:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/world-hypertension-day-2026-lifestyle-mistakes-raising-your-blood-pressure</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[पेट की Acidity और Headache का रामबाण इलाज है ये Lemon Shot, आयुर्वेद का चमत्कारी नुस्खा]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/ayurvedic-lemon-shot-for-digestion-and-headaches]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>अक्सर सिरदर्द की वजह केवल तनाव नहीं बल्कि डाइजेशन भी हो सकता है। गर्मी के मौसम में बार-बार डाइजेशन, गैस और ब्लोटिंग होती रहती है। असल में आयुर्वेद में पेट और ब्रेन के कनेक्शन को महत्वपूर्ण माना गया है। यह एकदम आसान Ayurvedic Lemon Shot डाइजेंशन को सपोर्ट करने और सिरदर्द को कम करने में मदद करेगा। आइए आपको बताते हैं लेमन शॉट के बारे में-</div><div><br></div><div><b>लेमन शॉट रेसिपी के लिए सामग्री</b></div><div><br></div><div>-नींबू का रस- आधा चम्‍मच</div><div>-काला नमक- 1 चुटकी</div><div>-हींग- 1 चुटकी</div><div>-काली मिर्च पाउडर- 1 चुटकी</div><div><br></div><div>इन सभी चीजों को हल्के गुनगुने पानी में मिलाकर खाने से पहले पिएं।</div><div><br></div><div><span style="font-size: 1rem;"><b>लेमन शॉट के फायदे&nbsp;</b></span></div><div><br></div><div>- डाइजेशन को इम्प्रूव करने में मदद करता है।</div><div><br></div><div>&nbsp;- गैस और ब्लोटिंग कम करने में सहायक होता है।</div><div><br></div><div>&nbsp;- पेट से जुड़े सिरदर्द ट्रिगर्स को शांत करता है।</div><div><br></div><div>&nbsp;- शरीर को हल्का और एक्टिव फील होगा।&nbsp;</div><div><br></div><div><b>ब्लोटिंग से होने वाले सिरदर्द में कैसे मदद करती हैं ये चीजें?</b></div><div><br></div><div>&nbsp;गर्मियों अधिक खाने से डाइजेशन की समस्या उत्पन्न हो जाती है। गैस और ब्लोटिंग की वजह से सिर भारी रहता है और सिरदर्द महसूस हो सकता है। ऐसे में यह लेमन शॉट डाइजेशन को सपोर्ट करके राहत मिल सकती है।</div><div><br></div><div><b>&nbsp;- नींबू का रस-</b> नींबू पाचन एंजाइम्स को एक्टिव करता है। यह खाने को बेहतर तरीके से पचने में मदद करता है और पेट में भारीपन कम हो सकता है।</div><div><br></div><div><b>&nbsp;- काला नमक-</b> इसमें पाए जाने वाला मिनरल्स गैस और अपच से राहत दिलाते हैं। यह ब्लोटिंग की समस्या को कम कर सकता है।</div><div><br></div><div><b>&nbsp;- हींग-</b> हींग को आयुर्वेद में गैस, पेट दर्द और ब्लोटिंग कम करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। यह ब्लोटिंग की समस्या को कम करती है।</div><div><br></div><div><b>&nbsp;- काली मिर्च पाउडर-</b> काली मिर्च डाइजेशन को बेहतर बनाने और मेटाबॉलिज्म को सपोर्ट करने में सहायक है। इससे पेट हल्का महसूस होती है। इससे ब्लोटिंग और गैस कम होती है, तब इससे जुड़े सिरदर्द और भारीपन में भी राहत महसूस होगी।</div>]]></description>
      <pubDate>Fri, 15 May 2026 14:22:27 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/ayurvedic-lemon-shot-for-digestion-and-headaches</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Health Tips: ADHD से जूझ रहा बच्चा रातभर रहता है बेचैन? समझिए Sleep और Brain का पूरा कनेक्शन]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/child-with-adhd-remain-restless-throughout-night-understand-connection-between-sleep-and-brain]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>आमतौर पर ADHD के लक्षण बच्चों में 3 से 6 साल की उम्र के बीच सामने आने लगते हैं। इस स्थिति को कंट्रोल करने की कोशिश करना एक बड़ा काम है। ADHD बचपन के सबसे आम न्यूरोडेवलपमेंटल विकारों में से एक है। वहीं आमतौर पर इसका निदान बचपन में होता है और यह वयस्कता तक रहता है। वहीं इस स्थिति को कंट्रोल करने के लिए कई उपचार हैं। वहीं सही डाइट फॉलो करने से भी बच्चों को काफी मदद मिल सकती है। ADHA और नींद के बीच गहरा संबंध है। वहीं एडीएचडी से पीड़ित बच्चों में नींद में गड़बड़ी, सांस लेने में तकलीफ और अन्य समस्याओं से जूझते हैं।</div><div><br></div><h2>एडीएचडी के कारण नींद की समस्या</h2><div>दरअसल, एडीएचडी से पीड़ित लोगों में अनिद्रा और अन्य नींद संबंधी समस्याओं की संभावना ज्यादा रहती है। एक अध्ययन के मुताबिक सामान्य आबादी की तुलना में ADHA से पीड़ित लोगों में अनिद्रा का खतरा दोगुना से ज्यादा होता है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/health/pcos-renamed-pmos-a-major-shift-in-womens-health" target="_blank">Medical Science में बड़ा बदलाव, PCOS अब हुआ PMOS! जानिए नाम बदलने की असली वजह</a><span style="font-size: 1rem;">&nbsp;</span></h3><div><br></div><div>ADHD और नींद के बीच का संबंध जटिल है। ऐसा इसलिए भी है, क्योंकि इसके लक्षण आपकी नींद को प्रभावित कर सकते हैं। नींद की कमी आपके लक्षणों को प्रभावित कर सकती है। लेकिन कुछ मामले में ADHS नींद संबंधी समस्याओं की वजह बन सकता है।</div><div><br></div><div>ADHA आपके शरीर की जैविक घड़ी या सर्कैडियन रिदम को प्रभावित कर सकता है। जोकि नींद के पैटर्न को कंट्रोल करती है। इससे आपको जरूरत के समय सोने में परेशानी हो सकती है। वहीं ADHD से पीड़ित लोगों में अवसाद या चिंता जैसे मनोदशा संबंधी विकार होने की संभावना ज्यादा होती है। वहीं मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं भी अनिद्रा की वजह बन सकती है।</div><div><br></div><h2>एडीएचडी से सबसे अधिक होने वाली नींद संबंधी समस्याएं</h2><div>सुबह उठने में परेशानी</div><div><br></div><div>रात भर नींद टूटना</div><div><br></div><div>सुबह उठने पर तरोताजा न लगना</div><div><br></div><div>रात में सोने में 1 घंटे से ज्यादा समय लगना</div><div><br></div><h2>प्रबंधन और सहायता के उपाय</h2><div>सकारात्मक व्यवहार को बढ़ावा देने के लिए थेरेपी।</div><div><br></div><div>खेलने, पढ़ने और सोने का समय निश्चित करना चाहिए।</div><div><br></div><div>काम को छोटे-छोटे चरणों में बांटें।</div><div><br></div><div>स्कूल में बच्चे की एक्टिविटी पर नजर रखने के लिए टीचर्स के संपर्क में रहें।</div><div><br></div><div>वहीं लक्षण गंभीर होने पर पीडियाट्रिक न्यूरोलॉजिस्ट या बाल मनोवैज्ञानिक से संपर्क करना चाहिए।</div><div><br></div><h2>ADHA और नींद का संबंध</h2><div><br></div><h2>हाइपरएक्टिविटी</h2><div>ADHD वाले बच्चों का दिमाग सोने के समय भी काफी ज्यादा सक्रिय रहता है। वहीं सोने पर दिमाग को शांति मिलती है।</div><div><br></div><h2>मेलाटोनिन की कमी</h2><div>अक्सर एडीएचडी वाले बच्चों में नींद लाने वाले हार्मोन मेलाटोनिन का उत्पाद देर से होता है। जिस कारण उनको देर रात तक नींद नहीं आती है।</div><div><br></div><h2>दवाओं का असर</h2><div>ADHD के लिए जो दवाएं जी जाती हैं, वह भी कभी-कभी नींद में बाधा डाल सकती हैं।</div><div><br></div><h2>यहां जानिए बेहतर नींद के उपाय</h2><div>ADHD से पीड़ित बच्चे का सोने का समय तय होना चाहिए।</div><div><br></div><div>वहीं सोने से करीब 1 घंटा पहले टीवी, फोन या टैबलेट बंद कर देना चाहिए।</div><div><br></div><div>कमरे का वातावरण शांत होना चाहिए और कमरे में पर्याप्त अंधेरा होना चाहिए।</div><div><br></div><div>पढ़ने या शांत संगीत सुनने से सोने के लिए तैयार करने में सहायता मिलती है।</div>]]></description>
      <pubDate>Fri, 15 May 2026 11:58:47 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/child-with-adhd-remain-restless-throughout-night-understand-connection-between-sleep-and-brain</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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      <title><![CDATA[Medical Science में बड़ा बदलाव, PCOS अब हुआ PMOS! जानिए नाम बदलने की असली वजह]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/pcos-renamed-pmos-a-major-shift-in-womens-health]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>ज्यादातर महिलाओं में हार्मोनल समस्या PCOS यानी के पॉलिसिस्टक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) का नाम बदल दिया गया है। अब इसे पॉलीएंडोक्राइन मेटाबोलिक ओवेरियन सिंड्रोम (PMOS) कहा जाएगा। आपको बता दें कि, दुनियाभर के हेल्थ एक्सपर्ट्स और रिसर्चर्स की सहमति के बाद से यह बदलाव हुआ है।</div><div><br></div><div><span style="font-size: 1rem;">हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक, PCOS नाम इस बीमारी की पूरी तस्वीर को सही तरीके से नहीं दिखाता था। कुछ महिलाओं में इस समस्या के बाद भी ओवरी में सिस्ट नहीं पाए जाते हैं, इसलिए पुराना काफी हद तक भ्रम पैदा करता था। इसी कारण से अब इसका नाम बदलकर PMOS रखा गया है, ताकि बीमारी की असली प्रकृति को बेहतर तरीके से समझाया जा सके।</span></div><div><br></div><div><b>PCOS का नाम क्यों बदला गया?</b></div><div><br></div><div>'द लैंसेट' में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, दुनियाभर में प्रजनन आयु की लगभग 17 करोड़ महिलाएं PCOS से प्रभावित हैं। काफी लंबे समय से चल रही रिसर्च और एक्सपर्ट की चर्चा के बाद यह महसूस किया गया कि 'PCOS' नाम की यह बीमारी वास्तविक स्थिति को सही तरीके से नहीं दर्शाता है।</div><div><br></div><div>हेल्थ एक्सपर्ट का कहना है कि पुराने नाम की वजह के कई महिलाओं में इस समस्या की पहचान देर से हो पाती थी। इसके साथ ही इससे जुड़ी हार्मोनल, मेटाबोलिक और मेंटल हेल्थ संबंधी परेशानियों को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है।</div><div><br></div><div>असल में&nbsp; 'पॉलीसिस्टिक' शब्द सबसे ज्यादा भ्रम पैदा करता था। मेडिकल एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इस कंडीशन में ओवरी पर नॉर्मल सिस्ट नहीं बनते, बल्कि 'अरेस्टेड फॉलिकल्स' विकसित होते हैं। यानी हार्मोनल असंतुलन के कारण एग्स पूरी तरह से मैच्योर नहीं हो पाते है और ओव्यूलेशन प्रभावित होता है।</div><div><br></div><div>मेडिकल एक्सपर्ट मानते है कि कई महिलाएं सिर्फ इसलिए समय पर चेकअप नहीं करवाती थीं, क्योंकि उनके स्कैन में ओवरी सिस्ट नजर नहीं आते थे। वहीं, PCOS/PMOS में सिस्ट होना जरुरी नहीं है। इस वजह से पुराना नाम कई बार बीमारी की पहचान में देरी का कारण बन जाता था। नया नाम इस कंडीशन के हार्मोनल और मेटाबोलिक पहलुओं पर अधिक फोकस नहीं करते हैं।</div><div><br></div><div>हेल्थ एक्सपर्ट ने माना है कि बीमारी का नाम उसकी पूरी जटिलता को दर्शाता है। इसके लिए सात महाद्वीपों के डॉक्टरों, रिसर्चर्स और मरीजों ने करीब 14 वर्षों तक मिलकर काम किया है। गौरतलब है कि लंबी चर्चा और इंटरनेशनल सहमति के बाद आखिरकार PCOS का नया नाम PMOS (Polyendocrine Metabolic Ovarian Syndrome) रखने का फैसला किया।</div><div><br></div><div><b>PMOS का नाम का मतलब क्या है?</b></div><div><br></div><div><b>- पॉलीएंडोक्राइन -</b> इसका अर्थ है कि यह समस्या शरीर के कई हार्मोन सिस्टम को प्रभावित करती है।</div><div><br></div><div><b>- मेटाबोलिक- </b>यह बीमारी इंसुलिन रेजिस्टेंस, वजन बढ़ना और डायबिटीज के खतरे से जुड़ी होती है।</div><div><br></div><div><b>&nbsp;- ओवेरियन-</b> यह ओव्यूलेशन, पीरियड्स और फर्टिलिटी को प्रभावित करती है।</div><div><br></div><div><b>&nbsp;- सिंड्रोम- </b>यह कई लक्षणों और हेल्थ रिस्क का ग्रुप है।</div><div><br></div><div><b>PMOS के लक्षण</b></div><div><br></div><div>- पीरियड्स का न आना या फिर अनियमित पीरियड्स।</div><div><br></div><div>&nbsp;- चेहरे पर अधिक बाल आना।</div><div><br></div><div>&nbsp;- मुंहासे और ऑयली स्किन।</div><div><br></div><div>&nbsp;- अचानक से तेजी से वजन बढ़ना।</div><div><br></div><div>&nbsp;- वजन कम करने में दिक्कत होना।</div><div><br></div><div>&nbsp;- इंसुलिन रेजिस्टेंस।</div><div><br></div><div>&nbsp;- फर्टिलिटी से जुड़ी समस्याएं।</div><div><br></div><div>&nbsp;- मूड स्विंग और तनाव</div><div><br></div><div>एक्सपर्ट के मुताबिक, नाम बदलने से इलाज में बहुत बड़ा बदलाव नहीं होगा। लेकिन इससे बीमारी को समझने और सही पर पहचानने में मदद मिल सकती है।</div><div><br></div><div><b>PMOS को कैसे मैनेज करें</b></div><div><br></div><div>- नियमित रुप से एक्सरसाइज</div><div><br></div><div>&nbsp;- हेल्दी और बैलेंस्ड डाइट</div><div><br></div><div>&nbsp;- वजन कंट्रोल रखना&nbsp;</div><div><br></div><div>&nbsp;- पर्याप्त मात्रा में नींद लें</div><div><br></div><div>&nbsp;- तनाव बिल्कुल न लें</div><div><br></div><div>&nbsp;- जरुरत पड़ने पर हार्मोनल थेरेपी</div><div><br></div><div>&nbsp;- इंसुलिन सेंसिटिव दवाएं</div>]]></description>
      <pubDate>Fri, 15 May 2026 11:39:50 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/pcos-renamed-pmos-a-major-shift-in-womens-health</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Health Alert । इन हेल्दी बीजों से हो सकता है Kidney Failure, डॉक्टर ने जारी की पूरी Rating List]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/best-and-worst-seeds-for-kidney-health-expert-guide]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>आज के समय में किडनी से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह खराब लाइफस्टाइल और गलत खान-पान है। लोग हेल्दी समझकर कई चीजें खाते हैं, लेकिन वही चीजें कभी-कभी किडनी के लिए नुकसानदायक बन जाती हैं। ऐसे में सही जानकारी होना बहुत जरूरी है, ताकि आप अपनी डाइट को बेहतर तरीके से चुन सकें।</div><div><br></div><h2><b>डॉक्टर ने समझाया</b></h2><div>यूरोलॉजिस्ट डॉ. विस्वास ने इस मुद्दे को आसान भाषा में समझाया है। उन्होंने बताया कि लोग जिन बीजों को हेल्दी समझकर रोज खाते हैं, उनमें से कुछ किडनी के लिए सही नहीं होते। इसलिए उन्होंने अलग-अलग बीजों को रेटिंग देकर बताया कि कौन सा बीज कितना सुरक्षित है।</div><div><br></div><h2><b>हर हेल्दी चीज किडनी के लिए अच्छी नहीं होती</b></h2><div>अक्सर लोग मानते हैं कि बीज खाना हमेशा फायदेमंद होता है। लेकिन ऐसा हर बार सही नहीं है। कुछ बीज ऐसे होते हैं जो शरीर के लिए अच्छे हैं, लेकिन किडनी पर असर डाल सकते हैं। इसलिए यह जानना जरूरी है कि कौन से बीज कितनी मात्रा में खाने चाहिए।</div><div>&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/health/these-6-red-flags-alarm-bells-during-pregnancy-do-not-ignore-them-even-by-mistake" target="_blank">Pregnancy Care: Pregnancy में ये 6 Red Flags हैं खतरे की घंटी, भूलकर भी न करें नजरअंदाज</a></h3><div><br></div><h2><b>ये बीज किडनी के लिए फायदेमंद माने जाते हैं</b></h2><div><b>कद्दू के बीज</b> किडनी के लिए काफी अच्छे माने जाते हैं। डॉ. विस्वास के अनुसार ये यूरिन में बनने वाले स्टोन के खतरे को कम करने में मदद करते हैं।</div><div><b>अलसी के बीज</b> भी अच्छा विकल्प हैं क्योंकि इनमें ऑक्सालेट बहुत कम होता है, जो किडनी के लिए सुरक्षित माना जाता है।</div><div><b>तरबूज के बीज</b> भी फायदेमंद हैं। ये शरीर को हाइड्रेट रखते हैं और किडनी पर ज्यादा दबाव नहीं डालते।</div><div><br></div><h2><b>इन बीजों को सीमित मात्रा में ही खाएं</b></h2><div><b>सूरजमुखी के बीज</b> पूरी तरह नुकसानदायक नहीं हैं, लेकिन इनमें मध्यम मात्रा में ऑक्सालेट होता है, इसलिए इन्हें कम मात्रा में ही लेना चाहिए।</div><div><b>चिया सीड्स</b> को लोग सुपरफूड मानते हैं, लेकिन डॉ. विस्वास बताते हैं कि ज्यादा मात्रा में लेने से किडनी पर असर पड़ सकता है।</div><div><b>सब्जा (तुलसी) के बीज</b> पर अभी ज्यादा रिसर्च नहीं है, इसलिए इन्हें भी सीमित मात्रा में ही खाना बेहतर है।</div><div>&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/health/summer-heat-causing-gas-and-acidity-know-causes-and-how-to-fix-it" target="_blank">बढ़ता पारा, पेट का बिगड़ा हाजमा! Summer में Stomach Problems से बचने के लिए अपनाएं ये उपाय</a></h3><div><br></div><h2><b>इन बीजों से किडनी को हो सकता है नुकसान</b></h2><div><b>तिल के बीज</b> में ऑक्सालेट ज्यादा होता है, जिससे किडनी स्टोन का खतरा बढ़ सकता है।</div><div><b>खसखस के बीज</b> भी हाई ऑक्सालेट वाले होते हैं और अक्सर खाने में छिपे होते हैं, जिससे नुकसान बढ़ सकता है।</div><div><b>हलीम के बीज</b>, जिन्हें कई जगह हेल्दी माना जाता है, डॉ. विस्वास के मुताबिक किडनी के लिए सही नहीं हैं और इन्हें अवॉइड करना चाहिए।</div><div><br></div><h2><b>संतुलित डाइट ही है सबसे बड़ा समाधान</b></h2><div>किडनी को स्वस्थ रखने के लिए जरूरी है कि आप किसी भी चीज को जरूरत से ज्यादा न खाएं। सही मात्रा और संतुलन बनाए रखना सबसे जरूरी है। अगर आपको पहले से किडनी की समस्या है, तो डॉक्टर की सलाह लेकर ही अपनी डाइट तय करें।</div>]]></description>
      <pubDate>Thu, 14 May 2026 15:36:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/best-and-worst-seeds-for-kidney-health-expert-guide</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Pregnancy Care: Pregnancy में ये 6 Red Flags हैं खतरे की घंटी, भूलकर भी न करें नजरअंदाज]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/these-6-red-flags-alarm-bells-during-pregnancy-do-not-ignore-them-even-by-mistake]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>प्रेग्नेंसी के समय हर महिला को अपना खास ख्याल रखने की जरूरत होती है। क्योंकि इस दौरान शरीर में कई हार्मोनल बदलाव होते हैं। वहीं प्रेग्नेंसी में नजर आने वाले कुछ संकेत ऐसे होते हैं, जिन पर हर महिला को फौरन ध्यान देने की जरूरत होती है, वरना आपको समस्या हो सकती है। एक्सपर्ट की मानें, तो अगर आपको प्रेग्नेंसी के समय इनमें से कोई भी संकेत नजर आता है, तो आपको घबराने की जरूरत नहीं है, बल्कि बिना देर किए डॉक्टर का रूख करना जरूरी है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको इन संकेतों के बारे में जानकारी देने जा रहे हैं।</div><div><br></div><h2>इन संकेतों को न करें नजरअंदाज</h2><div><br></div><h2>वजाइनल ब्लीडिंग</h2><div>अगर आपको वजाइना से ब्लीडिंग हो रही है, तो इस स्थिति में भी आपको डॉक्टर से सलाह लेना चाहिए। प्रेग्नेंसी के शुरूआती सप्ताह में हल्की स्पॉटिंग होना नॉर्मल है, लेकिन अगर ज्यादा ब्लीडिंग हो रही है, वहीं खासकर 12 सप्ताह के बाद वजाइना से ब्लीडिंग रही है तो यह एक्टोपिक प्रेग्नेंसी, मिसकैरेज या कई और दिक्कतों का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में डॉक्टर की सलाह जरूर लेना चाहिए।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/health/analyzing-the-link-between-pcos-and-recurrent-uti" target="_blank">Doctor का खुलासा: PCOS और UTI का है गहरा कनेक्शन, जानें Health Risk के 5 बड़े कारण</a></h3><div><br></div><h2>पेट में तेज दर्द</h2><div>प्रेग्नेंसी के समय पेट के एक साइड तेज दर्द या ऐंठन एक्टोपिक प्रेग्नेंसी, वहीं समय से पहले प्लेसेंटल एब्रप्शन या प्रसव का संकेत हो सकता है। हालांकि महिलाएं कई बार इसको गैस समझकर नजरअंदाज कर देती हैं। लेकिन आपको ऐसा नहीं करना चाहिए। पेट में दर्द होने पर डॉक्टर से जरूर बात करनी चाहिए।</div><div><br></div><h2>सूजन आना</h2><div>वहीं प्रेग्नेंसी के समय शरीर के किसी भी हिस्से में सूजन आना सही नहीं होता है। खासकर अगर आपको हाथों या चेहरे पर सूजन महसूस हो। तो इसके पीछे हाई ब्लड प्रेशर की वजह से होने वाली एक हेल्थ कंडीशन हो सकती है। इससे स्ट्रोक का खतरा बढ़ सकता है, इसलिए ऐसा होने पर डॉक्टर की सलाह जरूर लें।</div><div><br></div><h2>सिर में तेज दर्द</h2><div>अगर प्रेग्नेंसी में आपको तेज सिरदर्द महसूस हो या धुंधला दिखाई दे या फिर स्पॉट्स नजर आएं, तो डॉक्टर से जरूर मिलना चाहिए। इसको नॉर्मल समझने की गलती नहीं करनी चाहिए।</div><div><br></div><h2>मूवमेंट में कमी होना</h2><div>अगर आपको पेट के अंदर बच्चे की मूवमेंट कम महसूस हो रही है, तो इसको नजरअंदाज करने की गलती नहीं करनी चाहिए। खासकर 24 सप्ताह के बाद बच्चे के किक मारने में कमी महसूस हो तो इस पर ध्यान देना जरूरी हो जाता है। क्योंकि अगर आपका बच्चा 2 घंटे से 10 बार से भी कम हलचल कर रहा है, तो यह चिंता की बात हो सकती है। लेकिन सभी महिलाओं के लिए यह अलग-अलग एक्सपीरियंस हो सकता है, इसलिए डॉक्टर की सलाह जरूर लें।</div><div><br></div><h2>तेज बुखार</h2><div>तेज बुखार, ठंड लगना, स्मेली डिस्चार्ज होना और इंफेक्शन का संकेत हो सकता है। यह आपके और आपके होने वाले बच्चे दोनों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। इसलिए इस पर जरूर ध्यान देना चाहिए।</div><div><br></div><h2>जानिए क्या कहते हैं एक्सपर्ट</h2><div>एक्सपर्ट की मानें, तो सभी महिलाओं का शरीर प्रेग्नेंसी में अलग-अलग तरीके से रिएक्ट करता है। लेकिन फिर भी अगर आपको इनमें से कोई भी संकेत नजर आता है, तो आपको फौरन डॉक्टर की सलाह लेना चाहिए। इसके लिए अगली अपॉइंटमेंट का इंतजार नहीं करना चाहिए।</div>]]></description>
      <pubDate>Thu, 14 May 2026 12:23:29 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/these-6-red-flags-alarm-bells-during-pregnancy-do-not-ignore-them-even-by-mistake</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Doctor का खुलासा: PCOS और UTI का है गहरा कनेक्शन, जानें Health Risk के 5 बड़े कारण]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/analyzing-the-link-between-pcos-and-recurrent-uti]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>PCOS और UTI दोनों ही महिलाओं के हेल्थ से जुड़ी अहम समस्याएं हैं। पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) और यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (UTI) ये दोनों समस्याएं एकदम अलग-अलग हैं। दरअसल, पीसीओएस हार्मोनल असंतुलन के कारण होने वाली समस्या है, जबकि UTI एक बैक्टीरियल इंफेक्शन से होने वाली दिक्कत है। लेकिन PCOS से पीड़ित महिलाएं अक्सर UTI की समस्या से परेशान रहते हैं। जिसके चक्कर में कई बार कंफ्यूज नजर आती है कि पीसीओएस और UTI में क्या कनेक्शन है? आइए आपको इसमें अंतर बताते हैं।</div><div><br></div><div><b>PCOS और UTI के बीच क्या संबंध है?</b></div><div><br></div><div><span style="font-size: 1rem;">PCOS की समस्या में हार्मोन असंतुलित होने और ब्लड शुगर बढ़ने की वजह से शरीर में बैक्टीरियल संक्रमण का खतरा अधिक हो जाता है, जिसके कारण महिलाओं को बार-बार यूरिन इंफेक्शन (UTI) की परेशानी हो सकती है। साल 2023 में Journal of the Brazilian Medical Association में प्रकाशित एक रिसार्च में PCOS और UTI के बीच मजबूत संबंध सामने आया। स्टडी में यह भी पाया गया कि PCOS, हाइपरएंड्रोजेनिज्म, मोटापा, ग्लूकोज असंतुलन और खराब लिपिड प्रोफाइल से जूझ रहे मरीजों में UTI की गंभीरता के साथ मेंटल हेल्थ संबंधी समस्याएं भी अधिक देखने को मिलीं।</span></div><div><br></div><div><b>इंसुलिन रेजिस्टेंस और हाई ब्लड शुगर</b></div><div><br></div><div>पीसीओएस से पीड़ित महिलाएं में इंसुलिन रेजिस्टेंस पाया जाता है। इसका सीधा मतलब यही है कि शरीर इंसुलिन का सही तरह से इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं, जिससे ब्लड शुगर बढ़ने लगता है। जब यूरिन में शुगर की मात्रा बढ़ती है, तो बैक्टीरिया तेजी से पनपने लगते हैं। इसी कारण से पीसीओएस वाली महिलाओं में UTI का खतरा अधिक देखने को मिलता है। हेल्थ एक्सपर्ट बताते हैं कि महिलाओं का वजन ज्यादा होता है और जिनमें असंतुलित इंसुलिन रेजिस्टेंस होता है, जिनमें बार-बार यूटीआई देखने को मिलता है।</div><div><br></div><div><b>हार्मोनल असंतुलन&nbsp;</b></div><div><br></div><div>PCOS में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोन का संतुलन बिगड़ जाता है। जिसका असर वजाइनल फ्लोरा पर भी देखने को मिलता है। महिलाओं के शरीर में नेचुरल बैक्टीरिया बैलेंस खराब होता है तो इंफेक्शन होने की संभावना अधिक हो जाती है।</div><div><br></div><div><b>वजन बढ़ना और खराब लाइफस्टाइल</b></div><div><br></div><div>पीसीओएस में ज्यादातर मोटापा बढ़ने की शिकायत बेहद आम होती है। अधिक वजन और शारीरिक एक्टिविटी की कमी शरीर में इंफ्लेमेशन बढ़ा देते हैं, जिससे कमजोर होने लगती है। कमजोर इम्यून सिस्टम इंफेक्शन का खतरा अधिक रहता है, जिससे बार-बार UTI होने के चांसेस बढ़ जाते हैं।&nbsp;</div><div><br></div><div><b>पानी कम पीना</b></div><div><br></div><div>ज्यादातर महिलाएं कम पानी पीती हैं, बिजी लाइफस्टाइल के कारण कई बार पानी पीने का समय नहीं होता है। जिससे शरीर टॉक्सिंस और बैक्टीरिया को शरीर से बाहर नहीं कर पाता है। दरअसल, पीसीओएस में डिहाइड्रेशन की समस्या बढ़ जाए, तो यूटीआई का खतरा अधिक बढ़ जाता है।</div><div><br></div><div><b>तनाव और नींद न आना</b></div><div><br></div><div>असल में PCOS केवल हार्मोनल बीमारी नहीं है, बल्कि यह एक प्रकार से मेंटल हेल्थ को भी प्रभावित करती है। ज्यादा तनाव लेने से और नींद की कमी के कारण कोर्टिसोल हार्मोन बढ़ जाते हैं, जिससे इम्यूनिटी भी कमजोर हो जाती है। कमजोर इम्यून सिस्टम शरीर को इंफेक्शन के प्रति अधिक सेंसिटिव कर देता है।&nbsp;</div>]]></description>
      <pubDate>Wed, 13 May 2026 16:39:36 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/analyzing-the-link-between-pcos-and-recurrent-uti</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[बढ़ता पारा, पेट का बिगड़ा हाजमा! Summer में Stomach Problems से बचने के लिए अपनाएं ये उपाय]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/summer-heat-causing-gas-and-acidity-know-causes-and-how-to-fix-it]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>क्या आपके पेट में बार-बार दर्द या ऐंठन की समस्या हो रही है? तो इस भूलकर भी इग्नोर न करें। गर्मी में अधिक तापमान और शरीर में पानी की कमी से यानी के डिहाइड्रेशन के कारण पेट संबंधी समस्याएं काफी देखने को मिलती हैं। अगर आपको भी पेट की समस्या बनीं रहती हैं, तो एक बार अच्छे डॉक्टर को जरुर दिखाएं। भीषण गर्मी में शरीर से पसीने के रुप में अधिक मात्रा में पानी निकल जाता है।&nbsp;</div><div><br></div><div><span style="font-size: 1rem;">यदि शरीर में पानी की कमी रहती है, तो पेट के अंदर बैड बैक्टीरिया को पनपने के लिए अनुकूल माहौल मिल जाता है। इस कारण से पाचन संबंधी समस्याएं अधिक हो जाती है। शरीर में पानी की कमी के कारण पेट में एसिड की अधिक मात्रा बढ़ जाती है। जिससे पेट और सीने में जलन की समस्या देखने को मिलती है। इतना ही नहीं, पानी की कमी के कारण कब्ज की दिक्कतें बढ़ जाती है। इसके साथ ही पेट फूलना और पेट में गैस बनना आम समस्या बन जाती है।</span></div><div><br></div><div><b>खानपान में सतर्कता जरुरी है</b></div><div><br></div><div>इन दिनों आप अधिक फैट वाले भोजन से बचें। क्योंकि ज्यादा फैट वाले भोजन का सेवन करने से अपच संबंधी समस्या देखने को मिलती है। पेट में जलन की दिक्कत हो सकती है। गर्मियों में हम सभी आइसक्रीम और अन्य ठंडे पेय पदार्थों का यह सोचकर सेवन करते हैं कि ये ठंडे प्रोडक्ट है, लेकिन ठंडे तापमान और चीनी की अधिक मात्रा का संयोजन पेट संबंधी समस्याएं देखने को मिलती हैं। जिन लोगों को लैक्टोज या डेयरी उत्पादों के प्रति संवेदनशील है, ये प्रोडक्ट पेट में गैस, ऐंठन और दस्त का कारण बन सकते हैं।</div><div><br></div><div><b>पेट संबंधी समस्याओं से इस तरह से करें बचाव</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">&nbsp;</span></div><div><span style="font-size: 1rem;">&nbsp;- यदि आपको किडनी संबंधी और पेट संबंधित कोई समस्या है, तो गर्मी के दिनों में कम से कम ढाई से तीन लीटर पानी पिएं।</span></div><div><br></div><div>&nbsp;- इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी होने पर नींबू की शिकांजी, नारियल पानी या ओरआरएस का घोल लें। नारियल पानी पेट के पीएच स्तर को बैलेंस करता है।</div><div><br></div><div>&nbsp;- ठंडी तासीर वाले खाद्य पदार्थों का भरपूर सेवन करें, आप दही, छाछ, रायता, लस्सी पी सकते हैं। यह पेट की गर्मी को शांत करता है और पाचनतंत्र भी सही रहता है।</div><div><br></div><div>&nbsp;- गर्मी के दिनों में बाहर का खाना खासकर स्ट्रीट फूड खाने से बचें।</div><div><br></div><div>&nbsp;- आप बाहर के खाने बजाय घर पर ही फ्रेश खाना खाएं। इस बात का ध्यान रखें कि हल्का और पचने वाला खाना का ही सेवन करें।&nbsp;</div><div><br></div><div><b>किन चीजों से बनाएं दूरी</b></div><div><br></div><div>&nbsp;- अधिक मात्रा में चाय और कॉफी का सेवन न करें।</div><div><br></div><div>&nbsp;- तरह-तरह के कार्बोनेटेड ड्रिंक्स का सेवन कम करें।</div><div><br></div><div>&nbsp;- डिब्बाबंद और प्रोसेस्ड फूड का सेवन कम करें।</div><div><br></div><div>&nbsp;- अत्यधिक ऑयली फूड खाने से बचें।</div><div><br></div><div><b>पेट की गर्मी बढ़ने के कारण</b></div><div><br></div><div>&nbsp;- अगर आप अधिक मसालेदार और तैलीय खाना खाते हैं, तो इससे पेट में एसिड की मात्रा अधिक हो जाती है।</div><div><br></div><div>&nbsp;- खानपान में किसी भी प्रकार की अनियमितता, समय से भोजन न करना, अधिक मात्रा में खा लेना, भोजन का बिल्कुल सेवन न करना, देर रात को भोजन करना, इससे पाचनतंत्र प्रभावित रहता है।</div><div><br></div><div>&nbsp;- कई बार शरीर में पानी की कमी के कारण पाचनक्रिया खराब हो जाती है और एसिडिटी की मात्रा भी काफी बढ़ जाती है।</div><div><br></div><div>&nbsp;- अधिक मात्रा में कैफीन शरीर में पहुंच जाए, तो इससे पेट की अंदरुनी परत में जलन होती है।</div><div><br></div><div>&nbsp;- तनाव और चिंता करने से भी शरीर में एसिड उत्पादन हो जाता है। जिससे पेट की गर्मी बढ़ जाती है।</div><div><br></div><div>&nbsp;- नींद की कमी, अपर्याप्त नींद के कारण पाचनतंत्र खराब होता है, बल्कि पेट के अंदर की गर्मी को भी बढ़ा देता है।</div><div><br></div><div><b>घरेलू उपाय हैं बहुत लाभकारी</b></div><div><br></div><div>&nbsp;- रात को थोड़ी सूखी धनिया, कच्चा जीरा और सौंफ को भिगों दें। सुबह इन तीनों को पीस लें। इस मिश्रण से एक चम्मच मात्रा लेकर एक गिलास पानी में मिलाकर पिएं। इसमें आप ग्लूकोज भी मिला सकते हैं।</div><div><br></div><div>&nbsp;- आप चाहे तो इस मिश्रण को फ्रिज में स्टोर करके रख लें। कच्ची या भुनी हई सौंफ में थोड़ी-सी मिश्री मिलाकर खाने से भी आराम मिलता है।</div><div><br></div><div>&nbsp;- इसके अलावा, छाछ के साथ सेंधा नमक, भुना पिसा जीरा मिलाकर पीने से काफी राहत मिलता है। इनसे भूख भी बढ़ जाती है।</div><div><br></div><div>&nbsp;- गर्मी में आप मुरब्बा या फिर बेल का शर्बत पी सकते हैं। यह शरीर को काफी आराम देता है। बेल का पाउडर का भी सेवन कर सकते हैं।</div><div><br></div><div>&nbsp;- आजवाइन, जीरा, कलौंजी और एक या दो ग्राम हींग, छोटी हर्र देसी घी में पकाकर पीस लें। इसके बाद इसमें थोड़ा-सा सेंधा नमक मिला सकते हैं। खाना खाने के बाद इसे आराम से खा सकते हैं।</div><div><br></div><div>&nbsp;- रात के समय मुनक्का के बीज निकालकर पानी में भिगो दें। सुबह इसके सेवन से करने से आराम मिलता है। आप चाहे तो रात को त्रिफला चूर्ण का सेवन भी कर सकते हैं। इसको आप पानी या दूध के साथ ले सकते हैं।</div><div><br></div><div>&nbsp;- रात में 25 किशमिश, 2 अंजीर, 5 अखरोट के टुकड़े और 5 बादाम पानी में भिगोकर रख दें। सुबह खाली पेट इन्हें अच्छे से चबाकर खाएं और साथ में एक गिलास दूध पी लें। यह मिश्रण पाचन तंत्र को बेहतर बनाने में मदद करता है। साथ ही बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल और ब्लड प्रेशर को संतुलित रखने में भी सहायक माना जाता है। नियमित सेवन से शरीर को भरपूर ऊर्जा और जरूरी पोषक तत्व मिलते हैं। इन चीजों को स्टील, कांच या चीनी मिट्टी के बर्तन में ही भिगोएं।</div><div><br></div><div>&nbsp;- आप तरबूज और खरबूजा भी खा सकते हैं। लेकिन खाने के बाद तुरंत पानी न पिएं।</div><div><br></div><div>&nbsp;- आम पन्ना, गन्ने का रस भी काफी लाभदायक होता है।&nbsp;</div><div><br></div><div><b>&nbsp;डॉक्टर को कब दिखाएं?</b></div><div><br></div><div>&nbsp; - अगर आपको घरेलू उपाय के बाद भी आराम न मिलें। फिर भी जलन हो रही है और दर्द बना हुआ है, तो एक बार डॉक्टर जरुर दिखाएं। कई बार-बार उल्टी व दस्त लग रहे हैं, तो डॉक्टर से जरुर मिलें।&nbsp;</div>]]></description>
      <pubDate>Wed, 13 May 2026 15:03:23 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/summer-heat-causing-gas-and-acidity-know-causes-and-how-to-fix-it</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    <item>
      <title><![CDATA[Women Health: Health के लिए Game Changer हैं ये 4 बीज, महिलाएं इन्हें अपनी Diet में जरूर करें शामिल]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/4-seeds-game-changer-for-health-women-definitely-include-them-in-diet]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>अगर आप भी सेहतमंद रहना चाहती हैं तो आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है। क्योंकि सेहतमंद रहना बेहद आसान है। अधिकतर बीमारियों के पीछे हमारा गलत खानपान और अनहेल्दी लाइफस्टाइल होती है। लेकिन हेल्दी डाइट इम्यूनिटी को मजबूत करके आपको बीमारियों से दूर रख सकती है। डाइजेशन में सुधार और हार्मोन्स को बैलेंस करती है। वहीं अनहेल्दी ईटिंग हमारी सेहत को बिगाड़ती है।</div><div><br></div><div>जब भी हेल्दी डाइट की बात होती है, तो सब्जियों और फलों के साथ सीड्स और नट्स का सेवन भी जरूरी होता है। खासकर महिलाओं के शरीर में ताकत बनाए रखने और हार्मोन्स को बैलेंस करने में कई सीड्स मदद कर सकते हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको 4 ऐसे सीड्स के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनका सेवन महिलाओं को करना चाहिए।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/health/the-hidden-dangers-of-sleeping-with-your-ac-on" target="_blank">Health Alert: क्या आपका एयर कंडीशनर आपको बीमार कर रहा है? जानिए इसके चौंकाने वाले नुकसान</a></h3><div><br></div><h2>हेल्दी रहने के लिए रोजाना खाएं ये 4 सीड्स</h2><div>कद्दू के बीज, चिया सीड्स, फ्लैक्स सीड्स और तिल के बीज महिलाओं की सेहत के लिए अच्छे होते हैं। इन बीजों से शरीर को ताकत मिलती है और हार्मोन भी बैलेंसे होते हैं। इन बीजों के सेवन से गट हेल्थ अच्छी होती है।</div><div><br></div><div>चिया सीड्स में प्रोटीन, फाइबर और ओमेगा 3 फैटी एसिड पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है। यह हार्मोन्स को बैलेंस रखने में मदद करता है। इसके सेवन से वेट भी कम होता है और डाइजेशन में भी सुधार होता है। यह स्किन हेल्थ के लिए भी फायदेमंद होता है।</div><div><br></div><div>कद्दू के बीज आयरन, जिंक और मैग्नीशियम से भरपूर होते हैं। यह बीज महिलाओं में खून की कमी को दूर करते हैं और इम्यूनिटी मजबूत करते है। कद्दू के बीज को डाइट में शामिल करने से पीरियड्स और पीएमएस के दिनों में होने वाली दिक्कतें भी दूर होती हैं।</div><div><br></div><div>अलसी के बीजों में ओमेगा-3 फैटी एसिड और लिग्नान होता है। जिन भी महिलाओं को हार्मोनल इंबैलेंस और पीसीओएस की समस्या है, उनको इसका सेवन जरूर करना चाहिए। यह बीज दिल की सेहत के लिए भी बेहतर माने जाते हैं और कोलेस्ट्रॉल को भी कंट्रोल करते हैं।</div><div><br></div><div>तिल के बीज में आयरन और कैल्शियम भरपूर मात्रा में पाया जाता है। इनका सेवन करने से हड्डियां मजबूत होती हैं और कैल्शियम की कमी भी दूर होती है। तिल के बीज बालों और त्वचा के लिए भी लाभकारी होते हैं।</div><div><br></div><h2>जानिए क्या कहते हैं एक्सपर्ट</h2><div>हेल्थ एक्सपर्ट की मानें, तो इन बीजों को खाने के सही तरीके और मात्रा की जानकारी होनी जरूरी है। कुछ हेल्थ कंडीशन में इसकी ज्यादा मात्रा आपको नुकसान पहुंचा सकती है। वहीं आपके शरीर की प्रकृति और उम्र के हिसाब से भी इसकी मात्रा और खाने का तरीका तय होना चाहिए।</div>]]></description>
      <pubDate>Wed, 13 May 2026 11:03:27 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/4-seeds-game-changer-for-health-women-definitely-include-them-in-diet</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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      <title><![CDATA[Health Alert: क्या आपका एयर कंडीशनर आपको बीमार कर रहा है? जानिए इसके चौंकाने वाले नुकसान]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/the-hidden-dangers-of-sleeping-with-your-ac-on]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>धीरे-धीरे तापमान बढ़ रहा है जिससे भीषण गर्मी पड़ने लगी है। चिलचिलाती धूप और बढ़ता हुआ पारा, में AC की ठंडी हवा बहुत आराम देती है। इस मौसम में बिना AC की नींद आना भी काफी मुश्किल होता है। गर्मियों के मौसम में ठंडी हवा पाने के लिए ज्यादातर लोग एसी में सोना ज्यादा आरामदायक मानते हैं। हालांकि, पूरी रात लगातार एसी चलाकर सोने से शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकता है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि रातभर एसी की ठंडी हवा लेना स्वास्थ्य के लिए कितना सुरक्षित है और इससे जुड़े फायदे-नुकसान क्या हैं, आइए एक्सपर्ट से जानते हैं।</div><div><br></div><div><b>क्या AC में सोना सेहत को पहुंचा सकता है नुकसान?</b></div><div><br></div><div>&nbsp; - हेल्थ एक्सपर्ट बताते हैं कि, एसी में सोना सेहत के लिए अच्छा है और इसका सेहत पर कोई बुरा असर नहीं पड़ता है। लेकिन इसका गलत तरीके से इस्तेमाल सेहत पर बुरा प्रभाव डाल सकते हैं।</div><div><br></div><div>&nbsp;- एसी का काम होता है कि ड्राई एयर को सर्कुलेट करके कमरे को ठंडा करना और ओवरहीटिंग से बचाता है। गर्म तापमान में कई बार नींद में खलल पड़ जाता है। एक्सपर्ट बताते हैं कि रातभर एसी में सोना आपको ही नुकसान पहुंचाएगा। हालांकि एसी का तापमान जरुर आपके लिए परेशानी की वजह बन सकता है।</div><div><br></div><div>&nbsp;- अगर आप रात में एसी का तापमान 24 डिग्री सेल्सियस से बहुत कम रखती हैं, तो शरीर पर इसका असर पड़ सकता है। ज्यादा ठंडक की वजह से मांसपेशियां सख्त होने लगती हैं और जोड़ों में दर्द या जकड़न महसूस हो सकती है। जिन लोगों को गठिया या हड्डियों से जुड़ी दिक्कतें हैं, उनके लिए यह समस्या और बढ़ सकती है। खासतौर पर बुजुर्गों लोगों को तेज ठंडी हवा से अधिक असहजता और दर्द का सामना करना पड़ता है।</div><div><br></div><div>&nbsp;- ड्राई एयर के कारण स्किन रुखी होने लगती है और इसी कारण से सांस संक्रमण, एलर्जी और अस्थमा की दिक्कत बढ़ जाती है।&nbsp;</div><div><br></div><div>&nbsp;- लंबे समय से ड्राई हवा से संपर्क में रहने से शरीर का मुख्य तापमान गिर जाता है, जो रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर देता है, इससे आपका रुटीन गड़बड़ा जा सकता है।&nbsp;</div><div><br></div><div>&nbsp;- जिन लोगों को एलर्जी और अन्य कोई समस्या है, तो तापमान को 24 से 26 डिग्री सेल्सियस के बीच रखें। इसके फिल्टर्स को हर हफ्ते में साफ करना चाहिए और शरीर को हवा को सीधा फ्लो दूर करें।</div><div><br></div><div>&nbsp;- इसके अलावा, बच्चों और बुजु्र्गों या किसी हेल्थ कंडीशन से परेशान लोगों को पूरी रात एसी में सोने से बचना चाहिए या फिर सीमित रुप में एसी का प्रयोग करें।&nbsp;</div>]]></description>
      <pubDate>Tue, 12 May 2026 16:49:44 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/the-hidden-dangers-of-sleeping-with-your-ac-on</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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      <title><![CDATA[Knee Pain Relief: घुटनों के दर्द का रामबाण इलाज है यह तेल, 3 चीजें मिलाकर बनाएं Natural Oil]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/3-ingredient-oil-a-natural-knee-pain-remedy]]></guid>
      <description><![CDATA[<div><span style="font-size: 1rem;">ज्यादातर लोग घुटनों या जोड़ों के दर्द से परेशान रहते हैं? सीढ़िया चढ़ते-उतरते समय दर्द देखने को मिलता है या सुबह उठते ही घुटनों में अकड़न महसूस होती है। इसलिए दवाइयों के साथ नेचुरल और असरदार घरेलू उपाय भी जरुर ट्राई करें। दादी-नानी के नुस्खए में से एक है यह तेल, जो कि केवल 3 चीजों से बना हुआ। इस लेख में हम आपको बताएंगे कैसे इस तेल को बनाएं और इसके फायदे।</span></div><div><span style="font-size: 1rem;">&nbsp;</span></div><div><span style="font-size: 1rem;"><b>दर्द को दूर करने वाले तेल की सामग्री</b></span></div><div><br></div><div>&nbsp; - लहसुन- 4 काली</div><div><br></div><div>&nbsp;- सरसों के बीज- 1 बड़ा चम्मच</div><div><br></div><div>&nbsp;- अरंडी का तेल- 5 बड़े चम्मच</div><div><br></div><div><b>दर्द भगाने वाला तेल कैसे बनाएं?</b></div><div><br></div><div>&nbsp;- सबसे पहले आप अरंडी का तेल को हल्का गर्म करें।</div><div><br></div><div>&nbsp;- अब इसमें लहसुन और सरसों के बीज डालकर कुछ मिनट तक पकाएं।</div><div><br></div><div>&nbsp;- इसको ठंडा होने के बाद छान लें।</div><div><br></div><div>&nbsp;- हल्का गुनगुना करके घुटनों या दर्द वाले हिस्से पर 5-10 मिनट तक मसाज करें।</div><div><br></div><div>&nbsp; - अच्छे रिजल्ट के लिए आप रोजाना इसे 4-5 हफ्ते इस्तेमाल करें।</div><div><br></div><div><b>इस तेल इस्तेमाल कब करें</b></div><div><br></div><div>रात को सोने से पहले इस तेल का इस्तेमाल करना सबसे अच्छा होता है। इससे आपकी मसल्स रिलैक्स होती हैं और सुबह दर्द कम महसूस होता है। इस में पड़ी ये 3 चीजें दर्द, सूजन और अकड़न से राहत देती हैं।</div><div><br></div><div><b>लहसुन के फायदे</b></div><div><br></div><div>लहसुन में प्राकृतिक रुप से सूजनरोधी तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर में होने वाले दर्द और सूजन को कम करने में सहायक होते हैं। इसका नियमित सेवन जोड़ों की अकड़न को धीरे-धीरे कम कर सकता है और रक्त संचार को बेहतर बनाने में मदद करता है। साथ ही, लहसुन मांसपेशियों को आराम पहुंचाकर शरीर को अधिक सहज महसूस कराने में भी उपयोगी माना जाता है।</div><div><br></div><div><b>सरसों के तेल के फायदे</b></div><div><br></div><div>सरसों के बीजों की तासीर गर्म होती है, जो शरीर में गर्माहट बढ़ाकर रक्त प्रवाह को बेहतर बनाने में मदद करती है। इसके प्रभाव से मांसपेशियों को आराम मिलता है और शरीर के दर्द में राहत महसूस हो सकती है। नियमित रूप से उपयोग करने पर सूजन और शरीर की जकड़न धीरे-धीरे कम होने लगती है।</div><div><br></div><div><b>अरंडी के तेल के फायदे</b></div><div><br></div><div>अरंडी का तेल त्वचा के अंदर तक जाकर सूजन को कम करता है। जोड़ों को लुब्रिकेट करता है, जिससे मूवमेंट आसान हो जाता है। अगर आप इसको नियमित तौर पर लगाते हैं, तो यह ड्राइनेस को कम करती है, दर्द में राहत पहुंचाती है और जोड़ों की फ्लेक्सिबिलिटी बेहतर होती है।</div><div><br></div><div><span style="font-size: 1rem;"><b>घुटने के दर्द वाले तेल के फायदे</b></span></div><div><br></div><div>&nbsp; - इस तेल की मदद से घुटनों और जोड़ों के दर्द में काफी राहत मिलेगा।</div><div><br></div><div>&nbsp; - सूजन और अकड़न को कम करता है।</div><div><br></div><div>&nbsp;- यह ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर करता है।</div><div><br></div><div>&nbsp;- मसल्स को रिलैक्स करता है।</div><div><br></div><div>&nbsp;- दर्द को प्राकृतिक रुप से कम करता है।&nbsp;</div>]]></description>
      <pubDate>Tue, 12 May 2026 15:30:33 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/3-ingredient-oil-a-natural-knee-pain-remedy</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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