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    <title><![CDATA[Hindi News - News in Hindi - Latest News in Hindi | Prabhasakshi]]></title>
    <description><![CDATA[Latest News in Hindi, Breaking Hindi News, Hindi News Headlines, ताज़ा ख़बरें, Prabhasakshi.com पर]]></description>
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      <title><![CDATA[क्या आपका Lifestyle भी बढ़ा रहा है High Blood Pressure का रिस्क? इन गलतियों से आज ही करें तौबा]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/bad-habits-fueling-high-bp-the-silent-killer-risk]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में ज्यादातर लोग असंतुलित और अन्हेल्दी रुटीन का पालन कर रहे हैं, जिसका सीधा असर उनकी सेहत पर पड़ रहा है। इसी वजह से हाइपरटेंशन यानी हाई ब्लड प्रेशर के मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है। हर साल बड़ी संख्या में लोग इस समस्या की चपेट में आ रहे हैं। अधिक नमक का सेवन, फास्ट फूड की आदत, मानसिक तनाव, शारीरिक गतिविधियों की कमी, बढ़ता वजन, धूम्रपान और शराब का सेवन हाई ब्लड प्रेशर के प्रमुख कारणों में शामिल हैं। </div><div>चूंकि यह बीमारी अक्सर शुरुआती चरण में कोई स्पष्ट संकेत नहीं देती, इसलिए इसे 'साइलेंट किलर' भी कहा जाता है। आइए आपको बताते हैं हाई ब्लड प्रेशर से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां और इससे बचाव के प्रभावी उपाय।</div><div><br></div><div><b>हाई ब्लड प्रेशर के कारण</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">उच्च रक्तचाप के प्रमुख कारणों में से एक माना जाता है अत्यधिक नमक का सेवन करना। प्रतिदिन अधिक नमक खाने से ब्लड प्रेशर बढ़ता है। प्रोसेस्ड फूड चिप्स, नमकीन, अचार और बाहर का खाना अक्सर ज्यादा नमक से भरे होते हैं। इसके साथ ही लगातार काम का दबाव, पारिवारिक समस्याएं या मानसिक तनाव लंबे समय से बने रहने से बीपी बढ़ जाता है। दिनभर बैठे रहना, एक्सरसाइज न करना और मोटापा भी बढ़ने लगता है।</span></div><div><br></div><div><b>खानपान की बातों पर ध्यान दें</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">इस बात का ध्यान रखें कि प्रोसेस्ड फूड का अधिक सेवन, तंबाकू और शराब से सेवन से धमनियों को नुकसान पहुंचाता है और हाइपरटेंशन का खतरा बढ़ जाता है। इसके साथ ही वजन बढ़ जाता है और पेट के आसपास की चर्बी, हृदय पर दबाव बन जाता है और बीपी बढ़ाती जाती है।&nbsp;</span></div><div><br></div><div><b>हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने के तरीके</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">उच्च रक्तचाप की समस्या से बचने के लिए समय-समय पर अपना ब्लड प्रेशर चेक कराते रहना चाहिए। इसके साथ ही पौष्टिक और कम नमक युक्त भोजन को अपनी दिनचर्या में शामिल करें। रोजाना लगभग 30 मिनट तक एक्सरसाइज करें- जैसे तेज चाल से चलना या व्यायाम करना। मानसिक तनाव को कम करने के लिए योग और ध्यान का अभ्यास करें। साथ ही धूम्रपान, तंबाकू और शराब के सेवन से दूरी बनाए रखें तथा स्वस्थ वजन बनाए रखना भी हाई ब्लड प्रेशर की रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।</span></div>]]></description>
      <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 17:49:31 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/bad-habits-fueling-high-bp-the-silent-killer-risk</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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      <title><![CDATA[Diabetes Warning Signs: सुबह शरीर में दिखें ये लक्षण तो समझिए बज गई खतरे की घंटी, ना करें इग्नोर]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/morning-health-signs-that-may-indicate-diabetes]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>अक्सर खराब जीवनशैली और गलत खानपान के कारण डायबिटीज बीमारी का खतरा बना रहता है। डायबिटीज की बीमारी एक साइलेंट किलर है, जो धीरे-धीरे शरीर को खराब करती है। पिछले कुछ सालों में भारत में डायबिटीज के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है। डायबिटीज की बीमारी एक तरह का मेटाबॉलिक डिसॉर्डर है जिसमें शरीर या पर्याप्त इंसुलिन का उत्पादन नहीं करता है या उसे इसका ठीक से उपयोग करने में दिक्कत रहती है। इसलिए शरीर में इंसुलिन की कमी होने से शुगर का स्तर बढ़ने लगता है जो किडनी, स्किन, हृदय, आंखों और ओवरऑल पूरी हेल्थ को प्रभावित करता है।</div><div><span style="font-size: 1rem;">आपको बता दें कि, डायबिटीज की बीमारी किसी भी उम्र में हो सकती है, लेकिन बच्चों, किशोर और युवा वयस्क टाइप 1 डायबिटीज से अधिक प्रभावित हो सकते हैं। वहीं, टाइप 2 डायबिटीज 40 वर्ष की आयु के बाद के वयस्कों में अधिक घेरती है। यह बीमारी किडनी और दिल की बीमारियों का भी एक बड़ा रिस्क फैक्टर है।</span></div><div><span style="font-size: 1rem;">अक्सर डायबिटीज से पीड़ित लोगों को सुबह हाई ब्लड शुगर महससू होता है और उनमें गले और मुंह में शुष्की, रात भर बार-बार पेशाब करने के बाद भी पेशाब की थैली का भारी होना, नजर कमजोर होना और भूख जैसे लक्षण देखने को मिलते हैं। आइए आपको बताते हैं&nbsp; डायबिटीज के ऐसे लक्षण जिन्हें कभी-भी नहीं भूलना चाहिए।</span></div><div><br></div><div><span style="font-size: 1rem;"><b>सुबह दिखने वाले इन संकेतों को कभी न भूलें</b></span></div><div><span style="font-size: 1rem;">हेल्थ एक्सपर्ट बताते हैं कि सुबह नजर आने वाले ये लक्षण दिन में नहीं दिखते हैं, जैसे कि खुजली, थकान, कमजोरी, ज्यादा भूख लगना, ज्यादा प्यास लगना दिन और रात दोनों में हो सकता है। वजन कम होना, ठीक ना होने वाले घाव, प्राइवेट पार्ट में खुजली ये सभी लक्षण आपको दिन भर फील हो सकते हैं।</span></div><div><br></div><div><b>डायबिटीज के अन्य लक्षण</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">&nbsp;- अधिक भूख लगना</span></div><div><br></div><div>&nbsp;- अचानक वजन कम होना</div><div><br></div><div>&nbsp;- हाथों-पैरों में झुनझुनी होना</div><div><br></div><div>&nbsp;- थकावट, कमजोरी और शुष्क त्वचा होना</div><div><br></div><div>&nbsp;- घावों का धीरे-धीरे भरना</div><div><br></div><div>&nbsp;- ज्यादा प्यास लगना</div><div><br></div><div>&nbsp;- रात के समय अत्यधिक पेशाब आना</div><div><br></div><div>&nbsp;- संक्रमण और बालों का झड़ना</div><div><br></div><div>&nbsp;ये सभी लक्षण टाइप 2 डायबिटीज के आम लक्षण है। वहीं, टाइप 1 डायबिटीज में लोगों को मतली, पेट दर्द, उल्टी जैसे लक्षण महसूस हो सकते हैं।&nbsp;</div>]]></description>
      <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 16:33:03 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/morning-health-signs-that-may-indicate-diabetes</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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      <title><![CDATA[40 के बाद बढ़ रहा है Weight? Gym नहीं, ये 3 Home Workout हैं रामबाण इलाज]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/weight-loss-tips-after-40-in-womens-try-3-simple-home-fitness-exercises]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>भागदौड़ भारी जिंदगी में खुद के लिए समय निकाल पाना काफी मुश्किल है। खराब जीवनशैली और गलत खानपान के कारण तेजी से मोटापा बढ़ता है। 40 की उम्र में महिलाओं में थकान और वजन बढ़ने की समस्या आम है। वजन कम करने के लिए फिजिकल एक्टिविटी करना और डाइट पर खासा ध्यान दिया जाता है। अब आपको इस उम्र में वजन कम करने के लिए ज्यादा वर्कआउट करने की कोई जरुरत नहीं, बस आपको बेसिक एकसरसाइज करनी है।</div><div><br></div><div><b>हेल्थ एक्सपर्ट क्या कहते हैं?</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">हेल्थ एक्सपर्ट ने बताया है कि 40+ उम्र की महिलाओं को फिट रहने और शरीर सक्रिय रखने केलिए हैवी वर्कआउट करने की जरुरत नहीं है। बस उनको ऐसी एक्सरसाइज की जरुरत होती है, जो शरीर के अनुसार हो और पूरे दिन उन्हें एक्टिव रखें।</span></div><div><br></div><div><b>फास्‍ट वॉकिंग</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">जब आप बाहर जाए, तो गाड़ी लेने की जरुरत नहीं है। ब्रिस्क वॉकिंग करें और तेज चलें जिससे आप अपनी मंजिल तक पहुंच जाएं। हालांकि अपने ऊपर ज्यादा प्रेशर न डालें। यदि आपकी सांस फूलने लगे तो तुरंत रूक जाएं और आराम करें। वैसे यह कोई रेस नहीं बस आपको रोजाना सिर्फ 15 मिनट वॉक करना है, आपको फर्क नजर आ जाएगा।</span></div><div><br></div><div><b>स्ट्रेंथ ट्रेनिंग</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">महिलाओं के लगता है कि 40 की उम्र में वजन घटाना काफी मुश्किल है, लेकिन इतना भी कठिन नहीं है। सही वेट और सही तरीके से हल्की स्ट्रेंथ ट्रेनिंग पर्याप्त होती है।</span></div><div><br></div><div><b>&nbsp;बेसिक स्ट्रेंथ एक्सरसाइज</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">40 की उम्र में वजन को कम करने के लिए महिलाओं को कुछ बेसिक स्ट्रेंथ एक्सरसाइज करनी चाहिए। इसके लिए वह तीन एक्सरसाइज को रोजाना करें।</span></div><div><br></div><div><b>लाइट डंबल चेस्‍ट प्रेस&nbsp;</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">&nbsp;- इसे करने के लिए पीठ के बल लेट जाएं।</span></div><div><br></div><div>&nbsp;- दोनों हाथों में हल्के डंबल पकड़ें।</div><div><br></div><div>&nbsp;- अब डंबल्स को ऊपर करें, ध्यान रखे किं आपकी कलाई कंधों के सीध में रहे।</div><div><br></div><div>&nbsp;- इसके बाद धीरे-धीरे वापस पुरानी पोजीशन में आ जाएं।</div><div><br></div><div><b>बेंट ओवर रोस</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">&nbsp;- इसको करने के लिए हल्के डंबल्स पकड़ें।</span></div><div><br></div><div>&nbsp;- अब अपनी कमर से आगे की तरफ झुकें।</div><div><br></div><div>&nbsp;- फिर डंबल्स को अपने हिप्स की तरफ खींचे और कंधे के ब्लेड्स को पास लाएं।</div><div><br></div><div>&nbsp;- अब धीरे-धीरे वापस नीचे ले जाएं।</div><div><br></div><div><b>ग्‍लूट ब्रिज</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">- इस एक्सरसाइज को करने के लिए पीठ के बल लेटें।</span></div><div><br></div><div>&nbsp;- घुटनों को मोड़ें और पैरों को जमीन पर रखें।</div><div><br></div><div>&nbsp;- अपने हिप्स को ऊपर उठाएं और ग्लूट मसल्स को टाइट करें।</div><div><br></div><div>&nbsp;- इसके बाद धीरे-धीरे वापस पुरानी पोजीशन में आ जाएं।</div>]]></description>
      <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 15:54:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/weight-loss-tips-after-40-in-womens-try-3-simple-home-fitness-exercises</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
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      <title><![CDATA[Health Tips: आखिर रात को ही क्यों लगती है मिठाई और स्नैक्स की तलब, जानिए पूरा सच]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/why-does-hunger-and-craving-feel-stronger-at-night-in-hindi]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>क्या आपके साथ भी ऐसा होता है कि दिनभर आप अपनी डाइट का पूरा ख्याल रखते हैं, लेकिन रात होते-होते क्रेविंग्स बढ़ने लगती हैं। रात के समय अचानक कुछ मीठा, चॉकलेट, नमकीन या चिप्स खाने का मन करने लगता है और ऐसा लगता है कि मानो खुद पर कोई कण्ट्रोल ही ना रहा हो।&nbsp;</div><div><br></div><div>अगर आपके साथ भी ऐसा होता है, तो आप अकेले नहीं हैं। यह एक ऐसी समस्या है, जिसका सामना हममें से अधिकतर लोग करते हैं। आपको शायद जानकर हैरानी हो, लेकिन रात में अनहेल्दी फूड खाने की तलब के पीछे सिर्फ भूख नहीं, बल्कि हमारे शरीर, हार्माेन और आदतों का भी बड़ा रोल होता है। तो चलिए आज इस लेख में हम इस बारे में बात करते हैं-</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/health/prostate-cancer-becoming-silent-killer-learn-about-the-doctor-warning" target="_blank">Health Tips: Prostate Cancer बन रहा 'Silent Killer', शर्म और अनदेखी बन रही जानलेवा वजह, जानें Doctor's Warning</a></h3><h2>दिनभर की थकान रिवार्ड ढूंढने पर मजबूर करती है</h2><div>जब हम पूरा दिन काम करते हैं तो इससे हमें रात में थकान व तनाव का अहसास होता है। ऐसे में हमारा दिमाग खुद को कोई छोटा सा इनाम देना चाहता है। ऐसे में हम रात में सलाद या कोई हेल्दी फूड नहीं खाना चाहते, बल्कि आइसक्रीम, चॉकलेट, बिस्कुट या नमकीन खाकर खुद को खुशी और संतुष्टि का एहसास देना चाहते हैं।</div><div><br></div><h2>नींद की कमी से बढ़ सकती है क्रेविंग</h2><div>अक्सर हमें क्रेविंग्स देर रात होती है। इसका सीधा सा मतलब यही है कि नींद की कमी से भी कहीं ना कहीं क्रेविंग बढ़ती है। अगर आप देर रात तक जागते हैं तो शरीर के कुछ हार्माेन प्रभावित होते हैं। जिसकी वजह से भूख बढ़ाने वाला हार्मोन ज्यादा सक्रिय हो जाता है। ऐसे में रात में बार-बार कुछ खाने का मन करता है।&nbsp;&nbsp;</div><div><br></div><h2>जरूरत से ज्यादा डाइटिंग</h2><div>अधिकतर लोग अपनी बॉडी को एक शेप में देखना चाहते हैं और इसलिए दिन में बहुत कम खाते हैं या फिर बेहद स्ट्रिक्ट डाइटिंग करते हैं। ऐसे में रात तक शरीर एनर्जी की कमी महसूस करने लगता है। जिससे अचानक तेज क्रेविंग शुरू हो जाती है और फिर हम खुद को रोक ही नहीं पाते हैं।</div><div><br></div><h2>रात की क्रेविंग कम करने के लिए क्या करें&nbsp;</h2><div>अगर आप रात की क्रेविंग को नेचुत तरीके से कण्ट्रोल करना चाहते हैं तो इसके लिए कुछ आसान तरीके आजमाएं।</div><div><br></div><div>- दिनभर पर्याप्त प्रोटीन खाएं।</div><div>- मील स्किप करने से बचें।</div><div>- रात में अच्छी नींद लें।</div><div>- तनाव कम करने के लिए खाने की जगह रिलैक्सेशन तकनीक अपनाएं।</div><div>- टीवी देखते समय स्नैक खाने की आदत को धीरे-धीरे बदलें।</div><div><br></div><div>- मिताली जैन</div>]]></description>
      <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 14:43:19 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/why-does-hunger-and-craving-feel-stronger-at-night-in-hindi</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Health Tips: Prostate Cancer बन रहा 'Silent Killer', शर्म और अनदेखी बन रही जानलेवा वजह, जानें Doctor's Warning]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/prostate-cancer-becoming-silent-killer-learn-about-the-doctor-warning]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>भारत में धीरे-धीरे प्रोस्टेट कैंसर एक 'साइलेंट किलर' के रूप में बढ़ता जा रहा है। लेकिन सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि भारतीय पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर का पता अक्सर बहुत देर से चलता है। जब तक कि यह बीमारी गंभीर रूप न ले ले, तब तक इसके बारे में पता नहीं चलता है। आखिर हमारे देश में इन गंभीर और जानलेवा बीमारी की पहचान इतनी देर में क्यों होती है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको प्रोस्टेट कैंसर के लक्षणों और मुख्य कारणों के बारे में बताने जा रहे हैं।</div><div><br></div><h2>जागरूकता न होना और लक्षणों की अनदेखी करना</h2><div>प्रोस्टेट कैंसर के देरी से पकड़े जाने की सबसे बड़ी वजह जागरुकता का अभाव है। अक्सर पुरुष शुरूआती लक्षणों को सिर्फ 'बढ़ती उम्र का असर' समझकर नजरअंदाज करने की गलती करते हैं। वहीं लोग इन शुरुआती लक्षणों को भी गंभीरता से नहीं लेते हैं।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/health/stress-or-iron-deficiency-health-signs-to-know" target="_blank">Health Alert: मामूली थकान और चिड़चिड़ापन नहीं, ये Iron Deficiency के गंभीर संकेत हो सकते हैं!</a><span style="font-size: 1rem;">&nbsp;</span></h3><div><br></div><h2>लक्षण</h2><div>पेशाब करते समय जलन महसूस होना</div><div>बार-बार पेशाब आना</div><div>रात के समय टॉयलेट के लिए बार-बार उठना</div><div>पेशाब का रुक-रुक कर आना</div><div><br></div><h2>शर्म और हिचकिचाहट</h2><div>आज भी हमारे समाज में पुरुष स्वास्थ्य संबंधी निजी समस्याओं पर खुलकर बात नहीं करते हैं। प्रोस्टेट जैसी बीमारी के बारे में डॉक्टर से बात करने में शर्म और संकोच महसूस करते हैं। इसी हिचकिचाहट की वजह से पुरुष अपनी तकलीफ को छिपाते रहते हैं और सही समय पर जांच नहीं हो पाती है।</div><div><br></div><h2>सुविधाओं का अभाव</h2><div>ग्रामीण क्षेत्रों और छोटे शहरों में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी एक बड़ी चुनौती है। कई जगहों पर कैंसर की जांच के लिए आधुनिक मशीनें और सुविधाएं नहीं हैं। वहीं आर्थिक परेशानी और बड़े अस्पतालों तक लंबी दूरी तय करने की मजबूरी की वजह से भी लोग लंबे समय तक जांच को टालते रहते हैं।</div><div><br></div><h2>रूटीन हेल्थ चेकअप न कराना</h2><div>भारत में अभी भी रूटीन हेल्थ चेकअप कराने का चलन काफी कम है। इसलिए डॉक्टर की सलाह है कि 50 साल से अधिक उम्र के पुरुषों को समय-समय पर प्रोस्टेट की जांच जरूर कराना चाहिए। लेकिन अधिकतर लोग डॉक्टर के पास तभी जाते हैं, जब उनकी समस्या बर्दाश्त के बाहर होती है।</div><div><br></div><h2>समय पर स्क्रीनिंग</h2><div>हेल्थ एक्सपर्ट की मानें, तो कई मामलों में शुरूआती चरण में यह बीमारी बिना किसी बड़े या स्पष्ट लक्षणों के शरीर खमोशी से पनपती है। यही कारण है कि समय पर स्क्रीनिंग कराना बेहद जरूरी है। अगर बीमारी को शुरूआती चरण में पकड़ लिया जाए, तो इसके इलाज के सफल होने के चांसेज काफी ज्यादा बढ़ जाते हैं।</div><div><br></div><h2>जानिए समाधान</h2><div>समाज में प्रोस्टेट कैंसर को लेकर जागरुकता बढ़ाई जानी चाहिए। वहीं पुरुषों को भी यह समझना होगा कि वह बिना किसी संकोच या शर्म के डॉक्टर के सामने अपने परेशानियों को साझा कर सकते हैं। सही जानकारी, नियमित जांच और सही समय पर उठाया गया कदम इस 'साइलेंट किलर' के जोखिम को काफी हद तक कम कर सकता है।</div>]]></description>
      <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 11:35:36 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/prostate-cancer-becoming-silent-killer-learn-about-the-doctor-warning</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
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      <title><![CDATA[Health Alert: मामूली थकान और चिड़चिड़ापन नहीं, ये Iron Deficiency के गंभीर संकेत हो सकते हैं!]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/stress-or-iron-deficiency-health-signs-to-know]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>हम सभी दिनभर की भागदौड़ में व्यस्त रहते हैं और जब शाम को थकान होती है या काम के दबाव में स्ट्रेस फील होता है, वह एक आम बात है। जब हम बिना किसी वजह के कमजोरी महसूस करते हैं या मूड खराब रहता है, तो हम अक्सर खुद ही यह मान लेते हैं कि शायद का प्रेशर ज्यादा है या फिर नींद पूरी नहीं हुई, इसलिए यह हो रहा है।&nbsp;</div><div><span style="font-size: 1rem;">अक्सर देखा गया है कि यह मामूली थकान से ज्यादा गंभीर समस्या हो सकती हैं, जिसे हम नजरअंदाज कर रहा हैं। ये लक्षण आयरन की कमी का संकेत भी हो सकते हैं। इन लक्षणों को भूलकर भी इग्नोर न करें, वरना आगे चलकर बड़ी दिक्कत हो सकती है। आइए आपको इस बारे में बताते हैं-</span></div><div><b style="font-size: 1rem;">कैसे होते हैं आयरन की कमी के संकेत?</b></div><div><br></div><div><span style="font-size: 1rem;"><b>लगातार कमजोरी और सुस्ती</b></span></div><div><span style="font-size: 1rem;">आयरन की कमी का सबसे बड़ा संकेत है, हीमोग्लोबिन कम होने की वजह से शरीर के सभी अंगों तक सही मात्रा में ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाता। हर वक्त थका हुआ और कमजोरी महसूस फील करता है।</span></div><div><br></div><div><b>चिड़चिड़ापन और मूड स्विंग्स</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">जब शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी होती है, तो दिमाग को सही मात्रा में ऑक्सीजन नहीं मिलता। इस कारण से कई बार काम पर फोकस करने में परेशानी, सिरदर्द या बेवजह चिड़चिड़ापन की समस्या देखने को मिलती है।</span></div><div><br></div><div><b>सांस फूलना</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">अगर आप थोड़ा-सा चलने और सीढ़ियों पर चढ़ते हैं, तो सांस फूलना और घबराहट हो सकती है। यह शरीर में ऑक्सीजन की कमी पूरा करने के लिए दिल पर ज्यादा मेहनत करता है, जिस वजह से धड़कनें तेज हो जाती है, जिसे हमें कई बार एंग्जायटी समझते हैं।&nbsp;</span></div><div><br></div><div><b>स्ट्रेस और आयरन की कमी में अंतर</b></div><div><br></div><div><b>त्वचा का पीलापन</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">यदि आपके चेहरा पीला दिखने लगा है, तो यह शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी का संकेत हो सकता है।&nbsp;</span></div><div><br></div><div><b>हाथ-पैर ठंडे रहना</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">अगर आपके हाथ-पैर हमेशा ठंडे रहते हैं, तो यह खराब ब्लड सर्कुलेशन और आयरन की कमी का संकेत है।</span></div><div><br></div><div><b>असामान्य चीजें खाने का मन</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">यदि आपको आयरन की गंभीर कमी है, तो मिट्टी, चॉक या कच्चे चावल खाने की इच्छा ज्यादा होगी।</span></div>]]></description>
      <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 17:37:11 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/stress-or-iron-deficiency-health-signs-to-know</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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      <title><![CDATA[Health Tips: Heatwave का आंखों पर 'साइलेंट अटैक', बढ़ रहा Redness और Infection का खतरा, जानें ये Eye Care Tips]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/heatwave-attack-on-eyes-increasing-redness-and-risk-of-infection-learn-eye-care-tips]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>बढ़ती गर्मी को हम सिर्फ डिहाइड्रेशन, लू या सनबर्न से जोड़कर देखते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसका असर आपकी आंखों पर भी देखने को मिल सकता है। गर्मियों में ड्राई आइज, जल, एनर्जी और धुंधला दिखने की समस्या बढ़ जाती है। जब तापमान 45 डिग्री सेल्सियस को पार कर जाता है, तो लंबे समय तक धूप में रहने से आंखों को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि हीटवेव का आपकी आंखों पर क्या असर होता है और इस समस्या से बचने के लिए आपको क्या करना चाहिए।</div><div><br></div><h2>हीटवेव आंखों को ऐसे पहुंचाती है नुकसान</h2><div><br></div><h2>टियर फिल्म का सूख जाना</h2><div>बता दें कि हमारी आंखों की सतह को सेफ और नमी बनाए रखने के लिए एक बारीक टियर फिल्म होती है। जोकि प्रदूषण, धूल और इंफेक्शन से बचाव करती है। हीटवेव के दौरान चलने वाली गर्म हवाएं, तेज धूप और शरीर में पानी की कमी इस नमी को तेजी से सुखा देती है। इससे आंखों में ड्राईनेस की समस्या और कॉर्निया में जलन का खतरा बढ़ जाता है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/health/balance-hormones-naturally-know-diet-and-lifestyle-tips" target="_blank">Hormonal Imbalance है Mood Swings की वजह? Diet और Fitness से ऐसे करें कंट्रोल</a></h3><div><br></div><h2>AC और बाहरी तापमान में बदलाव</h2><div>अक्सर लोग तेज गर्मी से बचने के लिए एयर कंडीशनर में बैठते हैं। फिर बाहर धूप में काम के लिए जाते हैं। तापमान में अचानक बदलाव और AC की ड्राई हवा आंखों की नमी को कम कर देती है। जिससे इंफेक्शन का खतरा बढ़ता है।</div><div><br></div><h2>बच्चों और युवाओं पर असर</h2><div>गर्मी की छुट्टियों में बच्चे और युवा लैपटॉप, मोबाइल या टैबलेट पर अधिक समय बिताते हैं। स्क्रीन देखने के दौरान हम कम पलकें झपकाते हैं। जिससे आंखों में ड्राईनेस और डिजिटल आई स्ट्रोन, खुजली, रेडनेस और जलन की समस्या बढ़ जाती है।</div><div><br></div><h2>UV रेडिएशन के नुकसान</h2><div>वहीं सुबह के 10 बजे से दोपहर के 3 बजे तक सूर्य की UV किरणों का स्तर सबसे ज्यादा होता है। इस दौरान अगर सीधी धूप के संपर्क में आते हैं, तो रेटिना को नुकसान, मोतियाबिंद का तेजी से बढ़ना, फोटोकेराइटाइटिस यानी आंखों का सनबर्न और टेरीजियम जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।</div><div><br></div><h2>आंखों को ऐसे रखें सुरक्षित</h2><div>जब भी आप धूप में घर से बाहर जाए, तो हमेशा अच्छी क्वालिटी वाले सनग्लासेज पहनने चाहिए, जो 100% UV किरणों को रोकते हों।</div><div><br></div><div>दिन भर पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए, इसके अलावा आप नींबू पानी या नारियल पानी भी पी सकते हैं। इससे शरीर के साथ-साथ आंखों में भी नमी बनी रहती है।</div><div><br></div><div>जब भी आप मोबाइल, टैबलेट या लैपटॉप का इस्तेमाल करें, तो हर 20 मिनट बाद, 20 फीट दूर किसी चीज को कम से कम 20 सेकेंड देखें। इससे आंखों की मांसपेशियों को भी आराम मिलता है।</div><div><br></div><div>जब भी बाहर से वापस आएं, तो आंखों को ठंडे और साफ पानी से धोना चाहिए। इस दौरान आंखों को रगड़ने से बचें। क्योंकि ऐसा करने से इंफेक्शन फैल सकता है।</div><div><br></div><div>आंखों में रेडनेस या जलन की समस्या होने पर बिना डॉक्टर की सलाह के कोई आई ड्रॉप न डालें।</div>]]></description>
      <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 13:23:44 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/heatwave-attack-on-eyes-increasing-redness-and-risk-of-infection-learn-eye-care-tips</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Hormonal Imbalance है Mood Swings की वजह? Diet और Fitness से ऐसे करें कंट्रोल]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/balance-hormones-naturally-know-diet-and-lifestyle-tips]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>खराब लाइफस्टाइल और गलत खानपान के कारण कई बार शरीर में हार्मोनल बदलाव किए जाते हैं। जब हार्मोन में बदलाव होते हैं, तो व्यक्ति के मूड में बार-बार बदलाव, वजन बढ़ने और मनोदशा में काफी बदलाव देखने को मिलता है। हमारे शरीर में एंडोक्राइन सिस्टम हार्मोन को सर्कुलेट करता है, जो काफी कार्यों के लिए जरुरी होता है। शरीर हेल्दी बने रहे इसलिए बॉडी में कई हार्मोन्स सटीक मात्रा में लगातार बनते हैं।</div><div><span style="font-size: 1rem;">हार्मोन्स शरीर के ऐसे केमिकल मैसेंजर हैं जो मेटाबॉलिज्म, वजन, मूड, नींद, भूख प्रजनन क्षमता और एनर्जी लेवल को भी नियंत्रित करता है। अक्सर मेडिकल में देखा गया है कि अनियमित जीवनशैली के कारण&nbsp; पीएमओएस, डायबिटीज, थायरॉयड आदि या खानपान की गलत आदतें&nbsp; &nbsp;हार्मोन के संतुलन को प्रभावित कर सकती हैं। आइए आपको बताते हैं कैसे आप हार्मोनल असंतुलन को आसानी से कंट्रोल कर सकते हैं।&nbsp;</span></div><div><br></div><div><b>असंतुलित हार्मोन को ठीक करने के नेचुरल उपाय</b></div><div><br></div><div><span style="font-size: 1rem;"><b>अपनी डाइट में प्रोटीन रिच फूड्स को एड करें</b></span></div><div><span style="font-size: 1rem;">एनसीबीआई के अनुसार, प्रोटीन शरीर के लिए बेहद जरुरी पोषक तत्व है। प्रोटीन शरीर को जरुरी अमीनो एसिड को प्रदान करता है, जिसकी मदद से कई जरुरी हार्मोन्स बनते हैं। पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन युक्त आहार लेने से ग्रोथ हार्मोन्स और टेस्टोस्टोरोन में बढ़ोतरी होती है। रिसर्च में बताया गया है कि अगर आप हर मील में 25 से 30 ग्राम प्रोटीन लेते हैं, तो यह आपके लिए काफी फायदेमंद होता है। इसलिए आप डाइट में अंडे, दालें, पनीर, दूध, दही, चिकन, सोया और टोफू का सेवन कर सकते हैं।</span></div><div><br></div><div><b>रोजाना एक्सरसाइज करें</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">हार्मोनल हेल्थ के लिए नियमित रुप से फिजिकल एक्टिविटी करना बेहद जरुरी है। NIH के अनुसार प्रतिदिन व्यायाम इंसुलिन संवेदनशीलता को बढ़ाने में मदद करता है और शरीर में ब्लड शुगर के लेवल को नियंत्रित करने में सहायक होता है। एनसीबीआई के अनुसार, नियमित एक्सरसाइज करने में एंडोर्फिन और ग्रोथ हार्मोन एक्टिव रहता है। जिससे मूड और एनर्जी लेवल बेहतर होते हैं। इसलिए रोजाना तेज चलना, साइकलिंग, स्ट्रेंथ ट्रेनिंग, योग आदि एक्सरसाइज करें।</span></div><div><br></div><div><b>वजन को नियंत्रित करता है</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">अगर आप बढ़ते हुए वजन से परेशान हैं, तो इसके पीछे का कारण हार्मोन असंतुलन होता है। एनसीबीआई के अनुसार, मोटापा इंसुलिन, लेप्टिन और एस्ट्रोजन जैसे हार्मोन्स के संतुलन को प्रभावित कर सकता है। जब शरीर में अतिरिक्त फैट जमा होता है, तो सूजन बढ़ने की संभावना अधिक होती है और इससे हार्मोनल समस्याएं होने का खतरा और भी बढ़ जाता है। वजन कम करने के लिए प्रोसेस्ड फूड, बाहर का अनहेल्दी खाना, व्हाइट ब्रेड और चीनी वाले अन्य ड्रिंक्स लेने से बचें। इसके साथ ही फिजिकली रूप से एक्टिव रहना बेहद जरुरी है।</span></div><div><br></div><div><b>तनाव न लें</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">इंडियन जरनल ऑफ एंडोक्राइनोलॉजी एंड मेटाबॉलिज्म के अनुसार, अत्यधिक तनाव शरीर के हार्मोनल संतुलन को प्रभावित कर सकता है। तनाव की स्थिति में ग्लूकोकोर्टिकोइड्स, कैटेकोलामाइंस, ग्रोथ हार्मोन और प्रोलैक्टिन जैसे हार्मोनों के स्तर में बदलाव देखा जा सकता है। इनमें से कुछ बदलाव शरीर को चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों से निपटने में मदद करते हैं, लेकिन लंबे समय तक बना रहने वाला तनाव ग्रेव्स रोग, प्रजनन संबंधी समस्याओं और बढ़ते वजन जैसी स्थितियों के जोखिम को बढ़ा सकता है।&nbsp;</span></div><div>इसलिए मानसिक तनाव को नियंत्रित रखना जरूरी है। इसके लिए नियमित योग और ध्यान का अभ्यास करें, अपने करीबी लोगों से खुलकर बातचीत करें, प्रकृति के बीच समय बिताएं और मनपसंद संगीत सुनकर खुद को रिलैक्स रखने की कोशिश करें।</div><div><br></div><div><b>शुगर का सेवन कम करें</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">यूनिवर्सिटी ऑफ उटाह के मुताबिक, अधिक मात्रा में शुगर या चीनी से बनीं चीजें खाने से एस्ट्रोजन हार्मोन के स्तर पर काफी प्रभाव पड़ता है। इससे महिलाएं में ओव्यूलेशन से जुड़ी&nbsp; समस्याएं हो सकती हैं। इसके साथ ही यह मेंस्ट्रुअल साइकिल को भी प्रभावित कर सकता है। इसलिए रोजाना अपनी डाइट में शामिल होने वाली शुगर या उससे बनी चीजों का बाहर करें। ब्रेड, कोल्ड ड्रिंक्स और सोडा का सेवन न करें। इसकी जगह पर आप फल, गुड़, नारियल पानी का सेवन कर सकते हैं।&nbsp;</span></div>]]></description>
      <pubDate>Sun, 14 Jun 2026 16:21:05 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/balance-hormones-naturally-know-diet-and-lifestyle-tips</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Internet का 'झोलाछाप' Doctor बना ChatGPT, AI की आधी से ज्यादा Medical सलाह भ्रामक]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/chatgpt-health-advice-a-dangerous-risk-say-experts]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>आज के डिजिटल दौर में तकनीकी दुनिया में काफी बदलाव आया। जबसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आया है, तब से हर एक काम काफी आसान हो गया है। आजकल लोग अपनी हेल्थ संबंधित समस्याएं तुरंत ChatGPT से पूछते हैं। डॉक्टर से बीमारी परामर्श लिए बिना सभी लोग चैटजीपीटी से बीमारियों को उपचार कर रहे हैं, क्या यह एकदम सुरक्षित और सही तरीका है।&nbsp;</div><div><span style="font-size: 1rem;">&nbsp;बीमारी के लक्षणों को समझने और मेडिकल कंडिशन के बारे में जानने से लेकर डाइट, फ़िटनेस और बचाव के तरीकों पर सलाह लेने तक, कई यूजर्स हेल्थ से जुड़ी तुरंत और आसानी से मिलने वाली गाइडेंस के लिए AI-पावर्ड टूल्स का सहारा ले रहे हैं। हेल्थ एक्सपर्ट ने बताया कि ChatGPT डॉक्टर की जगह क्यों नहीं ले सकता है।&nbsp;</span></div><div><br></div><div><span style="font-size: 1rem;"><b>ChatGPT टूल है डॉक्टर नहीं है</b></span></div><div><span style="font-size: 1rem;">आजकल लोग अपनी रिपोर्ट, प्रिस्क्रिप्शन और टेस्ट रिजल्ट ChatGPT पर अपलोड करके सलाह ले रहे हैं, जो कि सही नहीं है। अब मन में सवाल उठता है कि एआई सच में डॉक्टर की जगह ले सकता है। हेल्थ एक्सपर्ट ने बताया है कि ChatGPT मेडिकल जानकारी को समझाने में मदद कर सकता है। आपकी रिपोर्ट के कठिन शब्दों को आसान भाषा में समझा सकता है।</span></div><div><span style="font-size: 1rem;"> हालांकि, यह आपकी पूरी मेडिकल हिस्ट्री, बॉडी चेकअप और वास्तिवक परिस्थितियों को नहीं बता सकता है। अगर आप AI की सलाह लेकर दवा शुरु करना, बंद करना या दवाई को बदल रहे हैं, तो यह आपके लिए जोखिम भरा हो सकता है। गौरतलब है कि एआई एक असिस्टेंट हो सकता है लेकिन डॉक्टर की जगह कभी नहीं ले सकता।&nbsp;</span></div><div><br></div><div><b>&nbsp;50% मेडिकल सलाह गलत होती है</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">न्यूज 18 के इंटरव्यू में हेल्थ एक्सपर्ट ने बताया कि AI का इस्तेमाल हेल्थ के लिए इस्तेमाल करना इतना खतरनाक नहीं है। लेकिन उन्होंने खुलासा किया है कि चैटजीपीटी के द्वारा दी गई करीब 50% मेडिकल सलाह गलत होती है। इनमें से लगभग 20% जवाब अत्यधिक खतरनाक और भ्रामक होते है।</span></div><div><br></div><div><b>आईसीयू (ICU) पहुंचने का खतरा</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">अक्सर ऐसे मामले में सामने आए है कि जहां लोगों ने एआई के जरिए अजब-गजब डाइट प्लान या नुस्खे को अपना लिए, जिसके बाद हालत इतनी बिगड़ गई कि आईसीयू में भर्ती होना पड़ा।</span></div><div><br></div><div><b>ओपनएआई भी कर चुका है खुलासा</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">दरअसल, ओपनएआई ने अपनी पॉलिसी में स्पष्ट कहा है कि ChatGPT कोई डॉक्टर नहीं है और इसका प्रयोग मेडिकल ट्रीटमेंट या किसी भी तरह की सलाह के लिए इस्तेमाल बिल्कुल न करें।&nbsp;</span></div>]]></description>
      <pubDate>Sat, 13 Jun 2026 17:32:26 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/chatgpt-health-advice-a-dangerous-risk-say-experts</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[सेहतमंद Papaya कब बन जाता है खतरनाक? Doctor से जानें किन लोगों के लिए है ये 'Slow Poison']]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/doctor-warns-who-should-not-eat-papaya]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>आमतौर पर पपीता का सेवन हर कोई करता है। असल में पपीता खाने की सलाह कब्ज होने पर दी जाती है। पपीता में डाइट्री फाइबर, विटामिन्स और कई सारे मिनरल्स पाए जाते हैं। हर किसी का पका पपीता काफी पसंद होता है यह मीठा और स्वादिष्ट होता है, लेकिन कुछ लोगों के लिए कच्चे पपीते की सब्जी और इसका सलाद खाना पसंद होता है।</div><div><span style="font-size: 1rem;">वैसे कुछ लोगों के लिए पपीता का सेवन करना काफी फायदेमंद होता है। लेकिन कुछ लोगों के लिए यह नुकसानदायक होता है। आइए आपको बताते हैं कि पपीता खाने से किस तरह की हेल्थ प्रॉब्लम बढ़ जाती है।&nbsp;</span></div><div><br></div><div><b>पपीते में कौन-से न्यूट्रिशन पाए जाते हैं</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">साइंस डायरेक्ट के अनुसार, पपीते में फाइबर, फोलेट, विटामिन-C, विटामिन-A, पोटैशियम, पपेन (Papain) एंजाइम पाए जाते हैं। यह फल हमेशा पाचन को सुधारने में मदद करता है और कब्ज की दिक्कत भी दूर करता है।</span></div><div><br></div><div><b>ये लोग भूलकर भी न खाएं पपीता</b></div><div><br></div><div><b>लेटेक्स एलर्जी होने पर पपीता न खाएं</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">अगर आपको लेटेक्स एलर्जी से समस्या है, तो आप भूलकर भी पपीता सेवन न करें, क्योंकि इससे आपको एलर्जिक रिएक्शन हो सकता है। पपीता में पाए जाने वाला नेचुरल लेटेक्स कुछ लोगों में क्रॉस-रिएक्शन पैदा कर सकते हैं। जनरल ऑफ एलर्जी एंड क्लीनिकल इम्यूनोलॉजी में बताया है कि पपेन और पपीता लेटेक्स संवेदनशील लोगों में एलर्जी का कारण बनता है। असल में लेटेक्स एलर्जी पीड़ित व्यक्ति को खुजली, त्वचा पर रैशेज, होंठों में सूजन, सांस लेने में परेशानी और गले में जलन महसूस होना।</span></div><div><br></div><div><b>प्रेग्नेंसी में कच्चा पपीता खाने से बचें</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">प्रेग्नेंसी के दौरान पपीता खाने की मनाही होती है। कच्चे पपीते में पाए जाने वाले लेटेक्स से बचना चाहिए। क्योंकि इससे प्रेग्नेंसी में तीव्र संकुचन हो सकते हैं, जिससे समय से पहले डिलीवरी की समस्या हो सकती है। वहीं, पपीते में पाए जाने वाले पैपेन को कुछ मामलों में गर्भवस्था के दौरान महिला का शरीर इसे गलती से प्रोस्टाग्लैंडिन समझ सकते हैं। प्रोस्टाग्लैंडिन का इस्तेमाल कई बार लेबर पेन शुरु करने के लिए किया जाता है। इसके अलावा, यह गर्भ में पल रहे बच्चों को सहारा देने वाली झिल्लियों को भी कमजोर कर देती है।</span></div><div><br></div><div><b>सांस से जुड़ी समस्या</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">एनआईएच की रिपोर्ट के अनुसार, पपीते में पाए जाने वाला पैपेन एंजाइम अस्थमा से पीड़ित लोगों में सांस लेने में तकलीफ पैदा हो जाती है। ऐसे में डॉक्टर्स बताते हैं कि अस्थमा से पीड़ित लोगों को पपीते का सेवन करने से पहले अपने डॉक्टर को जरुर दिखाएं।&nbsp;</span></div><div><br></div><div><b>किडनी के मरीज</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">अगर आपको किडनी संबंधित जुड़ी कोई समस्या है, तो उनको अधिक मात्रा में पपीते का सेवन करने से बचना चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि पपीते में अधिक मात्रा में पोटैशियम पाया जाता है। नेशनल किडनी फाउंडेशन के अनुसार, जब शरीर में किसी फूड या अन्या सोर्स से पोटैशियमल की मात्रा अधिक हो जाती है, तो ऐसे में किडनी द्वारा अधिक पोटैशियमल को फिल्टर करके बाहर निकाला जा सकता है। जब किसी व्यक्ति पहले से किडनी की समस्या से पीड़ित है, तो उसको किडनी पर दबाव डालने वाले आहार का सेवन नहीं करना चाहिए।</span></div><div><br></div><div><b>पपीता खाते समय किन बातों का ध्यान रखें?</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">- ध्यान रहें कि हमेशा फ्रेश और पका हुए पपीता खाएं।</span></div><div><br></div><div>&nbsp;- जरुरत से ज्यादा सेवन न करें।</div><div><br></div><div>&nbsp;- किसी बीमारी में डॉक्टर की सलाह के बाद ही डाइट में बदलाव करें।</div><div><br></div><div>&nbsp;- अगर आपको एलर्जी है, तो पपीता खाना बंद करें।</div>]]></description>
      <pubDate>Sat, 13 Jun 2026 14:04:01 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/doctor-warns-who-should-not-eat-papaya</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Digestive Health Myths: दूध और मसालेदार खाने से जुड़ी इन बातों को मानते हैं सच? जानें पूरी सच्चाई]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/do-you-believe-these-things-about-milk-and-spicy-food-learn-full-truth]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>कई लोगों का मानना है कि दूध पीने से गैस और पेट फूलने की समस्या होती है। इसकी मुख्य वजह 'लैक्टोज इनटॉलेरेंस' है। बता दें कि इसके पीछे का कारण शरीर में लैकेटेज एंजाइम की कमी होती है, जिसको दूध में मौजूद लैक्टोज पचा नहीं पाता है। आज के समय में गैस, पेट दर्द, एसिडिटी और कब्ज जैसी समस्याएं आम हैं। लेकिन इनसे जुड़ी कई गलत धारणाएं आज भी लोगों के बीच मौजूद हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको पाचन से जुड़ी कुछ ऐसी अफवाहों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनकी सच्चाई के बारे में आपको भी जानना जरूरी है। जिससे आप अपने न सिर्फ पेट बल्कि सेहत का भी सही तरीके से ध्यान रख सकें।</div><div><br></div><h2>हर मसालेदार खाना पेट के लिए नुकसानदेह</h2><div>हालांकि यह एक आम धारणा है, लेकिन इसमें पूरी सच्चाई नहीं है। असल में मसालों का सीमित इस्तेमाल पाचन प्रोसेस को बेहतर बनाता है। जीरा, धनिया, हल्दी और अदरक जैसे मसाले पाचन एंजाइम्स को सक्रिय करते हैं। जिससे खाना जल्दी और बेहतर तरीके से पचता है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/health/troubled-by-work-stress-and-anxiety-at-office-these-lifestyle-tips-provide-relief" target="_blank">Health Tips: ऑफिस में Work Stress और Anxiety से हैं परेशान? ये Lifestyle Tips देंगे तुरंत राहत</a></h3><div><br></div><div>लेकिन समस्या तब होती है, जब बहुत ज्यादा मसालेदार या तीखा भोजन लगातार खाया जाता है, तो इससे जलन, एसिडिटी और गैस की समस्या हो सकती है। इसलिए हमेशा संतुलित मात्रा में मसालों का सेवन करना चाहिए।</div><div><br></div><h2>दूध पीने से गैस बनती है</h2><div>यह बात पूरी तरह से सच नहीं है, क्योंकि दूध एक पौष्टिक आहार है। इसमें प्रोटीन, कैल्शियम और विटामिन्स भरपूर मात्रा में होता है। लेकिन कुछ लोगों में लैक्टोज इनटॉलरेंस की समस्या होती है। इस दौरान शरीर दूध को ठीक से पचा नहीं पाता है। ऐसे लोगों को पेट दर्द, गैस या अपच की समस्या हो सकती है। बाकी लोगों के लिए यह एक हेल्दी ड्रिंक है, जोकि हड्डियों को मजबूत बनाता है और शरीर को एनर्जी देने का काम करता है।</div><div><br></div><h2>रोजाना मल त्याग न होना</h2><div>बता दें कि हर व्यक्ति का पाचन तंत्र अलग-अलग होता है। इसलिए मल त्याग की भी आदत अलग हो सकती है। कुछ लोगों को दिन में एक बार या फिर दो बार भी सामान्य माना जाता है। लेकिन अगर लंबे समय तक पेट दर्द, कब्ज या भारीपन महसूस होता है, तो यह चिंता का विषय हो सकता है। इस स्थिति फाइबर युक्त भोजन और पानी की मात्रा बढ़ानी चाहिए।</div><div><br></div><h2>बार-बार एंटासिड दवाएं लेना</h2><div>भले ही एंटासिड दवाएं फौरन राहत देती हैं, लेकिन इनको बार-बार और लंबे समय तक नहीं लेना चाहिए। इनका लगातार इस्तेमाल करने से शरीर में कैल्शियम और मैग्नीशियम का संतुलन बिगड़ सकता है। इससे अन्य सेहत संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। अगर एसिडिटी बार-बार हो रही है, तो इसके पीछे के कारण जानने के लिए डॉक्टर की सलाह जरूर लेना चाहिए।</div><div><br></div><h2>खाना खाने के फौरन बाद पानी पीना</h2><div>खाना खाने के फौरन बाद थोड़ी मात्रा में पानी पीना चाहिए। इससे कोई नुकसान नहीं होता है। लेकिन खाना खाने के बाद ज्यादा पानी पीने से पाचन रस पतला हो सकता है। इससे पाचन प्रोसेस धीमा हो सकता है। इसलिए खाना खाने के बाद संतुलित मात्रा में पानी पीना चाहिए।</div>]]></description>
      <pubDate>Sat, 13 Jun 2026 11:26:46 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/do-you-believe-these-things-about-milk-and-spicy-food-learn-full-truth</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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      <title><![CDATA[सुबह सूजे हुए चेहरे से हैं परेशान? जानें Water Retention और Face Swelling की 5 बड़ी वजहें]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/reduce-facial-swelling-doctors-water-retention-tips]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>अक्सर लोग वाटर रिटेंशन की समस्या से परेशान रहते हैं, जिसके कारण लोगों को अचानक से वजन बढ़ने, जोड़ों में अकड़न आने, दर्द होने और हाथों, पैरों, टखनों और चेहरे पर सूजन आने की समस्या का समाना करना पड़ता है। वैसे इस समस्या से बचने के लिए कुछ उपायों को अपनाया जा सकता है।</div><div><br></div><div><b>वाटर रिटेंशन की समस्या क्यों होती है?</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक, सुबह जब उठते हैं, तो चेहरे पर सूजन आना एक आम समस्या है और अक्सर यह किसी गंभीर बीमारी के कारण शरीर में कुछ समय के लिए पानी जमा होने यानी वाटर रिटेंशन की वजह से होता है। रातभर में चेहरे पर फ्लूइड जमा होने के पीछे ज्यादा नमक खाना, डिहाइड्रेशन, खराब नींद, हार्मोनल बदलाव और अल्कोहल जैसी चीजें आम समस्या हैं।</span></div><div><br></div><div><b>वाटर रिटेंशन से चेहरे की सूजन को कम कैसे करें?</b></div><div><br></div><div><span style="font-size: 1rem;"><b>हाइड्रेटेड रहें</b></span></div><div><span style="font-size: 1rem;">वाटर रिटेंशन की समस्या से राहत के लिए शरीर पानी की सही मात्रा बनाए रखना बेहद जरुरी है। असल में आपको हाइड्रेटेड रहना बहुत जरुरी है और असरदार उपायों में से एक है। जब आपके शरीर में पानी की कमी होती है, तो वह जो भी पानी बचा होगा, उसे रोककर रखने की कोशिश करता है, जिससे सूजन और बढ़ जाती है।</span></div><div><br></div><div><b>नमक युक्त खाने से बचें</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">अगर आप चेहरे की सूजन को कम करना चाहते हैं, तो आप नमकीन खीने की चीजों को कम करना चाहिए, क्योंकि सोडियम शरीर में फ्लूइड को रोककर रखने को बढ़ावा देता है। जिसके कारण वाटर रिटेंशन की समस्या बढ़ती है।</span></div><div><br></div><div><b>नींद में सुधार करें</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">अगर आप वाटर रिटेंशन से राहत पाने के लिए नींद की क्वालिटी भी मायने रखते हैं, क्योंकि खराब नींद शरीर की फ्लूइड बैलेंस को नियंत्रित करने की क्षमता को बिगाड़ देती है। यह वजह है कि सुबह-सुबह चेहरा अक्सर सबसे ज्यादा सूजा हुआ दिखता है।</span></div><div><br></div><div><b>चेहरे की हल्की मसाज करें</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">चेहरे पर हल्के हाथों से की गई मसाज या लिम्फ प्रवाह को बढ़ाने वाली तकनीकें जमा हुए अतिरिक्त तरल पदार्थ को बाहर निकालने में सहायक हो सकती हैं, जिससे फूला हुआ चेहरा सामान्य दिखने लगता है। इसके अलावा, कुछ देर तक ठंडी पट्टी या ठंडे कपड़े से सेक करने पर त्वचा के नीचे मौजूद रक्त वाहिकाएं संकुचित हो जाती हैं, जिससे सूजन और भारीपन में अस्थायी रूप से राहत मिल सकती है।</span></div><div><br></div><div><b>फिजिकल एक्टिविटीज करें</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">शरीर को एक्टिव रखना बेहद जरुरी है। शारीरिक रुप से एक्टिव रहने से शरीर में ब्लड सर्कुलेशन ठीक रहती है और फ्लूइड को एक ही जगह जमा होने से रोका जा सकता है।&nbsp;</span></div>]]></description>
      <pubDate>Fri, 12 Jun 2026 18:00:50 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/reduce-facial-swelling-doctors-water-retention-tips</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Health Tips: ऑफिस में Work Stress और Anxiety से हैं परेशान? ये Lifestyle Tips देंगे तुरंत राहत]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/troubled-by-work-stress-and-anxiety-at-office-these-lifestyle-tips-provide-relief]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>ऑफिस में वर्क स्ट्रेस की वजह से अक्सर लोगों को एंग्जायटी महसूस होती है। एंग्जायटी की असर उनके काम करने की क्षमता पर पड़ता है। आपके काम की क्वालिटी भी कम हो सकती है। ऑफिस में वर्कलोड को कम नहीं किया जा सकता है, लेकिन एंग्जायटी और स्ट्रेस को कम करना मुमकिन है। लेकिन आप अपनी लाइफस्टाइल में कुछ बदलाव करके एंग्जायटी को कम कर सकते हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको एंग्जायटी कम करने के उपायों के बारे में बताने जा रहे हैं।</div><div><br></div><h2>शांत‍ि के साथ करें दिन की शुरूआत</h2><div>अगर आपको ऑफिस में स्ट्रेस या एंग्जायटी महसूस होती है। तो आपको दिन की शुरूआत में बदलाव करना चाहिए। जल्दी-जल्दी उठकर करीब भागते हुए ऑफिस जाने की जगह आपको अपने सुबह की शुरुआत अच्छे तरीके से करनी चाहिए। सुबह उठकर थोड़ी देर धूप में बैठें, एक्सरसाइज और स्ट्रेचिंग करें। एक स्टडी के मुताबिक सुबह सुस्ती दूर करने के लिए और प्रोडक्टिविटी बढ़ाने के लिए छोटे-छोटे टास्क जैसे एक्सरसाइज करने से मदद मिलती है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/health/beat-summer-utis-with-this-barley-water-drink" target="_blank">Health Experts का दावा: गर्मियों में UTI से बचाएगा जौ का यह Super Drink, जानें बनाने का तरीका</a><span style="font-size: 1rem;">&nbsp;</span></h3><div><br></div><h2>डीप ब्रीदिंग एक्सरसाइज</h2><div>स्ट्रेस या एंग्जायटी दूर करने के लिए आपको डीप ब्रीदिंग एक्सरसाइज करना चाहिए। आप इसको कहीं भी और कभी भी कर सकते हैं। डीप ब्रीदिंग एक्सरसाइज करने से टेंशन दूर होती है और कुछ ही मिनट में आपका नर्वस सिस्टम शांत हो जाता है। डीप ब्रीदिंग एक्सरसाइज करने के लिए गहरी सांस लें और 4 गिनन तक सांस को होल्ड करें फिर 6 काउंट करने के साथ सांस को धीरे-धीरे छोड़ें।</div><div><br></div><h2>न करें मल्टीटास्किंग</h2><div>ऑफिस में ज्यादा स्ट्रेस या एंग्जायटी की वजह अक्सर मल्टीटास्किंग यानी की एक साथ दो काम करने के कारण होती है। इससे प्रोडक्टिविटी घटती है और मेंटल फटीग और एंग्जायटी भी होती है। इसलिए काम को ब्रेक लेकर पूरा करें। एक साथ अधिक काम करने की कोशिश न करें। काम के बीच में छोटे-छोटे ब्रेक्स लें, इस दौरान स्ट्रेचिंग करें, पानी पिएं, आंखों को आराम दें और कुछ देर वॉक करें।</div><div><br></div><h2>लंबे समय तक एक जगह न बैठें</h2><div>अगर आपको लगता है कि एक साथ लंबे समय तक बैठकर काम को जल्दी खत्म कर सकते हैं। तो आप पूरी तरह से गलत हैं। लंबे समय तक बैठे रहने से आपके मूड पर बुरा असर होता है। ज्यादा देर तक बैठे रहने से लो एनर्जी और थकान जैसी समस्याएं हो सकती हैं। हर 30-40 मिनट में 5 मिनट का ब्रेक लेना चाहिए और वॉक करना चाहिए। इससे ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है और एंग्जायटी भी कम करने में मदद मिलती है।</div><div><br></div><div>ऑफिस में अक्सर वर्क स्ट्रेस की वजह से लोगों को एंग्जायटी होती है। इसको दूर करने के लिए दिन की शुरूआत हड़बड़ी के साथ नहीं बल्कि शांति के साथ करनी चाहिए। वर्क स्ट्रेस कम करने के लिए डीप ब्रीदिंग एक्सरसाइज करें, एक जगह पर लंबे समय तक बैठकर काम करने की आदत को बदलें और मल्टीटास्किंग से बचना चाहिए।</div>]]></description>
      <pubDate>Fri, 12 Jun 2026 11:16:19 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/troubled-by-work-stress-and-anxiety-at-office-these-lifestyle-tips-provide-relief</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Health Experts का दावा: गर्मियों में UTI से बचाएगा जौ का यह Super Drink, जानें बनाने का तरीका]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/beat-summer-utis-with-this-barley-water-drink]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>गर्मियों के दौरान महिलाओं को सबसे ज्यादा यूटीआई यानी यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन की समस्या देखने को मिलती है। इस दिक्कत से महिलाएं काफी परेशान रहती है। हर दूसरे दिन यूटीआई समस्या परेशान करती है, कई महिलाएं एंटीबायोटिक्स की दवाइयां लेती है फिर भी आराम नहीं मिलता है।&nbsp;</div><div><span style="font-size: 1rem;">गौरतलब है कि यूटीआई के दौरान जलन, खुजली और यूरिन पास करते समय दर्द महसूस होना। अगर आप भी इस तरह की समस्या से परेशान हैं, कई उपचार कर चुकी हैं, तो आप एक बार इस उपाय को जरुर ट्राई करें। कई बार महंगी दवाइयां भी समस्या के जड़ से खत्म नहीं कर पाती है। इसलिए हेल्थ एक्सपर्ट बताते हैं कि यूटीआई में इस नुस्खे को जरुर ट्राई करें।</span></div><div><br></div><div><b>यूटीआई में राहत दे सकता है यह अनाज</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">&nbsp;- खासतौर पर जौ का पानी शरीर में जमा टॉक्सिन्स को बाहर निकालने, बर्निंग सेंसेशन को कम करने और आपको हाइड्रेट रखने में मदद करता है।</span></div><div><br></div><div>&nbsp;- यह एक प्रकार से नेचुरल ड्यूरेटिक की तरह कार्य करता है और पेशाब में जलन को कम करता है।</div><div><br></div><div>&nbsp;- बता दें कि, इसकी तासीर ठंडी होती है, इसलिए यह शरीर को ठंडा रखता है। जौ का पानी पीने से शरीर का पीएच बैलेंस रहता है और यूरिन का एसिडिक लेवल कम होता है।</div><div><br></div><div>&nbsp;- जौ का पानी में कई सारे विटामिन्स और मिनरल्स की मात्रा पाई जाती है। यह डाइजेशन को बेहतर करता है और वजन कम करने में मदद मिलती है।&nbsp;</div><div><br></div><div>&nbsp;- यह पानी एंटी-ऑक्सीडेंट्स को भरपूर होता है। इसलिए इंफेक्शन का खतरा कम हो जाता है और यह यूटीआई का खतरा भी कम करता है। इसके साथ ही यह पेट की गर्मी को शांत रखता है।</div><div><br></div><div>&nbsp;- इसको पीने से शरीर इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस बना रहता है और खून भी साफ होता है।<span style="font-size: 1rem;">&nbsp;</span></div><div><img src="https://images.prabhasakshi.com//static_files/imagegallery/20260612/11062457673_0_barley drink.jpeg" data-filename="" style="width: 100%;">&nbsp;</div><div><b style="font-size: 1rem;">यूटीआई के लिए कैसे पिएं जौ का पानी?</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">&nbsp;- इसके लिए आपको 2 चम्मच जौ लेना है और इसको 3-4 कप पानी में डालें।</span></div><div><br></div><div>&nbsp;- इसे कम से कम 20 मिनट तक उबालें।</div><div><br></div><div>&nbsp;- ये थोड़ा गाढ़ा हो जाएगा। फिर इसे छान लें और ठंडा होने दें।</div><div><br></div><div>&nbsp; - अब इसमें नींबू का रस और चुटकी भर नमक डालें लें।</div><div><br></div><div>&nbsp; - इसको आप दिन में एक या दो बार पी सकते हैं, इससे आपको काफी आराम मिलेगा।&nbsp;</div>]]></description>
      <pubDate>Fri, 12 Jun 2026 11:07:13 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/beat-summer-utis-with-this-barley-water-drink</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Health Tips: आपकी Diet में मौजूद ये Refined Carbs हैं 'Slow Poison', तुरंत करें बदलाव]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/these-refined-carbs-in-diet-slow-poison-make-changes-immediately]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>कार्बोहाइड्रेट या कार्ब्स का नाम सुनते ही लोग इसको सबसे पहले अपनी डाइट से बाहर कर देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हर कार्ब एक जैसा नहीं होता है। बता दें कि कार्ब्स को दो कैटेगिरी में बांटा गया है, रिफाइंड और कॉम्प्लैक्स। लेकिन इन दोनों के बीच के अंतर का पता होने से आपको वेट ल़ॉस, एनर्जी बढ़ाने और स्वस्थ रहने में मदद मिल सकती है। आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको अपनी डाइट से रिफाइंड कार्ब्स को बाहर करने के कई सिंपल तरीकों के बारे में बताने जा रहे हैं।</div><div><br></div><h2>ये चीजें कार्ब्स को बनाती हैं रिफाइन</h2><div>अधिकतर प्रोसेस्ड फूड सिंपल या रिफाइंड कार्ब्स की कैटेगिरी में आती हैं।</div><div>जिन फूड्स में फाइबर न की मात्रा में होती है।</div><div>यह कार्ब्स आसानी से पच जाते हैं, जिससे फौरन ही भूख लगने लगती है।</div><div>प्रीजरेवेटिव युक्त पैकेटबंद फूड या एडेड शुगर भी सिंपल कार्ब्स माने जाते हैं।</div><div>यह ब्लड शुगर को अचानक से बढ़ाते हैं।</div><div><br></div><h2>रिफाइंड कार्ब्स वाले फूड्स</h2><div>व्हाइट राइस</div><div>पेस्ट्री</div><div>पास्ता</div><div>सोडा</div><div>कैंडी</div><div><br></div><h2>ऐसे कम करें रिफाइंड कार्ब</h2><div>सुबह के नाश्ते से शुगरी सीरियल्स हटाकर घर का बना फ्रेश फूड खाना चाहिए। आप सुबह के नाश्ते में अंडे या फल को शामिल कर सकते हैं।</div><div><br></div><div>ब्रेड या पास्ता जैसे सिंपल कार्ब लेने की बजाय किनुआ, ब्राउन राइस या रागी जैसे होल ग्रेन से बनी चीजों को खाना चाहिए। ऐसी चीजों को शामिल करें, जिनको तैयार करने में कम प्रोसेसिंग हो।</div><div><br></div><div>रिफाइंड कार्ब्स वाली चीजों की बजाय सब्जियां और ताजे फलों को डाइट में शामिल करें। पैकेटबंद स्नैक्स की जगह रोस्टेड शकरकंद या सेब आदि का सेवन करना चाहिए।</div><div><br></div><div>कार्ब्स के साथ हमेशा प्रोटीन लेना चाहिए। इससे खाना धीरे-धीरे पचता है और ब्लड शुगर भी कंट्रोल रहता है।</div><div><br></div><h2>ये मिलते हैं फायदे</h2><div>ब्लड शुगर का सही लेवल बनाए रखने में मदद मिलती है।</div><div>एनर्जी का लेवल स्थिर रहता है और आपको बार-बार भूख नहीं लगती है।</div><div>पेट संबंधी समस्याएं कम होती हैं।</div><div>हार्ट हेल्थ बेहतर होती है।</div><div>वेट कंट्रोल होता है।</div><div><br></div><h2>किन लोगों को लेनी चाहिए सलाह</h2><div>प्रेग्नेंट महिलाओं को।</div><div>डायबिटीज या किडनी से जुड़ी समस्या वाले लोगों को।</div><div>कोई मेहनत का खेल खेलते हैं या एथलीट वाले लोगों को।</div>]]></description>
      <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 12:55:55 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/these-refined-carbs-in-diet-slow-poison-make-changes-immediately</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[40 के बाद Women में होते हैं Hormonal Changes, Menopause से पहले Diet में शामिल करें ये सुपरफूड्स]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/perimenopause-diet-top-foods-for-women-over-40]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>महिलाओं में उम्र के अलग-अलग पड़ाव पर कई तरह के हार्मोनल बदलाव शरीर में देखे जाते हैं। इसका असर इनकी सेहत पर भी होता है। अब बात चाहे पीरियड्स की हो, प्रेग्नेंसी की हो, पोस्टपार्टम की हो, पेरिमेनोपॉज की हो या मेनोपॉज की। महिलाओं के शरीर में उम्र के साथ कई तरह के बदलाव देखे जाते हैं। इस दौरान सेहत का ख्याल रखना भी बेहद जरुरी होता है।&nbsp;</div><div><span style="font-size: 1rem;">खासकर 40 साल की उम्र के बाद यानी ये समय जब पेरिमेनोपॉज शुरु होता है और शरीर धीरे-धीरे मेनोपॉज की तरफ जाता है, तो महिलाओं के शरीर में काफी बदलाव देखे जाते हैं। खासतौर पर पीरियड्स का अनियमित होना, हॉट फ्लैशेज, रात में पसीना आना, वजन बढ़ना, मूड स्विंग्स और चिड़चिड़ापन जैसे लक्षण नजर आते हैं। इस समय पर डाइट में कुछ खास चीजों को शामिल किया जाता है।&nbsp;</span></div><div><br></div><div><b>पेरिमेनोपॉज में महिलाओं को जरूर खाने चाहिए ये फूड्स</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">&nbsp;- हेल्थ एक्सपर्ट भी मानते हैं कि महिलाओं को डाइट का खास ध्यान बेहद जरुरी होता है। इस दौरान आप फल, सब्जियां, नट्स, सीड्स और ऐसे मसालों को डाइट का हिस्सा जरुर बनाएं, जिससे इंफ्लेमेशन कम हो जाएं, एस्ट्रोजन को बैलेंस कर सके, ब्लड शुगर लेवल को बैलेंस कर सके और शरीर को ताकत दें।</span></div><div><br></div><div>&nbsp;- इस समय पर स्किन, मूड और हार्ट हेल्थ को लेकर विशेष ध्यान देना और ऐसी चीजों का सेवन करें, जिससे आपकी त्वचा, मूड और हार्ट तीनों हेल्दी रहे।</div><div><br></div><div>&nbsp;- पेरिमेनोपॉज में अनार, सेब,&nbsp; आंवला और बेरीज खाएं। ये एंटीऑक्सीडेंट्स और न्यूट्रिएंट्स से भरपूर होते हैं। इन फलों में इंफ्लेमेशन कम होता है, हार्मोन्स बैलेंस रहते हैं, स्किन और हार्ट हेल्दी रहते हैं।&nbsp;</div><div><br></div><div>&nbsp;- इसके अतिरिक्त सब्जियों में आप ब्रॉकली, गाजर और गोभी खाएं। इनमें फाइबर और कैल्शियम अधिक मात्रा में पाया जाता है। इनसे एस्ट्रोजन बैलेंस होता है, हड्डियां मजबूती होती हैं और शरीर डिटॉक्स होता है।</div><div><br></div><div>&nbsp;- फ्लैक्स सीड्स, कद्दू के बीज, अखरोट और तिल के बीज खाएं। इनमें फाइटोएस्ट्रोजन, ओमेगा-3 और मिनरल्स होते हैं, जो हॉट फ्लैशेज को कम करते हैं। वहीं मूड स्विग्ंस को सुधारके हैं और हार्मोन्स भी बैलेंस रहते हैं।</div><div><br></div><div>&nbsp;- आप अपनी डाइट में हल्दी, मेथी, दालचीनी और सौंफ के बीज को डाइट में शामिल कर सकते हैं। इनसे ब्लड शुगर लेवल रेगुलेट होता है, इंफ्लेमेशन कम होता है और पेरिमेनोपॉज में होने वाला हार्मोनल बदलाव आसानी से हो जाते हैं।&nbsp;</div>]]></description>
      <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 17:54:46 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/perimenopause-diet-top-foods-for-women-over-40</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Plant Based Protein का बढ़ता Trend: क्या ये Complete Protein है? जानिए इसका पूरा सच]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/plant-protein-a-complete-source-the-health-facts]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>आजकल प्लांट बेस्ड प्रोटीन पाउडर का चलन काफी बढ़ गया है। पिछले कुछ सालों में प्लांट बेस्ड प्रोटीन का सेवन तेजी हो रहा है। नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन (NLM) के अनुसार वेगन डाइट फॉलो करने वाले या फिर किसी अन्य कारणों से एनिमल प्रोटीन पाउडर का सेवन नहीं करने वाले लोग प्लांट बेस्ड प्रोटीन पाउडर का सेवन करते हैं।&nbsp;</div><div><span style="font-size: 1rem;">अब मन में सवाल उठता है कि क्या प्लांट बेस्ड प्रोटीन पाउडर से शरीर की आवश्यक प्रोटीन की पूर्ति हो सकती है? आज हम आपको इस लेख में प्लांट बेस्ड प्रोटीन पाउडर से शरीर की आवश्यक प्रोटीन की पूर्ति हो सकती है? आज हम आपको इस आर्टिकल में बताएंगे कि क्या प्लांट बेस्ड प्रोटीन पाउडर कम्प्लीट प्रोटीन पाउडर होता है।</span></div><div><b style="font-size: 1rem;">क्या है कम्प्लीट प्रोटीन?</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">दरअसल, Harvard Health Report के अनुसार बॉडी को फिट रखने के लिए और मसल्स को रिपेयर होने में प्रोटीन की खास भूमिका होती है। प्रोटीन अमीनो एसिड से मिलकर बनता है, इसमें 9 एसेंशियल एमिनो एसिड मौजूद होते हैं। शरीर इन एमिनो एसिड को खुद से बनाने में सक्षम नहीं होते हैं। इनको डेली की डाइट से प्राप्त करना भी जरुरी होता है। जिस प्रोटीन में ये सभी एसेंशियल एमिनो एसिड पर्याप्त मात्रा में मौजूद हो, उसको कम्पलीट प्रोटीन माना जाता है।</span></div><div><span style="font-size: 1rem;">इसके अलावा, कम्प्लीट प्रोटीन के लिए प्रतिदिन अपने आहार में अंडा, मीट, मछली और चिकन को शामिल किया जाता है। वहीं प्लांट&nbsp; बेस्ड प्रोटीन सोर्स में तकरीबन एक या दो एसेंशियल एमिनो एसिड मौजूद नहीं हो सकते हैं। क्या प्लांट बेस्ड प्रोटीन पाउडर को कम्प्लीट प्रोटीन कहा जा सकता है।</span></div><div><br></div><div><b>प्लांट बेस्ड प्रोटीन पाउडर है 'कम्प्लीट प्रोटीन'</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">हार्वर्ड हेल्थ और अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन की रिपोर्ट के अनुसार, प्लांट बेस्ड प्रोटीन पाउडर कम्प्लीट प्रोटीन नहीं हो सकते हैं। लेकिन कुछ प्लांट सोर्स ऐसे भी होते हैं जिनमें जरुरी एसेंशियल एमिनो एसिड पाए जाते हैं। इनमें सोया प्रोटीन, क्विनोआ, चिया सीड्स के सेवन से कम्प्लीट एमिनो एसिड प्राप्त किया हो।</span></div><div><br></div><div><b style="font-size: 1rem;">प्लांट बेस्ड प्रोटीन पाउडर लेने से पहले किन बातों का रखें ध्यान?</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">बाजार में मिलने वाले ज्यादातर प्रोटीन पाउडर पर हाई प्रोटीन लिखा होता है। इसलिए सिर्फ हाई प्रोटीन देखकर प्रोडक्ट न खरीदें। हाई प्रोटीन पाउडर में एसेंशियल एमिनो एसिड मौजूद है या नहीं, इससे पता नहीं चलता है। इसलिए सबसे जरुरी है कि प्रोटीन पाउडर के बॉक्स पर लिखे इंग्रेडिएंट्स लेवल को ध्यान से पढ़ें।&nbsp;</span></div><div><span style="font-size: 1rem;">इसी तरह राइस प्रोटीन में लाइसिन की मात्रा अधिक होती है। इसलिए लोगों को कम्प्लीट प्रोटीन देने के लिए कुछ ब्रांडस मटर और ब्राउन राइस प्रोटीन को मिलाकर प्लांट बेस्ड प्रोटीन पाउडर तैयार करते हैं। हालांकि, आप इंग्रेडिएंट्स के लेवल पर जरुर ध्यान दें कि इसमें एडेड शुगर, आर्टिफिशियल फ्लेवर और प्रिजर्वेटिव का कितना इस्तेमाल किया गया है।&nbsp;</span></div><div><br></div><div><b>जानें प्लांट बेस्ड प्रोटीन पाउडर के फायदे और नुकसान?</b></div><div><br></div><div><b>प्लांट बेस्ड प्रोटीन पाउडर के फायदे</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">&nbsp;- बॉडी को जरुरी प्रोटीन और अमीनो एसिड की पूर्ति हो सकती है।</span></div><div><br></div><div>&nbsp;- प्लांट बेस्ड प्रोटीन पाउडर को आसानी से डाइजेस्ट किया जा सकता है।</div><div><br></div><div>&nbsp;- प्लांट बेस्ड प्रोटीन पाउडर आसानी से डाइजेस्ट होता है।</div><div><br></div><div>&nbsp;- इसमें फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट की भरपूर मात्रा होती है।</div><div><br></div><div>&nbsp;- वेगन और लैक्टोज इन्टॉलरेंस वालों के लिए सबसे अच्छा ऑप्शन है।</div><div><br></div><div><b>प्लांट बेस्ड प्रोटीन पाउडर के नुकसान</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">&nbsp;- प्रोटीन पाउडर में एडेड शुगर की मात्रा अधिक होती है।</span></div><div><br></div><div>&nbsp;- IBS की समस्या से परेशान लोगों को गैस या ब्लोटिंग की समस्या हो सकती है।</div><div><br></div><div>&nbsp;- किसी-किसी प्लांट बेस्ड प्रोटीन पाउडर में एमिनो एसिड का लेवल कम होता है।</div><div><br></div><div>&nbsp;- मार्केट में मिलने वाले सभी प्लांट बेस्ड प्रोटीन पाउडर कम्प्लीट प्रोटीन की पूर्ति नहीं करते हैं।&nbsp;</div><div><br></div><div>इसलिए एक्सपर्ट की सलाह के अनुसार ही प्लांट बेस्ड प्रोटीन पाउडर को खरीदें।&nbsp;</div>]]></description>
      <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 16:32:48 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/plant-protein-a-complete-source-the-health-facts</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Health Tips: खून की कमी वाली महिलाएं सावधान! चाय की ये आदत बढ़ा सकती है Health Risk]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/anaemic-women-beware-this-tea-habit-can-increase-your-health-risk]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>आज के समय में बहुत सी महिलाएं एनीमिया की समस्या से जूझ रही हैं। खराब खानपान, प्रेग्नेंसी, पीरियड्स के दौरान ज्यादा ब्लीडिंग और आयरन की कमी इसके प्रमुख कारण माने जाते हैं। एनीमिया होने पर शरीर में हीमोग्लोबिन का लेवल कम हो जाता है। जिससे चक्कर आना, कमजोरी, सांस फूलना और थकान जैसी समस्याएं होने लगती हैं। दिनभर में कई महिलाएं कई बार चाय पीती हैं, लेकिन उनको यह पता नहीं होता है कि यह आदत उन समस्या को अधिक बढ़ा सकती है। हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक एनीमिया से पीड़ित महिलाओं को खाना खाने के फौरन बाद चाय पीने से बचना चाहिए। क्योंकि इससे शरीर में आयरन का अवशोषण प्रभावित होता है।</div><div><br></div><h2>क्यों कम पीनी चाहिए चाय</h2><div>एक्सपर्ट के मुताबिक चाय में टैनिन नामक तत्व पाया जाता है। यह शरीर में आयरन को सही तरीके से अवशोषित नहीं होने देता है। वहीं जब कोई महिला आयरन का भरपूर खाना खाने के फौरन बाद चाय पीती है, तो भोजन से मिलने वाला आयरन पूरी तरह शरीर तक नहीं पहुंच पाता है। इससे धीरे-धीरे शरीर में आयरन की कमी बढ़ सकती है। खासतौर पर ब्लैक टी और ज्यादा गाढ़ी चाय का असर देखने को मिलता है। यही वजह है कि एनीमिया महिलाओं को खाने के कम से कम 1 से 2 घंटे बाद चाय पीने की सलाह दी जाती है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/health/double-attack-of-dehydration-during-pregnancy-threatening-health-of-both-mother-and-child" target="_blank">Pregnancy Care: प्रेग्नेंसी में Dehydration का Double Attack, मां और बच्चे दोनों की Health पर मंडराया खतरा</a></h3><div><br></div><div>जो महिलाएं पहले से एनीमिया से पीड़ित हैं, उनको जरूरत से ज्यादा चाय पीना शरीर की कमजोरी बढ़ा सकता है।</div><div><br></div><div>शरीर में आयरन की कमी होने से ऑक्सीजन का फ्लो सही तरीके से नहीं हो पाता है। इससे सुस्ती और थकान महसूस होती है।</div><div><br></div><div>अगर इस स्थिति में लगातार चाय पीती हैं, तो शरीर में आयरन की कमी और गंभीर हो सकती है।</div><div><br></div><div>कई महिलाएं सुबह खाली पेट चाय पीती हैं। जोकि एनीमिया में नुकसान पहुंचाती है। इससे एसिडिटी, गैस और पोषक तत्वों की कमी जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।</div><div><br></div><h2>डाइटीशियन की सलाह</h2><div>एनीमिया से बचने और शरीर में आयरन का लेवल बढ़ाने के लिए आयरन से भरपूर डाइट लेनी चाहिए। डाइट में हरी पत्तेदार सब्जियां, दालें, अनार, चुकंदर, गुड़ और ड्राई फ्रूट्स शामिल करना चाहिए। इससे शरीर में आयरन बढ़ाने में मदद करता है। वहीं इसमें विटामिन C से भरपूर चीजें जैसे आंवला, नींबू और संतरा खाने से आयरन का अवशोषण बेहतर होता है। अगर किसी महिला को बार-बार चक्कर, थकान या कमजोरी महसूस हो रही है, तो उसको फौरन ब्लड टेस्ट कराना चाहिए। वहीं डॉक्टर की सलाह पर आयरन सप्लीमेंट लेना चाहिए।</div><div><br></div><h2>क्या करें</h2><div>एनीमिया से पीड़ित महिलाओं को ज्यादा या भोजन के फौरन बाद चाय पीना नुकसानदेह है। चाय में मौजूद टैनिन भोजन से मिलने वाली आयरन के अवशोषण को रोक देता है। जिससे शरीर में हीमोग्लोबिन का लेवल गिरता है। इससे थकान और कमजोरी बढ़ती है। इस समस्या से बचने के लिए खानपान में सुधार करना जरूरी है। महिलाओं को अपनी डाइट में विटामिन सी और आयरन से भरपूर चीजों को शामिल करना चाहिए।</div>]]></description>
      <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 11:16:45 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/anaemic-women-beware-this-tea-habit-can-increase-your-health-risk</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Pregnancy Care: प्रेग्नेंसी में Dehydration का Double Attack, मां और बच्चे दोनों की Health पर मंडराया खतरा]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/double-attack-of-dehydration-during-pregnancy-threatening-health-of-both-mother-and-child]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>प्रेग्नेंसी में महिलाओं के शरीर में कई तरह के मानसिक और शारीरिक बदलाव होते हैं। वहीं अगर प्रेग्नेंसी के दौरान या गर्मी में महिला के शरीर में पानी की कमी हो जाए, तो इससे मां और भ्रूण दोनों को कई तरह की समस्या हो सकती है। आम महिलाओं की तुलना में प्रेग्नेंसी के दौरान शरीर को ज्यादा पानी की जरूरत होती है। क्योंकि मां का शरीर बच्चे के ब्लड सर्कुलेशन, विकास और एमनियोटिक फ्लूइड को बनाए रखने में मदद करता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि प्रेग्नेंसी में पानी की कमी कैसे मां और बच्चे दोनों को नुकसान पहुंचा सकती है।</div><div><br></div><h2>प्रेग्नेंसी में डिहाइड्रेशन से होने वाली समस्याएं</h2><div>एक्सपर्ट के मुताबिक गर्मियों में अधिक पसीना आना, उल्टी होना, कम पानी पीना या लंबे समय तक धूप में रहने से शरीर में पानी की कमी हो सकती है। अगर समय रहते इस समस्या पर ध्यान न दिया जाए, तो इसका असर मां और गर्भ में पलने वाले बच्चे की सेहत पर भी असर हो सकता है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/health/boost-bone-and-muscle-health-with-black-chickpeas" target="_blank">हड्डियों और Muscles का Superfood है काला चना, रोज 1 कटोरी खाने से मिलेंगे गजब के फायदे</a></h3><div><br></div><h2>समय से पहले डिलीवरी का जोखिम</h2><div>प्रेग्नेंसी में अगर शरीर में पानी की कमी हो जाए, तो इस पर ध्यान न दिया जाए। तो यूट्रेस सिकुड़ सकता है और इससे प्री टर्म लेबर यानी समय से पहले डिलीवरी का जोखिम बढ़ जाता है। इसलिए प्रेग्नेंसी में लंबे समय तक पानी की कमी को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।&nbsp;</div><div><br></div><h2>एमनियोटिक फ्लूइड पर असर</h2><div>प्रेग्नेंसी में बच्चे की सेफ्टी और विकास के लिए मौजूद एमनियोटिक फ्लूइड जरूरी होता है। शरीर में पानी की कमी होने पर इसके लेवल पर असर हो सकता है। इससे मां और भ्रूण दोनों को नुकसान हो सकता है।</div><div><br></div><h2>ऑक्सीजन सप्लाई पर भी असर</h2><div>जब मां के शरीर में पर्याप्त फ्लूइड नहीं होता है, तो ब्लड फ्लो प्रभावित हो सकता है। इससे गर्भ में पलने वाले बच्चे तक जरूरी पोषक तत्व और ऑक्सीजन पहुंचने में समस्या हो सकती है।</div><div><br></div><h2>बच्चे की ग्रोथ कम होना</h2><div>प्रेग्नेंसी के दौरान अगर लंबे समय तक गंभीर डिहाइड्रेशन बना रहता है, तो इसका असर बच्चे की ग्रोथ पर भी पड़ सकता है। इसलिए प्रेग्नेंट महिलाओं को हाइड्रेशन का ध्यान रखना चाहिए।</div><div><br></div><h2>कमजोरी और थकान महसूस होना</h2><div>प्रेग्नेंसी में शरीर में पानी की कमी होने से ब्लड प्रेशर प्रभावित हो सकता है। इससे महिला को चक्कर, कमजोरी और अधिक थकान महसूस हो सकती है। कई बार अचानक चक्कर आने से गिरने या चोट लगने का खतरा बढ़ जाता है।</div><div><br></div><h2>सिरदर्द और मूड स्विंग्स होना</h2><div>प्रेग्नेंसी में हार्मोनल बदलाव की वजह से महिलाओं को बेचैनी और चिड़चिड़ापन महसूस हो सकता है। ऐसे में अगर डिहाइड्रेशन हो जाए, तो यह स्थिति गंभीर हो सकती है। वहीं कुछ महिलाओं को फोकस करने और सिरदर्द की भी समस्या होती है। लगातार डिहाइड्रेशन रहने से प्रेग्नेंसी में मेंटल प्रॉब्लम्स मुश्किल पैदा कर सकती है।</div><div><br></div><h2>कब्ज और यूरिन इंफेक्शन का रिस्क</h2><div>एक्सपर्ट के मुताबिक प्रेग्नेंसी की शुरूआती महीने में कब्ज की समस्या होना काफी आम समस्या है। गर्मी में अगर शरीर में पानी की कमी हो जाए, तो कब्ज की समस्या अधिक गंभीर हो सकती है। वहीं प्रेग्नेंसी में यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन का खतरा ज्यादा रहता है। वहीं डिहाइड्रेशन में यह खतरा ज्यादा बढ़ सकता है।</div><div><br></div><h2>ऐसे रखें ध्यान</h2><div>प्रेग्नेंसी में डाइट के साथ हाइड्रेशन का ध्यान रखना जरूरी है। इसके लिए दिनभर थोड़ा-थोड़ा पानी पीते रहना चाहिए। जिन महिलाओं को उल्टी होती है, उनको गर्मियों में खास ध्यान रखना चाहिए। आप नींबू पानी, छाछ, नारियल पानी और घर के बने हेल्दी ड्रिंक्स शरीर में फ्लूइड और इलेक्ट्रोलाइट्स बनाए रखने में सहायता कर सकते हैं। वहीं आप मौसमी फल भी खा सकती हैं, इससे शरीर हाइड्रेट रहता है। वहीं अगर आप प्रेग्नेंसी में दर्द या थकान महसूस हो, तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।</div>]]></description>
      <pubDate>Tue, 09 Jun 2026 12:07:51 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/double-attack-of-dehydration-during-pregnancy-threatening-health-of-both-mother-and-child</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[हड्डियों और Muscles का Superfood है काला चना, रोज 1 कटोरी खाने से मिलेंगे गजब के फायदे]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/boost-bone-and-muscle-health-with-black-chickpeas]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>खराब जीवनशैली और गलत खान-पान के कारण कई लोगों को हेल्थ संबंधित समस्याएं परेशान करती है। घंटों तक ऑफिस में लगातार बैठे रहना और फिजिकल एक्टिविटी के कारण हिप्स और पीठ दर्द की समस्या देखने को मिलती है।&nbsp; इस तकलीफ से बचने के लिए लोग तरह-तरह के उपाय भी करते हैं, लेकिन कभी भी अपनी डाइट पर ध्यान नहीं देते हैं। अच्छे स्वास्थ्य के लिए अच्छी डाइट का होना बेहद जरुरी है। अगर आप अपने डाइट में काले चना को एड ऑन करेंगे, तो दर्द से बच सकते हैं।&nbsp;</div><div><span style="font-size: 1rem;">काला चना में कई जरुरी पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर को अंदर से पोषण देता है और मसल्स और हड्डियों को मजबूत बनाता है। यदि आप भी पीठ या हिप्स में दर्द और कमजोरी महसूस करते हैं, तो 1 कटोरी उबले चने को डाइट में शामिल कर सकते हैं।&nbsp;</span></div><div><br></div><div><b>उबले काले चने क्यों फायदेमंद है?</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">हेल्थ एक्सपर्ट ने बताया है कि उबले काले चने प्रोटीन, आयरन, फॉस्फोरस, मैग्नीशियम जैसे न्यूट्रिशन से भरपूर होते हैं। इसके सेवन से ही शरीर को काफी फायदे होते हैं।</span></div><div><br></div><div><b>प्रोटीन का अच्छा स्रोत</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">काला चना में भरपूर मात्रा में प्रोटीन पाया जाता है। इसमे पाए जाने वाले पोषक तत्व मसल्स को रिपेयर और मजबूत बनाने के लिए जरुरी माना जाता है। मजबूत मसल्स शरीर को अच्छी तरह से सपोर्ट मिलती है।</span></div><div><br></div><div><b>आयरन की मौजूदगी</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">गौरतलब है कि काला चना में आयरन की मात्रा काफी अच्छी होती है। आयरन शरीर में ऑक्सीजन के परिवहन में मदद करता है। इसके साथ ही आपको थकान कम महसूस होती है।</span></div><div><br></div><div><b>मैग्नीशियम पाया जाता</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">इसमें मैग्नीनिशय की मात्रा भी अधिक पाई जाती है, यह मसल्स और नसों का काम सही तरीके से करती है। इसके अलावा, इसकी पर्याप्त मात्रा शरीर के काम को बेहतर तरीके से करने में मदद करता है।</span></div><div><br></div><div><b>फॉस्फोरस का स्रोत</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">हड्डियों और दांतों के लिए फॉस्फोरस हेल्दी माना जाता है, क्योंकि यह जरुरी मिनरल है। संतुलित आहार में इसकी मात्रा हड्डियों को मजबूत बनाती है।</span></div><div><br></div><div><b>कैसे खाएं काले चने?</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">&nbsp; - रात के समय काले चने को पानी में भिगो दें और सुबह इन्हें उबाल लें।</span></div><div><br></div><div>&nbsp;- आप इन्हें सलाद में मिलाकर, हल्के मसालों के साथ या स्नैक के रुप में खा सकते हैं।</div><div><br></div><div>&nbsp;- आप चाहें तो इसमें प्याज, टमाटर, नींबू और हरा धनिया मिलाकर स्वाद और पोषण दोनों बढ़ा सकती हैं।&nbsp;&nbsp;</div>]]></description>
      <pubDate>Tue, 09 Jun 2026 11:56:22 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/boost-bone-and-muscle-health-with-black-chickpeas</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[लगातार थकान और भूलने की आदत सिर्फ Stress नहीं, Brain Tumor का हो सकता है Warning Sign]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/fatigue-and-memory-loss-more-than-stress-a-health-alert]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>भागदौड़ भारी जिंदगी में क्या आप भी रोजाना थकान महसूस करते हैं। बातों को भूल जाना या मेंटली ड्रेन फील होना। लंबे समय तक काम करना, स्क्रीन का लगातार इस्तेमाल, नींद पूरी न होना और हर वक्त का तनाव इन सभी कारणों को हम सभी नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन कई बार लोग इन संकेतों को स्ट्रेस या बर्नआउट समझ लेते हैं, लेकिन हर बार ऐसा होना जरुरी नहीं है।&nbsp;</div><div><span style="font-size: 1rem;">इस तरह के संकेत तनाव नहीं, इसके पीछे गंभीर बीमारी भी हो सकती है। यह ब्रेन ट्यूमर के लक्षण भी हो सकते हैं। आमतौर पर लोग सोचते हैं कि ब्रेन ट्यूमर होने पर सिर्फ दौरे पड़ना या दिमाग से जुड़ी कोई बहुत बड़ी और गंभीर समस्या ही सामने आती है, सच तो यह है कि इसके शुरुआती लक्षण काफी आम और सामान्य होते हैं, जिन्हें लोग नजरअंदाज कर देते हैं। इन संकेतों को समझना जरुरी है।</span></div><div><span style="font-size: 1rem;">&nbsp;</span></div><div><span style="font-size: 1rem;"><b>रोज की थकान नॉर्मल नहीं</b></span></div><div><span style="font-size: 1rem;">वैसे रोजमर्रा की जिंदगी में थकान फील होना नॉर्मल है। हालांकि, हर समय आप थकान को महसूस करते हैं तो यह सही नहीं है। कई बार लोगों को लगता है कि ऐसा ज्यादा काम करने के कारण हो रहा है और वो थोड़ा आराम करेंगे तो ठीक हो जाएंगे, लेकिन यह जरुरी नहीं है। यदि आपकी पूरी नींद और आराम के बाद भी थकान फील होती है और इसका असर आपकी रोज की लाइफ पर हो रहा है, तो यह ठीक नहीं है।</span></div><div><br></div><div><b>बार-बार सिरदर्द होना</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">आज के समय में सिरदर्द की समस्या काफी आम हो चुकी है। ऐसे कई लोग हैं, जो हर दूसरे दिन सिरदर्द से परेशान रहते है, लेकिन वे इस पर ध्यान नहीं देते हैं। जिससे कमजोरी, कभी थकान तो कभी जुकाम की वजह से होने वाला सिरदर्द को मान लेते हैं। यदि सिरदर्द के साथ उल्टी महसूस हो, जी मिचलाए या सिर के अंदर दबाव फील हो, तो यह तनाव के कारण होने वाला सिरदर्द बिल्कुल नहीं है।</span></div><div><br></div><div><b>चक्कर आना</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">यदि आपकी दृष्टि बार-बार धुंधली हो रही है, छोटी-छोटी बातें याद रखने में परेशानी हो रही है, किसी काम में ध्यान केंद्रित करना कठिन लग रहा है या अक्सर चक्कर आने की शिकायत रहती है, तो इन संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इसके अलावा, बिना किसी स्पष्ट कारण के बार-बार मूड बदलना, मानसिक रूप से थकान महसूस होना या भावनात्मक अस्थिरता भी कुछ मामलों में ब्रेन ट्यूमर से जुड़े लक्षण हो सकते हैं।</span></div>]]></description>
      <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 14:34:36 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/fatigue-and-memory-loss-more-than-stress-a-health-alert</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    <item>
      <title><![CDATA[Health Tips: Heat Sensitivity को न करें नजरअंदाज, हो सकती है ये गंभीर Medical Condition]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/do-not-ignore-heat-sensitivity-it-lead-to-serious-medical-condition]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>गर्मी में पसीना आना और थकान महसूस होना एक आम बात होती है। लेकिन कुछ लोगों को कम गर्मी में भी बहुत ज्यादा गर्मी लगने लगती है। थोड़ी देर धूप में रहने पर कुछ लोगों को बेचैनी, चक्कर आना, सिरदर्द, ज्यादा पसीना, दिल की धड़कन तेज होना और कमजोरी महसूस होने जैसे लक्षण दिखते हैं। यह सिर्फ गर्मी के मौसम का असर नहीं बल्कि मेडिकल कंडीशन का भी संकेत हो सकता है।&nbsp;&nbsp;</div><div><br></div><div>हेल्थ एक्सपर्ट की मानें, तो शरीर का तापमान कंट्रोल करने की क्षमता जब प्रभावित होने लगती है। तो व्यक्ति गर्मी के प्रति ज्यादा सेंसिटिव हो जाता है। वहीं कई बार यह समस्या थायराइड, डिहाइड्रेशन, हार्मोनल गड़बड़ी या नर्वस सिस्टम से जुड़ी बीमारियों की वजह से भी हो सकती है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/health/late-periods-herbal-drink-for-a-regular-cycle" target="_blank">Time पर नहीं आते पीरियड्स? रसोई की इन 3 चीजों से बना काढ़ा है अचूक उपाय, जानें यह Expert Tip</a></h3><div><br></div><h2>गर्मी के प्रति सेंसिटिव बनाती हैं ये बीमारियां</h2><div><br></div><h2>हाइपरथायरायडिज्म</h2><div>हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक हाइपरथायरायडिज्म ऐसी स्थिति है, जिसमें थायराइड ग्लैंड जरूरत से ज्यादा हार्मोन बनाने लगती है। इससे बॉडी का मेटाबॉलिज्म तेज हो जाता है। वहीं व्यक्ति को सामान्य तापमान भी बहुत गर्म महसूस होने लगता है। ऐसी स्थिति में लोगों को अधिक पसीना आना, तेजी से वेट घटना और दिल की धड़कन बढ़ जाना और बेचैनी महसूस होती है।</div><div><br></div><h2>मल्टीपल स्क्लेरोसिस और नर्व सिस्टम की समस्या होना</h2><div>शरीर की गर्मी सहन करने की क्षमता को कुछ न्यूरोलॉजिकल बीमारियां भी प्रभावित करती हैं। ऐसी ही एक बीमारी मल्टीपल स्क्लेरोसिस है, जिसमें नसों और मस्तिष्क के बीच संदेश पहुंचाने वाले प्रोसेस प्रभावित हो जाते हैं। एक्सपर्ट के मुताबिक एमएस के मरीजों को हल्की गर्मी में भी धुंधला दिखाई देना, थकान महसूस होना या कमजोरी लगने लगती है। वहीं शरीर का तापमान थोड़ा बढ़ने से लक्षण गंभीर हो सकते हैं। वहीं ऑटोनोमिक नर्व डिसऑर्डर जैसी स्थितियों में भी शरीर सही तरीके से तापमान कंट्रोल नहीं कर पाता है।</div><div><br></div><h2>डायबिटीज, मोटापा और हार्ट डिजीज</h2><div>हार्ट डिजीज और डायबिटीज भी शरीर के तापमान कंट्रोल करने के प्रोसेस को प्रभावित करता है। डायबिटीज में नसों को नुकसान पहुंच सकता है। जिससे शरीर को ठंडा रखने की क्षमता भी कम हो जाती है। वहीं हार्ट डिजीज की समस्या होने पर ब्लड सर्कुलेशन प्रभावित होता है, जिससे शरीर सही तरीके से गर्मी बाहर नहीं निकाल पाता है।</div><div><br></div><h2>दवाओं का सेवन</h2><div>शरीर में पानी की कमी होना भी हीट सेंसिटिविटी की बड़ी वजह बन सकता है। जब शरीर में पर्याप्त पानी नहीं होता है, तो पसीना सही तरीके से नहीं निकल पाता है। वहीं शरीर का तेजी से तापमान बढ़ने लगता है। कुछ दवाएं भी शरीर के कूलिंग सिस्टम को प्रभावित कर सकती हैं। इसमें भी मरीज को ज्यादा गर्मी महसूस होने लगती है। अगर किसी दवा को खाने से असहनीय गर्मी लगने लगे, तो आपको फौरन डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।</div><div><br></div><div>हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक हीट सेंसिटिव लोगों को दिन के सबसे गर्म समय यानी की दोपहर में 12 से 4 के बीच घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए। अगर बार बार उल्टी, ज्यादा चक्कर आना, कमजोरी या सांस लेने में परेशानी हो रही है, तो ऐसे में भी फौरन डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। क्योंकि यह हीट स्ट्रोक या हीट एक्सॉशन का संकेत हो सकता है।</div>]]></description>
      <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 11:05:30 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/do-not-ignore-heat-sensitivity-it-lead-to-serious-medical-condition</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    <item>
      <title><![CDATA[Heatwave का कहर! ये 5 Superfoods घटाएंगे Body Heat, गर्मी से मिलेगा तुरंत आराम]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/health-diet-top-5-foods-to-beat-summer-body-heat]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>गर्मियों में बढ़ता हुआ तापमान से बॉडी हीट की कई समस्याएं देखने को मिलती हैं। भीषण गर्मी में शरीर को अंदर से ठंडा रखना बेहद जरुरी है। तेज गर्मी और लगातार बढ़ते तापमान के दौरान शरीर में ठंडक बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ऐसे में यदि आप हेल्थ एक्सपर्ट द्वारा बताए गए कुछ खास खाद्य पदार्थों को अपनी रोजाना की डाइट में शामिल करती हैं, तो शरीर को प्राकृतिक रूप से ठंडा रखने और गर्मी के प्रभाव से बचाने में सहायता मिल सकती है। आइए आपको इस लेख में बताते हैं गर्मियों में किन फूड्स का सेवन करने से शरीर ठंडा बना रहता हैं।</div><div><br></div><div><b>छाछ</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">गर्मियों में छाछ पीना हेल्दी मानी जाती है। इससे पेट भी ठंडा बना रहता है और शरीर को भी ठंडक मिलती हैं। इसके साथ ही डाइजेशन भी बेहतर रहता है, एसिडिटी कम होती है और पाचन संबंधित समस्याएं नहीं होती है।&nbsp; इसको आप लंच के बाद ले सकते हैं। इसमें करी पत्ता,जीरा और पुदीना मिलाकर जरुर पिएं। गर्मियों में आप दही को भी डाइट में शामिल कर सकते हैं। यह प्रोबायोटिक्स से भरपूर होता है, जिससे गट हेल्द भी दुरुस्त रहती है।</span></div><div><br></div><div><b>नारियल पानी</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">गर्मियों में शरीर को हाइड्रेट रखना काफी जरुरी है। नारियल पानी इलेक्ट्रोलाइट्स से भरपूर होता है। नारियल पानी पीने से शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स बैलेंस रहता है। यह थकान को दूर करता है और शरीर को ताकत मिलती है। गर्मियों में डेली नारियल पानी को डाइट में जरुर शामिल करें। इससे शरीर को ठंडक मिलती है। इसमें आप बेसिल सीड्स डाल सकते हैं, इससे खून की कमी नहीं होगी।</span></div><div><br></div><div><b>पुदीना</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">पुदीना गर्मियों में शरीर को ठंडक पहुंचाने वाला एक बेहतरीन नेचुरल ऑप्शन माना जाता है। इसकी तासीर ठंडी होती है, जो शरीर के बढ़ते तापमान को संतुलित रखने में मदद करता है। साथ ही, यह पाचन क्रिया को बेहतर बनाकर पेट से जुड़ी समस्याओं से राहत दिला सकता है। गर्म मौसम में आप पुदीने को अपनी रोजमर्रा की डाइट में शामिल कर सकती हैं। इसे चटनी, सलाद या ताजगी भरे पेय के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। पुदीने का पानी या डिटॉक्स ड्रिंक भी शरीर को हाइड्रेट और तरोताजा रखने में सहायक होता है।</span></div><div><br></div><div><b>नींबू</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">नींबू में कई सारे पोषक तत्व पाए जाते हैं, इनमें भरपूर मात्रा में विटामिन-सी और एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते है। नींबू का नियमित सेवन शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के साथ-साथ विषैले तत्वों को बाहर निकालने में भी सहायक माना जाता है। गर्म मौसम में नींबू शरीर को ताजगी देने और लू के प्रभाव से बचाने में मदद कर सकता है।</span></div><div>&nbsp;इसके अलावा, यह पाचन तंत्र को एक्टिव रखता है और वेट मैनेज में भी योगदान दे सकता है। आप इसे नींबू पानी के रूप में पी सकते हैं या सलाद और अन्य व्यंजनों में मिलाकर अपने आहार का हिस्सा बना सकते हैं।</div><div><br></div><div><b>खीरा</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">खीरा में भरपूर मात्रा में पानी पाया जाता है। समर सीजन में खीरा का सेवन करना फायदेमंद माना जाता है। यह शरीर को हाइड्रेट रखता है और बॉडी की हीट को कम करता है। इससे डाइजेशन बेहतर होता है और ब्लोटिंग कम होती है।&nbsp;</span></div>]]></description>
      <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 11:11:06 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/health-diet-top-5-foods-to-beat-summer-body-heat</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Time पर नहीं आते पीरियड्स? रसोई की इन 3 चीजों से बना काढ़ा है अचूक उपाय, जानें यह Expert Tip]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/late-periods-herbal-drink-for-a-regular-cycle]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>खराब जीवनशैली और गलत खानपान के कारण भी कई समस्याएं शरीर में देखने को मिलती है। महिलाओं को हर महीने पीरियड्स आना एक नेचुरल बायोलॉजिकल प्रक्रिया है, लेकिन ये लेट हो जाए, तो बड़ी समस्या हो जाती है। क्या आप भी लेट पीरियड्स की समस्या से परेशान हैं। 2-3 दिन पीरियड्स लेट आए, तो यह नॉर्मल है। अगर 1 हफ्ते से ज्यादा लेट आते हैं, तो आगे चलकर आपको दिक्कत हो सकती है। ऐसे में आपको घबराने की जरुरत नहीं है। इस लेख में हम आपको बताएंगे ऐसा घरेलू उपचार, जिसके इस्तेमाल से ही आपके पीरियड्स जल्दी आ जाएंगे। किचन में मौजूद इन 3 चीजों से बनाएं यह स्पेशल काढ़ा।&nbsp;</div><div><br></div><div><b>एक्सपर्ट की राय</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">डॉक्टर भी मानते है कि कभी-कभी कुछ दिनों के लिए पीरियड्स लेट आना काफी नॉर्मल होता है। इसके पीछे तनाव, पूरी नींद न लेना, हार्मोनल में बदलाव, वजन में उतार-चढ़ाव, ज्यादा एक्सरसाइज या लाफइस्टाल से जुड़े कई कारण हो सकते हैं। ऐसे में आपको चिंता छोड़कर कुछ हेल्दी आदतें अपनाना चाहिए। आइए आपको बताते हैं काढ़ा बनाने की विधि-</span></div><div><br></div><div><b>काढ़ा बनाने की सामग्री</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">- मेथी के बीज - 1 चम्मच</span></div><div><br></div><div>&nbsp;- अजवाइन - 1/2 चम्मच</div><div><br></div><div>&nbsp;- पार्सले की टहनियां- 8-9</div><div><br></div><div>&nbsp;- पानी- 200 मिलीलीटर</div><div><br></div><div><b>काढ़ा कैसे बनाएं?</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">&nbsp;- सबसे पहले एक पैन में पानी डालें।</span></div><div><br></div><div>&nbsp;- अब इसमें मेथी, अजवाइन और पार्सले मिलाएं।</div><div><br></div><div>&nbsp;- इसे अच्छी तरह उबालें।</div><div><br></div><div>&nbsp;- जब पानी थोड़ा कम हो जाए तब गैस बंद कर दें।</div><div><br></div><div>&nbsp;- इसको छानकर हल्का गर्म होने पर रात को सोने से पहले पी लें।</div><div><br></div><div><b>काढ़ा कब पीना चाहिए?</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">यदि आपके पीरियड्स रेगुलर आते हैं, तो अनुमानित पीरियड डेट से करीब 7 दिन पहले इस काढ़े को पीना शुरु कर सकते हैं।</span></div><div><br></div><div><b>जानें काढ़े में मौजूद चीजों के फायदे</b></div><div><span style="font-size: 1rem;"><b>पार्सले</b></span></div><div><span style="font-size: 1rem;">महिलाओं के लिए यह जड़ी-बूटी बेहद ही फायदेमंद है। इसमें पाए जाने वाले पीरियड्स फ्लो को सपोर्ट करते हैं। इसके साथ ही इसमें विटामिन A, C और K जैसे पोषक तत्व भी पाए जाते हैं, जो सेहत के लिए फायदेमंद हैं।</span></div><div><br></div><div><b>&nbsp;मेथी</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">मेथी के दानों को महिलाओं की सेहत के लिए बेहद लाभकारी माना जाता है। इनमें मौजूद फाइबर, एंटीऑक्सीडेंट्स और अन्य पोषक तत्व शरीर के हार्मोनल संतुलन को बनाए रखने में मदद कर सकते हैं। नियमित रूप से उचित मात्रा में मेथी का सेवन करने से पाचन तंत्र बेहतर तरीके से काम करता है, साथ ही मेटाबॉलिज्म को भी समर्थन मिलता है, जिससे पूरे हेल्थ को फायदा पहुंच सकता है।</span></div><div><br></div><div><b>अजवाइन</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">अजवाइन पेट से संबंधित समस्याओं गैस, अपच और पेट के भारीपन को कम करती है। इसकी गर्म तासीर के कारण पीरियड्स में होने वाली ऐंठन और पेट की असुविधा कम होती है, क्योंकि इससे शरीर में ब्लड सर्कुलेशन अच्छा होता है। वहीं, पेट की मसल्स को आराम मिलता है।&nbsp;</span></div>]]></description>
      <pubDate>Sat, 06 Jun 2026 11:30:50 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/late-periods-herbal-drink-for-a-regular-cycle</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Heat Stroke Alert: बच्चों के लिए जानलेवा हो सकती है गर्मी, इन Summer Tips से करें बचाव]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/heat-can-be-fatal-for-children-protect-them-with-these-summer-tips]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>बच्चों के लिए गर्मियों का मौसम सबसे ज्यादा चुनौतीपूर्ण माना जाता है। क्योंकि बच्चे का शरीर बड़े लोगों की तुलना में तापमान को जल्दी कंट्रोल नहीं कर पाता है। बढ़ता तापमान, तेज धूप और लू की वजह से बच्चे में हीट स्ट्रोक का खतरा तेजी से बढ़ता है। हीट स्ट्रोक एक ऐसी गंभीर स्थिति है, जिसमें शरीर का तापमान अचानक से ज्यादा हो जाता है। वहीं अगर समय रहते इस पर ध्यान न दिया जाए, तो यह जानलेवा भी साबित हो सकता है।</div><div><br></div><div>छोटे बच्चों में कमजोरी, डिहाइड्रेशन, तेज बुखार, चक्कर आना, बेहोशी जैसी लक्षण जल्दी दिखाई दे सकते हैं। ऐसे में माता-पिता को एक्स्ट्रा सतर्क रहने की जरूरत होती है। वहीं कुछ आसान लेकिन जरूरी सावधानियां अपनाकर बच्चे को हीट स्ट्रोक और गर्मी के खतरे से सेफ रख सकते हैं।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/health/say-goodbye-to-mood-swings-these-5-yoga-poses-provide-instant-stress-relief" target="_blank">Health Tips: Mood Swings को कहें Bye-Bye, ये 5 योगासन देंगे Instant Stress Relief</a></h3><div><br></div><h2>पर्याप्त पानी दें</h2><div>गर्मी में बच्चे को पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए। क्योंकि पसीने के रूप में शरीर से पानी तेजी से निकलता है, जिससे डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ जाता है।</div><div><br></div><div>बच्चे को नारियल पानी, छाछ, ORS और घर पर बना नींबू पानी पीना चाहिए। यह शरीर में जरूरी मिनरल्स और इलेक्ट्रोलाइट्स बनाए रखता है।</div><div><br></div><div>छोटे बच्चों को बाहर से खेलने के बाद फौरन पानी देना चाहिए।</div><div><br></div><h2>दोपहर की धूप में न निकलने दें</h2><div>बच्चे को दोपहर में घर से न निकले दें, क्योंकि इस दौरान तापमान ज्यादा होता है। वहीं इस दौरान लू लगने का खतरा भी बढ़ जाता है।</div><div><br></div><div>सुबह 11 से शाम 4 बजे तक बच्चे को बाहर धूप में खेलने या घूमने न भेजें।</div><div><br></div><div>अगर बच्चे का बाहर जाना जरूरी है, तो उसको छांव में रखें और ज्यादा देर धूप में न रहने दें।</div><div><br></div><h2>सूती और हल्के कपड़े पहनाएं</h2><div>बच्चे को गर्मियों में हमेशा सूती और ढीले कपड़े पहनाने चाहिए।</div><div><br></div><div>सूती कपड़े आसानी से पसीना पोंछ लेते हैं और शरीर को ठंडा रखने में सहायता करते हैं।</div><div><br></div><div>ज्यादा टाइट कपड़े या सिंथेटिक कपड़े पहनने से बच्चे को खुजली, घमौरियां और बेचैनी हो सकती है।</div><div><br></div><h2>तली-भुनी चीजें कम दें</h2><div>गर्मियों के मौसम में बच्चों का पाचन तंत्र जल्दी प्रभावित हो सकता है।</div><div><br></div><div>ऐसे में बच्चे को ज्यादा तला भुना, जंक फूड और मसालेदार खाना देने से उसका पेट खराब हो सकता है, साथ ही शरीर में गर्मी बढ़ने की समस्या हो सकती है।</div><div><br></div><div>बच्चे को दही, सलाद, ताजे फल, खिचड़ी और हल्का घर का बना खाना देना ज्यादा फायदेमंद रहता है।</div><div><br></div><h2>कैप और छाते का इस्तेमाल</h2><div>जब भी बच्चे को बाहर ले जाए, तो उसको कैप या छाता जरूर दें। जिससे कि धूप सिर और चेहरे पर सीधे न पड़े।</div><div><br></div><div>तेज धूप से बच्चे को बचाने के लिए सनग्लास का भी इस्तेमाल किया जा सकता है।</div><div><br></div><div>इन उपायों से बच्चों को गर्मी और UV किरणों के नुकसान से बचाया जा सकता है।</div><div><br></div><h2>शरीर को ठंडा रखें</h2><div>गर्मियों में घर का तापमान सामान्य रखना जरूरी होता है।</div><div><br></div><div>कमरे में एसी, कूलर या पंखे का इस्तेमाल करें। लेकिन बच्चे को बहुत ज्यादा बंद या गर्म जगह पर न रहने दें।</div><div><br></div><div>वहीं बच्चे को समय-समय पर ठंडे पानी से हाथ-पैर और चेहरा धुलवाएं। इससे भी उसको राहत मिलेगी।</div><div><br></div><h2>हीट स्ट्रोक के लक्षण</h2><div>अगर बच्चे को चक्कर आना, कमजोरी, उल्टी, सिरदर्द, बेहोशी या तेज बुखार आने जैसी समस्या हो रही है। तो यह हीट स्ट्रोक का संकेत हो सकता है। इस स्थिति में बच्चे को फौरन ठंडी जगह पर ले जाएं, शरीर को ठंडा करें और बिना किसी देरी के डॉक्टर से संपर्क करें। क्योंकि सही समय पर सही इलाज मिलने से गंभीर स्थिति से बचा जा सकता है।</div>]]></description>
      <pubDate>Sat, 06 Jun 2026 11:14:55 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/heat-can-be-fatal-for-children-protect-them-with-these-summer-tips</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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      <title><![CDATA[Health Tips: Mood Swings को कहें Bye-Bye, ये 5 योगासन देंगे Instant Stress Relief]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/say-goodbye-to-mood-swings-these-5-yoga-poses-provide-instant-stress-relief]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>आज ही लाइफस्टाइल से जुड़ी एक आम समस्या मूड स्विंग्स है, जोकि नजरअंदाज करने वाली समस्या नहीं है। उदासी, अचानक गुस्सा, बेचैनी या चिड़चिड़ापन यह सभी मानसिक असंतुलन का संकेत हो सकता है। नींद की कमी, तनाव, हार्मोनल बदलाव और अनिय़मित लाइफस्टाइल इसके प्रमुख कारण हैं। ऐसे में योग एक प्राकृतिक और प्रभावी उपाय है। जोकि शरीर और मन दोनों को संतुलित करता है। योग हमारे नर्वस सिस्टम को शांत करता है और हार्मोनल संतुलित करने में सहायता करता है और दिमाग के पॉजिटिव सोच को बढ़ावा देता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको मूड स्विंग्स को कंट्रोल करने वाले योगासन के बारे में बताने जा रहे हैं।</div><div><br></div><h2>बालासन</h2><div>इस आसन को करने से मानसिक थकान दूर होगा और ओवरथिंकिंग का समस्या भी कंट्रोल होती है। आप तुरंत रिलैक्सेशन के लिए यह आसन कर सकते हैं। इसके लिए घुटनों के बल बैठें और सांस छोड़ते हुए आगे की ओर झुकें। फिर माथा जमीन पर लगाते हुए दोनों हाथ आगे की ओर रखें। फिर आंखें बंद कर सामान्य सांस लें।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/health/stress-villain-during-ivf-treatment-learn-from-doctor-how-to-increase-success-rate" target="_blank">Health Tips: IVF Treatment के दौरान Stress बन सकता है विलेन, Doctor से जानें कैसे बढ़ेगा Success Rate</a></h3><div><br></div><h2>सेतु बंधासन</h2><div>सेतु बंधासन का अभ्यास करने से थकान और तनाव कम होता है और हार्मोन को संतुलित करने में मदद मिलता है। इस आसन को करने के लिए पीठ के बल लेट जाएं, पैरों को जमीन पर रखें और घुटनों को मोड़ें। अब हाथ को आगे की ओर रखें और सांस लेते हुए कमर को ऊपर की ओर उठाएं। ठुड्डी छाती पर रखें और कुछ सेकेंड रुकें और धीरे-धीरे सामान्य अवस्था में आ जाएं।</div><div><br></div><h2>भुजंगासन</h2><div>भुजंगासन का अभ्यास करने से हार्मोन बैलेंस करने में मदद मिलती है। यह आसन डिप्रेशन और लो मूड लाभकारी होता है और यह शरीर में ऊर्जा बढ़ाने में सहायता करता है। इस आसन को करने के लिए पेट के बल जमीन पर लेट जाएं, हथेलियों को कंधों के पास रखें। सांस लेते हुए छाती को धीरे-धीरे ऊपर उठाएं और नाभि को जमीन से लगाए रखें। इस पोजिशन में कुछ सेकेंड रुकने के बाद सांस छोड़ते हुए वापस सामान्य अवस्था में आ जाएं। इस आसन को 5 से 7 बार दोहराएं।</div><div><br></div><h2>शवासन</h2><div>इस आसन को करने से मानसिक तनाव कम होता है और नकारात्मक विचार कम आते हैं। वहीं दिमाग भी रिलैक्स होता है। इस आसन को करने के लिए पीठ के बल सीधे लेट जाएं, आंखें बंद करें और हाथ-पैर ढीला छोड़ दें। फिर रिलैक्स होते हुए सांस पर ध्यान फोकस करें।</div><div><br></div><h2>सुखासन</h2><div>इस आसन को करने से मन शांत होता है, तनाव और एंग्जायटी कम होती है। साथ ही भावनात्मक संतुलन बनाए रखें। इस आसन को करने के लिए पलथी मारकर बैठें, रीढ़ की हड्डी को सीधा रखें और दोनों हाथ घुटनों पर रखें। फिर आंखें बंद करते हुए गहरी सांस लें और सांस आने-जाने पर ध्यान केंद्रित करें। सुखासन को आप 5-10 मिनट तक कर सकते हैं।</div><div><br></div><h2>वज्रासन</h2><div>वज्रासन का अभ्यास करने से पाचन तंत्र सुधरता है और मन स्थिर होता है। इस आसन को भोजन के बाद किया जा सकता है। वज्रासन करने के लिए घुटनों के बल बैठे, पैरों को पीछे रखें और एड़ियों पर बैठ जाएं। अब रीढ़ को सीधा रखें और सामान्य सांस लें।</div>]]></description>
      <pubDate>Fri, 05 Jun 2026 11:57:53 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/say-goodbye-to-mood-swings-these-5-yoga-poses-provide-instant-stress-relief</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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      <title><![CDATA[Health Tips: IVF Treatment के दौरान Stress बन सकता है विलेन, Doctor से जानें कैसे बढ़ेगा Success Rate]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/stress-villain-during-ivf-treatment-learn-from-doctor-how-to-increase-success-rate]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>अगर कोई कपल नेचुरल तरीके से पेरेंट नहीं बन पाता है, तो फिर कपल IVF की सहायता लेते हैं। हालांकि यह एक बेहतरीन ऑप्शन है। सामान्यत: महिलाएं IVF के जरिए गर्भवती हो जाती हैं। लेकिन यह आसान प्रोसेस नहीं है। इस प्रोसीजर के दौरान महिलाओं को कई तरह की समस्याएं, हार्मोनल बदलाव और शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। यहां तक कि कुछ महिलाओं को IVF तकनीक के दौरान ज्यादा तनाव होने लगता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि स्ट्रेस का IVF प्रोसेस पर क्या असर पड़ता है। साथ ही यह भी जानेंगे कि क्या तनाव लेने से IVF का रिजल्ट बदल सकता है।</div><div><br></div><h2>तनाव और IVF के बीच संबंध</h2><div>तनाव कई तरह की समस्याओं को जन्म देता है। वहीं तनाव के कारण हमारे शरीर में स्ट्रेस हार्मोन का लेवल बढ़ जाता है। जो शरीर को बुरी तरह से प्रभावित करता है। साल 2024 के एक शोध पत्र के मुताबिक ज्यादा तनाव और चिंता IVF के इलाज को नकारात्मक रूप से प्रभावित करते हैं। वहीं तनाव इसकी सफलता दर को कम कर सकते हैं।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/health/lemon-water-daily-health-myth-or-wellness-fact" target="_blank">Daily Lemon Water पीने से पहले जानें ये बातें, फायदे की जगह हो सकते हैं ये गंभीर Side Effects</a><span style="font-size: 1rem;">&nbsp;</span></h3><div><br></div><div>IVF प्रोसेस के दौरान तनाव लेने से एड्रिनिलिन और कोर्टिसोल हार्मोन का लेवल बढ़ता है। यह दोनों हार्मोन महिला की प्रजनन क्षमता पर सीधे-सीधे बुरा असर डालते हैं। जैसे एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन के लेवल को बिगाड़ सकते हैं। ऐसे में IVF प्रोसेस का रिजल्ट प्रभावित हो सकता है।</div><div><br></div><div>अगर आप लंबे समय तक तनाव में रहते हैं, तो शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ता है। IVF प्रोसेस के दौरान अगर महिलाएं तनाव में रहती हैं, तो ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस के कारण से महिलाओं में अंडों की गुणवत्ता और पुरुषों में शुक्राणुओं की संख्या और गतिशीलता प्रभावित हो सकती है। यह स्थिति भी IVF प्रोसेस की सफलता में बाधा डाल सकती है।</div><div><br></div><div>जब तनाव बढ़ता है, तो शरीर की रक्त वाहिकाएं सिकुड़ जाती है। इस स्थिति में ब्लड फ्लो में अवरोध पैदा होता है। अगर IVF के दौरान भी तनाव लेते हैं, तो गर्भाशय की ओर से होने वाला ब्लड सर्कुलेशन कम हो सकता है। ऐसे में भ्रूण के गर्भाशय की दीवार से चिपकने की संभावना पर भी असर पड़ता है।</div><div><br></div><h2>कैसे कम करें तनाव</h2><div>एक्सपर्ट की मदद लेनी चाहिए और इस दौरान विशेषज्ञ और काउंसलिंग की सलाह मददगार होती है।</div><div><br></div><div>सेल्फकेयर पर ध्यान देना चाहिए, इससे IVF जर्नी आसान लगने लगेगी।</div><div><br></div><div>अगर आपको कोई बात परेशान कर रही है, उसका समाधान खोजें। वहीं जरूरत पड़ने पर परिवार की मदद लें।</div><div><br></div><div>माइंडफुल एक्टिविटी करनी चाहिए। वहीं आप डॉक्टर की सलाह पर हल्की-फुल्की एक्सरसाइज करना चाहिए।</div><div><br></div><div>IVF प्रोसेस के दौरान पार्टनर के साथ अपने इमोशनल बॉन्ड को मजबूत बनाना चाहिए।&nbsp;</div><div><br></div><div>बता दें कि IVF फेल होने के लिए सिर्फ तनाव जिम्मेदार नहीं होता है, लेकिन इसकी सफलता दर में कमी जरूर आती है। इसलिए प्रयास करें कि इस प्रोसेस के दौरान तनाव न दें। वहीं IVF के दौरान योग करना, मानसिक शांति बनाए रखना और सकारात्मक रहना बेहद जरूरी होता है।</div>]]></description>
      <pubDate>Thu, 04 Jun 2026 11:24:55 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/stress-villain-during-ivf-treatment-learn-from-doctor-how-to-increase-success-rate</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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      <title><![CDATA[Daily Lemon Water पीने से पहले जानें ये बातें, फायदे की जगह हो सकते हैं ये गंभीर Side Effects]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/lemon-water-daily-health-myth-or-wellness-fact]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>आजकल भीषण गर्मी के बचने के लिए ठंडा नींबू पानी मिल जाए तो मजा आ जाता है। गर्मियों में नींबू पानी ठंडक पाने के लिए अमृत से कम नहीं है। वैसे सुबह खाली पेट नींबू पानी पीना हेल्दी रुटीन बन गया है। इसे कई महिलाएं वेट लॉस, शरीर को डिटॉक्स करने और दिन की हेल्दी शुरुआत से जोड़कर देखा जाता है।</div><div><span style="font-size: 1rem;">कुछ लोग तो इसमें शहद मिलाकर पीने से चेहरे पर बेदाग निखार आता है। इस लेख में बताएंगे कि नींबू पानी पीना सच में फायदेमंद है या इसे कितनी मात्रा में पीना सही होता है।</span></div><div><br></div><div><b>नींबू पानी पीने के फायदे</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">नींबू पोषक तत्वों से भरपूर होता है, इसमें प्रचुर मात्रा में विटामिन C और प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट मौजूद होते हैं। नियमित रूप से संतुलित मात्रा में नींबू पानी का सेवन करने से शरीर में पानी की कमी नहीं होती और ताजगी बनी रहती है। पानी में नींबू मिलाने से उसका स्वाद बेहतर हो जाता है, जिससे लोग अधिक मात्रा में तरल पदार्थ पीने के लिए प्रेरित होते हैं। इसके अलावा, विटामिन C शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने में मदद करता है और त्वचा को स्वस्थ व चमकदार बनाए रखने में भी सहायक होता है।&nbsp;</span></div><div><br></div><div><b>क्या वेट लॉस में मदद करता है नींबू पानी?</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">ऐसे में कुछ महिलाओं का मानना है कि नींबू पानी पीने से वजन तेजी से कम होता है, लेकिन यह पूरी तरह सही नहीं है। नींबू अपने आप फैट नहीं जलाता है। लेकिन आप मीठे ड्रिंक्स की जगह बिना चीनी वाला नींबू पानी पीते हैं,तो यह कैलोरी कम करने में मदद करता है और वेट मैनेजमेंट का हिस्सा बन सकता है।</span></div><div><br></div><div><b>रोज नींबू पानी पीने के साइड इफेक्‍ट्स</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">नींबू पानी का सेवन फायदेमंद माना जाता है, लेकिन इसका अत्यधिक उपयोग कुछ परेशानियां भी पैदा कर सकता है। जरूरत से ज्यादा या अधिक खट्टा नींबू पानी पीने पर कई महिलाओं को सीने में जलन, अपच, गैस या पेट में असहजता महसूस हो सकती है।</span></div><div>&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">&nbsp;विशेष रूप से जिन लोगों को एसिडिटी, माइग्रेन या पाचन संबंधी समस्याएं रहती हैं, उन्हें इसका सेवन सीमित मात्रा में करना चाहिए। साथ ही, नींबू में मौजूद अम्लीय तत्व दांतों की बाहरी परत को कमजोर कर सकते हैं। ऐसे में नींबू पानी स्ट्रॉ की मदद से पीना और इसके बाद मुंह को सादे पानी से साफ करना एक अच्छा विकल्प माना जाता है।</span></div><div><br></div><div><b>नींबू पानी पीने के सही तरीके</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">नींबू पानी पीने का सही तरीका है इसे पर्याप्त पानी में मिलाकर पिया जा सकता है और इसमें ज्यादा चीनी न डालें। खाली पेट पीना सही नहीं होता है। इसे दिन में किसी भी सम अपनी सुविधा और शरीर प्रतिक्रिया के अनुसार पी सकते हैं।</span></div><div><br></div><div>आखिर हम कह सकते है कि रोज नींबू पानी पीना सही हो सकता है लेकिन इसे चमत्कारी उपाय मानने के जगह संतुलित खानपान और स्वस्थ जीवनशैली का हिस्सा समझना ज्यादा जरुरी है। शरीर के संकेतों को समझें और कोई परेशानी फील हो सकती है।&nbsp;</div>]]></description>
      <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 11:12:16 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/lemon-water-daily-health-myth-or-wellness-fact</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Health Tips: पेट में बढ़ गया है Pitta Dosha? डाइट में शामिल करें ये 5 Superfoods, मिलेगी ठंडक]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/is-pitta-dosha-aggravated-in-stomach-include-5-superfoods-in-diet-to-soothe-stomach]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>अक्सर गर्मी के मौसम में खाना खाने के फौरन बाद पेट में जलन, एसिडिटी या भारीपन लगने लगता है। अगर आपको भी यह महसूस होता है, तो यह पेट की गर्मी के लक्षण हैं। तेज गर्मी के कारण कुछ लोगों के साथ ऐसा होता है, जोकि बाद में पेट की गंभीर समस्या के रूप में सामने आती है। बाहर के बढ़ते तापमान का असर आपके पेट पर भी होता है। गर्मी के मौसम में पाचन तंत्र में असंतुलन होने की वजह से पेट फूलन, एसिड रिफ्लक्स, ब्लोटिंग और खाना हजम न होने जैसी समस्याएं होती हैं।</div><div><br></div><div>बता दें कि इसके पीछे सिर्फ बढ़ता तापमान नहीं बल्कि खाने-पीने में लापरवाही और डिहाइड्रेशन भी अहम कारण हैं। आयुर्वेद में इस समस्या को पित्त दोष कहा जाता है। तला-भुना, अनियमित दिनचर्या, मलालेदार खाना और पानी की कमी इस समस्या को बढ़ा देती है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि इस मौसम में पेट को कैसे ठंडा रखें और पाचन तंत्र को मजबूत कैसे बनाएं।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/health/from-honey-to-cow-milk-these-foods-deadly-for-children-under-1-year-old" target="_blank">Health Tips: शहद से लेकर गाय का दूध, 1 साल से छोटे बच्चों के लिए ये फूड्स हैं जानलेवा</a></h3><div><br></div><h2>पित्त दोष क्यों होता है</h2><div>जब शरीर में पानी की कमी होती है, तो इससे पाचन क्रिया प्रभावित होती है। डिहाइ़ड्रेशऩ की वजह से शरीर का तापमान बढ़ता है और पेट से गर्मी निकलती है।</div><div><br></div><div>जब आप ज्यादा खाना खाते हैं, तो इससे भी पाचन तंत्र पर प्रेशर पड़ता है। जिससे पेट में एक्स्ट्रा गर्मी पैदा होती है।</div><div><br></div><div>बैक्‍टीरियल या वायरल इंफेक्‍शन की वजह से पेट की गर्मी और आंतों में सूजन आ सकती है। क्योंकि इस मौसम में बैक्टीरिया जल्दी पनपते हैं, वहीं बासी खाना या फिर दूषित स्ट्रीट फूड खाने से भी पेट में इंफेक्शन बढ़ता है।</div><div><br></div><div>पेट में लंबे समय तक गर्मी रहने से आंतों में सूजन और अल्सर बनने की संभावनाएं बढ़ती हैं।</div><div><br></div><h2>जानिए कैसी हो आपकी डाइट</h2><h2><br></h2><h2>तरल पदार्थों का सेवन करें</h2><div>इस मौसम में पेट को ठंडा रखने और पाचन तंत्र को मजबूत रखने के लिए पेय पदार्थों का अधिक से अधिक सेवन करना चाहिए।</div><div><br></div><div>कैमोमाइल चाय पाचन तंत्र को आराम देती है और एसिडिटी की समस्या को भी कम करने में सहायता करती है।</div><div><br></div><div>आप हिबिस्कस चाय का सेवन कर सकते हैं, यह तापमान को कंट्रोल करने और शरीर को ठंडक प्रदान करती है।</div><div><br></div><div>गर्मियों में पुदीने की चाय का सेवन कर सकते हैं। यह पेट फूलने के राहत दिलाती है और पाचन क्रिया भी बेहतर होती है।</div><div><br></div><div>पुदीना का पानी, सौंफ और धनिया का पानी, दही, सत्तू, नारियल पानी और छाछ आदि का सेवन करना चाहिए। यह भी पेट को ठंडा रखता है। आप चाहें तो रोजाना सुबह के समय गोंद का पानी भी सकते हैं। यह पूरा दिन पेट को ठंडक देता है। वहीं इस मौसम में चिया सीड्स भी भिगोकर खाना चाहिए।</div><div><br></div><h2>हल्का भोजन लाभकारी</h2><div>गर्मी के दिनों में भोजन हमेशा हल्का करना चाहिए, मसलन आपको अगर तीन रोटी की भूख है, लेकिन आपने दो रोटी खाई है तो पेट हैवी नहीं होगा। इस मौसम में छिलके वाली या मूंग की धुली दाल, तूहर दाल, दलिया, खिचड़ी, रागी आदि का आहार पेट के लिए बेहतरीन विकल्प है। दरअसल, इस मौसम में जल्दी पचने वाला भोजन ही ग्रहण करना चाहिए। आप चाहें तो दही चावल, किनुआ, पोहा भी खा सकते हैं। पाचन तंत्र मजबूत करने के लिए फाइबर युक्त आहार भी जरूरी है।</div><div><br></div><h2>इन चीजों से करें परहेज</h2><div>मसालेदार और हैवी खाना खाने से पाचन क्रिया स्लो हो जाती है। इसलिए प्रयास करें कि गर्मियों में डिब्बा बंद चीजें, तली-भुनी चीजें और रेडी टू इट फूड्स से दूरी बनाएं। ऐसा खाना खाने से एसिडिटी बढ़ने की संभावना रहती है।</div><div><br></div><div>हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक तेज गर्मी और शरीर में पानी की कमी का सीधा असर हमारे पाचन तंत्र पर पड़ता है। गर्मी में तापमान कंट्रोल रखने के लिए शरीर ज्यादा पानी खर्च करता है। अगर शरीर में पानी की कमी होती है, तो पाचन स्लो हो जाता है। जिसकी वजह से कब्ज, गैस और ब्लोटिंग जैसी समस्याएं शुरू हो जाती हैं। ऐसे मौसम में कैफीन का अधिक सेवन भी नुकसान पहुंचा सकता है।</div><div><br></div><div>गर्मियों में लोगों को फूड इंफेक्शन और पेट खराब होने की शिकायत ज्यादा रहती है। इसलिए इस मौसम में हल्का और सुपाच्य भोजन लेना चाहिए। वहीं लंबे समय तक भूखे रहने से भी एसिडिटी की समस्या बढ़ती है। एक बार में नहीं बल्कि थोड़ी मात्रा में भोजन करना बेहतर होता है। वहीं देर रात हैवी खाना, ज्यादा मसालेदार खाना और बाहर की खुली चीजों को खाने से पेट में जलन हो सकती है। वहीं अगर बार-बार दस्त, उल्टी, पेट दर्द या ब्लोटिंग की समस्या हो रही है, तो फौरन डॉक्टर को दिखाना चाहिए।</div>]]></description>
      <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 10:50:25 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/is-pitta-dosha-aggravated-in-stomach-include-5-superfoods-in-diet-to-soothe-stomach</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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      <title><![CDATA[Travel के दौरान Motion Sickness से हैं परेशान? Summer Trip पर आजमाएं ये 8 रामबाण उपाय]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/health/combat-motion-sickness-natural-health-remedies]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>इस समय बच्चों को गर्मियों की छुट्टियां शुरु हो चुकी हैं। ऐसे में माता-पिता भी कहीं घूमने के लिए जाते हैं, लेकिन कई लोगों को यात्रा के दौरान उल्टी और जी मचलने लगता है। जिस वजह लोग ट्रिप को अच्छे से एन्जॉय नहीं करपाते हैं। ऐसे कई लोग हैं, जो सफर पर जाने के लिए तैयार रहते हैं लेकिन उल्टी, चक्कर आना, जी मचलाने जैसी परेशनियों के कारण यात्रा से दूर भागते हैं।&nbsp;</div><div><span style="font-size: 1rem;">कुछ लोगों का मानना होता है कि सफर में जाने से पहले तला-भुना, तीखा और हेवी खाने के वजह से उल्टी होती है, लेकिन एक्सपर्ट की माने तो यह स्थिति शरीर के नर्वस सिस्टम में असंतुलन खोने की वजह से होती है। इस वैज्ञानिक भाषा में मोशन सिकनेस कहा जाता है।&nbsp;</span></div><div><br></div><div><b>क्या है मोशन सिकनेस?</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">सरल भाषा में समझें तो यह मोशन सिकनेस तब होती है, जब आपके मस्तिष्क को शरीर के उन हिस्सों से परस्पर विरोधी संदेश मिलते हैं, जो गति का अनुभव करते हैं, जैसे कि आंखे, कान, मांसपेशियां और जोड़। अक्सर कई बार यात्रा के समय आपका शरीर नियंत्रण खोने लगता है और उस समय दिमाग को भीतरी कान, आंख और त्वचा से अलग-अलग सिग्नल मिलने लगते हैं, जिससे नर्वस सिस्टम दुविधा में पड़ जाती है, तब इस तरह की स्थिति पैदा होती है और लोगों को उल्टी, चक्कर आने जैसी समस्याएं देखने को मिलती है।</span></div><div><br></div><div><b>मोशन सिकनेस बचने के लिए क्या करें?</b></div><div><span style="font-size: 1rem;"><b>अदरक का सेवन करें</b></span></div><div><span style="font-size: 1rem;">यदि आपको यात्रा करते समय उल्टी या जी मचलता है, तो इस दौरान समय अदरक खाएं। अदरक गैस, जी मचलना, पेट दर्द जैसी समस्याओं को दूर करता है। आप चाहे तो सफर के दौरान अदरक की चाय पी सकते हैं। इसके अलावा, अदरक कैंडी या फिर कच्ची अदरक नमक के साथ खा सकती हैं जिससे उल्टी नहीं आएगी। जब आप यात्रा करें, तो माउथ में अदरक का टुकड़ा रख लें। आप चाहे तो पुदीना या काली मिर्च भी खा सकते हैं।</span></div><div><br></div><div><b>केले से मिलेगा ताजगी</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">केले में भरपूर मात्रा में पौटेशियम पाया जाता है, इसमें इलेक्ट्रोलाइट होता है। सफर से पहले केला खाने से शरीर में शक्ति बनीं रहती है और शरीर में ताजगी बनीं रहती है।</span></div><div><br></div><div><b>हाइड्रेटेड रहें</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">कुछ लोग ट्रैवलिंग के दौरान कुछ लोग पेशाब की डर के वजह से पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं पीते हैं। सफर में कम पानी पीने से भी उल्टी होने लगती है। इन सबसे बचने के लिए ज्यादा से ज्यादा पानी-पानी जरुर पिएं। आप चाहे पानी में नींबू या ग्लूकोज डाल सकते हैं।&nbsp;</span></div><div><br></div><div><b>ताजे पानी वाले फल खाएं</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">जब आप यात्रा करें तो आप ताजे खीरा या अमरूद लेकर खा सकते हैं। अमरुद व खीरा में काला नमक डालकर खाने से आपका मन और भी अच्छा हो जाएगा। इसके सेवन से आपका पेट हल्का रहेगा और तरोताजा बन रहेगा।</span></div><div><br></div><div><b>मीठा या शुगर</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">अक्सर सफर में मीठी चीजें खाने से उल्टी होने लगती है या फिर जी मचलता है। इसलिए यात्रा के दौरान मीठी चीजें खाने से बचें।</span></div><div><br></div><div><b>शराब या कैफीन से दूरी&nbsp;</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">सफर पर निकलने से पहले या यात्रा के दौरान शराब और कैफीन युक्त पेय पदार्थों का सेवन करने से बचना चाहिए। ये चीजें शरीर में पानी की कमी पैदा कर सकते हैं, जिससे चक्कर आना, बेचैनी और मतली जैसी समस्याएं अधिक बढ़ सकती हैं। यात्रा को आरामदायक बनाए रखने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी पीना बेहतर विकल्प है।</span></div><div><br></div><div><b>तला-भुना खाना</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">यात्रा करते समय सबसे जरुरी है कि तला-भुना खाना बिल्कुल न खाएं। कई बार में सफर में पूड़ी-पराठे खाते हैं जिसके बाद उल्टी या जी मचलने लगता है। अधिक तीखी वाले खाद्य पदार्थ का भी सेवन न करें।&nbsp;</span></div><div><br></div><div><b>ब्रेक लेकर ठंडी हवा लें</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">अगर आप यात्रा करते समय जी मचलने लगे तो गाड़ी को रोककर बाहर ठंडी हवा लें। बस में खिड़की खोलकर बाहर की हवा लें। ऐसा करने से उल्टी बंद हो जाएगी।</span></div><div><br></div><div><span style="font-size: 1rem;">इसके अलावा, जब आप सफर करें, तो किताब पढ़ सकते हैं या फिर मोबाइल का इस्तेमाल कर सकते हैं। ऐसा करने से उल्टी नहीं आएगी। गाड़ी में हमेशा ड्राइवर के पास ही बैठें और हमेशा सामने देखें।&nbsp;</span></div>]]></description>
      <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 15:58:43 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/health/combat-motion-sickness-natural-health-remedies</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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