By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Aug 08, 2021
अगरतला। त्रिपुरा के खोवई जिले में ‘‘कोविड नियमों का उल्लंघन’’ करने के आरोप में रविवार को तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के कम से कम 12 नेताओं और कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया। इनमें वे कार्यकर्ता भी शामिल हैं जो एक दिन पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) कार्यकर्ताओं के कथित हमले में घायल हो गए थे। टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी अगरतला पहुंचे और गिरफ्तार पार्टी कार्यकर्ताओं से मुलाकात करने के लिए खोवई रवाना हुए। इन पार्टी कार्यकर्ताओं को सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त के बीच एक अदालत में पेश किया जाएगा। बनर्जी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे हैं और उन्हें पार्टी में नंबर दो माना जाता है।
बहरहाल, पुलिस ने सुबह बताया कि कोविड पाबंदियों का उल्लंघन करने के लिए टीएमसी सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है। इस बीच, अभिषेक बनर्जी, पश्चिम बंगाल के शिक्षा मंत्री ब्रात्या बासु और राज्यसभा सदस्य डोला सेन अगरतला पहुंचे और गिरफ्तार सदस्यों से मिलने के लिए खोवई रवाना हुए। बनर्जी इससे पहले दो अगस्त को त्रिपुरा आए थे जब भाजपा कार्यकर्ताओं ने उनके काफिले पर कथित तौर पर हमला कर दिया था। शनिवार को हुए हमले की कड़ी निंदा करते हुए टीएमसी नेताओं ने आरोप लगाया कि यह घटना साबित करती है कि त्रिपुरा में ‘‘गुंडा राज’’ है और भाजपा ने राज्य में 2023 के विधानसभा चुनावों में अपनी हार भांप ली है।
हमले में अपने कार्यकर्ताओं के शामिल होने से इनकार करते हुए भाजपा ने दावा किया कि त्रिपुरा में टीएमसी कहीं नहीं हैं और पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी पूर्वोत्तर राज्य में ‘‘राजनीतिक हिंसा का वायरस’’ फैला रही है जहां ‘‘बाहरी’’ लोग परेशानी पैदा कर रहे हैं। घटना के तुरंत बाद भाजपा और टीएमसी समर्थकों में टकराव हो गया और उन्होंने एनएच 8 पर 500 मीटर तक सड़क अवरुद्ध कर दी जिसके चलते मुख्यमंत्री बिप्लव देब को धर्मनगर में कुछ कार्यक्रमों में शामिल होने के बाद अगरतला लौटते वक्त रास्ता बदलना पड़ा। सुबल भौमिक के नेतृत्व में टीएमसी कार्यकर्ता शुक्रवार रात को धर्मनगर के बटारसी इलाके में भगवा पार्टी के कार्यकर्ताओं द्वारा टीएमसी के एक पार्टी कार्यालय में कथित तौर पर तोड़फोड़ का विरोध कर रहे थे। माकपा की पश्चिम बंगाल इकाई ने भी हमले की निंदा की लेकिन टीएमसी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि जब भाजपा शासित त्रिपुरा में वाम पार्टी के कार्यकर्ताओं पर हमला किया गया था तो उसने चुप्पी साध ली थी।