By अभिनय आकाश | Aug 19, 2025
सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) द्वारा दायर एक विशेष अनुमति याचिका खारिज कर दी, जिसमें पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के 2022 के उस फैसले को चुनौती दी गई थी जिसमें कहा गया था कि 16 साल की मुस्लिम लड़की किसी मुस्लिम पुरुष से वैध विवाह कर सकती है और जोड़े को धमकियों से सुरक्षा प्रदान की गई थी। न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ ने कहा कि एनसीपीसीआर इस मुकदमे से अनजान है और उसे उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने का कोई अधिकार नहीं है।
न्यायमूर्ति नागरत्ना ने कहा कि क़ानूनी सवाल ही नहीं उठता। याचिका खारिज करते हुए पीठ ने अपने आदेश में कहा कि कृपया किसी उचित मामले में चुनौती दें। हम यह समझ नहीं पा रहे हैं कि एनसीपीसीआर ऐसे आदेश से कैसे असहमत हो सकता है। यदि उच्च न्यायालय, अनुच्छेद 226 के तहत अपनी शक्ति का प्रयोग करते हुए, दो व्यक्तियों को संरक्षण प्रदान करना चाहता है, तो एनसीपीसीआर को ऐसे आदेश को चुनौती देने का कोई अधिकार नहीं है।