1962 भारत-चीन युद्ध में छुड़ाए थे दुश्मन के छक्के! अब रिक्शा चलाने को मजबूर हुआ जवान

By रेनू तिवारी | Mar 03, 2021

अपने इतिहास में हिंदुस्तान ने कई लड़ाइयां लड़ी और लगभग हर बार देश को जीत का गौरव मिला। लेकिन एक युद्ध ऐसा था जो दरअसल युद्ध नहीं छल की दास्तां थी। जब दोस्ती की पीठ पर दगाबाजी का खंजर चलाया जाता है तो उसे 1962 का भारत चीन युद्ध कहते हैं। तब दोस्ती का भरोसा हिंदुस्तान का था, विश्वासघात का खंजर चीन का। उस युद्ध में हार से ज्यादा अपमान का लहू निकला। 1962 के भारत चीन युद्ध को कौन भूल सकता है। 62 कि वह तबाही को कौन भूल सकता है जो चीन ने बरपाई लेकिन उसके साथ ही हिंदुस्तान ने याद रखा एक सबक कि दोबारा 62 जैसी नौबत ना आए।

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पूर्व सैनिक अब्दुल करीम ने बताया कि इंदिरा गांधी के शासनकाल के दौरान कई जवानों को पद से हटा दिया गया था। इस जवानों में वो भी एक थे। जब करीम सेना में थे तब उन्होंने सरकारी जमीन के लिए भी आवेदन किया था। इस दौरान उन्हें तेलंगाना के गोलापल्ली गांव में पांच एकड़ जमीन दी गई। लेकिन वक्त जैसे-जैसे बीता वह पूरी जमीन गांव के 5 लोगों में बांट दी गयी। शिकायत की थी इस चीज की लेकिन अभी इस पर काम चल रहा है। अब अपने परिवार का संभालने के लिए शेख अब्दुल करीम को रिक्शा चलाना पड़ा रहा है। करीम ने अपना दुख बयां करते हुए बताया कि सेना से निकाल दिए जाने के बाद उन्हों काफी दुखों का सामना करना पड़ा। उनके पास कोई घर भी नहीं था रहने के लिए। वह अपना परिवार और रोजी-रोटी के लिए 71 साल की आयु में रिक्शा चला रहे हैं। जमीन का काम अभी भी दफ्तरों में अटका हुआ है। 

आपको बता दें कि इंदिरा गांधी जब भारत की प्रधानमंत्री थी तब उन्होंने कई सैनिकों को उनके पद से हटा दिया था। जिसके बाद कई ऐसे सैनिक थे जो बेरोजगार हो गये थे। इन्हीं में से एक पूर्व सैनिक अब्दुल करीम भी थे। 

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