Prabhasakshi NewsRoom: Karnataka में Caste Census को लेकर चल रहे विवाद में आया दिलचस्प मोड़, जाति जनगणना की ऑरिजनल रिपोर्ट ही गायब!

By नीरज कुमार दुबे | Apr 22, 2025

कर्नाटक में विवादास्पद सामाजिक-आर्थिक एवं शिक्षा सर्वेक्षण रिपोर्ट जिसे ‘जाति जनगणना’ के नाम से भी जाना जाता है वह एक बार फिर सुर्खियों में है। हम आपको बता दें कि इस तरह की रिपोर्टें हैं कि कंथाराजू आयोग द्वारा तैयार की गयी रिपोर्ट की ऑरिजनल प्रति गायब हो गयी है। इसको लेकर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो जाने के बीच कर्नाटक में सत्तारुढ़ कांग्रेस ने कहा है कि यदि ओरिजनल रिपोर्ट गायब भी हो गयी है तब भी कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि सारा डाटा सिस्टम में संकलित होगा।

इसे भी पढ़ें: सोनिया, राहुल की प्रतिष्ठा धूमिल करने के लिए किया गया हमला, कांग्रेस लड़ेगी और विफल करेगी: चिदंबरम

हम आपको याद दिला दें कि सिद्धरमैया के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार (2013-2018) ने 2015 में सर्वेक्षण का आदेश दिया था। तत्कालीन अध्यक्ष एच. कंथाराजू के नेतृत्व में राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग को जाति जनगणना रिपोर्ट तैयार करने का काम सौंपा गया था। सर्वेक्षण का कार्य मुख्यमंत्री के रूप में सिद्धारमैया के पहले कार्यकाल के अंत में 2018 में पूरा हुआ था और रिपोर्ट को उनके उत्तराधिकारी के. जयप्रकाश हेगड़े ने फरवरी 2024 में अंतिम रूप दिया था।

हम आपको बता दें कि सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे हेगड़े द्वारा नवंबर 2023 में सरकार को कथित तौर पर लिखे गए एक पत्र में कहा गया है कि कंथाराजू आयोग के सर्वेक्षण विवरण वाले सीलबंद बक्से 26 अगस्त 2021 को आयोग के अध्यक्ष, सदस्यों और सदस्य सचिव की मौजूदगी में खोले गए थे। पत्र में लिखा है कि बक्से में रिपोर्ट के मुद्रित संस्करण उपलब्ध थे, उनमें सदस्य सचिव के हस्ताक्षर नहीं थे और मूल खाका गायब था। पत्र में कहा गया है कि यह देखते हुए संबंधित अधिकारी को तत्काल ब्लूप्रिंट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया और अधिकारी ने जवाब प्रस्तुत किया है कि यह गायब है। पत्र में लिखा है कि इस मामले को सरकार के संज्ञान में लाते हुए मैं आगे की कार्यवाही करने का तरीका जानना चाहूँगा। हम आपको यह भी बता दें कि जांच की मांग के बावजूद, खासकर तब जब मूल सर्वेक्षण से राज्य के खजाने को 160 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ, कर्नाटक सरकार ने अभी तक कोई औपचारिक मामला दर्ज नहीं किया है और जांच भी शुरू नहीं की है।

हम आपको यह भी बता दें कि इस रिपोर्ट पर चर्चा के लिए हाल ही में बुलाई गई कर्नाटक की विशेष कैबिनेट बैठक बिना किसी बड़े फैसले के समाप्त हो गई थी। हालांकि, बैठक में शामिल मंत्रियों ने किसी भी आंतरिक मतभेद से इंकार करते हुए कहा कि उन्होंने सर्वेक्षण के लिए इस्तेमाल किए गए मापदंडों पर चर्चा की तथा वरिष्ठ अधिकारियों से अधिक जानकारी और तकनीकी विवरण मांगे। मंत्रिमंडल दो मई को एक बार फिर सर्वेक्षण रिपोर्ट पर चर्चा करेगा। बैठक के बाद कानून और संसदीय मामलों के मंत्री एचके पाटिल ने कहा था, ‘‘मंत्रिमंडल ने रिपोर्ट पर विस्तार से चर्चा की है और यह महसूस किया गया कि चर्चा के लिए अधिक जानकारी और तकनीकी विवरण की आवश्यकता है। इसलिए वरिष्ठ अधिकारियों को इसे उपलब्ध कराने के लिए कहा गया है।’’ वहीं संशोधित रिपोर्ट का बचाव करते हुए गृह मंत्री जी परमेश्वर ने कहा, "डेटा को वैज्ञानिक दृष्टिकोण का उपयोग करके संकलित किया गया था। आयोग ने जनसांख्यिकीय अध्ययनों में व्यापक रूप से स्वीकार की जाने वाली सांख्यिकीय तकनीकों को लागू किया है। सही तरीके से किए जाने पर नमूना-आधारित सर्वेक्षण वैध हैं।"

इस बीच, सूत्रों ने बताया कि कई लोगों द्वारा इसे ‘‘अवैज्ञानिक’’ बताए जाने का हवाला देते हुए कुछ मंत्रियों ने सर्वेक्षण रिपोर्ट पर आपत्ति जताई। इसके बाद, मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने सभी मंत्रियों से लिखित या मौखिक रूप से अपनी राय देने को कहा। हम आपको बता दें कि विभिन्न समुदायों, विशेषकर कर्नाटक के दो प्रमुख समुदायों- वोक्कालिगा और वीरशैव-लिंगायत ने इस सर्वेक्षण पर कड़ी आपत्ति जताई है और इसे ‘‘अवैज्ञानिक’’ बताते हुए मांग की है कि इसे खारिज किया जाए तथा एक नया सर्वेक्षण कराया जाए। समाज के विभिन्न वर्गों द्वारा भी इस सर्वेक्षण पर आपत्ति जताई गई है तथा सत्तारुढ़ कांग्रेस के भीतर से भी इसके खिलाफ आवाजें उठ रही हैं। हालांकि, सभी वर्ग इसका विरोध नहीं कर रहे हैं। दलितों और ओबीसी का प्रतिनिधित्व करने वाले नेता और संगठन इसके समर्थन में हैं और चाहते हैं कि सरकार सर्वेक्षण रिपोर्ट को सार्वजनिक करे और इस पर आगे बढ़े।

प्रमुख खबरें

RCB के बिकने पर विजय माल्या का रिएक्शन, कहा-तब हंसे थे लोग, आज देखिए कीमत...

Ahmedabad में PM Morarji Desai को किया याद, Maganbhai Patel ने सुनाए राष्ट्रनिष्ठा के किस्से

कर्नाटक के CM सिद्धारमैया और पत्नी को High Court का समन, MUDA जमीन घोटाले की File फिर खुली

Women Reservation पर जल्दबाजी क्यों? Kharge का Kiren Rijiju को पत्र, चुनाव बाद हो All-Party Meeting