तुमसे न हो पाएगा...ट्रंप को किनारे कर Strait Of Hormuz को खोलने के लिए एक साथ उतर पड़े 35 देश!

By अभिनय आकाश | Apr 02, 2026

बीते एक महीने से चल रही ईरान जंग अब सुलझने के बजाय और उलझती जा रही है। एक तरफ अमेरिका अपनी शर्तों पर समझौता करना चाहता है तो दूसरी तरफ ईरान झुकने को तैयार नहीं है। इस खींचतान के बीच सबसे ज्यादा असर जिस जगह पर पड़ा है, वह स्टेट ऑफ हुर्मूज है। इस जगह को दुनिया की तेल सप्लाई की लाइफलाइन कहा जाता है। यहां हालात इतने तनावपूर्ण हो गए हैं कि कभी भी बड़ा टकराव हो सकता है और यही वजह है कि ग्लोबल मार्केट से लेकर आम लोगों तक सबकी नजर इसी रस्ते पर टिकी है। हालांकि होर्मोस्टेट में बढ़ते बवाल को देखते हुए इस हफ्ते ब्रिटेन की मेजबानी में करीब 35 देशों की एक बड़ी मीटिंग होने जा रही है। ऐसे माहौल में ब्रिटेन ने खुद को सीधे जंग से दूर रखते हुए एक अलग रास्ता चुना है। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री के स्टारमबर ने साफ कर दिया है कि उनका देश इस जंग में शामिल नहीं होगा। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वो हाथ पर हाथ धरे बैठे रहेंगे। बल्कि उन्होंने हॉर्मोज को दोबारा खोलने के लिए एक बड़ी पहल शुरू की है। 

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ब्रिटेन भी इस खतरे को समझ रहा है। ब्रिटेन पीएम ने साफ कहा कि इस जंग का असर ब्रिटेन के भविष्य पर पड़ सकता है। लेकिन उनकी प्राथमिकता अपने नागरिकों का हित है। उन्होंने यह भी कहा कि चाहे कितना भी दबाव क्यों ना हो ब्रिटेन इस जंग में नहीं कूदेगा। एक तरह से केस स्टारमर का यह जवाब ट्रंप के लिए था क्योंकि ट्रंप लगातार यूके, फ्रांस अपने नेटो सहयोगियों को इस जंग में शामिल होने के लिए दबाव डाल रहे हैं। हालांकि इस बीच ब्रिटेन ने भी अपना संदेश साफ तौर पर ट्रंप के लिए पहुंचा दिया है। कुल मिलाकर नेटो देशों ने अमेरिका का साथ देने से इंकार कर दिया है। अमेरिका चाहता है कि नेटो देश अपनी वॉरशिप भेजकर होमोस को खुलवाने में मदद करें। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इससे अमेरिका की रणनीति को झटका लगा है। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप लगातार सख्त रुख दिखा रहे हैं और ईरान पर दबाव बढ़ाने की बात भी कर रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट भी चेतावनी दे चुकी है कि यह जंग अब सीमित नहीं रही बल्कि पूरे वेस्ट एशिया के लिए एक बड़ा आर्थिक खतरा बन चुकी है। स्टेट ऑफ होमोस पर बढ़ते तनाव के बाद ही ब्रिटेन की मेजबानी में करीब 35 देशों की मीटिंग होने जा रही है। 

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इसके साथ ही ब्रिटिश प्रधानमंत्री केअर स्टार्मर ने साफ कहा कि ईरान के खिलाफ युद्ध में ब्रिटेन को ‘‘घसीटा नहीं जाएगा’’ और उन्होंने घोषणा की कि वे इस सप्ताह होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए सभी व्यवहार्य कूटनीतिक तथा राजनीतिक उपायों पर चर्चा करने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की मेजबानी करेंगे। स्टार्मर ने डाउनिंग स्ट्रीट में एक प्रेसवार्ता की और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नाटो पर की गई हालिया टिप्पणियों को एक तरह का हल्ला कहकर खारिज करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में युद्ध का प्रभाव ‘‘हमारे देश के भविष्य को प्रभावित करेगा’’, लेकिन उन्होंने इस बात पर जोर दिया यह तूफान कितना भी भयंकर क्यों न हो, हम इसका सामना करने के लिए अच्छी स्थिति में हैं।’’ इससे पहले राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा था कि ईरान से उनके युद्ध में सहयोगी देशों द्वारा शामिल न होने के बाद वह नाटों से अमेरिका के बाहर होने जैसे फैसले पर विचार कर रहे हैं।

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