By अनन्या मिश्रा | Oct 29, 2025
हाई कोलेस्ट्रॉल को साइलेंट किलर भी कहा जाता है। क्योंकि इसके शुरूआती लक्षण आसानी से समझ नहीं आते हैं। जब हमारे शरीर की नसों में बैड कोलेस्ट्रॉल यानी एलडीएल की मात्रा बढ़ती है तो नसों की दीवारों पर मोम जैसे पदार्थ की तरह चिपकने लगता है। इससे नसें संकरी और सख्त हो जाती हैं। इससे खून के फ्लो में रुकावट आती है और स्ट्रोक व हार्ट अटैक का खतरा कई गुना तक बढ़ जाता है। हालांकि दवाओं के अलावा हम अपनी लाइफस्टाइल में कुछ अच्छी आदतें शामिल कर जमे हुए बैड कोलेस्ट्रॉल को प्राकृतिक रूप से कम करने या फिर पिघलाने में सहायता कर सकती हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको कुछ ऐसा आसान बदलावों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनको अपनी दिनचर्या में शामिल करके आप अपने दिल की सेहत को बेहतर बना सकते हैं।
एक गतिहीन लाइफस्टाइल भी बैड कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाती है। ऐसे में अगर आप नियमित रूप से व्यायाम करते हैं, तो यह न सिर्फ वेट को कंट्रोल में रखता है, बल्कि यह गुड कोलेस्ट्रॉल यानी की एचडीएल को भी बढ़ाने में सहायता करता है। गुड कोलेस्ट्रॉल नसों में जमे बैड कोलेस्ट्रॉल लिवर कर लेकर जाता है। जहां से वह शरीर से बाहर निकल जाता है। सप्ताह में कम से कम 5 दिन 30 से 40 मिनट तक तेज चलने, साइकिलिंग करने या जॉगिंग करने जैसी एक्सरसाइज जरूर करनी चाहिए।
आप अपनी डाइट से सैचुरेटेड फैट और ट्रांस फैट को हटा दें। जोकि अक्सर तले हुए खाने, पैकेट वाले स्नैक्स और जंक फूड में पाया जाता है। इसकी बजाय आप हेल्दी स्नैक्स जैसे अखरोट, बादाम, जैतून का तेल और अलसी के बीज आदि को शामिल कर सकते हैं। वहीं धूम्रपान, स्मोकिंग और शराब का सेवन करने वाले लोगों में कोलेस्ट्रॉल का लेवल बिगड़ता रहता है।
बता दें कि यदि आपका तनाव लगातार बना है तो भी यह अप्रत्यक्ष रूप से कोलेस्ट्रॉल को बढ़ा सकता है। क्योंकि यह हमारे खाने-पीने की आदतों को प्रभावित करता है। इसलिए तनाव कम करने के लिए योग और ध्यान करें। वहीं रोजाना 7-8 घंटे की गहरी और अच्छी नींद लें। अच्छी नींद लेने से शरीर खुद को सुधारने के साथ मेटाबॉलिज्म को भी दुरुस्त रखता है। जिससे कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करने में आसानी होती है।