By दिव्यांशी भदौरिया | Apr 25, 2026
चारधाम की यात्रा शुरु हो चुकी है। बद्रीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल 2026 को खुल चुके हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, बद्रीनाथ के दर्शन करने से व्यक्ति जन्म मरण के चक्र से मुक्त हो जाता है। ऐसे में बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलते ही यहां लाखों की संख्या में भक्त दर्शन के लिए आते हैं।
भविष्य बद्री
बद्रीनाथ धाम के दर्शन करने के बारे में प्लान बना रहे हैं, तो आप यहां मौजूद भविष्य बद्री के दर्शन करने जरुर जाएं। इसे भविष्य का बद्रीनाथ भी कहा जाता है, जो जोशीमठ से थोड़ी दूरी पर स्थित है। इसके पीछे धार्मिक मान्यता है कि जब कलयुग अपने चरम पर होगा, तो नर और नारायण पर्वत आपस में मिल जाएंगे। जिसके बाद बद्रीनाथ पहुंचना संभव नहीं होगा। तब भविष्य बद्री में ही बद्रीनाथ विराजमान रहेंगे।
श्री वेद व्यास गुफा
मान्यता है कि महर्षि व्यास ने इसी गुफा में तपस्या करते हुए चारों वेदों और गीता का संकलन किया था, इसी वजह से इसका नाम व्यास गुफा पड़ा। कहा जाता है कि यह गुफा लगभग 5 हजार साल पुरानी और अत्यंत पवित्र मानी जाती है। इसकी छत की बनावट ऐसी है, जैसे किसी किताब के पन्ने एक के ऊपर एक रखे हों। इसी कारण इसे ‘व्यास पुस्तक’ के नाम से भी पुकारा जाता है। लोककथाओं के अनुसार, समय के साथ यह दिव्य पुस्तक पत्थर का रूप ले चुकी है।
भीम पुल
बद्रीनाथ मंदिर जाने के साथ-साथ आप भीम पुल के दर्शन भी कर सकते हैं। यह माना गांव के पास सरस्वती नदी के झरने पर स्थित है। धार्मिक मान्यताओं और प्राचीन कथाओं के अनुसार, महाभारत काल में जब पांडव द्रौपदी के साथ स्वर्ग की यात्रा पर निकले थे, तब उनके मार्ग में यह नदी आई थी। उस समय भीम ने द्रौपदी को पार कराने के लिए एक बड़ा पत्थर उठाकर नदी पर रख दिया, जिससे रास्ता आसान हो गया। ऐसा भी कहा जाता है कि नदी के किनारे जो लगभग 20 फीट लंबे पदचिह्न नजर आते हैं, उन्हें भीम के पैरों के निशान माना जाता है।
वसुधारा झरना
बद्रीनाथ से लगभग 8 किलोमीटर की दूरी पर यह पवित्र स्थित है। वसुधारा को बहुत ही पवित्र स्थान माना जाता है। वसुधारा झरने का पानी करीब 400 फीट की ऊंचाई से नीचे गिरता है। कहा जाता है कि इसकी धारा खूबसूरत मोतियों जैसी है जो स्वर्ग में होने का अहसास कराती है। मान्यता है कि जिस व्यक्ति पर पाप का बोझ होता है, उस पर इस झरने की एक भी बूंद नहीं गिरती। स्थानीय लोगों के अनुसार, केवल वही व्यक्ति इसकी बूंदों को महसूस कर पाता है, जिसका मन और कर्म शुद्ध होते हैं।
तप्त कुंड
बद्रीनाथ मंदिर के पास अलकनंदा नदी के पवित्र तट पर एक प्राकृतिक गर्म पानी का कुंड मौजूद है। श्रद्धालु बद्रीनाथ धाम के दर्शन करने से पहले इस कुंड में स्नान करने जरुर आते हैं। माना जाता है कि इस पवित्र कुंड में स्नान करने का खास महत्व बताया जाता है और इसके साथ पानी को औषधीय गुणों से भरपूर माने जाते हैं, जिसमें स्नान करने से हेल्थ संबंधित समस्याएं दूर हो जाती है।