By अभिनय आकाश | Oct 24, 2026
मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) एक बार फिर बारूद के ढेर पर बैठा नजर आ रहा है। अमेरिकी नौसेना के दो एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप पहले से ही इलाके में तैनात हैं और तीसरा भी रास्ते में है। दूसरी तरफ, भारत और अमेरिका ने ताजा ट्रैवल एडवाइजरी जारी कर दी है, जबकि इजरायल द्वारा ईरानी सीमा के पास सैन्य उड़ानें भरने की खबरें हैं। बीते कुछ हफ्तों के घटनाक्रम साफ इशारा कर रहे हैं कि अमेरिका और इजरायल, ईरान पर फिर से बड़े हवाई हमलों की तैयारी में हैं और इस बार यह प्रहार पहले से कहीं ज्यादा घातक हो सकता है। बातचीत के रास्ते बंद हैं और दोनों ओर से तीखी चेतावनियों का दौर जारी है। ऐसे में खाड़ी क्षेत्र में किसी भी वक्त एक नया सैन्य टकराव भड़क सकता है। रक्षा और कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि अमेरिका और इजरायल में अगले दो हफ्तों के भीतर होने वाले चुनाव इस हमले के समय (टाइमिंग) को तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। इजरायल में बेंजामिन नेतन्याहू 27 अक्टूबर को अपने राजनीतिक जीवन की सबसे कठिन चुनावी चुनौती का सामना कर रहे हैं। वहीं, अमेरिका में होने वाले मध्यावधि (मिडटर्म) चुनाव यह तय करेंगे कि संसद (कांग्रेस) पर किसका नियंत्रण होगा। ऐसे माहौल में आइए नजर डालते हैं उन 5 बड़े संकेतों पर, जो इशारा कर रहे हैं कि मिडिल ईस्ट बहुत जल्द एक बड़े सैन्य टकराव का गवाह बन सकता है।
CNN की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान पूरे देश में सैन्य अभ्यास कर रहा है। इसमें एक साथ 30 बैलिस्टिक मिसाइलों का प्रक्षेपण भी शामिल है। तेहरान से आ रही खबरों से संकेत मिलता है कि वहां के कमांडर फिर से शुरू होने वाले संभावित संघर्ष की तैयारी कर रहे हैं। इस हफ्ते की शुरुआत में जवाबी कार्रवाई के तौर पर IRGC ने एक नए हथियार सभी बमों का पिता (फादर ऑफ ऑल बॉम्ब्स) का प्रदर्शन किया। IRGC के प्रवक्ता होसैन मोहाबी ने स्थानीय मीडिया को बताया, दुश्मन के लिए यह कुछ नया है। IRGC ने यह भी धमकी दी है कि अगर सैन्य तनाव बढ़ता है, तो वे अपनी नई लंबी दूरी की मिसाइलों का इस्तेमाल करेंगे। विश्लेषकों का मानना है कि ये मिसाइलें ब्रिटेन में मौजूद अमेरिकी एयरबेस या जर्मनी के रामस्टीन स्थित लॉजिस्टिक्स हब तक पहुंच सकती हैं। रामस्टीन, अमेरिका के बाहर स्थित सबसे बड़ा अमेरिकी सैन्य ठिकाना है। इस महीने की शुरुआत में अमेरिका ने ब्रिटेन में तैनात अपने सभी लंबी दूरी के बॉम्बर विमानों को वापस उनके घरेलू बेस पर बुला लिया था। ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसेन रेज़ाई ने कहा है कि इस बार कोई रेड लाइन नहीं होगी। रेज़ाई ने चेतावनी दी है कि खाड़ी क्षेत्र में तेल सुविधाओं, समुद्र के नीचे बिछी केबलों, डेटा सेंटरों और AI सुविधाओं को निशाना बनाया जा सकता है।
एक और अहम संकेत जो संघर्ष के फिर से शुरू होने की संभावना की ओर इशारा करता है, वह है मध्य पूर्व में अमेरिकी राजनयिक मिशनों द्वारा अमेरिकी नागरिकों के लिए जारी की गई नई सुरक्षा चेतावनियाँ। सऊदी अरब, बहरीन, कतर और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में अमेरिकी दूतावासों ने चेतावनी जारी की है कि हालात तेजी से और बिना किसी पूर्व सूचना के बिगड़ सकते हैं। इन परामर्शों में अमेरिकियों से कहा गया है कि वे उड़ानों के रद्द होने और हवाई क्षेत्र (एयरस्पेस) के बंद होने की स्थिति के लिए तैयार रहें। सऊदी अरब में ईरान समर्थित हूती हमलों ने तनाव को और बढ़ा दिया है, जिससे इस संघर्ष में एक नया मोर्चा खुल गया है। 21 अक्टूबर को अमेरिकी विदेश विभाग ने सऊदी अरब में मौजूद अपने मिशनों से कुछ राजनयिकों और उनके परिवार के सदस्यों को वापस जाने का आदेश दिया। इस क्षेत्र में मौजूद अन्य अमेरिकी मिशनों से भी परिवारों को वापस बुलाने की योजना बनाई जा रही है। इसी तरह के व्यापक परामर्श मार्च में भी जारी किए गए थे, जब अमेरिका-इजरायल हमलों के जवाब में तेहरान ने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों पर हमले किए थे।
संघर्ष के पिछले दौरों में, भारत अक्सर सुरक्षा एडवाइजरी जारी करने वाले पहले देशों में से एक रहा है; कई बार तो लड़ाई शुरू होने से पहले ही एडवाइजरी जारी कर दी गई। इस हफ्ते की शुरुआत में भी ऐसी ही एक एडवाइजरी जारी की गई, जिसमें भारत ने सऊदी अरब में मौजूद अपने नागरिकों से "पूरी सावधानी" बरतने को कहा और हवाई हमलों को लेकर चेतावनी दी। यह एडवाइजरी रियाद के किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हूती विद्रोहियों के मिसाइल हमले के बाद जारी की गई, जिसमें एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए। इसके अलावा, सभी भारतीय एयरलाइनों ने 31 अक्टूबर तक सऊदी अरब के लिए अपनी उड़ानें रद्द कर दी हैं, और कुछ ने तो 30 नवंबर तक के लिए रद्द कर दी हैं। मक्का और मदीना में फंसे लगभग 4,000 भारतीय तीर्थयात्रियों को भी वहां से वापस लाया जा रहा है।
इस बीच, इजरायल चुप नहीं बैठा है। एक्सियोस की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस हफ्ते की शुरुआत में इजरायल के दर्जनों लड़ाकू विमानों ने ईरानी सीमा के पास उड़ानें भरीं। यह घटनाक्रम अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ और प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच हुई एक गुप्त मुलाकात के समय ही हुआ। रिपोर्ट में बताया गया है कि इजरायल के इस अभ्यास में दर्जनों लड़ाकू विमान और ईंधन भरने वाले विमान शामिल थे। इन विमानों का उड़ान मार्ग ऐसा था, जिससे ईरान पर संभावित हमले का संकेत मिलता है; ये विमान सीरिया और इराक के हवाई क्षेत्र से होकर गुजरे। एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारियों ने बताया कि अमेरिका को इन उड़ानों की जानकारी थी। इजरायल ने इसे एक 'प्रशिक्षण अभ्यास' बताया है, जिसका मकसद अपनी 'ताकत का प्रदर्शन' करना था।