'विश्वास प्रोजेक्ट' का प्रथम चरण पूर्ण, राज्य भर में 7,000 सीसीटीवी कैमरा स्थापित

By प्रेस विज्ञप्ति | Jul 02, 2022

नई दिल्ली। ट्रैफ़िक मैनेजमेंट एण्ड सिक्योरिटी (यातायात नियमन तथा सुरक्षा) के लिए वर्ष 2020 में राज्य भर में सीसीटीवी (क्लोज़्ड-सर्किट टेलीविज़न) कैमरा स्थापित करने के ‘विश्वास प्रोजेक्ट’ के प्रथम चरण का शुभारंभ हुआ था और 1 मई, 2022 की स्थिति के अनुसार समग्र राज्य में 7 हज़ार सीसीटीवी कैमरा स्थापित कर प्रथम चरण पूर्ण कर लिया गया है। अब राज्य सरकार इस प्रोजेक्ट के द्वितीय चरण की तैयारी कर रही है, जिसमें इसकी व्यापकता छोटे शहरों में विस्तृत की जाएगी। दूसरे चरण में टियर-3 श्रेणी के 51 शहरों में 10 हज़ार से अधिक सीसीटीवी कैमरा स्थापित किए जाएँगे। इसके लिए टेंडरिंग (निविदा) सहित सभी प्रक्रियाएँ शुरू कर दी गई हैं और वर्ष 2023 के अंत तक यह कार्य पूर्ण कर दिया जाएगा।

‘विश्वास प्रोजेक्ट’ का मुख्य उद्देश्य सार्वजनिक स्थलों पर सुरक्षा निगरानी, ट्रैफ़िक नियमन तथा नियंत्रण, घटना के बाद की वीडियो फ़ॉरेंसिक तथा जाँच और सड़क सुरक्षा एवं शहरी गतिशीलता है। सीसीटीवी कैमरा के दृश्यों की मॉनिटरिंग ज़िला कमाण्ड एण्ड कंट्रोल सेंटर में होती है, जिसे ‘नेत्रम्’ कहा जाता है। ‘

विश्वास’ की सफलता

सीसीटीवी कैमरा द्वारा इस प्रकार की व्यवस्था किए जाने के कारण वर्ष 2018 से 2021 के दौरान सड़क दुर्घटनाओं में 19.09 प्रतिशत की कमी आई है। जहाँ तक ट्रैफ़िक नियमन का सवाल है, तो 13 जून, 2022 की स्थिति के अनुसार 55,20,80,100 रुपए मूल्य के 15,32,253 ई-मेमो जारी किए गए। ई-चालान की प्रक्रिया को पेमेंट पोर्टल तथा मोबाइल ऐप्लिकेशन की सहायता से पूरी तरह पारदर्शी एवं सरल बनाया गया है। सीसीटीवी सर्वेलांस तथा चालान प्रणाली के कारण रोड बिहेवियर में भी बदलाव देखने को मिला है। बॉडी वॉर्न कैमरा तथा ड्रोन के कारण सीमित पुलिस बल के बावजूद बड़े पैमाने पर कार्य करना संभव हुआ है। इसके कारण भी कामकाज में पारदर्शिता आई है।

टेक्नोलॉजी से लैस

सीसीटीवी सर्वेलांस में ‘विश्वास प्रोजेक्ट’ के अंतर्गत हाल में इंटेलिजेंट ट्रैफ़िक मैनेजमेंट सॉफ़्टवेयर है, जिसमें ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन, रेड लाइट वायलेशन डिटेक्शन, चोरी गए वाहनों की अलर्ट प्रणाली है। इसके द्वारा अवैध पार्किंग, बाधक/अवरोधक पदार्थों की पहचान, भीड़ की पहचान, लोगों की गणना, कैमरा के साथ छेड़छाड़ आदि सरलता से पहचानी जा सकती है। प्रोजेक्ट के अंतर्गत अब तक कुल 10 हज़ार बॉडी वॉर्न कैमरा दिए गए हैं, जबकि 15 ड्रोन कैमरा हैं।

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जहाँ तक डिजिटल तथा इनफ़ॉर्मेशन टेक्नोलॉजी के उपयोग से सुशासन की बात है, तो गुजरात ने समग्र देश में अभूतपूर्व कार्य किया है। हाल में सरकार की महत्वपूर्ण सेवाएँ ऑनलाइन उपलब्ध हैं और इनके द्वारा राज्य के नागरिकों का कामकाज सरल हुआ है तथा उनके समय की भी बचत हो रही है।

हाल ही में मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल ने राजकोट में एक कार्यक्रम में कहा था, “सरकार सुशासन के लिए प्रतिबद्ध है और आगामी दिवसों में 200 प्रकार की ऑनलाइन सेवाएँ गाँवों तक पहुँचाने की दिशा में कार्य हो रहा है। अंतिम छोर के मानव तक सुख-सुविधाओं का पहुँचना आवश्यक है और अटल बिहारी वाजपेयीजी भी कहते थे कि ग्रामीण क्षेत्र सुखी व समृद्ध होंगे, तो अंतत: देश सुखी व समृद्ध होगा।”

इस प्रोजेक्ट के विषय में गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव राज कुमार ने कहा, “राज्य में क़ानून-व्यवस्था की स्थिति मज़बूत करने, अपराधों के डिटेक्शन तथा ट्रैफ़िक मैनेजमेंट के लिए ‘विश्वास प्रोजेक्ट’ अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्ध हुआ है। सरकार ने उचित प्लानिंग के साथ रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्थानों पर सीसीटीवी कैमरा लगा कर सुरक्षा की दृष्टि से मज़बूत कार्य किया है। आगामी दिवसों में ‘विश्वास प्रोजेक्ट’ का दायरा छोटे शहरों तक बढ़ाया जा रहा है, जिससे लोगों को और अधिक सुरक्षा एवं सुविधा मिलेगी।”

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