भारत-चीन के बीच 8वीं उच्चस्तरीय आर्थिक वार्ता हुई

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Aug 19, 2016

बीजिंग। भारत और चीन के बीच आज आपसी व्यापार एवं आर्थिक सहयोग की मजबूती के लिये आठवीं उच्चस्तरीय वित्तीय एवं आर्थिक वार्ता हुई। दुनिया की इन दोनों तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं ने अधिक जवाबदेह वृहद आर्थिक नीतियों को अपनाने के लिए और अधिक एकजुटता पर जोर दिया। दोनों देशों के बीच हुई इस वार्षिक वार्ता में आर्थिक मामलों के सचिव शक्तिकांत दास की अगुवाई में रिजर्व बैंक और वित्त मंत्रालय के अधिकारी शामिल हुए। चीन के प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई उसके वित्त उपमंत्री शी याओबिन ने की।

शी ने बैठक में अपने शुरुआती संबोधन में कहा, ‘‘भारत घरेलू बाजार का एकीकरण करने, विनिर्माण क्षेत्र को रफ्तार देने तथा अधिक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) आकर्षित करने के लिए काफी प्रयास कर रहा है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हमें यह सुनकर खुशी हुई है कि अगस्त के शुरू में भारत ने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। इस तरह की पृष्ठभूमि में हमें एक-दूसरे से अधिक सीखने की जरूरत है जिससे वृहद आर्थिक नीतियों पर समन्वय स्थापित हो सके, अधिक चुनौतियों का सामना किया जा सके और आपसी विकास के लिए अधिक उत्प्रेरक बनाए जा सकें।’’ इस वार्ता व्यवस्था का मकसद दोनों देशों के बीच वृहद आर्थिक स्थिति पर विचारों तथा स्थिति रिपोर्ट का आदान प्रदान करना है। इसमें दोनों देशों के अधिकारी अपनी आर्थिक और राजकोषीय नीतियों के बारे में एक-दूसरे को अवगत कराते हैं और बुनियादी सुधारों और द्विपक्षीय निवेश के प्रवाह तथा आर्थिक सहयोग पर विचार करते हैं।

इस साल यह वार्ता चीन के हांगझाउ शहर में होने वाले जी-20 शिखर सम्मेलन से पहले हुई है। इसके बाद अक्तूबर में गोवा में ब्रिक्स (ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका) शिखर सम्मेलन होना है। यह सम्मेलन मुख्य रूप से वैश्विक आर्थिक सुस्ती तथा वृद्धि को प्रोत्साहन के उपायों पर केंद्रित रहेगा। दास ने अपने संबोधन में कहा कि भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय संबंधों में हाल में चौतरफा प्रगति देखने को मिली है। उन्होंने कहा, ‘‘यह उल्लेखनीय घटनाक्रम है, जो दोनों देशों के द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों के बीच प्राथमिकता को दर्शाता है।’’ उन्होंने कहा कि आज की वार्ता में भारतीय पक्ष ने दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश प्रवाह के मामले में सहयोग को बढ़ाने के उपायों का उल्लेख किया गया। इसके अलावा आर्थिक विकास में भारत और चीन की कंपनियों की भागीदारी के अलावा बुनियादी सुधारों तथा बहुपक्षीय मंचों मसलन जी-20 और ब्रिक्स में दोनों देशों के बीच सहयोग के मसले पर चर्चा होगी। दास ने कहा कि जी-20 और ब्रिक्स जैसे संस्थान आज वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने वाले महत्वपूर्ण मुद्दों पर वैश्विक और क्षेत्रीय सहमति बनाने में अधिक महत्वपूर्ण भूमिका में उभरे हैं।

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