Trump का बड़ा दावा: US Navy ने डुबोए Iran के 46 जंगी जहाज, War को लेकर बदला स्टैंड

By Ankit Jaiswal | Mar 10, 2026

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक नया बयान सामने आया है, जिसमें उन्होंने दावा किया है कि अमेरिकी नौसेना ने अब तक ईरान के कई अत्याधुनिक युद्धपोतों को समुद्र में डुबो दिया।

मौजूद जानकारी के अनुसार ट्रंप ने वॉशिंगटन में सत्तारूढ़ दल के सांसदों के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि अमेरिकी नौसेना ने ईरान के लगभग छियालिस आधुनिक नौसैनिक जहाजों को नष्ट कर दिया।

बता दें कि अपने संबोधन के दौरान ट्रंप ने एक सैन्य अधिकारी के साथ हुई बातचीत का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि उन्होंने अधिकारी से पूछा था कि क्या ईरानी जहाजों को डुबाने के बजाय कब्जे में लेकर इस्तेमाल किया जा सकता है। इस पर अधिकारी ने मजाकिया अंदाज में जवाब दिया कि उन्हें डुबोना ज्यादा मजेदार है।

गौरतलब है कि ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब उन्होंने इसी दिन युद्ध को लेकर दो अलग-अलग तरह के संकेत दिए।

मौजूद जानकारी के अनुसार दिन में एक अमेरिकी समाचार माध्यम से बातचीत में ट्रंप ने कहा था कि युद्ध लगभग खत्म होने की स्थिति में पहुंच गया है और अमेरिका इस संघर्ष में अपेक्षा से कहीं आगे निकल चुका है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान की नौसेना, संचार व्यवस्था और वायु शक्ति काफी हद तक कमजोर हो चुकी है।

हालांकि कुछ ही घंटों बाद एक अन्य कार्यक्रम में ट्रंप का रुख बदला हुआ नजर आया। वहां उन्होंने कहा कि अमेरिका ने अभी पर्याप्त जीत हासिल नहीं की है और युद्ध तब तक जारी रहेगा जब तक ईरान को पूरी तरह निर्णायक रूप से पराजित नहीं कर दिया जाता।

ट्रंप के इस बयान पर ईरान की ओर से भी तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। ईरान की क्रांतिकारी गार्ड ने कहा है कि युद्ध कब और कैसे खत्म होगा इसका फैसला ईरान खुद करेगा।

गौरतलब है कि ईरान की इस सैन्य इकाई ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका और इजरायल के हमले जारी रहते हैं तो क्षेत्र से एक बूंद तेल भी बाहर नहीं जाने दिया जाएगा। मौजूद जानकारी के अनुसार इस संघर्ष का असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ने लगा है। फारस की खाड़ी के पास स्थित होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाला समुद्री मार्ग इस समय लगभग ठप पड़ा है।

यह वही समुद्री रास्ता है जिससे दुनिया का बड़ा हिस्सा कच्चा तेल और तरलीकृत गैस प्राप्त करता है। पिछले एक सप्ताह से अधिक समय से कई तेल टैंकर इस मार्ग से गुजर नहीं पा रहे हैं, जिसके कारण कुछ उत्पादक देशों को तेल उत्पादन भी रोकना पड़ा है क्योंकि भंडारण क्षमता भर चुकी है।

बता दें कि अमेरिका और इजरायल ने अट्ठाईस फरवरी को ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू की थी। इसके जवाब में ईरान ने भी इजरायल और खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर हमले किए हैं।

गौरतलब है कि इस संघर्ष में अमेरिका और इजरायल के उद्देश्य भी अलग बताए जा रहे हैं। इजरायल जहां ईरान की धार्मिक सत्ता व्यवस्था को बदलने की बात कर रहा है, वहीं अमेरिका का मुख्य लक्ष्य ईरान की मिसाइल क्षमता और परमाणु कार्यक्रम को खत्म करना बताया जा रहा है।

मौजूद जानकारी के अनुसार ट्रंप पहले भी यह कह चुके हैं कि यदि ईरान में अमेरिका के अनुकूल सरकार बन जाती है तो युद्ध जल्द समाप्त हो सकता है। इस बीच विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष लंबा खिंचता है तो इसका असर केवल पश्चिम एशिया ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति और अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।

प्रमुख खबरें

Indigo Crisis: फ्लाइट संकट के बाद CEO Pieter Elbers का इस्तीफा, Rahul Bhatia संभालेंगे कमान

West Asia War का असर: भारत में Gas Supply पर सरकार का बड़ा फैसला, नई Priority List लागू।

Iran में Khamenei की मौत के बाद सत्ता बेटे को, घायल Supreme Leader मोजतबा के सामने US-Israel की चुनौती

West Bengal Voter List: Supreme Court की सख्त चेतावनी, Judicial Officers पर उंगली उठाने की कोशिश न करें