विधानसभा चुनाव परिणाम: स्पष्ट जनादेश, नई सरकारों की होगी कड़ी अग्निपरीक्षा

By मृत्युंजय दीक्षित | May 08, 2026

पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव परिणाम आ चुके हैं। नई सरकारों के गठन की प्रक्रिया आरम्भ हो चुकी है। बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और पुद्दुचेरी के ये विधानसभा चुनाव परिणाम कई स्पष्ट संकेत देने वाले हैं। बंगाल, असम, और पुद्दुचेरी ने जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाले भाजपा व राजग गठबंध को दो तिहाई बहुमत के साथ चुना वहीं तमिलनाडु और केरल में भी सत्ता बदल गई। बंगाल, असम और पुद्दुचेरी में विकास, कल्याणकारी योजनाओं व हिंदुत्व का कमाल रहा। असम में कल्याणकारी योजनाओं के सहारे भाजपा जहां महिलाओं और युवाओं को साधने में सफल रही वहीं मुख्यंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने बांग्लादेशी घुसपैठ के खिलाफ मुहिम छेड़कर नस्ल, क्षेत्र और भाषा में बनते हिंदुओं को एकजुट करने में अहम भूमिका निभाई। असम और बंगाल की जनता को भाजपा यह भरोसा दिलाने में सफल रही कि केवल भाजपा ही बांग्लादेशी घुसपैठ की समस्या से मुक्ति दिला सकती है। 

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तमिलनाडु में थलपति विजय की सरकार- तमिलनाडु की जनता द्रविड़ राजनीति से हताश और निराश हो चुकी थी। कभी द्रमुक और कभी अन्ना द्रमुक राज्य इनके बीच में झूलता रहता था। तमिल राजनीति में फिल्मी कलाकारों की अहम भूमिका रही है एम. जी. रामचंद्रन से लेकर करुणानिधि और जयललिता जैसे सितारों ने वहां की राजनीति में अहम भूमिका निभाई और लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे।

तमिलनाडु में एक्टर थलपति विजय की इतनी प्रचंड लहर चली कि मुख्यमंत्री स्टालिन अपनी सीट तक हार गए। इस लहर का आभास किसी भी राजनैतिक विश्लेषक को नही था। एक्टर थलपति विजय की विजय में मुख्य भूमिका उनके चुनावी वायदों ने की है जो अधिकांशतः मुफ्त की रेवड़ी वाले हैं। विवाह के लिए महिलाओं को 22 कैरेट का आठ ग्राम सोना देने से लेकर 60 सल से कम आयु की महिलाओं को 2500 रुपए मासिक सहायता प्रति परिवार छह फ्री सिलेंडर देने का वादा काम कर गया। गरीब दुल्हनों के लिए रेशमी साड़ी और महिलाओं द्वारा संचालित स्वयं सहायता समूहों  के लिए पांच लाख रुपए तक के बयाज मुक्त ऋण का आश्वासन भी विजय ने दिया है। थलपति विजय ने वैसे ही कई लेाक लुभावन वायदे किये है जैसे कभी आप नेता अरविंद केजरीवाल किया करते थे। यह थलपति विजय तमिलनाडु के केजरीवाल सिद्ध हो सकते हैं। 

ईसाई पिता ओर हिंदू मां की संतान विजय ने अपनी पार्टी की विचारधारा तैयार करने में द्रविड़ विचारधारा और तमिल राष्ट्रवाद के तत्वों को जोड़ा है। इनकी पार्टी तमिलगा वेटी कझागम की स्थापना फरवरी 2024 में हुई, जो  तमिलनाडु और पुद्दुचेरी तक फैली हुई है। लोग सेाच रहे हैं कि विजय की आखिर इतनी बड़ी विजय कैसे हो गई– विजय लम्बे समय से कई घरों  के चूल्हों  के ईंधन, बेटियों की पढ़ाई ओर बहनों  की शादी का खर्च लगातार उठा रहे थे। उनके वोटबैक में सबसे बड़ी हिस्सेदारी महिलाओं और युवाओं की रही है। वह अपनी फिल्मों में गरीबों के मसीहा के तौर पर पेश किए जाते थे जिसका परिणाम अब सबके सामने है। विजय की  चुनावी जनसभाओं  में अभूवपूर्व भीड़ उमड़ रही थी किंतु कोई राजनैतिक विश्लेषक यह मानकर नहीं चल रहा था कि वह सरकार बनाने तक पहुंच जाएंगे।

तमिलनाडु में यदि कोई सबसे बड़ा परजीवी दल साबित हुआ है तो वह कांग्रेस है क्य उसने हर बार की तरह अपना अस्तित्व बचाये रखने के लिए एक और क्षेत्रीय दल की सरकार में गठबंधन के बहाने सेंधमारी कर ली है। जो दल कांग्रेस के साथ गए व कांग्रेस जिन दलों के साथ गई उन दलों का क्या हाल हो रहा है सभी को पता है। वैसे अभी थलपति विजय का शपथ ग्रहण समारोह भी ग्रहण ग्रस्त लग रहा है। 

– मृत्युंजय दीक्षित 

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