कार्यवाहक मुख्य न्यायधीश रवि मलिमठ को दी गई गरिमापूर्ण विदाई

By विजयेन्दर शर्मा | Oct 11, 2021

शिमला। हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायधीश न्यायमूर्ति रवि मलिमठ को आज गरिमापूर्ण विदाई दी गई। उनका पदोन्नयन मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायधीश के रूप में हुआ है।

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इस अवसर पर न्यायमूर्ति रवि मलिमठ ने कहा कि उन्होंने पूरा प्रयास किया वादियों को उचित और त्वरित न्याय मिले। एक न्यायाधीश के लिए केवल न्याय की गुणवत्ता और गति सर्वोपरि होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि न्यायिक या प्रशासनिक स्तर पर जो भी निर्णय लिए जाते हैं वे निष्पक्ष, न्यायसंगत और उचित होने चाहिए। उन्होंने कहा कि अक्षमता और निष्ठाहीनता के प्रति उनकी जीरो टोलरेंस  है। उन्होंने कहा कि इस न्यायालय मंे 105 दिनों के दौरान उनकी पीठ ने 1511 मामलों का निपटारा किया। उन्होंने हिमाचल प्रदेश के न्यायालयों के लिए कई योजनाओं की परिकल्पना की और इस दिशा में कई प्रगतिशील कदम उठाए गए हैं।

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उन्होंने कहा कि बार के सदस्यों की सहायता के लिए कार्यालय से संबंधित आपत्तियों को दूर करने की समयावधि को 20 दिनों से बढ़ाकर 6 सप्ताह कर दिया गया है। हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय को जिला न्यायपालिका में सभी वर्गोंे के न्यायधीशों की भर्ती करने की शक्ति प्रदान करने के लिए हिमाचल प्रदेश न्यायिक सेवा नियम, 2004 में संशोधन किया गया है। प्रत्येक जिले के लिए प्रशासनिक न्यायधीशों के अलावा प्रत्येक जिले के लिए गार्डियन न्यायाधीशों की नई अवधारणा को तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश न केवल अपनी प्राकृतिक सुन्दरता के कारण बल्कि यहां के लोगों के व्यवहार के कारण भी एक सुन्दर प्रदेश है।

इस अवसर पर उन्होंने न्यायधीशों, बार के सदस्यों, न्यायिक अधिकारियों और रजिस्ट्री के अधिकारियों व कर्मचारियों के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।न्यायमूर्ति रवि मलीमठ ने हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में 07 जनवरी, 2021 को शपथ ली थी। वह 25 फरवरी, 2021 को हिमाचल प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किए गए और एक जुलाई, 2021 को उन्होंने मुख्य न्यायाधीश (कार्यवाहक) का पदभार संभाला।

फुल कोर्ट रेफरेंस के बाद न्यायमूर्ति रवि मलिमठ को गार्ड आॅफ आॅनर दिया गया। इस अवसर पर न्यायमूर्ति सबीना ने कहा कि न्यायमूर्ति रवि मलिमठ का जन्म 25 मई, 1962 में कर्नाटक के एक सम्मानित परिवार में हुआ। इनके दादा दिवंगत न्यायमूर्ति एस.एस मलिमठ एक स्वतंत्रता सेनानी थे और कर्नाटक के एकीकरण के संघर्ष में बढ़-चढ़कर भाग लिया। इनके पिता स्वर्गीय डाॅ. न्यायमूर्ति वी.एस. मलिमठ की पहचान अब तक के बेहतरीन मुख्य न्यायाधीशों में होती है। वह कर्नाटक और केरल उच्च न्यायालय के प्रसिद्ध मुख्य न्यायधीश थे।

महाधिवक्ता अशोक शर्मा, हिमाचल प्रदेश बार काउंसिल के अध्यक्ष अजय कोचर, प्रदेश उच्च न्यायलय बार एसोसिएशन के अध्यक्ष लवनीश कंवर और भारत के सहायक साॅलिसिटर जनरल बलराम शर्मा ने भी इस अवसर पर अपने विचार रखे।

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