एक फुटबॉल ही तो है ज़िंदगी (व्यंग्य)

By संतोष उत्सुक | Sep 20, 2022

फुटबाल के कर्णधारों को लगने लगे कि फुटबाल की किस्मत हिलने डुलने लगी है तो वे ज्योतिष के द्वारे ही जाएंगे क्युंकि डाक्टर इस रोग के मामले में कुछ कर नहीं सकेगा। ज्योतिषी के कुछ सुझाने के बाद ही वे मैदान का रुख करेंगे। देखा जाए तो ज्योतिष भी तो किस्मत को फुटबाल बनाने लगती है। यह हम पर निर्भर करता है कि हम उसे बास्कटबॉल समझें या गोल्फ का छोटा मगर खोटा बॉल। अनुभवी ज्योतिषी को पता होता है कि यजमान की शक्ल, अक्ल और ज़रूरत के मुताबिक कैसे खेलना है। यजमान अपने हिसाब से फेल या पास होता है। एक गीत भी तो है, ‘ज़िंदगी है खेल, कोई पास कोई फेल, अनाड़ी है कोई, खिलाड़ी है कोई’।

इंसानी रिश्ते डिमांड एंड सप्लाई के फार्मूले पर टिकने लगे हैं। हर कोई ख़ास शैली में इनका प्रबंधन करता है। ज्योतिष की मदद इसलिए लेता है कि किए जाने वाले कार्य सांसारिक, आर्थिक यानी व्यवसायिक रूप से सफल रहें। यह कोई नैतिक, आध्यात्मिक या धार्मिक कार्य नहीं है। जिस तरह व्यक्ति भजन गाकर, सुनकर, ईष्ट की पूजा कर या कराकर उत्साहित होता है। ग़ज़ल या मनपसंद संगीत सुनकर, बागवानी कर रिलेक्स होता है। उसी तरह उचित ज्योतिषी भी प्रेरित करता है। मनोवैज्ञानिक शैली में इंसान के विचारों, सवालों और जवाबों को सम्भालता है। उपाय और वैचारिक स्तर पर मानवीय परेशानियों को सुलझाता है।  व्यापार, प्यार, व्यवहार में मात खाई किस्मत का बेहतर भविष्य रचता है। ज्योतिष यह काम प्रभावशाली तरीके से करता रहे तो भारतीय संस्कृति का परचम स्थापित रहता है।

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हमारे यहां तो पूजा, पाठ, हवन यज्ञ की बड़ी महिमा है। प्रसिद्ध एवं प्रतिष्ठित पूजास्थलों में दिन रात विशिष्ट पूजा करवाई जाती है जिनमें टेढ़े मेढ़े, अनैतिक, कुराजनीतिक कार्यों में सफलता पाने के लिए सभी क्षेत्रों के दिग्गज जुटे रहते हैं। अपने वर्तमान के साथ साथ, हमेशा अप्रत्याशित भविष्य के लिए बहुत चिंतित रहते हैं। कई बार ज्योतिष बांचने वालों को अपने भविष्य बारे पता नहीं चलता फिर भी व्यवसाय तो व्यवसाय होता है। वस्तु कैसे बेचनी है यह भी तो एक कौशल है। इसमें बेचने वाले की नहीं, खरीदने वाले की गलती रहती है। खरीदने वाला अपनी सफलता बारे सुनिश्चित होने का विशवास उगाता है जिसके लिए उसे प्रेरक चाहिए चाहे वह प्रेमिका हो या पत्नी या ज्योतिषी।  

भारतीय परिवेश में किस्मत बड़ी चीज़ है। किस्मत हो तो कितने ही गधे, पहलवान होते देखे हैं और किस्मत फुटबाल हो तो कितने ही मेहनती, पढ़े लिखे पहलवान, गधे। तो क्या ज़िंदगी और किस्मत दोनों फुटबाल नहीं हैं।

- संतोष उत्सुक

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