World Cup में कोच की एक चूक ने डुबोई South Korea की नैया, Son Heung-min बेंच पर बैठे रहे

By Ankit Jaiswal | Jun 25, 2026

फुटबॉल विश्व कप जैसे बड़े टूर्नामेंटों में एक रणनीतिक फैसला कभी टीम को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकता है तो कभी पूरे अभियान को संकट में डाल सकता है। दक्षिण कोरिया और दक्षिण अफ्रीका के बीच खेले गए महत्वपूर्ण मुकाबले में ऐसा ही कुछ देखने को मिला, जहां दक्षिण कोरिया के मुख्य प्रशिक्षक होंग म्युंग-बो का एक बड़ा दांव पूरी तरह उल्टा पड़ गया।

मौजूद जानकारी के अनुसार होंग म्युंग-बो ने यह फैसला रणनीतिक सोच के तहत लिया था। उनका मानना था कि मैच के बाद के चरण में जब विपक्षी खिलाड़ी थक जाएंगे और मैदान पर अधिक खाली स्थान उपलब्ध होंगे, तब सोन ह्युंग-मिन अपनी गति और आक्रामक क्षमता का बेहतर उपयोग कर सकेंगे। इसी वजह से उन्हें शुरुआती मिनटों की बजाय बाद में मैदान पर उतारने की योजना बनाई गई थी।

लेकिन यह रणनीति सफल नहीं हो सकी। दक्षिण अफ्रीका ने अनुशासित और प्रभावशाली खेल दिखाते हुए दक्षिण कोरिया को 1-0 से हरा दिया। इस जीत के साथ दक्षिण अफ्रीका ने बड़ा उलटफेर करते हुए समूह में दूसरे स्थान पर कब्जा कर लिया और इतिहास में पहली बार नॉकआउट चरण के लिए अपना स्थान सुनिश्चित कर लिया है।

बता दें कि दक्षिण अफ्रीका इस मुकाबले से पहले समूह में सबसे निचले स्थान पर था। हालांकि निर्णायक मैच में उसने शानदार प्रदर्शन करते हुए सभी समीकरण बदल दिए हैं। दूसरी ओर दक्षिण कोरिया की टीम अब सीधे अगले दौर में पहुंचने में सफल नहीं हो सकी। अब उसे समूह चरण के बाकी मुकाबलों के नतीजों का इंतजार करना होगा और उम्मीद करनी होगी कि वह सर्वश्रेष्ठ तीसरे स्थान वाली टीमों में शामिल हो जाए।

हार के बाद दक्षिण कोरियाई मीडिया ने प्रशिक्षक होंग म्युंग-बो की रणनीति पर तीखे सवाल उठाए हैं। कई पत्रकारों ने इस परिणाम को अस्वीकार्य और निराशाजनक बताया है। शुरुआती टीम में किए गए बदलावों को भी विफल प्रयोग करार दिया गया है।

मैच के बाद संवाददाताओं से बातचीत में होंग म्युंग-बो ने भी स्वीकार किया कि परिणाम को देखते हुए उनका फैसला गलत साबित हुआ है। उन्होंने कहा कि यदि पहले से परिणाम का अंदाजा होता तो शायद वह अलग निर्णय लेते। उन्होंने यह भी माना कि टीम की हार की पूरी जिम्मेदारी मुख्य प्रशिक्षक होने के नाते उन्हीं की है।

गौरतलब है कि होंग म्युंग-बो दक्षिण कोरिया के पूर्व कप्तान भी रह चुके हैं और वर्ष 2002 में टीम को ऐतिहासिक सेमीफाइनल तक पहुंचाने वाली टीम का हिस्सा थे। हालांकि प्रशिक्षक के रूप में उनका रिकॉर्ड मिक्स रहा है। वर्ष 2014 के विश्व कप में भी उनके नेतृत्व में दक्षिण कोरिया एक भी मैच नहीं जीत सका था।

अब दक्षिण कोरिया की नजर अन्य समूहों के नतीजों पर टिकी हुई है। वहीं दक्षिण अफ्रीका आत्मविश्वास से भरा हुआ अगले दौर में प्रवेश कर चुका है और उसने इस विश्व कप के सबसे बड़े उलटफेरों में से एक को अंजाम देकर दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया हैं।

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