हो गया खेल! भारत को रोककर खुद रूसी तेल खरीद रहा अमेरिका?

By अभिनय आकाश | Aug 11, 2026

कुछ दिन पहले यूएस सेनेट में एक बिल पास हुआ। बिल था अगर कोई देश रूसी से तेल खरीदेगा तो उस पर अमेरिका 100% तक का टेरिफ लगाने का अधिकार रखेगा। भारत और चीन के लिए यह सीधा थ्रेट था क्योंकि यह दो देश रूस से भारी मात्रा में तेल खरीदते हैं। लेकिन अब अगर हम कहें कि यह बिल बस मजाक है। अमेरिका और यूरोप रशियन ऑयल खरीद को लेकर दुनिया के दूसरे देशों पर टेरिफ और आर्थिक प्रतिबंध लगाने की चेतावनी दे रहे हैं, वही देश दूसरी ओर खुद रशिया के तेल से बने रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों का इस्तेमाल भी कर रहे हैं। 

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तमाम बयानबाजी और धमकियों के बाद भी अमेरिका और यूरोप कहीं ना कहीं किसी ना किसी तरीके से रशियन ऑयल प्रोडक्ट इस्तेमाल कर रहे हैं और एक तरह से जो वो बार-बार धमकी दे रहे हैं कि जो देश रशिया से तेल खरीदेंगे उन पर वो टेरेफ लगाएंगे तो कायदे से देखा जाए तो पहले तो उन्हें इस पर रोक लगानी होगी। फिर दूसरे देशों से रशियन ऑयल को लेकर बात करनी होगी। देखिए अब बात उन कारगो की जो जुलाई में भारतीय रिफाइनरियों से निकलकर यूरोपीय संघ के बंदरगाहों तक पहुंचे। इन कारगोस में ऐसे रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पाद थे जिन्हें तैयार करने में रशियन कच्चे ऑयल का इस्तेमाल हुआ था। यानी आसान भाषा में समझिए कच्चा तेल रूस से आया। भारत की रिफाइनरी में उसकी प्रोसेसिंग हुई। उससे पेट्रोलियम प्रोडक्ट तैयार हुए और फिर उसका एक हिस्सा यूरोपीय बाजार तक पहुंचा। इसी तरह जामनगर रिफाइनरी से अमेरिका को भी रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों की शिपमेंट भेजी गई।

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सीआरए की रिपोर्ट के मुताबिक जुलाई से पहले के तीन महीनों में जामनगर रिफाइनरी के फीड स्टॉक का करीब 35% हिस्सा रूसी क्रूड था। यानी भारत सिर्फ रूसी तेल खरीद नहीं रहा बल्कि उस तेल को रिफाइंड करके तैयार पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात भी कर रहा है और यही पेट्रोलियम उत्पाद यह देश अमेरिका यूरोप के बाजार में जा रहे हैं और देखा जाए तो सीधे तौर पर नहीं लेकिन घुमा फिराकर रशिया के प्रोडक्ट अमेरिका और यूरोप के बाजार में बेचे जा रहे हैं। तो देखा जाए तो एक तरह से अमेरिका यूरोप खुद रशियन प्रोडक्ट लेने में पीछे नहीं है। मगर वो ये भी नहीं चाहते कि भारत रशिया से कोई व्यापार करे।

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