यूपी में आप और ओवैसी जितने ज्यादा वोट लेंगे, भाजपा को उतना अधिक फायदा होगा

By अजय कुमार | Dec 17, 2020

उत्तर प्रदेश में 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी को चुनौती देने वालों की लिस्ट में दो और नये नाम जुड़ गए हैं। आम आदमी पार्टी और ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम)। इन दोनों पार्टियों ने भी यूपी विधानसभा चुनाव लड़ने और योगी सरकार को उखाड़ फेंकने का ऐलान किया हैं। एआईएमआईएम के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी और आम आदमी पार्टी के संयोजक व दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने उत्तर प्रदेश में चुनावी मैदान में उतरने का ऐलान कर दिया है। इसी सिलसिले में गत दिनों ओवैसी ने सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर से लखनऊ में मुलाकात भी की है। असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि ओम प्रकाश राजभर के नेतृत्व में हम यूपी चुनाव लड़ेंगे। वहीं आम आदमी पार्टी के नेता, सांसद और उत्तर प्रदेश के प्रभारी संजय सिंह भी लम्बे समय से उत्तर प्रदेश में आम आदमी पार्टी का झंडा उठाए घूम रहे हैं। संजय सिंह लगातार योगी सरकार के खिलाफ चुनावी बिगुल बजाए हुए हैं। आम आदमी पार्टी 2022 के विधानसभा चुनाव से पूर्व पंचायत चुनाव में भी अपनी ताकत दिखाएगी।

आम आदमी पार्टी के उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष सभाजीत सिंह कहते हैं कि अरविंद केजरीवाल ने उत्तर प्रदेश में पार्टी के संगठन पर विश्वास जताते हुए आगामी विधानसभा चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। इसके चलते हम उत्तर प्रदेश के कार्यकर्ताओ और नेताओं की तरफ से उनका आभार जताते हैं और उम्मीद करते हैं कि दिल्ली के विकास मॉडल को यूपी के घर-घर ले जाकर उत्तर प्रदेश के भीतर जाति-धर्म की नफरत वाली राजनीति को खत्म करने का काम करेंगे। दिल्ली जैसी शिक्षा-स्वास्थ्य समेत अन्य सुविधाएं यूपी के लोगों को देकर प्रदेश को आगे ले जाने का काम करेंगे।

उधर, हाल ही में हुए बिहार विधानसभा चुनाव में पार्टी के प्रदर्शन से उत्साहित एआईएमआईएम के अध्यक्ष असद्दुदीन ओवैसी अब उत्तर प्रदेश में अपने पैर जमाने का प्रयास कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि यूपी में ओवैसी की जनभागीदारी मोर्चा के साथ गठबंधन पर बातचीत चल रही है। बता दें कि उत्तर प्रदेश सरकार की नीतियों का विरोध करने के लिए ओम प्रकाश राजभर ने जनभागीदारी संकल्प मोर्चा का गठन किया है। जनभागीदारी मोर्चे में बाबूराम कुशवाहा की जन अधिकार पार्टी, राष्ट्रीय उदय पार्टी, राष्ट्रीय उपेक्षित समाज पार्टी और जनता क्रांति पार्टी समेत आठ क्षेत्रीय पार्टियां शामिल हैं। इसके अलावा ओवैसी की प्रगतिशील समाज पार्टी (लोहिया) के अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव और बहुजन समाज पार्टी के महासचिव सतीश चन्द्र मिश्रा से भी मेल-मिलाप का कार्यक्रम तय है।

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बहरहाल, लाख टके का सवाल यही है कि क्या आम आदमी पार्टी और ओवैसी की पार्टी भाजपा को कोई चुनौती दे भी पाएगी, कहीं यह दल भी ‘मुंह नोचवा’ न साबित हो जाएं। क्योंकि जब-जब विपक्ष में बिखराव होता है तब-तब भाजपा की जीत आसान हो जाती है। इन दलों के आने से भाजपा विरोधी वोटों में बिखराव ही देखने को मिलेगा, जिसका सीधा फायदा भाजपा उठाएगी।

-अजय कुमार

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