पैगंबर पर टिप्पणी को लेकर भारत में कार्रवाई देरी से हुई, हसीना सरकार पर भी दबाव: नक्शबंदी

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Jun 11, 2022

ढाका। भारत में पैंगबर मोहम्मद पर टिप्पणी को लेकर विरोध प्रदर्शनों और सियासी घमासान के बीच बांग्लादेश में सत्तारूढ़ अवामी लीग के एक नेता ने स्वीकार किया कि इस मुद्दे पर देश की सरकार पर कार्रवाई करने का दबाव है। उन्होंने कहा कि भारत में होने वाली घटनाओं का असर बांग्लादेश में भी होता है, क्योंकि यहां का बहुसंख्यक समाज मुस्लिम है और देश में मौजूद विघटनकारी ताकतें ऐसी स्थिति का लाभ उठाकर समाज में अव्यवस्था फैलाने का प्रयास करती हैं।

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उन्होंने दावा किया कि अरब देशों द्वारा विरोध जताये जाने के बाद भाजपा ने यह कदम उठाया। इस मामले में अरब समेत कई मुस्लिम देशों के विरोध के स्वरों के बीच बांग्लादेश सरकार के रुख को लेकर नक्शबंदी ने कहा, सरकार स्थिति का आकलन कर रही है। धार्मिक मामलों की समिति क्या इस मामले में हसीना सरकार को कोई सलाह देगी, इस पर नक्शबंदी ने कहा, हमने इस बारे में धार्मिक मंत्री से चर्चा की है और इस बारे में आगे और विचार-विमर्श कर हम बयान जारी करेंगे। उन्होंने कहा कि भारत और बांग्लादेश के बीच बेहद प्रगाढ़ रिश्ते हैं और यह बात भी सही है कि कई अंतरराष्ट्रीय ताकतें भारत-बांग्लादेश के बीच रिश्तों को खराब करने का प्रयास कर रही हैं।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री शेख हसीना धार्मिक कट्टरपंथियों के खिलाफ कतई बर्दाश्त नहीं करने की नीति रखती हैं और यही कारण है कि उन्होंने सांप्रदायिक सद्भाव सुनिश्चित करने के लिए ऐसे मामलों में तेजी से काम किया है। बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमले जारी रहने के सवाल पर उन्होंने कहा कि ऐसे बहुत थोड़े मामले हैं। उन्होंने दावा किया कि मौजूदा सरकार धर्मनिरपेक्षता में विश्वास रखती है और देश के अल्पसंख्यकों के लिए उसने 100 फीसदी सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में काम किया है। नक्शबंदी ने दावा किया कि बांग्लादेश उन मामलों पर तुरंत कार्रवाई करता है जहां धार्मिक संवेदनाएं शामिल हैं। उन्होंने कहा,“जब कुमिल्ला और पीरगंज में सांप्रदायिक हिंसा हुई तोसरकार ने तुरंत कार्रवाई की और 12 घंटे के भीतर आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।”

इसके साथ ही उन्होंने यह भी संकेत दिया कि भारत और बांग्लादेश में सांप्रदायिक स्थितियां आपस में जुड़ी हुई हैं और वहां त्वरित उपचारात्मक कदम नहीं उठाए जाने की स्थिति में बांग्लादेश के कुछ हिंसक तत्व यहां फायदा उठाने की कोशिश कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य से पैगंबर के खिलाफ टिप्पणी के मामले में भारत में कार्रवाई को लेकर देरी से कदम उठाए गए। वहीं, ढाका विश्वविद्यालय के फारसी और साहित्य के प्रोफेसर डाक्टर के.एम. सैफुल इस्लाम खान ने कहा कि भारत सरकार द्वारा उचित कदम उठाये जाने के बाद इस मामले को और अधिक तूल दिए जाने की जरूरत नहीं है।

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