By Ankit Jaiswal | May 04, 2026
अनिल अग्रवाल की अगुवाई वाली वेदांता लिमिटेड ने जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड के अधिग्रहण को लेकर गौतम अडानी समूह की बोली को चुनौती दी थी, जिसे अब खारिज कर दिया गया।
गौरतलब है कि इससे पहले राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण ने भी अडानी एंटरप्राइजेज की इस बोली को मंजूरी दी थी, जिसके खिलाफ वेदांता ने अपील की थी। हालांकि, अपीलीय न्यायाधिकरण ने दोनों याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा कि प्रक्रिया में किसी प्रकार की अनियमितता नहीं पाई गई है।
यह मामला उस समय शुरू हुआ था जब जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड पर 57 हजार करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज हो गया था और जून 2024 में इसे दिवाला प्रक्रिया में शामिल किया गया था। इस प्रक्रिया में कुल 28 कंपनियों ने रुचि दिखाई थी, जिनमें से छह अंतिम चरण तक पहुंचीं। अडानी समूह और वेदांता दोनों प्रमुख दावेदार बनकर उभरे थे।
बताया जाता है कि नवंबर 2025 में लेनदारों की समिति ने करीब 93.81 प्रतिशत मतों के साथ अडानी समूह की योजना को मंजूरी दी थी। वहीं वेदांता ने बाद में 16,070 करोड़ रुपये की संशोधित पेशकश दी, जिसे नियमों के तहत स्वीकार नहीं किया गया। समिति का कहना था कि समय सीमा के बाद किसी भी प्रस्ताव में बदलाव की अनुमति नहीं है।
वेदांता ने दलील दी थी कि उसकी बोली मूल्य के लिहाज से अधिक थी, लेकिन न्यायाधिकरण ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि केवल अधिक राशि होना ही चयन का आधार नहीं हो सकता है। बता दें कि बोली का मूल्यांकन कई पहलुओं जैसे नकद भुगतान, व्यवहार्यता और क्रियान्वयन क्षमता के आधार पर किया जाता है।
इस पूरे मामले में उच्चतम न्यायालय भी पहले हस्तक्षेप कर चुका है और उसने भी अधिग्रहण प्रक्रिया पर रोक लगाने से इनकार किया था। हालांकि उसने यह निर्देश दिया था कि कोई भी बड़ा फैसला न्यायाधिकरण की अनुमति से ही लिया जाए।
अब इस फैसले के बाद जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड के अधिग्रहण का रास्ता अडानी समूह के लिए लगभग साफ हो गया है, हालांकि वेदांता चाहे तो आगे उच्चतम न्यायालय का रुख कर सकती है। कंपनी के पास रियल एस्टेट, सीमेंट, ऊर्जा और आतिथ्य जैसे कई बड़े क्षेत्र में संपत्तियां हैं, जिनमें ग्रेटर नोएडा और नोएडा के बड़े प्रोजेक्ट भी शामिल हैं।