रांची। झारखंड में कोरोना वायरस के सामुदायिक संक्रमण से इंकार करते हुये प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव नितिन मदन कुलकर्णी ने कहा है राज्य में जांच किट की कोई कमी नहीं है और सूबे में प्रतिदिन 1200 से 1400 जांच किये जा रहे हैं। पीटीआई के साथ विशेष बातचीत में कुलकर्णी ने कहा, प्रदेश में जांच किटों का कोई अभाव नहीं है और राज्य की क्षमता प्रति दिन 1200 से 1400 नमूनों की जांच करने की है। यह पूछे जाने पर कि 107 कोरोना संक्रमित मरीजों वाला झारखंड क्या वायरस के सामुदायिक संक्रमण की ओर बढ़ रहा है, अधिकारी ने कहा, ‘अभी ऐसी स्थिति नहीं है। स्थिति नियंत्रण में है और सभी कोरोना संक्रमितों की संपर्कों का या तो पता किया जा चुका है अथवा किया जा रहा है।
रांची में बरियातू के रहने वाले एक पूर्व प्राशासनिक अधिकारी में कोरोना के स्रोतों का पता नहीं चलने के बारे में पूछेजाने पर प्रमुख सचिव ने कहा, ‘‘बुजुर्ग पूर्व अधिकारी का इलाज के लिए रांची से एयर एंबुलेंस से दिल्ली पहुंचने के दो दिनों बाद निधन हो गया। उन्हें कोरोना संक्रमित पाया गया था। उनके कोरोना संक्रमित होने की रांची में कोई पुष्टि नहीं हुई थी। ऐसे में उनके संपर्कों का पता करना बहुत कठिन है।’’ कुलकर्णी ने बताया, ‘‘इन विपरीत परिस्थितियों के बावजूद अधिकारी के संपर्कों का पता ला कर अब तक 272 लोगों की जांच की जा चुकी है जिनमें दो-तीन लोग कोरोना संक्रमित पाये गये हैं।’ यह पूछे जाने पर कि आखिर झारखंड में कोरोना संक्रमण के इतने मामले आने के क्या कारण है, कुलकर्णी ने स्पष्ट कहा, ‘‘राज्य में कोरोना की शुरूआत तो रांची के हिंदपीढ़ी इलाके से ही हुई। मूल समस्या वहीं से प्रारंभ हुई है।’’ उन्होंने बताया कि झारखंड में कोरोना संक्रमण की जांच नियमित किट से ही करायी जा रही है क्योंकि यहां नियमित जांच किट पर्याप्त संख्या में मौजूद हैं। उन्होंने बताया कि झारखंड सरकार स्वयं भी अनेक भारतीय कंपनियों से ये किट खरीद रही है। रैपिड टेस्ट किट्स के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने स्पष्ट किया कि अब तक केन्द्र सरकार ने इनके इस्तेमाल की अनुमति नहीं दी है।
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