तालिबानी ताकतों से भारत को सतर्क रहने की जरूरत, आंतरिक सुरक्षा के लिए है यह बड़ी चुनौती

By अनुराग गुप्ता | Aug 26, 2021

काबुल। अफगानिस्तान पर तालिबान ने कब्जा कर लिया है। जिसके बाद से कई मुल्कों की चिंता बढ़ गई है। पाकिस्तान की मदद से तालिबान का उदय हुआ और अफगानिस्तान की अस्थिरता के लिए कहीं-न-कहीं पाकिस्तान भी जिम्मेदार है। यह किसी से छिपा नहीं है कि पाकिस्तान हमेशा से तालिबान का समर्थक रहा है। इसीलिए भारत की चिंता बढ़ गई है। क्योंकि पाकिस्तान लगातार भारत में घुसपैठ की कोशिश करता रहा है। 

अंग्रेजी न्यूज बेवसाइट 'हिन्दुस्तान टाइम्स' की रिपोर्ट के मुताबिक मध्य प्रदेश के इंदौर से साल 2008 में स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) के पूर्व अध्यक्ष सफदर नागोरी को गिरफ्तार किया गया था। उस वक्त उसने पूछताछ में बताया था कि वह तालिबान के तत्कालीन अमीर-उल-मोमीन मुल्ला उमर को सच्चा खलीफा मानता है।

दरअसल, सिमी आतंकी सफदर नागोरी तालिबान के खूंखार आतंकी कमांडर मुल्‍ला उमर के नेतृत्‍व में भारत में जिहाद छेड़ना चाहता था। उसने पूछताछ के दौरान यह बात खुद कबूली थी। आपको बता दें कि मुल्‍ला उमर की साल 2013 में ज़ाबुल में मौत हो गई थी।

मुल्ला उमर ने छेड़ा था जिहाद 

रिपोर्ट के मुताबिक, वह अल कायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन के लिए बहुत सम्मान करता था, लेकिन उसे खलीफा के रूप में नहीं मान सकता था। क्योंकि उसे उसकी ही धरती या कहें सऊदी अरब से उखाड़ फेंका गया था। वहीं दूसरी ओर मुल्ला उमर ने अपने ही क्षेत्र (तालिबान) में जिहाद छेड़ा था। 

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रिपोर्ट के मुताबिक मुल्ला उमर और तालिबान की तरह नागोरी भी एक देवबंदी था। जबकि ओसामा बिन लादेन सलाफी इस्लाम का अनुयायी था।

विशेषज्ञों के मुताबिक आतंकी संगठन सिमी अस्तित्व में नहीं है, लेकिन इसके कई आतंकवादी भारत में वहादत-ए-इस्लाम में स्थानांतरित हो गए हैं। खाड़ी संपर्कों के माध्यम से नागोरी तालिबानी आतंकी मुल्ला उमर के साथ संबंध स्थापित करने की इच्छा रखता था लेकिन सिमी तालिबान प्रमुख मौलवी तक नहीं पहुंच सका।

विशेषज्ञों के मुताबिक कई सिमी आतंकवादी इंडियन मुजाहिदीन (IM) में शामिल हो गए, जो लश्कर-ए-तैयबा द्वारा प्रशिक्षित और पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) द्वारा प्रयोजित एक सलाफी आतंकवादी संगठन है। इसके अलावा भारत को निशाना बनाने वाला पाकिस्तान स्थित एक अन्य आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM), हक्कानी नेटवर्क या तहरीक-ए-पाकिस्तान की तरह ही आतंकी संगठन है। 

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ऐसे में अफगानिस्तान की जमीं पर तालिबान के बढ़ते प्रभुत्व का खतरा भारत में मंडरा रहा है। इसीलिए भारत को और भी ज्यादा सतर्क और सावधान रहने की जरूरत है। हालांकि सीडीएस जनरल बिपिन रावत ने हाल ही में स्पष्ट किया था कि भारत हर स्थिति का मुकाबला करने के लिए तैयार है।

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