आखिर क्यों टाले गये कश्मीर में पंचायत चुनाव? 370 हटने के बाद इन राजनीति दलों का हुआ गठन

By अंकित सिंह | Jul 30, 2020

अनुच्छेद 370 के हटने के बाद जम्मू कश्मीर में राजनीतिक समीकरण नए रूप में उभर कर सामने आ रहे है। 5 अगस्त 2019 को राज्य से अनुच्छेद 370 को हटाते हुए इसे दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने का फैसला लिया गया था। इस फैसले के विरोध में स्थानीय राजनेताओं ने आवाज उठाई और बाद में कई नेताओं को पीएसए के तहत नजरबंद कर दिया गया। केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद वहां के पंचायतों और ब्लॉकों को जम्मू कश्मीर के विकास में अहम योगदान निभाने के लिए मजबूत किया गया। इसी कड़ी में पहले वहां ब्लॉक चुनाव कराए गए। इसके बाद पंचायत चुनाव के लिए तारीखों का ऐलान किया गया था।

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निर्वाचन अधिकारी की ओर से यह दावा किया गया कि यह कदम गृह मंत्रालय से मिली जानकारी के मुताबिक उठाया गया है। पंचायत चुनाव 5 से 20 मार्च के बीच 8 चरणों में होने वाले थे। आपको बता दें कि जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 के हटने के बाद तथा इसे दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटे जाने के बाद यह पहली बड़ी राजनीतिक गतिविधि होने वाली थी। हालांकि यह भी माना जा रहा है कि इन पंचायत चुनाव को स्थगित इसलिए भी करना पड़ा क्योंकि वहां के मुख्य राजनीतिक दल इसका बहिष्कार कर रहे थे। पीडीपी, नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस लगातार इस चुनाव का बहिष्कार कर रहे थे। वहीं जम्मू-कश्मीर के गवर्नर रहे सत्यपाल मलिक ने बड़ा बयान देते हुए यह भी कहा था कि पाकिस्तान के तबाव में जम्मू कश्मीर के बड़े नेताओं ने पंचायत चुनाव में उनका साथ नहीं दिया था।

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फिलहाल राज्य में पंचायत चुनाव में कोरोना की वजह से भी देरी हो रही है। उधर पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती और कुछ अन्य नेताओं को छोड़कर राज्य के बाकी बड़े नेताओं को रिहा कर दिया गया है। लेकिन आने वाले दिनों में यहां की राजनीति दिलचस्प हो सकती है। वर्तमान में जम्मू कश्मीर में अलगाववाद की बात कम हो रही है और फिर से एक मुख्य राज्य के रूप में इसे स्थापित करने पर राजनेता जोर दे रहे हैं। अब तक वहां की राजनीति नेशनल कॉन्फ्रेंस, कांग्रेस और पीडीपी के ही इर्द-गिर्द घूमती रही है। लेकिन अब भाजपा और कुछ अन्य दल भी वहां की राजनीति में खूब सक्रिय हुए हैं। राज्य से अनुच्छेद 370 हटाने के बाद अल्ताफ बुखारी ने भी एक नई पार्टी का गठन कर लिया है। अल्ताफ बुखारी ने 'जम्मू-कश्मीर अपनी पार्टी' का ऐलान किया है। पीडीपी के इस पूर्व नेता ने नई पार्टी का गठन कर महबूबा मुफ्ती के लिए मुश्किलें बढ़ा दी है। यह माना जा रहा है कि कश्मीर घाटी में यह उमर अब्दुल्ला और महबूबा के प्रभाव को कम कर सकते हैं। इसके अलावा इनका भाजपा के साथ भी आने वाले दिनों में गठजोड़ देखने को मिल सकता है।

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