By अभिनय आकाश | Apr 20, 2026
क्या ईरान ने चीन को भी रोक दिया? एक ऐसा खुलासा हुआ है जिसने इंटरनेशनल शिपिंग और जियोपॉलिटिक्स में हलचल मचा दी है। चीनी नागरिकों के स्वामित्व और क्रू वाला जहाज लेकिन फिर भी होर्मुज स्टेट से गुजरने की इजाजत नहीं मिली। कैरियर सन प्रॉफिट जो पूरी तरह से चीनी स्वामित्व वाला था और जिसका क्रू भी चीनी नागरिकों से बना था उसे हॉर्मज स्टेट से गुजरने की इजाजत नहीं मिली। नतीजा इस जहाज को अचानक अपना रास्ता बदलना पड़ा और वापस लौटना पड़ा। ऐसे में सवाल उठता है कि इसमें इतना बड़ा क्या है? आम धारणा यह रही कि ईरान और चीन के बीच मजबूत रणनीतिक और आर्थिक रिश्ते हैं और माना जाता था कि ईरान चीन के जहाजों को प्राथमिकता देता है लेकिन इस घटना ने उस धारणा को भी पूरी तरह से तोड़ दिया। ईरान का यह कदम बताता है कि होर्मुज स्टेट में फैसले पूरी तरह रणनीतिक और परिस्थितियों पर आधारित है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक स्थिति को देखते हुए जहाज को तुरंत रूट बदलना पड़ा और पीछे लौटना पड़ा। यह फैसला दिखाता है कि ईरान हर जहाज को अलग-अलग आधार पर आंक रहा है और सुरक्षा को लेकर कोई समझौता नहीं कर रहा है। इस पूरी घटना को समझने के लिए थोड़ा बड़ा परिपेक्ष देखना जरूरी है। हाल ही में अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर हमले हुए। इसके बाद ईरान ने होर्मुज स्टेट में कंट्रोल बढ़ा दिया। कई जगहों पर जहाजों को रोका गया था या फिर फायरिंग की गई जिसकी खबरें हमने आपको दिखाई भारत तक पर। ऐसे में ईरान अब महत्वपूर्ण जलमार्ग पर कड़ी निगरानी और चयनात्मक अनुमति की नीति अपना रहा है। यानी कि सेलेक्टिव एक्सेस और यही वजह है कि चाहे जहाज भारत का हो या चीन का हो हर किसी को समान रूप से जांचा जा रहा है। अब अगर हम भारत और चीन के जहाजों की स्थिति की तुलना करें तो एक दिलचस्प तस्वीर सामने आती है। कुछ भारतीय जहाजों ने जोखिम के बावजूद रास्ता पार किया जबकि एक चीनी जहाज को लौटना पड़ा। इससे साफ होता है। दिखता है कि ईरान का फैसला सिर्फ देश के आधार पर नहीं बल्कि तत्काल सुरक्षा स्थिति और ऑपरेशनल फैक्टर्स पर निर्भर करता है। कुल मिलाकर सन प्रॉफिट का वापस लौटना सिर्फ एक शिपिंग घटना नहीं यह एक बड़ा जिओपॉलिटिकल संकेत है। ईरान ने साफ कर दिया कि कोई भी देश विशेष नहीं है।