मेरठ : सीएम योगी के निर्देश के बाद पश्चिमांचल में बिगड़ने लगी बिजली की चाल

By राजीव शर्मा | Oct 09, 2021

मेरठ ,कोयले की कमी से बिजली उत्पादन में आई कमी से पश्चिमांचल पहले ही जूझता नज़र आ रहा था,उस पर सोमवार को जारी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह निर्देश कि प्रदेश में शाम 6 बजे से सुबह 7 बजे तक निरंतर विद्युत आपूर्ति होगी, भारी पड़ता नज़र आ रहा है ।  पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (पीवीवीएनएल) में बिजली की मांग और उपलब्धता में कोयला संकट के कारन करीब दस फीसदी की कमी के चलते ग्रामीण क्षेत्र में बिजली कटौती पहले ही शुरू हो गई है। इसका सबसे ज्यादा असर सहारनपुर और मुरादाबाद जोन में देखा जा रहा है। नलकूपों की बिजली आपूर्ति को भी झटका लग रहा है। अब मुख्यमंत्री योगी के इस आदेश के बाद पश्चिमांचल को भी बिजली संकट से जूझना पड़ सकता है। मेरठ, गाजियाबाद और नोएडा अभी कटौती के संकट से बाहर हैं। लेकिन हालात सामान्य नहीं हुए तो यहां भी कटौती शुरू हो जाएगी। 

आपको बता दे की पीवीवीएनएल के करीब 70 लाख बिजली उपभोक्ताओं की बिजली की मांग 6500 से 7000 मेगावाट तक है, लेकिन इन दिनों प्रदेश में चल रहे बिजली संकट के चलते उपलब्धता में करीब दस फीसदी तक की कमी आ गई है। इस कमी का असर कंपनी के अंतर्गत आने वाले 14 जनपदों में से सात जनपदों पर पहले ही पड़ना शुरू हो गया है। जिस कारण बिजली की कमी के चलते ग्रामीण क्षेत्रों के 18 घंटे के शेड्यूल से दो से तीन घंटे कटौती की जा रही है। अब मुख्यमंत्री के नए आदेश के बाद संकट ज्यादा खड़ा हो सकता है।  

बिजली संकट के चलते कंपनी के सात जनपदों सहारनपुर, मुरादाबाद, संभल, रामपुर, अमरोहा और बिजनौर में दो से तीन घंटे की रोस्टिंग शुरू हो गई है। इन जिलों के गांवों को 18 घंटे की बजाय 15 से 16 घंटे ही बिजली दी जा रही है। इसके अलावा नलकूपों को 10 घंटे तक ही बिजली दी जा रही है।

प्राप्त रिकॉर्ड के अनुसार पश्चिमांचल के सहारनपुर और मुरादाबाद जोन में सर्वाधिक बिजली चोरी होती है। बिजली चोरी  रोकने के लिए भी सहारनपुर, मुरादाबाद, अमरोहा, रामपुर, संभल और बिजनौर आदि की बिजली काटी जा रही है।  जितनी ज्यादा बिजली आपूर्ति होती है उतनी ही बिजली चोरी से कंपनी को राजस्व की चपत लगती है। कम बिजली आपूर्ति से बिजली चोरी का मीटर भी कम घूमता है। 

मेरठ में बैठे एमडी पीवीवीएनएल अरविंद मल्लप्पा बंगारी के अनुसार मुख्यमंत्री के निर्देशों का अक्षरशय पालन होगा। फिलहाल पश्चिमांचल पर बिजली संकट का अभी ज्यादा असर नहीं है। हालांकि मांग और उपलब्धता में पहले के मुकाबले थोड़ी कमी आने से ग्रामीण क्षेत्र की बिजली आपूर्ति का शेड्यूल थोड़ा प्रभावित हुआ है। यह संकट जल्द ही खत्म हो जाएगा।   

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