Nepal के बाद फ्रांस में तख्तापलट! अचानक PM मोदी के फोन की घंटी खूब बजने लगी

By अभिनय आकाश | Sep 11, 2025

नेपाल के बाद अब फ्रांस में भी सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। एक लाख से ज्यादा लोग फ्रांस की सड़कों पर उतर आए हैं और इन्हें काबू करने के लिए सरकार ने 80 हजार पुलिसकर्मियों को उतर दिया है। लेकिन दिलचस्प बात ये है कि नेपाल में तो वामपंथी सरकार का तख्तापलट हो गया। लेकिन फ्रांस में तो वामपंथी इमैनुएल मैक्रो का तख्तापलट करना चाहते हैं। इमैनुएल मैक्रो जानते थे कि फ्रांस में ऐसा कुछ होने जा रहा है इसलिए वो अपनी छवि सुधारने के लिए बार बार पीएम मोदी को फोन मिला रहे थे। 

फ्रांस में क्यों हुआ बवाल

राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के इस्तीफे की मांग को लेकर 1 लाख से ज्यादा लोग सड़क पर आ गए। फ्रांस के गृह मंत्री ब्रूनो रेतेयो ने प्रदर्शनकारियों पर विद्रोह का माहौल बनाने की कोशिश करने का आरोप लगाया है। फ्रांस बंद का आह्वान लेफ्ट पार्टियों ने किया है। इस प्रदर्शन को 'Block Everything' नाम दिया गया है। इन प्रदर्शनों की शुरुआत फ्रांस में बीते हफ्ते हुए राजनीतिक संकट से हुई। प्रधानमंत्री फ्रांस्वा बायरू ने संसद में विश्वास मत खो दिया था। उन्होंने खर्चों में भारी कटौती करने की योजना पेश की थी, जिसमें पेंशन रोकना और सार्वजनिक छुट्टियों को घटाना शामिल था। 

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पीएम मोदी से लगातार कर रहे बात

यूक्रेन युद्ध के बीच मैक्रों लगातार एक्टिव दिख रहे हैं। मैक्रों बार बार पीएम मोदी और यूरोपीय देशों को यूक्रेन के एक एक अपडेट दे रहे हैं, मीटिंग कर रहे हैं ताकी फ्रांस की जनता के बीच उनकी लोकप्रियता दोबारा बढ़ जाए। प्रधानमंत्री फ्रांस्वा बायरू के हारने से दो दिन पहले ही इमैनुएल मैक्रों ने पीएम मोदी को फोन मिलाया था। मैक्रों खासतौर पर पीएम मोदी से टच में हैं। वो जानते हैं कि फ्रांस की अर्थव्यवस्था को इस वक्त सिर्फ भारत की बचा सकता है। पिछले कुछ हफ्तों में इमैनुएल मैक्रों पीएम मोदी से दो तीन बार बात कर चुके हैं। मैक्रों लगातार पीएम मोदी से व्यापार और यूक्रेन डील पर बात कर रहे हैं। वो एक्स पर पोस्ट करके एक एक चीज बता भी रहे हैं। ताकी फ्रांस की जनता को पता चल जाए कि वैश्विक और आर्थिक मुद्दों पर लगातार काम कर रहे हैं।  

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बजट ने बढ़ा दी मुश्किलें

फ्रांस में हमेशा से हांग पार्लियामेंट रहा है और फ्रांस की राजनीति में बजट हमेशा से टकराव का कारण रहा है। इस बार भी बजट ने ही इमैनुएल मैक्रोंकी मुश्किलें बढ़ा दी। इस बार भी बजट ने ही इमैनुएल मैक्रों की मुश्किलें बढ़ा दी। आंदोलन की जड़ें पूर्व पीएम फ्रांस्वा बायरू यरू के जुलाई में पेश किए गए कठोर बजट में हैं। उन्होंने 43 अरब यूरो की कमी को पूरा करने के लिए दो सार्वजनिक छुट्टियां खत्म करने, पेंशन और कल्याणकारी भुगतान रोकने और अन्य कटौतियां लागू करने की योजना बनाई थी।

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