श्रीलंका और मालदीव के बाद अब क्या पाकिस्तान को भी बचायेगा भारत?

By डॉ. वेदप्रताप वैदिक | Aug 05, 2022

श्रीलंका के प्रधानमंत्री रनिल विक्रमसिंघ और मालदीव के राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह ने भारत के प्रति जिन शब्दों में आभार व्यक्त किया है, वैसे कर्णप्रिय शब्द किसी पड़ोसी देश के नेता शायद ही कभी बोलते हैं। क्या ही अच्छा हो कि पाकिस्तान, अफगानिस्तान और नेपाल के शीर्ष नेता भी भारत के लिए वैसे ही शब्दों का प्रयोग करें। यह बात मैंने एक भाषण में कही तो कुछ श्रोताओं ने मुझसे पूछा कि क्या पाकिस्तान भी कभी भारत के लिए इतने आदरपूर्ण शब्दों का इस्तेमाल कर सकता है? 

इसे भी पढ़ें: पाकिस्तान: लाहौर में 1200 साल पुराने वाल्मिकी मंदिर का किया जाएगा जीर्णोद्धार

इसी तरह पिछले कुछ वर्षों में मालदीव के कुछ नेताओं को अपना बगलबच्चा बनाकर चीन ने उसके सामने कई चूसनियां लटका दी थीं लेकिन इसी हफ्ते मालदीव के राष्ट्रपति सोलेह की भारत-यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच छह समझौतों पर दस्तखत हुए। सोलिह ने कोरोना-काल में भारत द्वारा भेजी गई दवाइयों के लिए भारत के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने हिंद महासागर क्षेत्र में आतंकवाद और राष्ट्रों के उस पार से होने वाले अपराधों के विरुद्ध भारत के साथ खुला सहयोग करने की बात कही है। बिना बोले ही उन्होंने सब कुछ कह दिया है। भारत की मदद से सैंकड़ों करोड़ रु. के कई निर्माण-कार्यों की योजना भी बनी है। भारत ने मालदीव को अनेक सामरिक संसाधन भी भेंट किए हैं।

इसे भी पढ़ें: सत्ता गंवाने के बाद इमरान खान को EC से लगा करारा झटका, PTI ने अमेरिकी संगठन समेत 34 विदेशी चंदे लिए

अब प्रश्न यही है कि क्या भारत ऐसे ही लाभदायक काम पाकिस्तान के लिए भी कर सकता है? किसी से भी आप यह प्रश्न पूछें तो उसका प्रश्न यही होगा कि आपका दिमाग तो ठीक है? पाकिस्तान का बस चले तो वह भारत का ही समूल नाश कर दे। यह बात मोटे तौर पर ठीक लगती है लेकिन अभी-अभी अल-क़ायदा के सरगना जवाहिरी के खात्मे में पाकिस्तान का जो सक्रिय सहयोग रहा और उसामा बिन लादेन के बारे में भी उसकी नीति यही रही, इससे क्या सिद्ध होता है? यही कि मजबूरी का नाम महात्मा गांधी! जब आसिफ ज़रदारी राष्ट्रपति थे तो मैंने फोन करके पूछा कि आपके भयंकर आर्थिक संकट में क्या हम आपको कुछ मदद दें तो आप स्वीकार कर लेंगे? उससे आपकी सीट को खतरा तो नहीं हो जाएगा? उनकी तरफ से हर्ष और आश्चर्य दोनों व्यक्त किए गए लेकिन हमारे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी की हिम्मत नहीं पड़ी। यदि नरेंद्र मोदी इस समय शाहबाज शरीफ को वैसा ही इशारा करके देखें तो शायद कोई चमत्कार हो जाए। भारत-पाक संबंधों में अपूर्व सुधार के द्वार खुल सकते हैं।

-डॉ. वेदप्रताप वैदिक

(लेखक, भारतीय विदेश नीति परिषद के अध्यक्ष हैं)

प्रमुख खबरें

Delhi Police ने 2021 के मर्डर केस में भगोड़ा हरीश उर्फ पिलुआ पकड़ा

न्यूयॉर्क में ICE अधिकारियों की कार्रवाई, कार से टक्कर मारने वाले व्यक्ति पर चलाई गोली

Lilavati Hospital Trust वित्तीय धोखाधड़ी मामला: Mumbai Sessions Court ने FIR के आदेश को सही ठहराया

Ranchi T20: Shai Hope के नाबाद शतक से जीता West Indies, सीरीज 1-1 से बराबर