By अंकित सिंह | Feb 01, 2026
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को केंद्रीय बजट 2026-27 पेश करते हुए कहा कि सरकार महिलाओं को ऋण आधारित आजीविका से निकालकर अपने उद्यमों की मालिक बनने में मदद करना चाहती है। उन्होंने कहा कि लखपति दीदी कार्यक्रम की सफलता के कारण यह प्रस्ताव रखा गया है। सीतारमण ने स्वयं सहायता उद्यमियों या "शी मार्ट्स" के शुभारंभ की भी घोषणा की, जो स्वयं सहायता उद्यमियों द्वारा संचालित और समुदाय के स्वामित्व वाले खुदरा आउटलेट के रूप में काम करेंगे।
शी मार्ट्स कार्यक्रम का उद्देश्य महिला व्यवसाय मालिकों को बड़े बाजारों तक पहुंचने, अपने ब्रांड बनाने और आय के स्थिर स्रोत सृजित करने में सहायता करना है। इसका उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों जैसे स्थानीय संस्थानों को मजबूत करना भी है। उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता उद्यमियों को उन्नत और नवोन्मेषी वित्तपोषण साधनों के माध्यम से क्लस्टर-स्तरीय संघों के अंतर्गत सामुदायिक स्वामित्व वाले खुदरा आउटलेट के रूप में स्थापित किया जाएगा।
क्लस्टर स्तर पर इन आउटलेट की स्थापना करके, सरकार का उद्देश्य ग्रामीण उत्पादों को एक ऐसा प्रतिष्ठित स्थान देना है जहाँ वे प्रसिद्ध ब्रांडों के साथ अपनी पहचान बना सकें। सीतारामन ने यह भी कहा कि इतने बड़े कदम के लिए नियमित बैंक ऋण पर्याप्त नहीं हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि उद्यमियों को उन्नत और नवोन्मेषी वित्तपोषण साधनों के माध्यम से सहायता प्रदान की जाएगी। ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा संचालित लखपति दीदी कार्यक्रम का उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों की सदस्यों को छोटे व्यवसाय शुरू करने और प्रति वर्ष कम से कम 1 लाख रुपये की स्थिर आय अर्जित करने में सहायता प्रदान करके ग्रामीण महिलाओं का समर्थन करना है। इसका लक्ष्य उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है।
इस कार्यक्रम के तहत महिलाओं को प्लंबिंग, एलईडी बल्ब बनाना और ड्रोन का उपयोग व मरम्मत जैसे कौशल सिखाए जाते हैं। अपने बजट भाषण में सीतारमण ने कहा कि इन प्रस्तावों से देश के युवाओं, महिलाओं, किसानों के साथ-साथ सार्वजनिक और निजी निवेश को भी सीधा लाभ होगा।