By अंकित सिंह | Dec 15, 2022
उत्तर प्रदेश की राजनीति भी दिलचस्प मानी जाती है। कहा जाता है कि दिल्ली की सत्ता में अगर आपको पहुंचना है तो उसके लिए उत्तर प्रदेश में अपनी पकड़ को मजबूत करनी होगी। दिल्ली में सरकार के लिए उत्तर प्रदेश में अपनी मजबूती काफी जरूरी है। 2022 के विधानसभा चुनाव में मिली हार से सबक लेते हुए अखिलेश यादव ने अब अपने सहयोगियों को फिर से विश्वास में लेने की शुरुआत कर दी है। सबसे पहले तो उन्होंने अपने रूठे चाचा शिवपाल यादव को मनाया। शिवपाल यादव को साथ लेते हुए उन्हें फिर से पार्टी में भी शामिल करा लिया। शिवपाल यादव ने भी साफ तौर पर कह दिया कि वह अब भाजपा से लड़ने में अखिलेश यादव की मदद करेंगे। शिवपाल यादव और अखिलेश के बीच जैसे ही सुलह हुई उसके बाद समाजवादी पार्टी की ओर से अपने पुराने सहयोगियों को फिर से साथ लेने की कोशिश शुरू हो गई है।
सूत्रों के मुताबिक भाजपा के साथ ओमप्रकाश राजभर की बात नहीं बन पाई और यही कारण है कि अब वह फिर से अपने पुराने गठबंधन में लौटने की कोशिश कर रहे हैं। ओमप्रकाश राजभर पहले ही संकेत दे चुके हैं कि अगर शिवपाल यादव पहल करें तो वह गठबंधन के लिए फिर से तैयार है। दूसरी ओर महान दल और उसके प्रमुख केशव देव मौर्य हैं। 2024 चुनाव को लेकर इनकी अपनी तैयारी है। वह समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन के लिए तैयार हैं। केशव देव मौर्य लगातार कह रहे हैं कि अगर आज के समय में भाजपा को कोई चुनौती उत्तर प्रदेश में दे सकता है तो वह अखिलेश यादव ही हैं। उन्होंने इस बात को भी स्वीकार किया कि अकेले हम भाजपा को चुनौती नहीं दे सकते। लेकिन सपा या बसपा से गठबंधन होता है तो हम उलटफेर कर सकते हैं।