By नीरज कुमार दुबे | May 08, 2026
चीन में भ्रष्टाचार विरोधी अभियान ने एक बार फिर दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। चीन की सैन्य अदालत ने पूर्व रक्षा मंत्रियों ली शांगफू और वेई फेंघे को रिश्वतखोरी और सत्ता के दुरुपयोग के मामलों में दो वर्ष की मोहलत के साथ मौत की सजा सुनाई है। यह फैसला चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के उस व्यापक अभियान का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके तहत सेना, प्रशासन, न्याय व्यवस्था और सरकारी कंपनियों में फैले भ्रष्टाचार पर कठोर कार्रवाई की जा रही है।
हम आपको याद दिला दें कि ली शांगफू वर्ष 2023 में केवल सात महीने तक रक्षा मंत्री रहे थे। इससे पहले वह सेना के उपकरण खरीद विभाग के प्रमुख थे, जहां उनके पास विशाल सैन्य बजट और हथियार खरीद से जुड़ी संवेदनशील जिम्मेदारियां थीं। जांच में उन पर आरोप लगा कि उन्होंने नियुक्तियों और रक्षा सौदों में अनुचित लाभ पहुंचाने के बदले भारी रिश्वत ली। वहीं उनके पूर्ववर्ती वेई फेंघे ने पांच वर्षों तक रक्षा मंत्री के रूप में काम किया और इससे पहले वह चीन की रॉकेट फोर्स के प्रमुख रह चुके थे, जो चीन के परमाणु हथियारों की जिम्मेदारी संभालती है। उन पर भी बड़े पैमाने पर रिश्वत लेने और अधिकारियों की नियुक्तियों में पक्षपात करने के आरोप सिद्ध हुए।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन दोनों शीर्ष सैन्य नेताओं को इतनी कठोर सजा दिया जाना केवल भ्रष्टाचार विरोधी कदम नहीं, बल्कि सेना पर राजनीतिक नियंत्रण मजबूत करने की रणनीति भी है। पिछले कुछ वर्षों में चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी से जुड़े सौ से अधिक वरिष्ठ अधिकारियों को हटाया गया है या उनके खिलाफ जांच शुरू हुई है। इनमें कई अधिकारी अचानक सार्वजनिक जीवन से गायब हो गए और बाद में उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले सामने आए।
हम आपको बता दें कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने वर्ष 2012 में सत्ता संभालने के बाद भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान को अपनी राजनीति का मुख्य आधार बनाया। उन्होंने बार बार कहा कि भ्रष्टाचार कम्युनिस्ट पार्टी के लिए सबसे बड़ा खतरा है। इस अभियान के तहत मंत्री, सैन्य अधिकारी, न्यायपालिका से जुड़े लोग और सरकारी कंपनियों के शीर्ष अधिकारी तक कार्रवाई की जद में आए हैं। चीन के सरकारी आंकड़ों के अनुसार लाखों अधिकारियों की जांच हो चुकी है और बड़ी संख्या में लोगों को सजा दी गई है।
हाल के वर्षों में कई चर्चित मामलों ने चीन की सख्त न्याय व्यवस्था को दुनिया के सामने रखा है। वर्ष 2024 में भीतरी मंगोलिया के पूर्व अधिकारी ली जियानपिंग को 421 मिलियन डॉलर से अधिक के भ्रष्टाचार मामले में फांसी दे दी गई थी। इसे चीन के इतिहास का सबसे बड़ा भ्रष्टाचार मामला बताया गया। इसी तरह सरकारी वित्तीय कंपनी के पूर्व अधिकारी बाई थ्येनहुई को 157 मिलियन डॉलर की रिश्वत लेने के मामले में मौत की सजा पर अमल करते हुए फांसी दी गई।
कृषि मंत्री रह चुके तांग रेनजियान को भी लगभग 38 मिलियन डॉलर की रिश्वत लेने के मामले में दो वर्ष की मोहलत के साथ मौत की सजा सुनाई गई। जांच में सामने आया कि उन्होंने सरकारी परियोजनाओं, ठेकों और नियुक्तियों में अनुचित लाभ पहुंचाकर भारी संपत्ति अर्जित की। इसी तरह पूर्व न्याय मंत्री तांग यीचुन को उम्रकैद की सजा सुनाई गई। अदालत ने कहा कि उन्होंने जमीन सौदों, कंपनियों की सूचीबद्धता और न्यायिक मामलों में हस्तक्षेप के बदले करोड़ों युआन की रिश्वत ली।
इन कार्रवाइयों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बहस छेड़ दी है। कई रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि चीन की सेना के शीर्ष स्तर पर फैला भ्रष्टाचार उसके सैन्य ढांचे, हथियार खरीद प्रणाली और परमाणु कमान की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करता है। विशेष रूप से उस समय जब हिंद प्रशांत क्षेत्र में सामरिक प्रतिस्पर्धा तेजी से बढ़ रही है, चीन के सैन्य नेतृत्व में लगातार हो रही उथल पुथल को गंभीर संकेत माना जा रहा है।
दूसरी ओर आलोचकों का कहना है कि भ्रष्टाचार विरोधी अभियान का उपयोग राजनीतिक विरोधियों को हटाने और सत्ता केंद्रीकरण के लिए भी किया जा रहा है। कई राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शी जिनपिंग अपने विरोधी गुटों को कमजोर करने के लिए भ्रष्टाचार के आरोपों को प्रभावी हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। हालांकि चीन की सरकार इस आरोप को खारिज करती रही है और उसका कहना है कि कानून के सामने सभी समान हैं।
हम आपको बता दें कि चीन में मौत की सजा की परंपरा बहुत पुरानी है। वहां हत्या, मादक पदार्थों की तस्करी और बड़े भ्रष्टाचार जैसे अपराधों में आज भी मौत की सजा दी जाती है। मानवाधिकार संगठनों के अनुसार दुनिया में सबसे अधिक फांसियां चीन में ही दी जाती हैं, हालांकि वास्तविक आंकड़े सरकारी गोपनीयता के कारण सार्वजनिक नहीं किए जाते। एमनेस्टी इंटरनेशनल का मानना है कि हर वर्ष हजारों लोगों को चीन में फांसी दी जाती है।
हाल ही में एक और मामला दुनिया भर में चर्चा का विषय बना था जिसमें हैकोउ शहर के पूर्व मेयर के यहां से कथित रूप से सोने की ईंटों और नकदी का विशाल भंडार मिलने की खबरें सामने आईं थीं। सोशल मीडिया पर फैली तस्वीरों और वीडियो में भारी मात्रा में सोना और नकदी दिखाई गई। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी, लेकिन अदालत ने यह जरूर माना कि अधिकारी ने सरकारी परियोजनाओं और जमीन सौदों में भारी भ्रष्टाचार किया था तथा अरबों डॉलर की संपत्ति जब्त की गई।
बहरहाल, विशेषज्ञों का कहना है कि चीन की सख्त सजाओं से भ्रष्टाचार पर कुछ हद तक अंकुश जरूर लगा है, लेकिन समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हुई। कई विद्वानों का मानना है कि जब तक स्वतंत्र निगरानी तंत्र और पारदर्शी संस्थागत व्यवस्था विकसित नहीं होगी, तब तक केवल अभियान आधारित कार्रवाई लंबे समय में पर्याप्त साबित नहीं होगी। इसके बावजूद चीन की सरकार अपने अभियान को लगातार और अधिक कठोर बनाती दिखाई दे रही है।
-नीरज कुमार दुबे