By अभिनय आकाश | Apr 04, 2026
बरेली में घर के अंदर नमाज पढ़ने का मामला इन दिनों सुर्खियों में बना हुआ है। जहां निजी संपत्ति में धार्मिक गतिविधियों और कानून व्यवस्था के बीच संतुलन को लेकर बहस तेज हो गई। इसी मामले में दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अहम टिप्पणी करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि घर के अंदर बड़ी संख्या में लोगों को इकट्ठा करना सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा बन सकता है। यह पूरा विवाद बरेली के एक इलाके से जुड़ा है। जहां याचिकाकर्ता तारिक खान पर आरोप था कि वह सुरक्षा का लाभ उठाकर अपने घर में रोजाना 50 से 60 लोगों को नमाज के लिए बुला रहा था। प्रशासन ने इस पर आपत्ति जताते हुए कोर्ट में हलफनामा और तस्वीरें पेश की थी। जिनमें भीड़ जुटने की स्थिति दिखाई गई थी। राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता अनूप त्रिवेदी ने दलील दी कि इस तरह की गतिविधि से इलाके की शांति और सौहार्द प्रभावित हो सकता है। इसलिए इसे अनुमति नहीं दी जा सकती। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति करिमा प्रसाद की खंडपीठ ने की। याचिकाकर्ता की तरफ से दिए गए जवाब में कोर्ट को भरोसा दिलाया गया कि भविष्य में विवादित स्थान पर बड़ी संख्या में लोगों को नमाज के लिए नहीं बुलाया जाएगा। इस संबंध में एक अंडरटेकिंग भी दी गई। याचिकाकर्ता की इस प्रतिबद्धता को रिकॉर्ड पर लेते हुए हाई कोर्ट ने याचिका का निस्तारण कर दिया। साथ ही साथ यह भी स्पष्ट कर दिया कि अगर भविष्य में अंडरटेकिंग का उल्लंघन होता है तो दोबारा भीड़ जुटाई जाती है। जिससे कानून व्यवस्था को खतरा पैदा होता है तो प्रशासन और पुलिस कानून के मुताबिक सख्त कारवाई करने के लिए स्वतंत्र होंगे। कोर्ट ने इस दौरान बरेली के जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को जारी अवमान नोटिस भी उनका निरस्त कर दिया है। इसके अलावा याचिकाकर्ता और अन्य के खिलाफ जारी चालान को तुरंत वापस लेने के निर्देश दिए हैं।
एएजी ने आगे कहा कि चूंकि अधिकारियों का दायित्व है कि वे कानून-व्यवस्था बनाए रखें, और यदि कानून-व्यवस्था में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की संभावना हो, तो अधिकारियों के पास कार्रवाई करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। इन कथनों के जवाब में याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि याचिकाकर्ता यह आश्वासन देता है कि वह संपत्ति पर नमाज़ अदा करने के लिए बड़ी संख्या में लोगों को इकट्ठा नहीं करेगा। दलीलें सुनने के बाद, पीठ ने अपने आदेश में कहा कि हमें आशा और विश्वास है कि याचिकाकर्ता अपने द्वारा दिए गए वचन का पालन करेगा। यदि याचिकाकर्ता उपरोक्त वचन का उल्लंघन करता है और इस याचिका में उल्लिखित संपत्ति पर बड़ी संख्या में लोगों को नमाज अदा करने के लिए इकट्ठा करता है, और यदि इससे क्षेत्र में शांति और व्यवस्था को खतरा होता है, तो प्रतिवादी अधिकारियों को कानून के अनुसार कार्रवाई करने की स्वतंत्रता है। पीठ ने आगे कहा कि हम राज्य अधिकारियों को याचिकाकर्ता और अन्य व्यक्तियों के विरुद्ध जारी चालान तुरंत वापस लेने का निर्देश देते हैं। अवमानना नोटिस भी रद्द किए जाते हैं। याचिकाकर्ता के वकील द्वारा यह कहने के बाद कि संपत्ति मालिक को अदालत द्वारा पहले दिए गए पुलिस सुरक्षा की आवश्यकता नहीं है, अदालत ने अधिकारियों को हसीन खान को दी गई सुरक्षा वापस लेने का निर्देश दिया।