एआई से मीडिया में प्रतिस्पर्द्धा बढ़ेगी लेकिन गुणवत्ता में आएगा निखार: यशवंत व्यास

By प्रेस विज्ञप्ति | Aug 22, 2025

भोपाल। एआई एक अच्छा साथी या सेवक हो सकता है। इसका मुकाबला ईमानदारी जैसे गुणों से किया जा सकता है। एआई से घबराने की कोई जरूरत नहीं। प्रिंट मीडिया को एआई से बहुत फायदा होगा। एआई के इस दौर में हाइपर लोकल दुनिया बहुत महत्वपूर्ण है, इससे भविष्य में प्रिंट मीडिया में फील्ड रिर्पोटिंग के जॉब्स बढ़ेंगे। उक्त बातें एमसीयू के सत्रारंभ कार्यक्रम 'अभ्युदय' के दूसरे दिन के पहले सत्र में वरिष्ठ पत्रकार और लेखक यशवंत व्यास ने कही। वे बतौर मुख्य वक्ता 'एआई के दौर में प्रिंट मीडिया' विषय पर व्‍याख्‍यान  दे रहे थे।

इस अवसर पर स्वागत भाषण में कुलगुरू श्री विजय मनोहर तिवारी ने कहा कि पत्रकारिता खासकर प्रिंट मीडिया की पत्रकारिता बहुत विशिष्ट रही है। बहुत से समाचार पत्रों और पत्रिकाओं ने इस क्षेत्र में मानदंड स्थापित किए हैं। अपने पत्रकारीय जीवन के अनुभवों को साझा किया और बताया कि किस तरह प्रतिष्ठित पत्रिकाओं ने उनके लेखन में अहम भूमिका का निर्वाह किया है।

'आवाज की दुनिया' विषय पर अपने विचार रखते हुए प्रख्‍यात रेडियो उद्घोषक श्री कमल शर्मा ने कहा कि शब्‍द 'बम' का काम भी करते हैं और 'मरहम' का भी। अच्‍छा बोलना चाहते हैं तो अच्‍छा सुनना सीखिये। शब्‍द उदास भी करते हैं और शब्‍दों में वह ताकत भी होती है जो खुशी से भर दे। शब्‍द ब्रम्‍ह भी है जिसकी हम प्राण प्रतिष्‍ठा करते हैं। अच्‍छी भाषा के साथ अच्‍छा बोलने का संस्‍कार ही उद्घोषक को सफल बनाते हैं। उन्होंने कहा कि शब्द की प्राण प्रतिष्ठा वाणी से ही होती है और वह प्रभावशाली हो जाता है। बोलते वक्त व्याकरण का ध्यान रखना जरूरी हो जाता है। उन्होंने ऑडियो मीडियम में आ रहे बदलावों सहित वाइस प्रोजेक्शन, रेडियो के लिए लेखन आदि विषयों पर विस्तार से बात की।

इसी सत्र में संवाद कौशल पर वरिष्ठ पत्रकार और कला समीक्षक श्री विनय उपाध्याय ने कहा कि संसार में भाषा के आने से पूर्व भी ध्वनियां मौजूद थीं।  यही ध्वनि भाषा की मातृभूमि हैं और शब्द उसकी पृष्ठभूमि। ज्ञान परंपरा का निर्माण वाचिक और शब्द जैसे अलग-अलग माध्यमों से हुआ है। शब्द के पास वाचिक शक्ति होती है। उन्होंने कहा कि शब्द हमारी स्मृति में ठहर जाते हैं। इसलिए अच्छा संवाद करने के लिए अच्छे शब्द हमारे पास होना जरूरी है। इसके लिए अच्छा पढ़ना और सुनना बहुत आवश्यक है।

एक अन्य सत्र में 'पत्रकारिता साहित्य एवं संस्कृति' विषय पर पद्मश्री विजयदत्त श्रीधर ने कहा कि भाषा के लिए हमारी निर्भरता तकनीक पर बढ़ना बहुत अच्छा नहीं है। पत्रकारिता में लोकमंगल की भावना को महत्वपूर्ण बताते हुए उन्होंने कहा कि भाषा पत्रकार का प्रमुख औजार है इसलिए मीडिया के लोगों में भाषा की अच्छी समझ आवश्यक है। इसके बाद इसी विषय पर इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र, नई दिल्ली के सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने कहा कि एक भारतीय बतौर हमारी पहली पहचान हमारी संस्कृति है। उन्होंने कहा कि भारत की ज्ञान परंपरा और संस्कृति बहुत समृद्ध है और यह पूरे विश्व को प्रभावित कर सकती हैं। डॉ. जोशी ने कहा कि यह युग मोबाइल का नहीं बल्कि भारत का युग है।

इसके बाद डिजिटल दौर में विज्ञापन और जनसंपर्क की रणनीतियों पर ब्रांड विशेषज्ञ डॉ. समीर कपूर ने अपना संबोधन दिया। उन्होंने कहा कि इस डिजिटल दौर में जनसंपर्क का क्षेत्र बहुत विस्तृत हुआ है और इसमें अनेक नए आयाम जुड़े हैं। इस क्षेत्र में आने वालों को बाजार और बदलती तकनीकों, प्रतिस्पर्द्धा की बारीक जानकारियां होना आवश्यक है।

इन विविध सत्रों में पत्रकारिता विभाग के समाचार पत्र विकल्प, जनसंचार विभाग के पत्र 'पहल' का विमोचन भी हुआ। पत्रकारिता विभाग की छात्राओं सुश्री प्रज्ञा एवं सुश्री विशाखा को पंडित रामेश्वर दयाल स्मृति तथा विज्ञापन एवं जनसंपर्क विभाग में 2023-2025 में सबसे अधिक अंक प्राप्त करने पर छात्रा सुश्री प्रतिष्ठा पवार को स्‍व. अम्‍बा प्रसाद स्‍मृति पुरस्‍कार भी दिए गए। इस अवसर पर पूर्व छात्राओं प्रियंका दूबे, सोनल पटेरिया, डॉ. शिवा श्रीवास्तव तथा रागेश्री गांगुली ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

विविध सत्रों का संचालन लोकेंद्र सिंह राजपूत, डॉ गरिमा पटेल, विवेक सावरीकर, डॉ. संदीप भट्ट ने किया तथा आभार डॉ. राखी तिवारी विभागाध्यक्ष पत्रकारिता विभाग, प्रो. संजय द्विवेदी, विभागाध्यक्ष जनसंचार विभाग, डॉ. आरती सारंग विभागाध्यक्ष पुस्तकालय विभाग तथा डॉ. पवित्र श्रीवास्तव विभागाध्यक्ष विज्ञापन एवं जनसंपर्क विभाग ने किया।

आज के सत्र

सत्रारंभ कार्यक्रम अभ्‍युदय के तीसरे दिन दिनांक 22 अगस्‍त 2025 को फिल्‍म समीक्षा विषय पर प्रख्‍यात पत्रकार अनंत विजय का उद्बोधन होगा। सिनेमा लेखन के विविध आयाम विषय पर फिल्‍म निर्माता एवं लेखक विपुल रावल अपनी बात रखेंगे। इलेक्‍ट्रानिक मीडिया के विभिन्‍न आयामों पर वरिष्‍ठ पत्रकार ब्रजेश सिंह एवं बालकृष्‍ण अपने विचार रखेंगे। सेंसर टेक्‍नोलॉजी पर चिराग जैन एवं बीएनएस एवं मीडिया कानून पर शिखा छिब्‍बर के व्‍याख्‍यान होंगे। विश्‍वविद्यालय की पूर्व छात्राएं सरिता चौरसिया, अदिति राजपूत एवं निधि अरोड़ा मैं और मेरा विश्‍वविद्यालय पर विद्यार्थियों से अपने अनुभव साझा करेंगी।

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