बिजली संशोधन बिल-2020 को लेकर AIPEF संगठन ने लिखा PM मोदी को पत्र

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Sep 21, 2020

नयी दिल्ली।बिजली क्षेत्र में कार्यरत इंजीनियरियों के संगठन एआईपीईएफ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बिजली (संशोधन) विधेयक 2020 में प्रस्तावित बदलावों को लेकर जल्दबाजी नहीं करने का आग्रह करते हुये इसे लेकर संबधित पक्षों द्वारा जतायी गयी आपत्तियों पर विचार करने का अनुरोध किया है। ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन (एआईपीईएफ) ने विधेयक को विचार के लिये प्रवर समिति के पास भेजने की मांग की है। संगठन ने एक बयान में कहा, ‘‘एआईपीईएफ ने प्रधानमंत्री से सभी पक्षों की चिंताओं को दूर करने और बिजली (संशोधन) विधेयक 2020 को पारित कराने को लेकर जल्दबाजी नहीं करने का आग्रह किया है।’’ बयान के अनुसार एआईपीईएफ ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर कहा है कि सरकार को 11 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों और अन्य पक्षों के सुझावों के बाद अब संशोधित मसौदे को जारी करना चाहिए। ताकि यह पता चल सके कि इसमें सुझावों को शामिल किया गया है।

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संगठन का कहना है कि वे संशोधित विधेयक के मसौदे का विरोध कर रहे हैं क्योंकि इसमें सहयोगपूर्ण संघवाद के सिद्धांतों का उल्लंघन होने का खतरा है। एआईपीईएफ ने कहा कि प्रस्तावित संशोधित विधेयक से केंद्र की शक्तियां बढ़ेंगी जबकि यह राज्यों के हितों को नुकसान पहुंचाएगा। उसने कहा कि राज्यों को आशंका है कि यह उसके मुफ्त बिजली कार्यक्रमोंको प्रभावित करेगा और किसानों तथा समाज के गरीब तबकों के हितों के खिलाफ काम करेगा। संगठन ने कहा, ‘‘यहां तक कि निजी और सरकारी क्षेत्र के विशेषज्ञों का भी मानना है कि सीधे किसानों और घरेलू उपभोक्ताओं के खातों में सब्सिडी का अंतरण व्यवहारिक रूप से संभव नहीं हो सकता क्योंकि राज्यों द्वारा समय पर भुगतान सुनिश्चित नहीं हो सकेगा।’’

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एआईपीईएफ ने कहा कि सरकार को मसौदा संशोधन विधेयक को लेकर सावधानीपूर्वक काम करना चाहिए। अगर यह पारित होता है, बिजली क्षेत्र सरकार के नियंत्रण से निजी क्षेत्र के हाथों में चला जाएगा। संगठन ने कहा कि सरकार का निजीकरण को लेकर विचार सहयोगपूर्ण संघवाद के खिलाफ है। सरकार टैरिफ पॉलिसी की आड़ में जो काम कर रही, वह काफी आपत्तिजनक है। उसने कहा कि संशोधन विधेयक के मसौदे पर गहराई से और खुले मन से विचार की जरूरत है। केंद्र्र को विधेयक को पारित कराने को लेकर जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए और जो अंतर है, उसे पूरा करने के लिये संरचनात्मक रूपरेखा तैयार करनी चाहिए। संगठन ने मांग की कि अगर विधेयक को संसद में पेश किया जाता है तो विधेयक को स्थायी समिति के पास भेजा जाना चाहिए।

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