By Ankit Jaiswal | Aug 09, 2026
बेंगलुरु से शुरू हुई एक नई पहल आने वाले समय में भारत के शहरों में सफर का तरीका बदल सकती है। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने कहा है कि भारत में बिजली से चलने वाली हवाई टैक्सी वर्ष 2028 तक उड़ान भर सकती है। इसके लिए अगले साल से परीक्षण की प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, अगले साल सारला एविएशन अपने विमान को परीक्षण के चरण में ले जाने की तैयारी कर रही है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय और नागर विमानन महानिदेशालय भी कंपनी के साथ मिलकर सुरक्षा, परीक्षण और नियमों से जुड़े पहलुओं पर काम कर रहे हैं। गौरतलब है कि बिजली से चलने वाले ऐसे विमान को अभी विमानन क्षेत्र की एक नई श्रेणी माना जा रहा है, जिसमें विमान, हेलीकॉप्टर और ड्रोन जैसी तकनीकों की खूबियां शामिल हैं।
सारला एविएशन के सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी एड्रियन श्मिट के अनुसार, कंपनी के विमान में छह यात्रियों और एक चालक के बैठने की व्यवस्था होगी। विमान को हवा में ऊपर उठाने के लिए छह बिजली मोटर और आगे बढ़ाने के लिए पीछे एक और बिजली मोटर लगाई जाएगी। यानी इसमें कुल सात बिजली मोटर होंगी। फिलहाल इसे चालक द्वारा उड़ाए जाने के हिसाब से तैयार किया जा रहा है।
कंपनी की योजना विमान की मुख्य ऊर्जा व्यवस्था को बिजली आधारित रखने की है। हालांकि भविष्य में उड़ान के दौरान बैटरी को दोबारा चार्ज करने के लिए एक अतिरिक्त ऊर्जा प्रणाली लगाने की संभावना पर भी विचार किया जा रहा है।
बता दें कि सारला एविएशन में कई बड़े निवेशकों ने पैसा लगाया है। इनमें एक्सेल, निखिल कामथ, बिन्नी बंसल, श्रीहर्ष मजेटी, अभिराज सिंह भाल, अभिषेक गोयल, रमाकांत शर्मा और सुजीत कुमार जैसे नाम शामिल हैं। इंडिगो वेंचर्स ने भी कंपनी में निवेश किया है।
राम मोहन नायडू ने कहा कि इस तकनीक की सफलता के लिए केवल सुरक्षा ही नहीं, बल्कि किराया भी अहम होगा। भारत में ही विमान के ज्यादातर हिस्से बनाने से लागत कम करने में मदद मिल सकती है। उनके मुताबिक हवाई टैक्सी से हवाई अड्डे और शहर के बीच का सफर दो घंटे से घटकर करीब 20 से 30 मिनट तक हो सकता है।
इस तकनीक का इस्तेमाल केवल यात्रियों को लाने-ले जाने तक सीमित नहीं रहेगा। चिकित्सा आपात स्थिति, हवाई एंबुलेंस और सामान पहुंचाने जैसे कामों में भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। बेंगलुरु हवाई अड्डे ने शहर और हवाई अड्डे के बीच संपर्क के लिए सारला एविएशन के साथ समझौता किया है। मणिपाल अस्पताल ने भी संभावित हवाई एंबुलेंस सेवा के लिए कंपनी के साथ समझौता किया है।
सरकार और कंपनी को उम्मीद है कि भारत में इस तकनीक के विकसित होने से आगे चलकर देश में बने ऐसे विमानों का विदेशों में भी बाजार तैयार हो सकता है। अगर सुरक्षा, लागत और नियमों से जुड़ी चुनौतियां समय पर दूर होती हैं, तो 2028 भारत के शहरी परिवहन के लिए एक अहम साल साबित हो सकता है।