By अभिनय आकाश | Jul 28, 2026
ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने मंगलवार को प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार हो रहे पेपर लीक को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने पेपर लीक रोकने वाले मौजूदा कानूनों को "बेअसर" बताया और कहा कि ये कानून सिस्टम की कमियों को दूर करने में नाकाम रहे हैं। पटना में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए, बोरा ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को खत्म करने या उसके ढांचे में बड़े कानूनी बदलाव करने पर ज़ोर दिया, ताकि सबसे ऊंचे प्रशासनिक स्तरों पर जवाबदेही तय की जा सके। उन्होंने नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP) की भी आलोचना की, जिसके तहत देश भर में यूनिवर्सिटी, मेडिकल और इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं को एक तरह से सेंट्रलाइज़ कर दिया गया है। आरोप है कि इससे परीक्षा सिस्टम में पेपर लीक का खतरा बढ़ गया है।
AISA प्रेसिडेंट ने इस बात पर ज़ोर दिया कि सज़ा बढ़ाना—जैसे जेल की सज़ा को तीन साल से बढ़ाकर पाँच साल करना या जुर्माना 1 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये करना—महज़ एक सतही उपाय (quantitative band-aid) है, न कि कोई ठोस या ढांचागत समाधान। उन्होंने कहा, "हम इसे एक बेअसर कानून कह रहे हैं क्योंकि जितने भी बदलाव किए गए हैं, वे सिर्फ़ मात्रा या संख्या से जुड़े हैं। जहाँ सज़ा 3 साल की थी, उसे 5 साल कर दिया गया है; जहाँ जुर्माना 1 करोड़ रुपये का था, उसे 5 करोड़ रुपये कर दिया गया है। ऐसा लगता है मानो सज़ा की गंभीरता बढ़ाने से ही पेपर लीक अपने-आप रुक जाएंगे। बोरा ने केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि ऐसे तरीके सरकार का यह दिखाने का एक ज़रिया हैं कि वे परीक्षा में गड़बड़ियों के ख़िलाफ़ सख़्त कदम उठा रही हैं, जबकि ज़मीनी स्तर पर इनका कोई असर नहीं होता। उन्होंने कहा, "हम समझते हैं कि सरकार की यह कोशिश असल में कुछ न करते हुए भी बहुत कुछ करने का दिखावा करने की है, ताकि ज़मीनी स्तर पर पेपर लीक के पूरे नेटवर्क पर कोई असर न पड़े। गौरतलब है कि बोरा ने जंतर-मंतर पर छात्रों के 37 दिनों तक चले बड़े विरोध-प्रदर्शन के दौरान एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक के साथ 23 दिनों की भूख हड़ताल की थी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग की थी।