Ajit Doval China Visit: ब्रिक्स समिट से पहले डोभाल का चीन दौरा, वांग यी के साथ सीमा विवाद पर होगी वार्ता

By एकता | Aug 23, 2026

भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल सोमवार को बीजिंग जाएंगे। वह अपने चीनी समकक्ष और विदेश मंत्री वांग यी के साथ भारत-चीन सीमा मुद्दे पर 'विशेष प्रतिनिधियों' की वार्ता में हिस्सा लेंगे। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, डोभाल और वांग यी के बीच मंगलवार को 25वें दौर की विशेष प्रतिनिधि वार्ता आयोजित की जाएगी।

शीर्ष बैठक के मायने क्या?

यह वार्ता नई दिल्ली में 12-13 सितंबर को आयोजित होने जा रहे 'ब्रिक्स शिखर सम्मेलन' में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भारत यात्रा से ठीक पहले हो रही है। दोनों पक्षों के अधिकारी चीनी राष्ट्रपति की भागीदारी को लेकर आशावादी हैं। इस दौरान ब्रिक्स से अलग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए अलग से बैठक होने का अवसर मिल सकता है। दोनों शीर्ष नेताओं की आखिरी मुलाकात अगस्त 2025 में तियानजिन में 'शंघाई सहयोग संगठन' शिखर सम्मेलन के दौरान हुई थी।

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विदेश मंत्री जयशंकर का कड़ा संदेश

डोभाल-वांग वार्ता से ठीक पहले विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शनिवार को नई दिल्ली में स्पष्ट किया कि सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता ही चीन के साथ अच्छे द्विपक्षीय संबंधों की पहली शर्त है। जयशंकर ने कहा कि 2020 से 2024 के बीच दोनों देशों के रिश्ते बेहद खराब दौर से गुजरे, जो मुख्य रूप से सीमा पर पैदा हुई स्थितियों का परिणाम था। उन्होंने दोहराया कि सीमा की स्थिति ही काफी हद तक दोनों देशों के समग्र संबंधों का भविष्य तय करेगी।

अरुणाचल प्रदेश पर गतिरोध

हाल के हफ्तों में अरुणाचल प्रदेश के अपर सुबनसिरी क्षेत्र में चीनी सैनिकों की गतिविधियों की खबरें सामने आई थीं। इन रिपोर्टों के बीच 12 अगस्त को चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने दावा किया था कि भारत-चीन सीमा पर स्थिति फिलहाल सामान्य और स्थिर है। गुओ ने बताया कि दोनों देशों ने परामर्श और समन्वय के लिए कार्यकारी तंत्र की 36वीं बैठक की है, जिसमें संवाद बनाए रखने पर सहमति बनी। वहीं भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 11 अगस्त को कहा था कि भारत सीमाई मुद्दों को अत्यंत गंभीर मानता है और एलएसी पर शांति बनाए रखना सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है।

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भौगोलिक नामों पर विवाद

भारत ने अरुणाचल प्रदेश के 27 स्थानों और भौगोलिक स्थलों के नाम बदलने की चीन की कोशिशों को पूरी तरह खारिज कर दिया था। नई दिल्ली ने साफ किया कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अखंड और अभिन्न हिस्सा है और इस सच्चाई को बदला नहीं जा सकता। चीन, जो अरुणाचल को दक्षिण तिब्बत का हिस्सा बताता है, 2017 से इन क्षेत्रों के अपने नाम जारी करता रहा है। भारत ने चीन के इस कदम को पूरी तरह से व्यर्थ बताया है।

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