विधानसभा चुनाव पास आये तो अखिलेश यादव ने भी मंदिरों में दर्शन शुरू कर दिये

By संजय सक्सेना | Mar 03, 2021

2017 में सत्ता गंवाने के बाद पिछले चार वर्षों से सक्रिय राजनीति से दूर सोशल मीडिया पर ट्विट करके अपनी राजनीति चमका रहे सपा प्रमुख अखिलेश यादव चुनावी वर्ष में काफी सक्रिय हो गए हैं। अखिलेश घर से बाहर निकल कर लोगों से मिल रहे हैं। मंदिर जा रहे हैं। महापुरूषों को याद कर रहे हैं। समाजवाद के पुरोधा डॉ. राम मनोहर लोहिया का गुणगान कर रहे हैं। आश्चर्यजनक रूप से अब अखिलेश जहां भी जाते हैं, वहां कई समाजवादी नेताओं के साथ-साथ उन संविधान निर्माता बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर का भी चित्र नजर आने लगा है। कहीं इसकी वजह यह तो नहीं कि उन्हें (अखिलेश) लग रहा हो कि बसपा सुप्रीमो मायावती सियासी रूप से कमजोर पड़ती जा रही हैं।

   

दरअसल, होता यह आया है कि भारतीय जनता पार्टी को छोड़ अन्य दलों के मिर्जापुर आने वाले नेता धर्मनिरपेक्ष दिखने के लिए विंध्यवासिनी मंदिर में दर्शन के बाद कंतित शरीफ दरगाह में मत्था टेकने जरूर जाते हैं। यहां अखिलेश के चादर चढ़ाने का इंतजार भी होता रहा लेकिन अखिलेश वहां नहीं पहुंचे। इसको लेकर दरगाह के संचालक भी काफी असहज महसूस कर रहे हैं। बताते चलें कि मिर्जापुर पहुंचकर अखिलेश यादव ने स्थानीय सर्किट हाउस में रात्रि विश्राम किया और मां विंध्यवासिनी मंदिर पहुंचे और मां की चुनरी लेकर दर्शन किए। अखिलेश ने विंध्यवासिनी देवी को कुलदेवी बताकर दर्शन किए। इसके बाद सूचना थी कि अखिलेश कंतित शरीफ की हजरत इस्माइल चिश्ती दरगाह पर चादरपोशी के लिए जाएंगे लेकिन वह मिर्जापुर शहर रवाना हो गए। सपा इस पर सफाई दे रही है कि समय की कमी होने के कारण अखिलेश दरगाह नहीं पहुच सके क्योंकि अखिलेश जी को वाराणसी के संत रविदास मंदिर भी जाना था, इस कारण वह दरगाह तक नहीं जा सके। पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मिर्जापुर दौरे पर सक्तेशगढ़ आश्रम में भी दर्शन पूजन किया थे।

दरगाह न जाकर अखिलेश माघ पूर्णिमा के अवसर पर वाराणसी स्थित रविदास मंदिर पहुंचे। यहां इससे पहले केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी दर्शन कर चुकी थीं। फिर अखिलेश ने भी यहां पूजा पाठ किया। इसे दलित राजनीति से जोड़कर देखा गया लेकिन समाजवादी पार्टी का कोर वोटबैंक यादव-मुस्लिम के गठजोड़ को माना जाता है। ऐसे में सवाल यही है कि क्या वाकई अखिलेश ने अपनी रणनीति बदल ली है। राजनैतिक पंडित बताते हैं कि अखिलेश यादव की सियासत में यह बदलाव ऐसे ही नहीं आया है।

इसे भी पढ़ें: छोटी बहू अपर्णा यादव ने मुलायम और अखिलेश, दोनों को दिखाया आईना

गौरतलब है कि समाजवादी पार्टी की तुष्टिकरण की सियासत के चलते पिछले कुछ चुनावों से सपा का गैर मुस्लिम वोट बैंक खिसकता जा रहा था। यहां तक की यादव जिन्हें समाजवादी पार्टी का कोर वोटर माना जाता है, चुनाव के समय उसका भी झुकाव बीजेपी की तरफ हो गया था। जिस कारण समाजवादी पार्टी को बुरी तरह से हार का सामना करना पड़ा था। तात्पर्य यह है कि सपा को समझ में आ गया है कि जैसे बसपा सुप्रीमो मायावती केवल दलित वोटों के सत्ता की सीढ़ियां नहीं चढ़ पाती थीं, वैसे ही सपा भी सिर्फ मुस्लिम वोटरों के सहारे सरकार नहीं बना सकती है। मायावती ने जब ‘सर्वजन हिताय-सर्वजन सुखाय’ का नारा दिया था, तभी यूपी में उनकी बहुमत के साथ सरकार बनी थी। सपा के पास मुस्लिम-यादव समीकरण था, लेकिन मोदी की हिन्दुत्व वाली सियासत ने सपा के यादव वोट बैंक में सेंधमारी कर दी थी, जिसके चलते ही अखिलेश अर्श से फर्श पर आ गए थे। इसी के बाद पिछले कुछ समय से अखिलेश सॉफ्ट हिंदुत्व की राजनीति की ओर बढ़ते नजर आ रहे हैं। इसके पीछे उनकी योजना यही है कि अगर चुनाव में बीजेपी धर्म के कार्ड का इस्तेमाल करे तो वह उसका बखूबी जवाब दे सकें।

इससे पहले अखिलेश साल की शुरुआत में लखनऊ स्थित पार्टी कार्यालय में अयोध्या से आए महंत और मौलवियों से मिले। उन्होंने इस मौके पर ऐलान किया था कि अगर यूपी में एसपी की सरकार बनती है तो भगवान श्रीराम की नगरी में मठ-मंदिर, मस्जिद-गुरुद्वारा, गिरजाघर और आश्रम पर कोई टैक्स नहीं लगेगा। इसी साल 8 जनवरी को अखिलेश चित्रकूट के लक्ष्मण पहाड़ी मंदिर पहुंचे थे और कामदगिरि मंदिर की परिक्रमा करते दिखाई दिए थे। इससे पूर्व 15 दिसंबर 2020 को अखिलेश यादव ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण वाली जगह का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने अपनी पार्टी की ओर किए गए धार्मिक कार्यों को गिनाने की कोशिश की। इसके बाद से अखिलेश लगातार मंदिरों को चक्कर लगा रहे हैं। अखिलेश जहां भी जा रहे हैं वहां के प्रमुख मंदिरों के दर्शन कर रहे हैं। यह बात उनके मुस्लिम वोटरों को कितनी रास आएगी, यह तो समय ही बताएगा।

-संजय सक्सेना

प्रमुख खबरें

Team India में अब चलेगी Gautam Gambhir की? Suryakumar Yadav की Captaincy पर लेंगे आखिरी फैसला!

TVK कैबिनेट में शामिल होने पर Thirumavalavan की सफाई, बोले- VCK कार्यकर्ताओं ने मुझे मजबूर किया

पाक आर्मी चीफ Asim Munir की तेहरान यात्रा सफल? USA को उम्मीद, Iran आज मान लेगा डील

Rajnath Singh का Shirdi से ऐलान: कोई ताकत नहीं रोक सकती, India बनेगा Top Arms Exporter