By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Oct 31, 2026
अदालत परिसरों में जारी विरोध और कामकाज में बाधा के बीच इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि युवा अधिवक्ताओं को सोशल मीडिया पर ‘लाइक’ बढ़ाने के बजाय अपने अध्ययन, मुकदमों की तैयारी और पेशेवर जीवन को संवारने पर ध्यान देना चाहिए। न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल ने कहा कि उच्च न्यायालय के कामकाज को लेकर सोशल मीडिया पर कुछ ऐसी पोस्ट की जा रही हैं, जिनमें अधूरी और भ्रामक जानकारी दी गई है। इससे बार और पीठ के बीच अनावश्यक मतभेद पैदा हो सकते हैं।
अदालत ने स्पष्ट किया कि अधिवक्ताओं की गरिमा में निजी और सरकारी, दोनों क्षेत्रों में कार्यरत वकील शामिल हैं। यह मामला सुनवाई के दौरान उस समय सामने आया, जब विरोध प्रदर्शन कर रहे कुछ अधिवक्ताओं ने अन्य वकीलों को न्यायमूर्ति देशवाल के अदालत कक्ष में जाने से रोक दिया। इस दौरान अदालत ने एक महिला अधिवक्ता की आवाज सुनी, जो अपने मुकदमे की सुनवाई के लिए अदालत कक्ष में प्रवेश करना चाहती थी।
अदालत ने कहा कि न्यायिक कार्यवाही केवल इसलिए नहीं रोकी जा सकती कि अधिवक्ताओं का एक वर्ग नहीं चाहता कि अदालत में कामकाज हो, जबकि अधिकांश वकील अपने मुकदमों की पैरवी करना चाहते हैं। अदालत ने कहा, ‘‘युवा अधिवक्ताओं को सोशल मीडिया पर अपनी पोस्ट पर लाइक बढ़ाने के बजाय पढ़ाई और अपने मुकदमों की तैयारी पर ध्यान देना चाहिए, ताकि वे अपना करियर बना सकें।’’ अदालत ने कहा, ‘‘कुछ अधिवक्ताओं का ऐसा आचरण बार और अदालत की प्रतिष्ठा तथा गरिमा के अनुकूल नहीं है।’’