By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Oct 10, 2026
क्रूरता और दहेज के लिए दर्ज प्राथमिकी रद्द करते हुए इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कम समय तक चलने वाली शादियों में आपराधिक कानून के गलत इस्तेमाल के खिलाफ चेतावनी दी है। वैवाहिक कलह को आपराधिक मुकदमे में बदलने के खतरों पर जोर देते हुए न्यायमूर्ति सी.डी. सिंह और न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने आगरा में दर्ज प्राथमिकी रद्द कर दी। इस प्राथमिकी में दहेज के लिए उत्पीड़न, मारपीट और गला घोटकर मारने के प्रयास का आरोप लगाया गया था।
अदालत ने पाया कि साथ रहने के दौरान कथित घटनाओं के संबंध में घरेलू हिंसा की कोई शिकायत, पीसीआर कॉल या पुलिस की कोई तत्काल कार्रवाई रिकॉर्ड में नहीं लाई गई थी। जबकि प्राथमिकी में दहेज की मांग और उत्पीड़न, खाना देने से मना करने, धमकी, स्त्रीधन रखने और गला घोटकर मारने के प्रयास का आरोप लगाया गया है। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि हालांकि दहेज से जुड़ी हिंसा और क्रूरता से महिलाओं की सुरक्षा एक कानूनी और संवैधानिक आवश्यकता है, लेकिन इसके दुरुपयोग की संभावना को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।