Pilot Safety Advisory | हवाई रास्तों पर युद्ध का साया! ALPA India की पायलटों को चेतावनी, 'संघर्ष क्षेत्रों में उड़ान से पहले खुद करें जोखिम का आकलन'

By रेनू तिवारी | Mar 17, 2026

अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच छिड़े भीषण संघर्ष ने अंतरराष्ट्रीय उड़ान मार्गों को अत्यधिक जोखिम भरा बना दिया है। इस संकट के बीच, भारतीय पायलटों के प्रमुख संगठन 'एयर लाइन पायलट्स एसोसिएशन इंडिया' (ALPA India) ने मंगलवार को सभी लाइसेंसधारी पायलटों के लिए एक विस्तृत एडवाइजरी जारी की है। संगठन ने पायलटों से अपील की है कि वे युद्ध प्रभावित क्षेत्रों में उड़ान भरने से पहले सुरक्षा और बीमा कवर की सावधानीपूर्वक समीक्षा करें।

पायलट संगठन ने कहा कि सदस्यों को विमानन बीमा से जुड़े संभावित प्रभावों, विशेषकर युद्ध जोखिम से संबंधित प्रावधानों पर ध्यान देना चाहिए। कुछ परिस्थितियों में बीमा प्रदाता संघर्ष क्षेत्रों या उच्च जोखिम वाले हवाई क्षेत्रों में संचालन के लिए बीमा ‘कवर’ को सीमित या वापस ले सकते हैं। एयर लाइन पायलट्स एसोसिएशन इंडिया ने कहा कि पश्चिम एशिया के कुछ हिस्सों में तेजी से बदलते और संभावित रूप से खतरनाक सुरक्षा हालात के कारण नागर विमानन संचालन के लिए जोखिम बढ़ गया है।

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इन जोखिमों में हवाई क्षेत्र का बंद होना, मिसाइल व ड्रोन गतिविधियां, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध से हस्तक्षेप तथा प्रभावित क्षेत्रों से गुजर रहे नागरिक विमानों की गलत पहचान की संभावना शामिल हैं। परामर्श में कहा गया कि ऐसी परिस्थितियों में चालक दल के लिए उपलब्ध बीमा सुरक्षा की सीमा को लेकर अस्पष्टता हो सकती है। संगठन ने कहा, ‘‘ हम सभी पायलट को सलाह देते हैं कि वे पश्चिम एशिया के तनावग्रस्त क्षेत्रों में जाने, वहां से आने या वहां से गुजरने के दौरान विशेष सतर्कता बरतें व उड़ान से पहले सभी परिचालन ‘ब्रीफिंग’, ‘ नोटिस टू एयरमेन’ (नोटैम) और कंपनी की सलाहों की सावधानीपूर्वक समीक्षा करें।’’

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साथ ही पायलट से कहा गया कि वे अपने पेशेवर विवेक का इस्तेमाल करें, आवश्यकता पड़ने पर स्थापित माध्यमों से सुरक्षा संबंधी चिंताओं को उठाएं और प्रस्तावित उड़ान के लिए बीमा व युद्ध जोखिम सुरक्षा को लेकर अपने संचालक से स्पष्ट जानकारी प्राप्त करें। संगठन ने यह भी कहा कि भले ही विमानन कंपनियां नियामकीय अनुमति या परिचालन कारणों से कुछ हवाई क्षेत्रों में उड़ानों का संचालन जारी रखें, लेकिन पायलटों को यह ध्यान रखना चाहिए कि इन क्षेत्रों में जोखिम का स्तर अचानक बदल सकता है।

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