By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Aug 12, 2021
वाशिंगटन। अमेरिकी सैन्य नेतृत्व को जितनी आशंका थी, उससे कहीं अधिक तेजी से अफगानिस्तान सरकार की सेना युद्धग्रस्त देश में तालिबान के सामने पस्त हो रही है। लेकिन व्हाइट हाउस, पेंटागन या अमेरिकी जनता के बीच इसे रोकने का ज़ज्बा कम ही नजर आ रहा है और अब शायद कुछ करने के लिए बहुत देर भी हो चुकी है। अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन के अफगानिस्तान से अपने सैनिकों की पूर्ण वापसी की घोषणा के बाद युद्धग्रस्त देश में ये हालात उत्पन्न हो रहे हैं। बाइडन ने स्पष्ट कर दिया है कि उनका पिछले वसंत में किए गए निर्णय को उलटने का कोई इरादा नहीं है, जबकि इसके परिणाम तालिबान के अधिग्रहण की ओर इशारा करते हैं।
विद्रोहियों के पास कोई हवाई बल नहीं है और उनकी संख्या अमेरिका द्वारा प्रशिक्षित अफगान रक्षा बलों से कम है, लेकिन फिर भी उन्होंने आश्चर्यजनक गति से क्षेत्र पर कब्जा कर लिया है। पेंटागन के मुख्य प्रवक्ता जॉन किर्बी ने कहा कि अफगानिस्तान के पास अब भी खुद को अंतिम हार से बचाने का यमय है। किर्बी ने पत्रकारों से कहा, ‘‘ काबुल के पतन सहित कोई भी संभावित परिणाम अपरिहार्य नहीं होना चाहिए। ऐसा नहीं होना चाहिए। यह वास्तव में इस बात पर निर्भर करता है कि इसे बदलने के लिए अफगानिस्तान किस तरह का राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व जुटा सकता है।’’ बाइडन ने भी एक दिन पहले पत्रकारों से कहा था कि अमेरिकी सैनिकों ने पिछले 20 वर्षों में अफगानिस्तान की सहायता के लिए वह सब कुछ किया है जो वे कर सकते थे। उन्होंने कहा था, ‘‘ उन्हें अपने लिए, अपने देश के लिए लड़ना होगा।