America का नया H-1B Visa रूल, Indian IT Companies और पेशेवरों को लग सकता है बड़ा झटका.

By Ankit Jaiswal | May 13, 2026

अमेरिका में एच-1बी वीजा को लेकर एक बड़ा बदलाव पेश किया गया है, जिसका असर भारतीय पेशेवरों और तकनीकी कंपनियों पर पड़ सकता है। अमेरिकी सरकार ने विदेशी कर्मचारियों को दिए जाने वाले न्यूनतम वेतन में बड़ी बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा है। सरकार का कहना है कि यह कदम अमेरिकी कर्मचारियों के हितों की सुरक्षा के लिए जरूरी है।

प्रस्तावित नियम के तहत चार अलग-अलग वेतन श्रेणियों में लगभग 20 से 33 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की बात कही गई है। अभी शुरुआती यानी एंट्री लेवल कर्मचारियों के लिए न्यूनतम वार्षिक वेतन 73,279 डॉलर तय है, जिसे बढ़ाकर 97,746 डॉलर करने का प्रस्ताव रखा गया है। इसी तरह दूसरे स्तर का वेतन 98,987 डॉलर से बढ़ाकर 1,23,212 डॉलर किया जा सकता है।

तीसरे स्तर के कर्मचारियों के लिए वेतन सीमा 1,21,979 डॉलर से बढ़कर 1,47,333 डॉलर और चौथे स्तर के लिए 1,44,202 डॉलर से बढ़ाकर 1,75,464 डॉलर करने का प्रस्ताव है। हालांकि अलग-अलग शहरों में वेतन मानकों में अंतर हो सकता है।

गौरतलब है कि यह बदलाव केवल एच-1बी वीजा तक सीमित नहीं रहेगा। एच-1बी1, ई-3 और स्थायी श्रम प्रमाणन कार्यक्रमों पर भी यह नियम लागू हो सकता है। अमेरिकी प्रशासन का तर्क है कि मौजूदा वेतन ढांचा करीब 20 साल पुराना है और इसमें समय के अनुसार बदलाव नहीं किया गया। इसके कारण कंपनियां विदेशी कर्मचारियों को अमेरिकी कर्मचारियों के मुकाबले कम वेतन पर नियुक्त कर रही थीं।

इस प्रस्ताव को लेकर अमेरिका में बहस भी तेज हो गई है। समर्थकों का कहना है कि इससे वेतन प्रणाली अधिक संतुलित होगी और अमेरिकी कर्मचारियों के हित सुरक्षित रहेंगे। वहीं आलोचकों का मानना है कि छोटे और मध्यम स्तर की कंपनियों के लिए विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करना मुश्किल हो जाएगा, खासकर शुरुआती पदों पर।

बता दें कि इससे पहले डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने 2020 में भी वेतन नियमों में बदलाव की कोशिश की थी, लेकिन कानूनी चुनौतियों के बाद उस फैसले को वापस लेना पड़ा था। इस बार सरकार सार्वजनिक सुझाव प्रक्रिया का पालन कर रही है ताकि नियम को कानूनी मजबूती मिल सके।

इसके अलावा सितंबर 2025 में अमेरिकी प्रशासन ने अमेरिका से बाहर मौजूद एच-1बी उम्मीदवारों पर एक लाख डॉलर का शुल्क भी लगाया था। उसी आदेश के तहत श्रम विभाग को वेतन मानकों में बदलाव की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया गया था।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह नियम लागू होता है तो भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों और अमेरिका में नौकरी की तैयारी कर रहे हजारों भारतीय पेशेवरों पर सीधा असर पड़ सकता है। खासकर वे कंपनियां जो कम लागत पर विदेशी प्रतिभाओं को नियुक्त करती हैं, उन्हें अपनी रणनीति बदलनी पड़ सकती है।

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