By नीरज कुमार दुबे | Jul 17, 2026
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का पश्चिम बंगाल दौरा ऐसे समय शुरू हो रहा है जब भारत-बांग्लादेश सीमा से जुड़ी सुरक्षा, बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठ, फर्जी दस्तावेजों के नेटवर्क और राष्ट्रीय सुरक्षा पर बहस अपने चरम पर है। सिलिगुड़ी के रणनीतिक जुमागाछ बॉर्डर आउटपोस्ट से अपने तीन दिवसीय दौरे की शुरुआत कर केंद्रीय गृह मंत्री ने साफ संकेत दिया है कि सीमा सुरक्षा अब केवल चौकसी तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि आधुनिक तकनीक, खुफिया तंत्र और सख्त कार्रवाई के जरिए हर अवैध घुसपैठिए और उसके पूरे नेटवर्क पर प्रहार किया जाएगा। संदेश बिल्कुल स्पष्ट है कि जो भी बांग्लादेशी या रोहिंग्या अवैध रूप से भारत में घुसकर फर्जी पहचान बनाकर बसने की कोशिश करेगा, उसके लिए अब भारत में कोई जगह नहीं है।
उधर, सीमा सुरक्षा की यह सख्ती अब जमीन पर भी दिखाई देने लगी है। हरियाणा के गुरुग्राम में पुलिस ने एक महीने पहले अलग-अलग निर्माण स्थलों पर छापेमारी कर 13 बांग्लादेशी नागरिकों को हिरासत में लिया था। दस्तावेजों की जांच में उनके भारत में अवैध रूप से रहने की पुष्टि होने के बाद गुरुवार को उन्हें कड़ी सुरक्षा के बीच नई दिल्ली से मालदा टाउन एक्सप्रेस के जरिए पश्चिम बंगाल भेज दिया गया, जहां से उन्हें सीमा सुरक्षा बल और अन्य एजेंसियों को सौंपकर बांग्लादेश वापस भेजने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इस अभियान के लिए 23 पुलिसकर्मियों की विशेष एस्कॉर्ट टीम तैनात की गई। पकड़े गए अधिकांश लोग गुरुग्राम में मजदूर के रूप में काम कर रहे थे और किराये के मकानों में रह रहे थे।
हम आपको यह भी बता दें कि गुरुग्राम पुलिस की कार्रवाई केवल 13 लोगों तक सीमित नहीं है। पूरे शहर में अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ व्यापक सत्यापन अभियान चलाया जा रहा है। कॉलोनियों, झुग्गी बस्तियों, लेबर कॉलोनियों, औद्योगिक क्षेत्रों और किराये के मकानों में रह रहे 1200 से अधिक संदिग्ध लोगों के दस्तावेजों की जांच जारी है। जिन राज्यों के दस्तावेज प्रस्तुत किए गए हैं, वहां के जिला प्रशासन से सत्यापन कराया जा रहा है। पुलिस ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि यदि कोई संदिग्ध किरायेदार, घरेलू सहायक, होटल कर्मचारी, निर्माण मजदूर या अन्य विदेशी नागरिक अवैध रूप से रह रहा हो तो तुरंत डायल-112 या नजदीकी थाने में सूचना दें। यह अभियान बताता है कि अब केवल सीमा पर ही नहीं बल्कि देश के भीतर भी अवैध नेटवर्क को तोड़ने की रणनीति अपनाई जा रही है।
हरियाणा के बाद कर्नाटक के मंगलुरु में भी इसी तरह की कार्रवाई सामने आई है। यहां पुलिस ने दो अलग-अलग निर्माण स्थलों से 11 संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिकों को हिरासत में लिया है। विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (FRRO) को उनकी रिपोर्ट भेजी जा रही है ताकि उन्हें हिरासत में लेकर निर्वासित किया जा सके। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि पश्चिम बंगाल से इन लोगों को काम दिलाने वाले बिचौलिये के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज किया जाएगा। इससे स्पष्ट है कि जांच अब केवल घुसपैठियों तक सीमित नहीं बल्कि उन्हें रोजगार दिलाने और देशभर में बसाने वाले पूरे नेटवर्क तक पहुंच रही है।
इसी बीच प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी अवैध बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठ के वित्तीय नेटवर्क पर बड़ा शिकंजा कस दिया है। ईडी ने उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा और पश्चिम बंगाल के 13 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। जांच एजेंसी का दावा है कि कुछ चैरिटेबल ट्रस्ट, जिन्हें विदेशी अंशदान (FCRA) के तहत धन प्राप्त होता था, कथित तौर पर विदेशी फंड का इस्तेमाल अवैध घुसपैठियों को भारत में बसाने के लिए कर रहे थे। जांच में यह भी सामने आया कि हवाला, म्यूल अकाउंट और कई परतों वाले बैंक लेन-देन के जरिए छोटी-छोटी रकम जैसे 6 हजार, 8 हजार और 10 हजार रुपये, घुसपैठियों तक पहुंचाई जाती थी ताकि वे भारत में आर्थिक रूप से स्थापित हो सकें।
ईडी की जांच के अनुसार यह संगठित गिरोह केवल लोगों को सीमा पार कराने तक सीमित नहीं था। उनके लिए फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड, पासपोर्ट और अन्य भारतीय पहचान पत्र तैयार कराए जाते थे। इसके बाद उन्हें अलग-अलग राज्यों में रोजगार दिलाया जाता था और कुछ मामलों में ई-रिक्शा, नकद सहायता तथा अन्य आर्थिक साधन उपलब्ध कराकर स्थायी रूप से बसाने की कोशिश की जाती थी। यह खुलासा राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों की उस आशंका को मजबूत करता है कि अवैध घुसपैठ अब केवल सीमा का मुद्दा नहीं बल्कि फर्जी दस्तावेज, हवाला, मानव तस्करी और संगठित अपराध से जुड़ा एक बड़ा नेटवर्क बन चुका है।
हम आपको यह भी बता दें कि अमित शाह के पश्चिम बंगाल दौरे का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू राज्य की कानून-व्यवस्था और नए आपराधिक कानूनों की समीक्षा है। गृह मंत्री सिलिगुड़ी और कोलकाता में उच्चस्तरीय बैठकों के दौरान भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) के क्रियान्वयन की समीक्षा करेंगे। साथ ही डिजिटल एफआईआर, फोरेंसिक जांच, अभियोजन प्रणाली, साइबर अपराध, महिलाओं के खिलाफ अपराध, सीमा पार अपराध और संवेदनशील जिलों की सुरक्षा व्यवस्था का भी विस्तृत मूल्यांकन किया जाएगा। जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण प्रणाली की समीक्षा भी इसी रणनीति का हिस्सा है ताकि फर्जी पहचान और अवैध नागरिकता के दावों पर प्रभावी रोक लगाई जा सके। सरकार का उद्देश्य सुरक्षा और डिजिटल प्रशासन को एकीकृत कर मजबूत राष्ट्रीय सुरक्षा ढांचा तैयार करना है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच संयुक्त राष्ट्र की एक चिंताजनक रिपोर्ट भी सामने आई है। म्यांमार के रखाइन प्रांत से निकली दो नौकाओं के डूबने की आशंका जताई गई है, जिनमें 500 से अधिक रोहिंग्या शरणार्थी सवार थे। इनमें कई लोग बांग्लादेश के शरणार्थी शिविरों से भी बताए जा रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी और अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन के अनुसार दोनों नौकाएं खराब समुद्री परिस्थितियों के बीच लापता हो गईं और बड़ी संख्या में लोगों की मौत की आशंका है। यह त्रासदी एक ओर रोहिंग्या समुदाय की मानवीय पीड़ा को दर्शाती है, तो दूसरी ओर यह भी याद दिलाती है कि अवैध और असुरक्षित प्रवासन मानव तस्करी तथा अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बना हुआ है।
बहरहाल, अमित शाह का पश्चिम बंगाल दौरा राष्ट्रीय सुरक्षा की व्यापक रणनीति का संकेत है। सीमा पर तकनीकी निगरानी, देश के भीतर अवैध घुसपैठियों की पहचान, फर्जी दस्तावेजों के नेटवर्क पर प्रहार, आर्थिक मदद पहुंचाने वाले गिरोहों पर ईडी की कार्रवाई, राज्यों में चल रहे सत्यापन अभियान और नए आपराधिक कानूनों का प्रभावी क्रियान्वयन, ये सभी कदम एक समन्वित सुरक्षा मॉडल की तस्वीर पेश करते हैं। सरकार का संदेश स्पष्ट है कि भारत की सीमाओं, पहचान व्यवस्था और आंतरिक सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा। अवैध घुसपैठ, चाहे वह बांग्लादेशी हो या रोहिंग्या नेटवर्क से जुड़ी, अब कानून की सख्त कार्रवाई का सामना करेगी, जबकि सीमा क्षेत्रों का विकास, तकनीकी आधुनिकीकरण और राष्ट्रीय सुरक्षा समानांतर रूप से आगे बढ़ाए जाएंगे।
-नीरज कुमार दुबे